
लखनऊ : उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में कथित अवैध कब्जे के एक मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस की मौजूदगी और कथित संरक्षण में उसकी भूमि पर अवैध कब्जा कराया गया। कई स्तरों पर शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई न होने पर अब पीड़ित ने मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित का कहना है कि विवादित भूमि पर कब्जे की सूचना समय रहते पुलिस को दी गई थी, लेकिन कब्जा रोकने के बजाय पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता अथवा कथित मिलीभगत के कारण कब्जाधारियों के हौसले बुलंद हुए और उन्हें न्याय नहीं मिल सका।
पीड़ित ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच करने और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही अवैध कब्जा हटाकर उसकी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है।
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि यदि किसी नागरिक को पुलिस की भूमिका पर ही संदेह हो जाए, तो वह न्याय की उम्मीद किससे करे। ऐसे मामलों में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक है, बल्कि पुलिस व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।


































