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भारत-अमेरिका डिफेंस पार्टनरशिप हुई मजबूत, अपाचे और M777 सिस्टम के लिए मंजूर हुआ बड़ा सपोर्ट पैकेज

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक नया कदम सामने आया है। अमेरिका ने भारत के पास मौजूद अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों और M777A2 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर सिस्टम के लिए रखरखाव, तकनीकी सहायता और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़े पैकेज को मंजूरी दी है। इस कदम को दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पहाड़ी इलाकों में सैन्य क्षमता को मिलेगा सहारा

भारत ने पहले ही हल्के और तेज तैनाती वाले M777A2 होवित्जर सिस्टम को अपनी सेना में शामिल किया था। इनका इस्तेमाल खास तौर पर ऐसे इलाकों के लिए उपयोगी माना जाता है जहां भारी हथियारों की तैनाती चुनौतीपूर्ण होती है। दूसरी ओर भारतीय सेना अपाचे हेलीकॉप्टरों का भी उपयोग करती है, जिन्हें आधुनिक युद्ध क्षमताओं वाले उन्नत लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है।

क्या शामिल है इस पैकेज में?

मंजूर किए गए पैकेज में रखरखाव सेवाएं, तकनीकी सहयोग, जरूरी कलपुर्जे, मरम्मत सहायता, प्रशिक्षण, इंजीनियरिंग सपोर्ट, फील्ड सर्विस, लॉजिस्टिक सहायता और अन्य परिचालन सहयोग शामिल बताए गए हैं। इसका उद्देश्य मौजूदा रक्षा प्लेटफॉर्म्स की परिचालन क्षमता को बनाए रखना और उन्हें लंबे समय तक प्रभावी रखना है।

अपाचे सिस्टम को भी मिलेगा अतिरिक्त तकनीकी सहयोग

अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए भी अलग सहायता पैकेज की व्यवस्था की गई है, जिसमें तकनीकी डेटा, प्रशिक्षण, इंजीनियरिंग सहायता और अन्य ऑपरेशनल सपोर्ट शामिल हैं। इससे इन हेलीकॉप्टरों की उपलब्धता और मिशन क्षमता को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

रणनीतिक साझेदारी पर जोर

अमेरिकी पक्ष की ओर से कहा गया कि दोनों देश लगातार रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं। इस तरह के सहयोग से सैन्य तैयारियों और दीर्घकालिक सुरक्षा हितों को मजबूती मिलने की संभावना जताई गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्म्स के लिए केवल खरीद ही नहीं बल्कि समय-समय पर तकनीकी सपोर्ट और रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

Travel Tips: आखिर क्यों ‘Mini Israel’ कहलाता है कसोल? जानिए इस खूबसूरत पहाड़ी गांव की खास पहचान

जब भी पहाड़ों में घूमने की बात आती है, हिमाचल प्रदेश का नाम सबसे पहले लिया जाता है। यहां की वादियां, नदियां, शांत माहौल और अलग-अलग सांस्कृतिक रंग हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इन्हीं जगहों में एक नाम है कसोल, जिसे कई लोग ‘मिनी इजराइल’ के नाम से भी जानते हैं।

क्यों कहा जाता है कसोल को ‘Mini Israel’?

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित कसोल पार्वती घाटी का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। समय के साथ यहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक, खासकर इजराइल से आने वाले यात्रियों की मौजूदगी ने इस जगह को एक अलग पहचान दी।

यात्रियों के अनुभवों के अनुसार, यहां कई कैफे, बोर्ड और कुछ स्थानीय व्यवसायों में हिब्रू भाषा का इस्तेमाल देखने को मिलता है। यही वजह है कि इस इलाके को अनौपचारिक रूप से ‘मिनी इजराइल’ कहा जाने लगा।

यहां क्या अलग अनुभव मिलता है?

कसोल की पहचान सिर्फ विदेशी प्रभाव तक सीमित नहीं है। यह जगह प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक मेल-जोल के लिए भी जानी जाती है।

  • पार्वती नदी के किनारे शांत माहौल
  • पहाड़ों और हरियाली के बीच आरामदायक समय
  • कई कैफे में अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय खाने के विकल्प
  • अलग-अलग देशों से आने वाले यात्रियों से मिलने का मौका
  • आसपास ट्रेकिंग और घूमने के कई विकल्प

खाने और माहौल की भी है अलग पहचान

कसोल में कई जगहों पर आपको अंतरराष्ट्रीय स्वाद से प्रभावित मेन्यू देखने को मिल सकता है। साथ ही स्थानीय हिमाचली संस्कृति का अनुभव भी यहां की यात्रा को खास बना देता है।

कैसे पहुंचे कसोल?

कसोल पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे लोकप्रिय विकल्प माना जाता है।

  • दिल्ली, चंडीगढ़ और मनाली से बस सेवाएं उपलब्ध रहती हैं।
  • नजदीकी प्रमुख पड़ाव भुंतर माना जाता है।
  • भुंतर से कसोल तक बस या साझा टैक्सी से आगे का सफर किया जा सकता है।

कम बजट में यात्रा करने वाले लोग भी सही प्लानिंग के साथ यहां घूमने का अनुभव ले सकते हैं।

अगर आप पहाड़, शांत माहौल और अलग सांस्कृतिक अनुभव एक साथ चाहते हैं, तो कसोल आपकी ट्रैवल लिस्ट में शामिल हो सकता है।

Health Update:Workout करते समय अचानक तबीयत बिगड़ने के मामले क्यों बढ़ रहे हैं? जिम जाने वाले इन बातों पर जरूर दें ध्यान

हाल ही में वर्कआउट के दौरान एक पुलिस अधिकारी की अचानक तबीयत बिगड़ने और मौत की घटना ने फिटनेस और स्वास्थ्य को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। इस तरह की घटनाएं अक्सर यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या सिर्फ नियमित एक्सरसाइज करना या फिट दिखना पूरी तरह स्वस्थ होने का संकेत होता है?

विशेषज्ञों के अनुसार कई बार व्यक्ति बाहर से पूरी तरह सक्रिय और फिट दिखाई देता है, लेकिन शरीर के अंदर कुछ ऐसी समस्याएं मौजूद हो सकती हैं जिनका पता समय रहते नहीं चल पाता।

फिट दिखना और स्वस्थ होना हमेशा एक जैसा नहीं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कई लोग नियमित वर्कआउट करते हैं, लेकिन उन्हें पहले से मौजूद कुछ स्वास्थ्य स्थितियों की जानकारी नहीं होती। इनमें हाई ब्लड प्रेशर, हृदय की धड़कन में असामान्यता, धमनियों में रुकावट या कुछ मामलों में आनुवंशिक हृदय संबंधी जोखिम शामिल हो सकते हैं।

शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें

कई बार शरीर पहले से संकेत देना शुरू कर देता है, लेकिन लोग उन्हें सामान्य थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं। वर्कआउट के दौरान या बाद में इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी माना जाता है:

  • जरूरत से ज्यादा सांस फूलना
  • सीने में दबाव या भारीपन
  • चक्कर या कमजोरी महसूस होना
  • दिल की धड़कन असामान्य लगना
  • सामान्य से अधिक थकावट

अगर ऐसे लक्षण बार-बार महसूस हों तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

कब बढ़ सकता है जोखिम?

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ स्थितियां अतिरिक्त सावधानी की मांग करती हैं:

  • लंबे समय बाद अचानक भारी एक्सरसाइज शुरू करना
  • क्षमता से ज्यादा हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग करना
  • पर्याप्त आराम के बिना लगातार वर्कआउट
  • 35 वर्ष से अधिक उम्र में फिटनेस रूटीन शुरू करना
  • परिवार में हृदय रोग का इतिहास होना
  • हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा या धूम्रपान जैसी स्थितियां

सुरक्षित फिटनेस के लिए क्या करें?

वर्कआउट केवल ज्यादा मेहनत का नाम नहीं है। फिटनेस को सुरक्षित रखने के लिए कुछ सामान्य आदतें मददगार हो सकती हैं:

  • एक्सरसाइज से पहले वॉर्म-अप करें
  • अंत में कूल-डाउन जरूर करें
  • पर्याप्त पानी पिएं
  • अच्छी नींद लें
  • शरीर को रिकवरी का समय दें
  • अपनी क्षमता के अनुसार वर्कआउट चुनें

फिटनेस का मतलब केवल कठिन ट्रेनिंग नहीं बल्कि शरीर की जरूरत और उसकी सीमाओं को समझना भी है।

नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नए व्यायाम कार्यक्रम या स्वास्थ्य निर्णय से पहले योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

मंडे को किस फिल्म ने बचाई अपनी रफ्तार? ‘कॉकटेल 2’ समेत जानिए बाकी फिल्मों का बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट कार्ड

वीकेंड के बाद सोमवार को फिल्मों की असली परीक्षा मानी जाती है और इस बार भी बॉक्स ऑफिस पर यही देखने को मिला। रविवार को शानदार प्रदर्शन करने वाली कई फिल्मों की कमाई में सोमवार को गिरावट दर्ज हुई, लेकिन कुछ फिल्मों ने अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश की।

‘कॉकटेल 2’ ने वीकेंड के बाद भी बनाए रखा असर

नई रिलीज ‘कॉकटेल 2’ ने शुरुआती दिनों में अच्छा प्रदर्शन किया था और रविवार को फिल्म ने मजबूत कलेक्शन दर्ज किया। हालांकि सोमवार को इसकी कमाई में सामान्य गिरावट देखने को मिली।

चौथे दिन फिल्म ने करीब 6.35 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इसके साथ इसका कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगभग 53.85 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। शुरुआती आंकड़ों के आधार पर फिल्म अब भी अच्छी स्थिति में मानी जा रही है।

‘मां इंति बंगारम’ की रफ्तार भी हुई धीमी

वीकेंड में दो अंकों की कमाई दर्ज करने वाली ‘मां इंति बंगारम’ को भी सोमवार का असर झेलना पड़ा। चौथे दिन फिल्म ने करीब 4.10 करोड़ रुपये का कारोबार किया।

अब तक फिल्म का कुल कलेक्शन लगभग 27.20 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। आने वाले दिनों का प्रदर्शन इसकी आगे की दिशा तय करेगा।

‘मैं वापस आऊंगा’ के दूसरे हफ्ते की शुरुआत धीमी

दूसरे सप्ताह में पहुंच चुकी इस फिल्म के लिए सोमवार थोड़ा कमजोर साबित हुआ। रिलीज के 11वें दिन फिल्म ने लगभग 2.50 करोड़ रुपये की कमाई की।

इसके बाद फिल्म का कुल कारोबार करीब 26.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अब इसकी कमाई पर वर्ड ऑफ माउथ और अगले वीकेंड का असर देखने को मिल सकता है।

‘पेद्दी’ की कमाई में तीसरे हफ्ते में गिरावट

शुरुआती दो हफ्तों में मजबूत प्रदर्शन करने के बाद ‘पेद्दी’ की कमाई तीसरे सप्ताह में धीमी पड़ती नजर आई। 19वें दिन फिल्म का कारोबार काफी कम हो गया।

सोमवार को फिल्म ने लगभग 0.83 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की। इसके बावजूद इसका कुल कलेक्शन करीब 235.10 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

किसने जीता मंडे टेस्ट?

सोमवार के आंकड़ों को देखें तो ‘कॉकटेल 2’ ने बाकी फिल्मों के मुकाबले बेहतर पकड़ दिखाई, जबकि अन्य फिल्मों में सामान्य गिरावट देखने को मिली। अब आने वाले दिनों की कमाई तय करेगी कि कौन सी फिल्म लंबी रेस में बनी रहती है।

Health Update:40 की उम्र में भी रहना चाहते हैं एक्टिव और फिट? जानिए योग और लाइफस्टाइल से जुड़ी आसान आदतें

बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या और खानपान की आदतों का असर अब कम उम्र में ही शरीर पर दिखाई देने लगा है। पहले जहां बढ़ती उम्र को ऊर्जा और फुर्ती में कमी से जोड़ा जाता था, वहीं आज कई लोग 40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते थकान और फिटनेस में गिरावट महसूस करने लगते हैं। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि सही आदतों के जरिए लंबे समय तक सक्रिय और स्वस्थ बना रहना संभव है।

योग और संतुलित जीवनशैली को बढ़ती उम्र में शरीर और मन के बेहतर समर्थन का महत्वपूर्ण तरीका माना जाता है। नियमित अभ्यास से शरीर की लचक, संतुलन और मानसिक शांति को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

योग क्यों हो सकता है उपयोगी?
योग केवल शारीरिक गतिविधि नहीं बल्कि शरीर, श्वास और मानसिक स्थिति के बीच तालमेल बनाने की प्रक्रिया माना जाता है। नियमित अभ्यास से शरीर की गतिशीलता, संतुलन और दैनिक ऊर्जा स्तर को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

सिद्ध वॉक (Figure-8 Walk)
इस अभ्यास में व्यक्ति आठ (∞) के आकार में नियंत्रित गति से चलता है और साथ ही अपनी सांसों तथा एकाग्रता पर ध्यान देता है।

संभावित लाभ:

  • शरीर के संतुलन और समन्वय को बेहतर बनाए रखने में मदद
  • गतिशीलता को सपोर्ट
  • सामान्य रक्त संचार और पाचन प्रक्रिया को सहयोग
  • मानसिक शांति और फोकस में सहायता

त्रिकोणासन
इस योग मुद्रा में पैरों के बीच दूरी बनाकर खड़े होते हैं और शरीर को नियंत्रित तरीके से एक ओर झुकाया जाता है।

संभावित लाभ:

  • पैरों और शरीर के निचले हिस्से को सक्रिय रखने में मदद
  • रीढ़ और शरीर की लचक को सपोर्ट
  • पोश्चर और संतुलन सुधारने में सहायक

भ्रामरी प्राणायाम
इस प्राणायाम में आरामदायक स्थिति में बैठकर सांस छोड़ते समय हल्की गुंजन ध्वनि निकाली जाती है।

संभावित लाभ:

  • मानसिक शांति बनाए रखने में मदद
  • तनाव कम करने में सहायक
  • ध्यान और एकाग्रता को समर्थन

विशेषज्ञों के अनुसार, योग के साथ पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, नियमित गतिविधि और तनाव प्रबंधन को भी दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है। किसी भी नई एक्सरसाइज या योग अभ्यास को शुरू करने से पहले अपनी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और जरूरतों के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।