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संकटमोचन की छाया में सौहार्द का संदेश: मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरि ने सूचना विभाग के गेट पर किया पत्रकार एसोसिएशन के भंडारे का शुभारंभ, भंडारे में दिखी लखनऊ की जीवंत गंगा-जमुनी तहज़ीब में विभिन्न समुदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर की सहभागिता, सुप्रसिद्ध होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. पीयूष शुक्ला समेत महान विभूतियों को किया गया सम्मानित

संकटमोचन की छाया में सौहार्द का संदेश: मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरि ने सूचना विभाग के गेट पर किया पत्रकार एसोसिएशन के भंडारे का शुभारंभ, भंडारे में दिखी लखनऊ की जीवंत गंगा-जमुनी तहज़ीब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बढ़चढ़कर की सहभागिता, सुप्रसिद्ध होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. पीयूष शुक्ला समेत महान विभूतियों को किया गया सम्मानित
संकटमोचन की छाया में सौहार्द का संदेश: मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरि ने सूचना विभाग के गेट पर किया पत्रकार एसोसिएशन के भंडारे का शुभारंभ, भंडारे में दिखी लखनऊ की जीवंत गंगा-जमुनी तहज़ीब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बढ़चढ़कर की सहभागिता, सुप्रसिद्ध होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. पीयूष शुक्ला समेत महान विभूतियों को किया गया सम्मानित
संकटमोचन की छाया में सौहार्द का संदेश: मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरि ने सूचना विभाग के गेट पर किया पत्रकार एसोसिएशन के भंडारे का शुभारंभ, भंडारे में दिखी लखनऊ की जीवंत गंगा-जमुनी तहज़ीब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बढ़चढ़कर की सहभागिता, सुप्रसिद्ध होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. पीयूष शुक्ला समेत महान विभूतियों को किया गया सम्मानित
  • उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन ने राज्य सूचना विभाग के गेट पर भव्य भंडारे का आयोजन किया।
  • प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल वहीद व उनकी टीम द्वारा संकटमोचन श्री हनुमान जी के पावन भंडारे का आयोजन किया गया।
  • मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरि ने भंडारे का शुभारंभ किया।
  • हर धर्म के लोगों ने मिलकर सहयोग किया, मुस्लिम समुदाय का भी अमूल्य योगदान रहा।
  • स्वास्थ्य शिविर, राशन किट, स्कूल बैग और पौधे वितरित किए गए।
  • डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत कई मंत्री, विधायक और पत्रकार शामिल हुए।
  • पत्रकारों के मुख्य संगठन NUJ (I) उत्तरप्रदेश की पूरी टीम ने भी भंडारे में पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।
  • आयोजन ने सेवा, सौहार्द और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।

लखनऊ, रिपोर्ट: शिवसागर सिंह चौहान | True News UP: लखनऊ की ऐतिहासिक मिट्टी में रचा-बसा बड़ा मंगल, जब श्रद्धा, सेवा और सौहार्द के त्रिवेणी संगम में परिणत होता है, तब दृश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का प्रतीक बन जाता है। ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला उत्तर प्रदेश सूचना विभाग के मुख्य द्वार पर, जहां उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन के तत्वावधान में प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल वहीद व उनकी टीम द्वारा ज्येष्ठ माह के चौथे बड़े मंगल के अवसर पर संकटमोचन श्री हनुमान जी के पावन भंडारे का आयोजन किया गया। इस आयोजन में उपमुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, विधायक, विधान परिषद के सभापति, पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री सहित कई प्रमुख राजनेता उपस्थित रहे, साथ ही प्रशासनिक अधिकारी, धर्मगुरु, वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, चिकित्सक, व्यापारी वर्ग और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोगों ने भी आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

यह आयोजन केवल प्रसाद वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण बन गया। हज़ारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। विशेष बात यह रही कि आयोजन में हर धर्म और समुदाय के लोगों ने भागीदारी की और मुस्लिम समुदाय ने विशेष सहयोग देकर भाईचारे की मिसाल पेश की। भव्य भंडारे में सभी धर्मों और समुदायों की सहभागिता ने सामाजिक सौहार्द और एकता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया, वहीं जरूरतमंदों के लिए आयोजित निःशुल्क चिकित्सा शिविर में न सिर्फ जांच व परामर्श दिया गया, बल्कि निशुल्क दवाएं भी वितरित की गईं। इसके साथ ही 21 गरीब परिवारों को एक महीने की राशन किट और 21 बच्चों को स्कूल बैग देकर सेवा भाव को प्राथमिकता दी गई। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अतिथियों को पौधे भेंट कर हरित जागरूकता का संदेश दिया गया, जबकि राजनीति, पत्रकारिता, प्रशासन, और समाजसेवा से जुड़े गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी प्रभावशाली और प्रेरणादायक बना दिया।

सेवा के साथ संवेदनशीलता – पत्रकारिता की परंपरा का विस्तार

जहां एक ओर भक्तों के लिए भंडारे की व्यवस्था रही, वहीं दूसरी ओर समाज के वंचित वर्ग को भी इस आयोजन में विशेष स्थान दिया गया।

  • डॉ. आदर्श त्रिपाठी के सौजन्य से आयोजित निशुल्क चिकित्सा शिविर ने दर्जनों ज़रूरतमंदों को स्वास्थ्य सुविधा और मुफ्त दवाएं प्रदान कीं।
  • सुप्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. पीयूष शुक्ला समेत समाज में अपनी सेवा के लिए चर्चित महान विभूतियों को सम्मानित किया गया।
  • 21 निर्धन परिवारों को एक महीने की राशन किट भेंट की गई।
  • 21 मेधावी बच्चों को स्कूल बैग और अध्ययन सामग्री दी गई।
  • पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ अतिथियों को पौधे, अंग वस्त्र और धार्मिक स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।

नेतृत्व और जनसेवा का संगम

इस आयोजन की गरिमा को और भी ऊँचाई मिली जब प्रदेश के कई वरिष्ठ मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि और पत्रकार एक साथ उपस्थित हुए।

उपस्थित प्रमुख राजनेता:

  • बृजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
  • एके शर्मा, ऊर्जा मंत्री
  • जयवीर सिंह, पर्यटन मंत्री
  • डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, वन मंत्री
  • कुंवर मानवेंद्र सिंह, सभापति, विधान परिषद

अन्य विशिष्ट जनप्रतिनिधि:

  • राजेंद्र चौधरी, वरिष्ठ सपा नेता
  • अरमान खान, विधायक, लखनऊ पश्चिम
  • सिराज मेंहदी, पूर्व एमएलसी
  • हेमंत तिवारी, अध्यक्ष, मान्यता समिति
  • रोहित अग्रवाल, प्रवक्ता, रालोद
  • अजय त्रिपाठी उर्फ मुन्ना, वरिष्ठ नेता
  • शिवशरण सिंह, वरिष्ठ पत्रकार
  • सिद्धार्थ कलहंस, अजय सिंह, सुशील दुबे

सांस्कृतिक समरसता की मिसाल

भंडारे के आयोजन में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भी भाग लिया:

  • महंत दिव्या गिरी, मनकामेश्वर मंदिर
  • डॉ. उमंग खन्ना, आरटीआई एक्टिविस्ट
  • डॉ. रीमा सिन्हा, वरिष्ठ कवयित्री
  • वेदव्रत बाजपेई, राष्ट्रीय कवि
  • मुर्तजा अली, अध्यक्ष, नशाबंदी संघर्ष समिति
  • कुदरत उल्ला खान, अध्यक्ष, इंसानियत वेलफेयर सोसाइटी
  • संजय गुप्ता, व्यापारी नेता
  • तनवीर सिद्दीकी, सामाजिक कार्यकर्ता
  • संदीप बंसल, उद्योगपति
  • संजय व उर्वशी शर्मा, समाजसेवी

संवेदनशील पत्रकारिता और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल

इस भंडारे ने साबित किया कि पत्रकारिता केवल शब्दों की लड़ाई नहीं होती, बल्कि सेवा और सामाजिक दायित्व की गहराइयों तक उतरने की भी ताकत रखती है। उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन द्वारा किया गया यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक परंपरा को निभाने वाला था, बल्कि उसने जरूरतमंदों की सेवा, समाज में सहयोग की भावना और सांप्रदायिक सौहार्द का ऐसा संदेश दिया, जिसे आने वाले समय तक याद किया जाएगा।

पत्रकार एसोसिएशन द्वारा आयोजित यह भव्य भंडारा केवल एक धार्मिक आयोजन भर नहीं था, बल्कि यह उस सामाजिक चेतना, सद्भाव और जनसेवा का प्रतिनिधि बनकर सामने आया, जिसकी मिसाल कम ही देखने को मिलती है। संकट मोचन भगवान हनुमान की कृपा के साथ इस आयोजन ने लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब, साम्प्रदायिक सौहार्द और मानवीय संवेदना की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।

यह आयोजन इस मायने में भी ऐतिहासिक रहा कि इसमें पत्रकारों की जीवंत और प्रतिबद्ध भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई। पत्रकार, जो दिन-रात समाज के हर पहलू को जनता तक पहुंचाने का कार्य करते हैं, उन्होंने इस बार न केवल आयोजन में नेतृत्व किया, बल्कि अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण भी प्रस्तुत किया। यह आयोजन यह दर्शाता है कि पत्रकार केवल कलम और कैमरे तक सीमित नहीं हैं, वे समाज की सेवा और जागरूकता में भी अग्रणी भूमिका निभाते हैं।

विशेष रूप से सराहना के पात्र हैं डॉ. आदर्श त्रिपाठी और उनके सहयोगी चिकित्सक, जिन्होंने जरूरतमंदों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन कर, न केवल स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई, बल्कि पत्रकारिता और चिकित्सा क्षेत्र के बीच समन्वय और मानवीय सेवा का सेतु भी निर्मित किया।

इस आयोजन की गरिमा को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, ऊर्जा मंत्री एके शर्मा, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र चौधरी, विधायक अरमान खान, पूर्व एमएलसी सिराज मेहदी, पत्रकार नेता हेमंत तिवारी, रालोद प्रवक्ता रोहित अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस, शिवशरण सिंह, सुशील दुबे, अजय सिंह के अलावा NUJ के अजय जायसवाल, आशीष मौर्य, अनुपम सिंह चौहान, तीर्थांकर गुहा, अरुण कुमार “टीटू”, शिव सागर सिंह चौहान, नागेंद्र सिंह, किरण सिंह एवं अन्य पत्रकार साथियों के साथ ही अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने और अधिक ऊँचाई प्रदान की।

साथ ही, मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरी, वरिष्ठ कवयित्री डॉ. रीमा सिन्हा, राष्ट्रीय कवि वेदव्रत बाजपेई, व्यापारी नेता संजय गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता तनवीर सिद्दीकी, इंसानियत वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष कुदरत उल्ला खान और अन्य समाजसेवियों की भागीदारी ने इस आयोजन को और अधिक प्रेरक और समरस बनाया।

इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश पूरे समाज में गया कि धर्म, सेवा और पत्रकारिता जब एकत्र होकर आगे बढ़ते हैं, तो वे केवल परंपराओं का निर्वहन नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त और प्रेरक सामाजिक आदर्श स्थापित करते हैं।

Ukraine Operation Spider Web:मिसाइल या फाइटर जेट नहीं, भविष्य की लड़ाई में ड्रोन होंगे ‘ब्रह्मास्त्र’! जानिए यूक्रेन का खास ऑपरेशन

 यूक्रेन ने रविवार (1 जून 2025) को ऑपरेशन स्पाइडर वेब (Operation Spiderweb) के तहत रूस के सैन्य हवाई अड्डों को निशाना बनाते हुए 40 बॉम्बर्स प्लेन को तबाह कर दिया. यूक्रेन ने 18 महीने की प्लानिंग के बाद इस ऑपरेशन को अंजाम दिया. यूक्रेन ने कम लागत वाले 150 छोटे FPV ड्रोन का इस्तेमाल किया, जिसमें से 118 ड्रोन ने रूस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है.

रूसी एयर डिफेंस सिस्टम को दिया चकमा

यूक्रेन सुरक्षा सेवा (SBU) ने इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उन्होंने ड्रोन को गुप्त तरीके से रूस सीमा के भीतर पहुंचाया गया. इन ड्रोन्स को दिन में कम दूरी से हमला करने के लिए ट्रकों पर लकड़ी के ढांचों से लॉन्च किया गया. ड्रोन रूस के सामरिक हवाई अड्डों के पास मोबाइल ट्रकों से लॉन्च किए गए, जिससे रूसी एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देना आसान हुआ. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस ऑपरेशन को शानदार उपलब्धि बताया.

यूक्रेन ने बदल दी युद्ध की परिभाषा

ऑपरेशन स्पाइडर वेब को खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इसने पारंपरिक एयर पावर को चुनौती दी है. यूक्रेन ने फाइटर जेट या क्रूज मिसाइलों को तैनात करने के बजाय विस्फोटकों से लैस सस्ते ड्रोन पर भरोसा किया, जो कारगर साबित हुआ. एक FPV ड्रोन की लागत 430 से 600 डॉलर (लगभग 36,000 से 50,000 रुपये) थी. इन्हीं सस्ते ड्रोन से यूक्रेन ने रूस के चार हवाई अड्डों पर 40 विमानों (Tu-95, Tu-22M3, A-50) को तबाह किया.

दशकों से एयरफोर्स की ताकत को बढ़ाने में बड़े औद्योगिक क्षमता और हाई टेक्नोलॉजी वाले देशों का वर्चस्व रहा है. ये ऑपरेशन दर्शाता है कि कैसे पारंपरिक हवाई ताकत के बिना भी कम लागत में दुश्मनों को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सकता है. पारंपरिक हवाई ऑपरेशन में महीनों भर की प्लानिंग, बेस्ट फाइटर जेट, ईंधन भरने वाले टैंकर सैटेलाइट कॉर्डिनेशन की जरूरत होती है. ऑपरेशन स्पाइडर वेब इन सभी मामलों में कमजोर था, लेकिन फिर भी यूक्रेन ने युद्ध के क्षेत्र में नया इतिहास लिख दिया है.

भारत के लिए सबक

ड्रोन अब दुनिया भर में तेजी से मुख्य शक्ति बनता जा रहा है. स्पाइडर वेब हमला इस बात का सबूत है कि यूएवी या मानव रहित हवाई ताकत भविष्य के युद्धों की आधारशिला है. इससे सेना दुश्मन के इलाके में बहुत अंदर तक जा सकती है. इससे पायलट के जान को जोखिम भी नहीं होगा.

भारत को मानवरहित प्रणालियों की ओर तेजी से बढ़ना होगा. भारत ने अपने लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और हवाई परिवहन में दशकों तक खूब खर्च किए हैं, लेकिन अब भविष्य में मानव रहित और एआई के इस्तेमाल वाला ड्रोन होगा. भारत ने उस दिशा में शुरुआती कदम उठाए हैं, लेकिन उतनी तेजी से नहीं. यूक्रेनी ऑपरेशन से भारत को स्वदेशी ड्रोन, सशस्त्र यूएवी पर आगे बढ़ना चाहिए.

Russia Ukraine Peace Talk: कैदियों की अदला-बदली पर बनी सहमति, लेकिन रूस की शर्त पर भड़के यूक्रेन और पश्चिमी देश

 रूस-यूक्रेन के बीच तुर्किये के इस्तांबुल में सोमवार (2 जून 2025) को शांति वार्ता को लेकर बैठक हुई. करीब एक घंटे तक चली बैठक में दोनों देशों के तेवर को देखते हुए एक चीज तो साफ हो गई कि रूस-यूक्रेन के बीच तत्काल सीजफायर तो नहीं हो सकता है. हालांकि दोनों देशों के बीच कुछ चीजों को लेकर सहमति भी बनी है.

मारे गए सैनिकों के शवों की अदला-बदली

न्यूज एजेंसी एसोसिएट प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक शांति वार्ता में रूस और यूक्रेन युद्ध में मारे गए 6,000 सैनिकों के शवों की अदला-बदली करने पर सहमत हुए. रूस के प्रतिनिधि मेडिंस्की ने कहा कि ग्रे जोन के जरिए शवों को सौंपा जाएगा. हालांकि जिस क्षेत्र में शवों को आदान प्रदान होगा वहां सीजफायर जरूरी है. मेडिंस्की के अनुसार कुछ फ्रंटलाइन इलाकों के लिए सीजफायर प्रस्तावित किया गया है.

दोनों देशों के बीच स्थायी समिति का गठन होगा

रूस-यूक्रेन के बीच इस शांति वार्ता में 1000-1000 युद्धबंदियों की अदला-बदली पर भी सहमति बनी है. हालांकि इसकी प्रकिया कब शुरू होगी इसकी जानकारी नहीं दी गई है. इसके लिए एक स्थायी समिति के गठन पर दोनों देश राजी हुए हैं. इसके समिति के माध्यम से भविष्य में युद्धबंदियों की अदला-बदली की प्रकिया को तेजी और सुचारू ढंग से पूरा किया जाएगा.

यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले रक्षा मंत्री रुस्तम उमरोव ने बताया कि वार्ता की मेज पर रूस ने शत्रुता समाप्त करने के लिए क्रेमलिन की शर्तों को बताते हुए एक ज्ञापन प्रस्तुत किया. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि यूक्रेन के अधिकारियों को दस्तावेज़ की समीक्षा करने और प्रतिक्रिया पर निर्णय लेने के लिए एक सप्ताह का समय चाहिए. उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने 20 जून से 30 जून के बीच शांति वार्ता पर आगे की बातचीत का प्रस्ताव रखा है.

सीजफायर को लेकर रूस की शर्त

रूस की ओर से दिए गए ज्ञापन में सुझाव दिया गया कि यूक्रेन उन चार क्षेत्रों से अपनी सेना वापस ले ले, जिन्हें रूस ने सितंबर 2022 में कब्जा कर लिया था, लेकिन युद्धविराम की शर्त के रूप में कभी पूरी तरह से कब्जा नहीं किया. इसमें कहा गया कि यूक्रेन अपनी धरती पर किसी भी तीसरे देश की सैन्य उपस्थिति पर प्रतिबंध लगा दे.

रूसी दस्तावेज में आगे प्रस्ताव दिया गया, “यूक्रेन मार्शल लॉ समाप्त करे और चुनाव कराए, जिसके बाद दोनों देश एक व्यापक शांति संधि पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. यूक्रेन नाटो में शामिल होने के अपने प्रयास को त्याग दे. यूक्रेन अपने सशस्त्र बलों के आकार पर सीमा निर्धारित करेगा और यूक्रेनी भाषा के समान रूसी भाषा को देश की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता देगा.” हालांकि यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने पहले भी मास्को की सभी मांगों को अस्वीकार कर दिया.

Ukraine Drone Attack in Russsia:AI और सोवियत काल के म्यूजियम की मदद से यूक्रेन ने रूस में कैसे मचाई भीषण तबाही, जानिए पूरी कहानी

 रूस के सामरिक बेस पर यूक्रेन के स्वार्म-ड्रोन अटैक से पूरी दुनिया हैरान है. हालांकि, यूक्रेन ने इस हमले को लेकर कहा है कि पिछले डेढ़ साल से प्लानिंग चल रही है. लेकिन अब जानकारी सामने आई है कि यूक्रेन ने एआई और सोवियत-काल के म्यूजियम की मदद से द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार इतने बड़े हमले को अंजाम दिया है.

दरअसल, यूक्रेन ने रूस के जिन पांच एयरबेस पर अटैक किया, उन सभी पर स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स तैनात रहते हैं यानी ऐसे मिलिट्री विमान, जो परमाणु बम ले जाने में सक्षम हैं. इन पांच एयरबेस में से एक इरकुत्स्क तो यूक्रेन बॉर्डर से करीब पांच हजार किलोमीटर दूर सुदूर-पूर्व के साइबेरिया में है. इसी तरह अमुर एयरबेस भी रूस के सुदूर-पूर्व में है.

बम और एक्सप्लोजिव से लैस ड्रोन्स ने बॉम्बर्स विमानों को बनाया निशाना

जानकारी के मुताबिक, यूक्रेन की इंटेलिजेंस एजेंसी एसबीयू ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से सोवियत काल के टीयू-95 स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स पर हमले की तैयारी की. यूक्रेन ने अपने एफपीबी (फर्स्ट पर्सन व्यू) ड्रोन के एल्गोरिथ्म को इस तरह तय किया कि बम और एक्सप्लोजिव से लैस ड्रोन सीधे इन बॉम्बर्स पर ही जाकर गिरे. ये टीयू-95 बॉम्बर (विमान) यूक्रेन में सोवियत-काल के म्यूजियम में मौजूद थे. रूस ने कुछ साल पहले इन बॉम्बर्स को अपग्रेड कर फिर से अपने जंगी बेड़े का हिस्सा बनाया है. रूस के पास अभी भी 55 ऐसे टीयू-95 बॉम्बर हैं.

रूस के 600 किमी भीतर अंदर तक यूक्रेन के स्वार्म-ड्रोन ने किए हमले

यूक्रेन का दावा है कि रविवार (1 जून) के हमले में रूस के करीब 40 बॉम्बर तबाह हुए हैं. रूस ने भी माना है कि जिन पांच एयरबेस पर यूक्रेन ने अपने स्वार्म-ड्रोन से अटैक किया था, उनमें से तीन पर बड़ा नुकसान हुआ है. रविवार (1 जून) को यूक्रेन ने रूस के पांच अलग-अलग प्रांतों में बड़ी संख्या में एफपीवी-ड्रोन से अटैक किए थे. स्वार्म-ड्रोन यानी ड्रोन के झुंडों के जरिए रूस के चार बड़े और स्ट्रेटेजिक महत्व के एयरबेस को इन ड्रोन के जरिए बड़ा नुकसान पहुंचाए जाने की खबर है. रूस के भीतर 600 किलोमीटर दूर तक यूक्रेन के इन स्वार्म-ड्रोन ने हमले किए.

हवाई रास्ते के बजाए यूक्रेन ने सड़क के माध्यम से ट्रक से भेजे ड्रोन

ग्रीस की विश्व-प्रसिद्ध पौराणिक कथा, ट्रोजन-हॉर्स से प्रेरणा लेते हुए यूक्रेन ने इन ड्रोन को रूस के भीतर पहुंचा दिया. यूक्रेन को पता था कि सीमावर्ती एयरस्पेस में रूस का एयर-डिफेंस बेहद मजबूत है. ऐसे में बॉर्डर एरिया से बड़ी संख्या में ड्रोन को फ्लाई कर रूस के एयरबेस तक अटैक करने के लिए पहुंचाना टेढ़ी खीर हो सकती है. ऐसे में यूक्रेनी इंटेलिजेंस एजेंसी ने सड़क के रास्ते बड़ी संख्या में सिविलयन ट्रकों को रूस के पांच अलग-अलग प्रांतों में पहुंचा दिया.

यूक्रेन ने ड्रोन हमले को नाम दिया ऑपरेशन स्पाइडरवेब

यूक्रेन के इन ट्रकों में फाल्स-सीलिंग तैयार की गई. इन फाल्स सीलिंग में यूक्रेन ने स्वार्म ड्रोन छिपाकर रख दिए थे. ये ड्रोन, बम और दूसरे एक्सप्लोजिव मटेरियल से लैस थे. बॉर्डर पुलिस को गच्चा देकर यूक्रेन ने इन ट्रकों को रूस के चार स्ट्रेटेजिक एयरबेस के करीब ले जाकर खड़ा कर दिया. फिर रिमोट के जरिए दूर से ही ट्रकों की सीलिंग खोलकर स्वार्म ड्रोन से रूसी एयरबेस पर खड़े स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स पर हमला कर दिया. ड्रोन अटैक में रूस के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम विमान धू-धू कर जल उठे. रूस के पांच अलग-अलग एयरबेस पर एक ही मोडस-ऑपरेंडी के जरिए हमले किए गए. यूक्रेन ने इस ऑपरेशन को स्पाइडर-वेब नाम दिया है.

यूक्रेनी हमले की जापान के पर्ल हार्बर पर हमले से हो रही तुलना

अगर यूक्रेन का दावा सही है तो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ये किसी जंग में इतनी बड़ी संख्या में दुश्मन के मिलिट्री एयरक्राफ्ट तबाह करने माना जा सकता है. यही वजह है कि सामरिक एक्सपर्ट इसे रूस पर यूक्रेन का पर्ल-हार्बर जैसा हमला मान रहे हैं. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर (हवाई द्वीप) पर बड़ा हवाई हमला किया था. जापान के इस हमले के बाद ही अमेरिका ने नागासाकी और हिरोशिमा पर न्यूक्लियर अटैक किया था, जिसमें लाखों लोगों की जान चली गई थी.

यूक्रेन के ड्रोन हमले को जवाब में रूस ने दागे ओरेसनिक मिसाइल

यूक्रेन ने रूस पर स्पाइडर-वेब हमला ऐसे समय में किया जब सोमवार (2 जून) को दोनों देशों के प्रतिनिधि इस्तांबुल में शांति-वार्ता के लिए मिल रहे हैं. वहीं, पूरी दुनिया की निगाहें पुतिन पर टिकी हैं कि रूस का अलग पलटवार कैसा होगा. यूक्रेन के हमलों का जवाब देने के लिए रूस ने भी यूक्रेन के उन एयरबेस पर ‘ओरेसनिक’ मिसाइल से अटैक शुरू कर दिए हैं, जहां स्वार्म-ड्रोन तैनात रहते हैं यहां कमांड एंड कंट्रोल सेंटर हैं.

Russia Ukraine War: ड्रोन हमले के बाद तुर्किए में यूक्रेन ने रूस के साथ शांति वार्ता की, जानिए किन मुद्दों पर बनी सहमति

रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से जारी जंग के बीच सोमवार (2 जून 2025) को तुर्किए के सिरागन पैलेस में शांति वार्ता को लेकर बातचीत हुई. दोनों देशों के बीच यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन ने रूस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करते हुए उसके 40 बॉम्बर्स प्लेन को तबाह कर दिया. दोनों देशों के बीच शांति को लेकर एक घंटे से ज्यादा देर तक बातचीत हुई.

एक-दूसरे के कैदियों को रिहा करने पर बनी सहमति

यूक्रेन के रक्षा मंत्री रुस्तम उमरोव ने इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया. उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे के कैदियों को रिहा करने पर सहमत हुए हैं. युद्ध रोकने की प्रमुख शर्तों के मामले में दोनों देशों के बीच अभी भी काफी मतभेद हैं. तुर्किए के विदेश मंत्री हकान फिदान ने इस शांति वार्ता की अध्यक्षता की. इस बैठक में तुर्की की खुफिया एजेंसी के अधिकारी भी मौजूद थे.

यूक्रेन ने किन-किन जगहों को निशाना बनाया?

रूस मे इस बात की पुष्टि की है कि यूक्रेन ने उसके एयरबेस को निशाना बनाया. रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “कीव शासन ने मरमंस्क, इरकुत्स्क, इवानोवो, रियाजान और अमूर में स्थित हवाई क्षेत्रों पर एफपीवी ड्रोन का उपयोग करके एक आतंकी हमला किया. इवानोवो, रियाजान और अमूर में सैन्य हवाई क्षेत्रों पर हुए सभी हमलों के विफल कर दिया गया.”

तत्काल सीजफायर की उम्मीद कम

रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा, “मरमंस्क और इरकुत्स्क क्षेत्रों में सैन्य हवाई अड्डों के नजदीकी इलाकों से एफपीवी ड्रोन छोड़े जाने के परिणामस्वरूप कई विमानों में आग लग गई.” यूक्रेन के इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच तत्काल सीजफायर की उम्मीद कम ही है. यूक्रेन के वायु सेना ने कहा कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने रूस की ओर से छोड़े गए 80 ड्रोनों में से 52 को तबाह कर दिया.

उत्तरपूर्वी यूक्रेनी शहर खारकीव के मेयर ने कहा कि सोमवार की सुबह दो बैलिस्टिक मिसाइल ने शहर के एक आवासीय इलाके पर हमला किया. उन्होंने कहा कि इसमें से एक मिसाइल स्कूल के पास तो दूसरा एक इमारत के पास गिरी.