नई पीढ़ी की वजन घटाने वाली दवाओं को लेकर सामने आई एक ताजा स्टडी में चौंकाने वाले परिणाम मिले हैं। शोध के अनुसार बिना डायबिटीज वाले और युवा मरीजों में GLP-1 थेरेपी आधारित दवाओं से वजन अपेक्षाकृत तेजी से घटता देखा गया है।
यह अध्ययन भारत में वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित पहला शोध बताया जा रहा है, जिसमें मोटापे और अधिक वजन से जूझ रहे करीब 150 लोगों को शामिल किया गया। इन मरीजों को छह महीने तक इंजेक्शन के जरिए Semaglutide और Tirzepatide दी गईं।
स्टडी के नतीजों के अनुसार लगभग 41 प्रतिशत प्रतिभागियों का वजन 10 प्रतिशत से अधिक कम हुआ, जबकि कुल औसत वजन घटने की दर करीब 8.2 प्रतिशत रही। खास बात यह रही कि जिन लोगों को डायबिटीज नहीं थी, उनमें वजन घटने की दर औसतन 11.21 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो डायबिटीज मरीजों की तुलना में अधिक थी।
दवाओं की तुलना में पाया गया कि Tirzepatide लेने वाले मरीजों में वजन घटने की दर अधिक रही, जबकि Semaglutide लेने वालों में यह थोड़ी कम देखी गई। इसके अलावा, जिन लोगों ने पहले कभी GLP-1 थेरेपी नहीं ली थी, उनमें असर और तेज देखने को मिला।
रिसर्च में यह भी सामने आया कि युवाओं में वजन घटाने की प्रक्रिया अधिक तेजी से होती है और 10 प्रतिशत से ज्यादा वजन घटाने का लक्ष्य कई मामलों में जल्दी हासिल हुआ। औसतन इस स्तर तक पहुंचने में करीब 9.5 महीने का समय लगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे के साथ डायबिटीज होने पर वजन घटाना अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है, क्योंकि इंसुलिन रेजिस्टेंस और पहले से ली जा रही दवाएं शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार भारत में बढ़ते मोटापे और डायबिटीज के मामलों के पीछे बदलती जीवनशैली, असंतुलित खान-पान और कम शारीरिक गतिविधि प्रमुख कारण हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इन दवाओं का उपयोग केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही किया जाना चाहिए।


































