अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को जहां कई देश तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं, वहीं इजरायल इससे पूरी तरह आश्वस्त नजर नहीं आ रहा। इजरायली नेतृत्व का मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कुछ बड़े मुद्दों पर अभी स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है।
इजरायल की सबसे बड़ी चिंता यह मानी जा रही है कि यदि समझौते में ईरान की सैन्य क्षमता, क्षेत्रीय प्रभाव और उससे जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर सख्त व्यवस्था नहीं होती, तो भविष्य में जोखिम बना रह सकता है। इसी कारण इजरायली नेतृत्व सार्वजनिक रूप से सावधानी भरा रुख दिखा रहा है।
इजरायल के कई नेताओं ने संकेत दिए हैं कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले उनकी प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति रहेगी। उनका कहना है कि केवल राजनीतिक सहमति पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि जमीन पर सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत रहनी चाहिए।
इसी बीच लेबनान से जुड़ी सैन्य गतिविधियों और सीमा क्षेत्र की स्थिति को लेकर भी इजरायल ने अपना रुख सख्त बनाए रखा है। इजरायली पक्ष का कहना है कि क्षेत्रीय हालात को देखते हुए सैन्य निर्णय सुरक्षा जरूरतों के आधार पर लिए जाएंगे।
राजनीतिक स्तर पर भी यह संदेश दिया गया है कि किसी बाहरी समझौते का असर तभी माना जाएगा जब उससे इजरायल की सुरक्षा चिंताओं का समाधान हो। इसी वजह से कुछ नेताओं ने साफ किया कि वे ऐसे किसी भी प्रस्ताव के पक्ष में नहीं होंगे जिसे वे अधूरा या जोखिमपूर्ण मानते हों।
विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद केवल अमेरिका–ईरान संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीति से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अंतिम समझौते की शर्तें क्षेत्र के बाकी देशों की चिंताओं को कितना संबोधित करती हैं।


































