अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच Pakistan की सक्रियता और चिंता दोनों साफ दिखाई दे रही हैं। एक तरफ Shehbaz Sharif आर्थिक मदद के लिए खाड़ी देशों के दौरे पर हैं, तो दूसरी ओर सेना प्रमुख Asim Munir बातचीत के अगले दौर को लेकर Tehran पहुंच गए हैं।
मध्यस्थता के जरिए राहत की कोशिश
पाकिस्तान United States और Iran के बीच मध्यस्थ बनकर अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारना चाहता है। इसके साथ ही वह उम्मीद कर रहा है कि इस भूमिका के बदले उसे प्रतिबंधों में कुछ ढील मिल सकती है, जिससे वह फिर से ईरान से तेल खरीद सके।
तेल और ऊर्जा संकट का दबाव
अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते पाकिस्तान के लिए ईरान से सस्ता तेल लेना लगभग बंद हो गया है। अगर Strait of Hormuz में तनाव बढ़ता है या रास्ता बाधित होता है, तो पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ेगा और तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
आर्थिक संकट ने बढ़ाई मुश्किल
पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक दबाव में है। उसे जल्द ही United Arab Emirates से लिया गया अरबों डॉलर का कर्ज चुकाना है। ऐसे में शहबाज शरीफ Saudi Arabia, Qatar और Turkey से वित्तीय मदद की उम्मीद में दौरे कर रहे हैं।
दोहरी रणनीति का जोखिम
एक तरफ पाकिस्तान ईरान से बातचीत कर रहा है और अमेरिकी संदेश पहुंचा रहा है, वहीं दूसरी ओर खाड़ी देशों से आर्थिक सहायता मांग रहा है। लेकिन अगर Iran और United States के बीच तनाव और बढ़ता है, तो यह “दोहरी नीति” पाकिस्तान के लिए उल्टा भी पड़ सकती है।
क्षेत्रीय तनाव का असर
हाल के हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बाद पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ी है। इसका असर न सिर्फ वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है, बल्कि क्षेत्र के कई देशों—खासकर पाकिस्तान—की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है।


































