इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL 2025 के 47वें मैच में राजस्थान रॉयल्स के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने बल्ले से कमाल कर दिया। गुजरात टाइटंस के 209 रनों का पीछा करते हुए यशस्वी जायसवाल ने 14 साल के वैभव सूर्यवंशी के साथ मिलकर धमाकेदार अंदाज में पारी का आगाज किया। दोनों ने 5 ओवर में ही अपनी टीम का स्कोर 81 रन पहुंचा दिया। इस दौरान वैभव सूर्यवंशी महज 17 गेंदों पर अपना पहला IPL अर्धशतक जड़ने में कामयाब रहे। वैभव सबसे कम उम्र में IPL में अर्धशतक जड़ने वाले बल्लेबाज बने। उन्होंने रियान पराग का रिकॉर्ड तोड़ा। इस दौरान यशस्वी जायसवाल एक छोर संभाले रहे और 37 रन के निजी स्कोर पर पहुंचने के साथ ही बड़ा कारनामा कर दिया।
सचिन तेंदुलकर से आगे यशस्वी जायसवाल
दरअसल, यशस्वी जायसवाल ने 37 रन बनाते ही IPL में अपने 2000 रन पूरे कर लिए। उन्होंने 62वीं पारी में यह उपलब्धि हासिल की। इस तरह वह IPL में सबसे तेज 2000 रन जड़ने वाले तीसरे भारतीय बल्लेबाज बन गए। उन्होंने सचिन तेंदुलकर को पछाड़ा। सचिन ने 63 पारियों में 2000 IPL रन जड़ने का बड़ा कारनामा किया था। अब जायसवाल महान बल्लेबाज सचिन से आगे निकल गए हैं। IPL में सबसे तेज 2000 रन बनाने का रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम दर्ज है। गेल ने महज 48 पारियों में 2000 रन का आंकड़ा छुआ था।
IPL में सबसे तेज 2000 रन बनाने वाले बल्लेबाज
क्रिस गेल – 48
शॉन मार्श – 52
ऋतुराज गायकवाड़ – 57
केएल राहुल – 60
यशस्वी जायसवाल – 62
सचिन तेंदुलकर – 63
जायसवाल ने IPL 2025 में ठोका 5वां अर्धशतक
यशस्वी जायसवाल ने गुजरात के खिलाफ 31 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया। ये उनके IPL करियर का 14वां अर्धशतक है। इसके अलावा वह IPL में 2 शतक भी ठोक चुके हैं। इस सीजन की बात की जाए तो जायसवाल 10 मैचों में 400 से ज्यादा रन बना चुके हैं। IPL 2025 में वह राजस्थान के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उन्होंने मौजूदा सीजन में 5 अर्धशतक जड़े हैं। जायसवाल भले ही बल्ले से कमाल कर रहे हैं, लेकिन उनकी टीम राजस्थान का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। टीम को अब तक सिर्फ 2 जीत मिली हैं।
ड्रीम गर्ल 2, गंगूबाई काठियावाड़ी और शुभ मंगल सावधान जैसी फिल्मों में अपने दमदार किरदारों के लिए मशहूर सीमा पाहवा को फिल्म इंडस्ट्री में 40 साल से ज्यादा का समय हो गया है। अब उन्होंने इस ओर संकेत दिए हैं कि वह जल्दी ही इंडस्ट्री छोड़ सकती हैं। सीमा पाहवा का मानना है कि बॉलीवुड इंडस्ट्री को पुरानी सोच वाले कलाकारों की कद्र नहीं है। दिग्गज अभिनेत्री ने इंडस्ट्री की वर्तमान स्थिति पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि इंडस्ट्री में क्रिएटिव लोगों की जगह और उनके लिए सम्मान कम हो चुका है। उनका मानना है कि अब इंडस्ट्री पूरी तरह से व्यावसायिक हो गई और इंडस्ट्री पर अब बड़े-बड़े बिजनेसमैन का कब्जा है।
चेहरे का व्यवसाय बन गया है बॉलीवुड
बॉलीवुड ठिकाना से बातचीत में सीमा पाहवा ने माना कि आज बॉलीवुड कहानियां बताने के बजाय चेहरे बेचने का व्यवसाय बन गया है। इसी दौरान उन्होंने ये भी खुलासा किया कि कई बार फिल्म मेकर्स उन्हें फोन करते हैं और नए कलाकारों को काम सिखाने को कहते हैं। लेकिन, वह किसी को भी काम सिखाने से इनकार कर देती हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इंडस्ट्री में ऐसे लोगों को मौका दिया जाना चाहिए जिन्हें काम आता है। इस तरह, सीमा ने खुलासा किया कि वह उन नेपो किड्स को एक्टिंग नहीं सिखाएंगी जिनमें प्रतिभा की कमी है ताकि उन्हें लॉन्च किया जा सके।
मेरे बच्चों को नहीं मिला मौका- सीमा पाहवा
बॉलीवुड ठिकाना से बात करते हुए सीमा ने खुलासा किया कि एक्टिंग ग्रेजुएट और थिएटर में प्रशिक्षित होने के बावजूद उनके बच्चों को बॉलीवुड में मौका नहीं मिला। सीमा ने कहा, “उन्हें लगता है कि उनका फैसला गलत है। वे कहते हैं कि हमने उन्हें जो कुछ भी सिखाया है, उसका मौजूदा सिस्टम में कोई महत्व नहीं है। उन्हें इस बात का अफसोस है कि हमने उन्हें स्टार नहीं बल्कि एक्टर बनाया… हमने उनसे और अधिक प्रशिक्षण लेने, थिएटर में और अधिक काम करने के लिए कहा और भले ही वे यह सब कर रहे हैं, लेकिन वे कहीं नहीं हैं।”
मैं नेपोटिज्म के खिलाफ नहीं- सीमा पाहवा
सीमा के अनुसार, वह नेपोटिज्म के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जब बात स्टारकिड्स की आती है तो इन्वेस्टमेंट में बैलेंस होना जरूरी है। उन्होंने कहा- “मैं क्यों कहूंगी कि स्टार किड्स को सिनेमा में नहीं आना चाहिए। जिस तरह से मैं चाहती हूं कि मेरे बच्चे आगे बढ़ें, वैसे ही दूसरों को भी ऐसी ही उम्मीदें होंगी, है न? लेकिन, ऐसे बहुत से एक्टर हैं जिन्होंने FTII या NSD से ट्रेनिंग ली है, उन्हें किसी भी फिल्म में क्यों नहीं लिया जा रहा है। मैं एक ऐसे व्यक्ति को जानती हूं जो एक्टिंग में ग्रेजुएट है और थिएटर कलाकार है, जिसने ऑफर की कमी के कारण एक्टिंग और शहर छोड़ दिया।”
मुझे बहुत जल्दी इंडस्ट्री को नमस्ते कहना होगा- सीमा
सीमा पाहवा आगे कहती हैं- ‘मेरे मन में एक सवाल उठता है, शायद मैं अच्छी हूं, लेकिन इतनी अच्छी नहीं कि मुझे लीड रोल में लेकर फिल्म बनाई जाए। एक तरफ शिकायत है, लेकिन फिर एक तरफ लगता है कि मेरी कुछ सीमाएं हैं। यही वजह है कि मुझे लीड रोल में नहीं लिया गया। मैं इंडस्ट्री में उस पीक पर पहुंच चुकी हूं, जहां मुझे लगता है कि मुझे बहुत जल्दी इंडस्ट्री को नमस्ते करना होगा। बॉलीवुड इंडस्ट्री की हालत बहुत खराब हो चुकी है। क्रिएटिव लोगों की हत्या कर दी गई है और इंडस्ट्री पर व्यापारी कब्जा कर चुके हैं। वे इंडस्ट्री को अपना व्यवसायिक मानसिकता के साथ चलाना चाहते हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि जिस इंडस्ट्री में हमने इतने सालों काम किया, वहां इस तरह काम किया जा सकता है।’
फिल्म निर्माता और कोरियोग्राफर फराह खान इन दिनों अपने फूड व्लॉग्स को लेकर खूब सुर्खियां बटोर रही हैं। उनके इन व्लॉग्स को उनके कुक दिलीप ने खास बना दिया है। दोनों के बीच की मजेदार बातचीत को दर्शक खूब पसंद करते हैं। अब फराह ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल पर अलाया फर्नीचरवाला और उनकी मां पूजा बेदी के साथ एक मजेदार एपिसोड होस्ट किया। इस दौरान अलाया ने अपने खास प्रोटीन से भरपूर ब्लूबेरी पैनकेक तैयार किए। दूसरी तरफ फराह और पूजा पुरानी यादों में खो गईं और 1992 की फिल्म ‘जो जीता वही सिकंदर’ में साथ काम करने के दौरान की मजेदार कहानियां याद कीं।
आमिर खान-पूजा बेदी पर फिल्माया गया था ‘पहला नशा’
फराह ने पूजा बेदी, आमिर खान पर फिल्माए ‘पहला नशा’ से जुड़ी यादें शेयर करते हुए पूजा को टेरिबल डांसर बताया। दरअस, इस गाने को फराह खान ने ही कोरियोग्राफ किया था। 1992 में आई इस फिल्म आमिर खान और आयशा जुल्का लीड रोल में थे। अब फराह ने ‘जो जीता वही सिकंदर’ के आइकॉनिक सॉन्ग ‘पहला नशा’ की शूटिंग से जुड़ा किस्सा शेयर किया, जो बेहद मजेदार था।
फराह खान को याद आया ‘पहला नशा’ से जुड़ा किस्सा
फराह खान, अलाया को बताती हैं कि उनकी मां बिलकुल भी अच्छी डांसर नहीं हैं, जबकि अलाया शानदार डांसर हैं। इसके बाद फराह ‘पहला नशा’ में पूजा बेदी के स्कर्ट उड़ने वाले सीन के बारे में चर्चा करती हैं। फराह, अलाया से कहती हैं- ‘मैंने तुम्हारी मां के साथ काफी वक्त गुजारा है। मैंने उन्हें बहुत डांस कराने की कोशिश की। मुझे पूछना है कि इसके (अलाया) अंदर किसके जीन्स आए हैं, क्योंकि ये बहुत अच्छी डांसर है। तुम जानती हो, जब पूजा को कार के ऊपर खड़े होकर स्कर्ट में डांस करना था, लड़के बेहोश हो गए थे। वो नीचे फैन पकड़कर खड़े थे।’
ड्रेस को आगे से खीचती तो पीछे से उड़ने लगती- पूजा बेदी
पूजा तुरंत उस गाने की शूटिंग के दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि ये गाना शूट करना उनके लिए काफी मुश्किल था। पूजा कहती हैं कि फराह इसे बढ़ा-चढ़ाकर बता रही हैं। पूजा ने स्पष्ट किया कि स्पॉट बॉय थोड़ी दूर खड़ा था। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि जब भी वह अपनी ड्रेस को आगे से नीचे खींचती थीं, तो वह पीछे से ऊपर की ओर उड़ जाती थी।
पूजा बेदी ने बताई पूरी कहानी
वह कहती हैं- ‘सेट पर एक स्पॉट बॉय था जो फैन लेकर खड़ा था, ताकि स्कर्ट उड़ती रहे। मैं अपनी ड्रेस को नीचे खींचने की बहुत कोशिश कर रही थी… लेकिन, पंखा चल रहा था और मैं सोच रही थी कि अपनी ड्रेस को संभालूं या डांस करूं। क्योंकि, जब मैं स्कर्ट को आगे से पकड़ती तो वह पीछे से उड़ने लगती और वहां मौजूद लोग हंस रहे थे। एक स्पॉट बॉय पीछे खड़ा था। मैंने इस गाने के दौरान थोंग पहन रखे थे।’ तभी फराह बताती हैं कि ये पहली बार था जब उन्होंने थोंग देखे थे। फराह ने कहा- ‘मैंने पहली बार थोंग देखा था। ये उन दिनों ये बहुत आम नहीं थे।
बॉलीवुड से लेकर साउथ तक अपनी कलाकारी से फिल्मी दुनिया में एक अलग छाप छोड़ने वाले एक्टर नील नितिन मुकेश अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। नील नितिन मुकेश भी फिल्मी खानदान से ताल्लुक रखते हैं। वह सिंगर नितिन मुकेश के बेटे और दिग्गज सिंगर मुकेश के पोते हैं। लेकिन, बॉलीवुड में फिल्मी खानदान से होने उनके काम नहीं आया। उन्हें अन्य स्टारकिड्स जैसी सफलता और मौके नहीं मिले। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें अपने करियर में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। खासतौर पर अपने लुक्स और रंग को लेकर। उनके लुक्स और फैमिली बैकग्राउंड के आधार पर उन्हें जज किया करते थे।
करियर में देखे उतार-चढ़ाव
एक्टर ने अब हाल ही में ‘थेरेपी डायरीज’ के साथ इंटरव्यू के दौरान बताया कि उनके करियर में क्या-क्या उतार चढ़ाव आया। उन्होंने बताया कि लोग कैसे उनके लुक्स को लेकर उन्हें शक भरी निगाहों से देखते थे। पिता और दादा की तुलना करते हुए लोग उनकी क्षमताओं पर शक करते थे। उन्होंने बताया कि लोग ये भी पूछते थे कि क्या वह अच्छे से हिंदी बोल सकते हैं क्योंकि वह फिरंगी दिखते थे। लोगों का मानना था कि वह विदेशी के बच्चे लगते हैं। ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल भी था कि क्या वह एक्टिंग कर सकेंगे, या हिंदी में बात कर पाएंगे?
पहली फिल्म से पहले इस बात का था डर
इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या आपको पहली फिल्म मिलने से पहले किसी तरह का कोई डर था। एक्टर नील ने कहा ‘जब तक मुझे अपनी पहली फिल्म नहीं मिली, तब तक मैंने खुद पर किसी भी चीज को हावी नहीं होने दिया। मैं किसी भी तरह के डर को बर्दाश्त नहीं कर सकता था। लेकिन, लोगों की विचारधारा ने धीरे-धीरे मेरे लिए चुनौतियां बढ़ा दीं। मेरे लिए पहले से ही एक चुनौती थी कि मैं मुकेश जी का पोता हूं और गायक का बेटा हूं।’
नील नितिन की चुनौतियां
एक्टर नील नितिन ने बताया कि लोगों का शक करना ही उनकी चुनौतियों को और बढ़ा दिया। एक्टर ने कहा- ‘लोगों को शक था कि मैं अभिनय भी कर सकता हूं या नहीं। मेरी हिंदी कैसी है? मुझे हिंदी आती भी है या नहीं? लोग कहते थे- फिरंगी दिखता है। इसलिए मुझे इन चुनौतियों से निपटना पड़ा। लोग कहते थे, मैं अंग्रेज का बच्चा दिखता हूं। काश मैं हिंदी फिल्मों में काम कर पाता। ये सब मेरी कमियां थीं जिन्हें मैंने सकारात्मकता में बदल दिया।’
नील नितिन मुकेश का करियर
एक्टर नील नितिन को भले ही बहुत से लोगों ने उनके लुक और हिंदी भाषा को लेकर उन पर शक किया था। लेकिन एक्टर ने सारे शक को सफलता में बदल दिया। नील नितिन ने इंडस्ट्री में खुद को सफल बनाने के लिए खुद से एक वादा किया और जी जान से मेहनत कर के एक सफल अभिनेता बन गए। उन्होंने 1988 और 1989 में ‘विजय’ और ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ से फिल्मी दुनिया में बाल कलाकार के रूप में कदम रखा। एक्टर ने साल 2002 में फिल्म ‘मुझसे दोस्ती करोगे’ में सहायक निर्देशक के रूप काम किया और बतौर लीड एक्टर ‘जॉनी गद्दार’ (2007) से अपना डेब्यू किया था। उनकी अंतिम फिल्म ‘हिसाब बराबर’ साल 2024 में रिलीज हुई थी।
'एनवायरमेंट वॉरियर्स' 4.0 अभियान: कट्टैया किशनपुर, खीरी में आयोजित हुए इंटर-स्कूल क्विज, पेंटिंग प्रतियोगिता और वन कर्मियों के सम्मान और पर्यावरण जन जागरूकता कार्यक्रम
एनवायरमेंट वॉरियर्स 4.0′ अभियान के तहत कट्टैया किशनपुर में इंटर-स्कूल क्विज और पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने वैश्विक पर्यावरण संकट पर आंकड़ों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई।
दुधवा टाइगर रिजर्व के 30 वाचरों को साइकिल वितरित कर सेवा भावना का सम्मान किया गया।
डॉ. सिंह ने यूपी में वन क्षेत्र बढ़ने और बाघों-गैंडों की संख्या बढ़ने की उपलब्धि को रेखांकित किया।
स्कूलों में डिजिटल शिक्षा, पर्यावरण विषय अनिवार्य बनाने और ग्रामीण महिलाओं के लिए सिलाई केंद्र खोलने की घोषणाएं हुईं।
‘एनवायरमेंट वॉरियर्स’ 4.0 अभियान: कट्टैया किशनपुर, खीरी में आयोजित हुए इंटर-स्कूल क्विज, पेंटिंग प्रतियोगिता और वन कर्मियों के सम्मान और पर्यावरण जन जागरूकता कार्यक्रम
खीरी: प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सोमवार को कट्टैया किशनपुर स्थित रेंजर्स कार्यालय प्रांगण में आयोजित पर्यावरणीय जागरूकता कार्यक्रम के चौथे चरण (4.0) में सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान 17 स्थानीय विद्यालयों के लगभग 250 विद्यार्थियों के बीच इंटर-स्कूल क्विज तथा पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिससे बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी विकसित हो सके। इस दौरान थारु समाज की महिलाओं ने पारम्परिक शिल्प कृतियों का प्रदर्शन भी किया।
इंटर स्कूल क्विज प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाले गुरुकुल अकैडमी के मनजोत कौर & ग्रुप को ₹20 हजार, द्वितीय स्थान पाने वाले विवेकानंद अकैडमी के शौर्य प्रताप & ग्रुप को ₹15 हजार, तथा तृतीय स्थान पाने वाले विवेकानंद अकैडमी के समूह निहारिका & ग्रुप को ₹10 हजार की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही पेंटिंग प्रतियोगिता की विजेता विवेकानंद अकैडमी की प्रशू कुमारी को ₹2.5 हजार, उपविजेता लिवलीन कौर को ₹2 हजार और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले SVPS विद्यालय के देव कश्यप को ₹1.5 हजार की राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग के 30 वाचरों को साइकिल वितरित कर उनकी सेवा भावना को प्रोत्साहित किया गया तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 5 वनकर्मियों गौरव यादव, अमित गंगवार, नंदराम, अरविन्द चौरसिया, भानु यादव को सम्मानित किया गया।
प्रति घंटे तीन प्रजातियाँ हमेशा के लिए हो रहीं विलुप्त
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. सिंह ने पहलगाम हादसे में दिवंगत पर्यटकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने धरती को अधिक सुंदर और बेहतर बनाने के लिए सभी से मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने वैश्विक पर्यावरण संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा: आज जब हम आर्थिक समृद्धि के नए प्रतिमान गढ़ रहे हैं, तब हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पृथ्वी पर जीवन की विविधता ही हमारे अस्तित्व का मूल है।” उन्होंने बताया कि: संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार, 1 मिलियन (10 लाख) से अधिक प्रजातियाँ निकट भविष्य में विलुप्त हो सकती हैं। IUCN Red List के अनुसार, वर्तमान में 42,100 से अधिक प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे में हैं। 1970 से अब तक 60% से अधिक वन्यजीव आबादी समाप्त हो चुकी है। प्रति घंटे तीन प्रजातियाँ हमेशा के लिए विलुप्त हो रही हैं। 99% संकटग्रस्त प्रजातियाँ मानवीय गतिविधियों जैसे वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और अवैध व्यापार के कारण संकट में हैं। अनुमान है कि 2050 तक समुद्र में मछलियों से अधिक प्लास्टिक कचरा होगा। विधायक ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व में वायु प्रदूषण के कारण हर वर्ष 70 लाख लोगों की मृत्यु होती है, जिनमें से 25 लाख मौतें भारत में होती हैं।
उत्तर प्रदेश में सकारात्मक प्रयासों की सराहना: डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त की कि उत्तर प्रदेश का वन क्षेत्र बढ़कर लगभग 10% तक पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि दुधवा क्षेत्र में बाघों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है और गेंडों की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रतीक है। उन्होंने Field Director राजा मोहन को बाघ संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य के लिए विशेष बधाई दी और जिलाधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों की भी सराहना की, जिनके लिए उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया है। अंबालिका ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूट के चेयरमैन अम्बिका मिश्रा द्वारा वाइल्डलाइफ कंजरवेशन के क्षेत्र में किए जा रहे सतत कार्यों की भी डॉ. सिंह ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
स्थानीय विकास और भविष्य की पहल: डॉ.सिंह ने घोषणा की कि 10 गांवों में सिलाई केंद्रों की स्थापना कराई जाएगी, जिससे ग्रामीण महिलाओं को आजीविका का साधन मिलेगा। CSR फंड के माध्यम से उन सेंचुरी क्षेत्रों में वाटर पंप्स लगाए जाएंगे, जहाँ इसकी आवश्यकता है। स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कराई जाएगी ताकि भविष्य की बदलती नौकरियों की आवश्यकताओं के अनुरूप बच्चों को तकनीकी शिक्षा से लैस किया जा सके, क्योंकि अनुमान है कि 2030 तक वर्तमान 70% नौकरियाँ अस्तित्व में नहीं रहेंगी। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि उन्होंने विधानसभा में अस्थाई वन्य कर्मियों को स्थायी करने का प्रस्ताव रखा है तथा मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि उत्तर प्रदेश बोर्ड के पाठ्यक्रम में पर्यावरणीय शिक्षा को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए। इससे प्रदेश के 25 लाख छात्रों को पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक बनाया जा सकेगा।
जिलाधिकारी एवं फील्ड डायरेक्टर का संबोधन: जिलाधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल ने उपस्थित छात्र – छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना, समय और सामर्थ्य अर्पित किया और इस महत्वपूर्ण कार्य को अपने कंधो पर उठाया है। युवाओं से अपने मात – पिता को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। एन्वॉयरन्मेंट एच. राजा मोहन का सम्बोधन – फील्ड डायरेक्टर एच. राजा मोहन ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग आदि कारणों से ग्लेशियर पिघल रहे, वनों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं, ऐसे में वनों का संरक्षण सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। तराई क्षेत्र के छात्र – छात्राओं को प्रोत्साहित फील्ड डायरेक्टर ने कहा की आप का सौभाग्य है कि आप तराई क्षेत्र में रह रहे और आपको वन संरक्षण का मौका मिला है।
अभियान की अब तक की यात्रा: एनवायरमेंट वारियर्स अभियान की शुरुआत 12 जनवरी 2025 को श्री गुरु गोबिंद सिंह राजकीय महाविद्यालय, पलियाकलां (खीरी) से हुई थी, जहाँ विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह और वित्त मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना की उपस्थिति में डिजिटल लाइब्रेरी का लोकार्पण, 5 मेधावी छात्रों को टैबलेट वितरण, 30 वॉचरों को साइकिल वितरण और 5 वनकर्मियों के सम्मान के साथ ‘प्राइड ऑफ तराई’ सम्मान भी प्रदान किया गया था। इसके बाद 16 फरवरी 2025 को मोतीपुर गेस्ट हाउस, बहराइच में आयोजित दूसरे संस्करण में 12 विद्यालयों के 81 छात्रों के बीच इंटर-स्कूल क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया तथा 30 वॉचरों को साइकिल और 5 वनकर्मियों को सम्मानित किया गया। तीसरा संस्करण 28 मार्च 2025 को मुस्तफाबाद फॉरेस्ट रेस्ट हाउस, पीलीभीत में हुआ, जिसमें वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना और डॉ. राजेश्वर सिंह की उपस्थिति में 10 विद्यालयों के छात्रों के मध्य डिबेट और क्विज का आयोजन, ‘प्राइड ऑफ तराई’ और ‘प्राइड ऑफ पीलीभीत’ सम्मान, 1000 पौधों का रोपण, 2 सोलर वाटर होल का लोकार्पण, 30 वॉचरों को साइकिल वितरण, 5 वनकर्मियों का सम्मान, 10 महिला स्वयं सहायता समूहों को ‘तारा शक्ति केंद्र’ (सिलाई केंद्र) प्रदान करना, प्राथमिक विद्यालय चोखापुरी में स्मार्ट क्लास का उद्घाटन तथा रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं सशक्तिकरण केंद्र की स्थापना जैसी कई महत्वपूर्ण गतिविधियाँ सम्पन्न हुईं।
इस अवसर पर कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाने हेतु जिलाधिकारी खीरी दुर्गा शक्ति नागपाल, अम्बालिका ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूट, लखनऊ के अध्यक्ष अम्बिका मिश्रा, फील्ड डायरेक्टर एच. राजा मोहन, डीएफओ सुरेश सहाय, डायरेक्टर ‘वन बीट’ दुधवा अमित पाल सिंह, पूर्व वरिष्ठ अधिकारी शरद चौधरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की सराहना करते हुए बच्चों में जागरूकता की इस पहल को एक महत्वपूर्ण कदम बताया।