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योगी सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय का बड़ा विजन: भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया कैंपस बनेगा भारत का वैश्विक परफॉर्मिंग आर्ट्स हब : AI म्यूजिक लैब, लिविंग म्यूजियम, डिजिटल आर्काइव, 1500 सीटों वाला ग्रैंड ऑडिटोरियम और गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़ेगा आधुनिक शिक्षा मॉडल

लखनऊ, 6 जुलाई 2026 : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय को देश का सबसे प्रतिष्ठित परफॉर्मिंग आर्ट्स एवं संस्कृति विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार का लक्ष्य ऐसा विश्वस्तरीय सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक परिसर विकसित करना है, जहां संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक कलाएं, भारतीय ज्ञान परंपरा, शोध और आधुनिक रचनात्मक विषयों का समावेश हो तथा उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक शिक्षा और कलात्मक उत्कृष्टता का राष्ट्रीय केंद्र बनकर उभरे।

इस महत्वाकांक्षी रोडमैप पर सोमवार को लखनऊ में पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात की अध्यक्षता में आयोजित सलाहकार समिति की बैठक में विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में देश के प्रतिष्ठित संगीतज्ञों, नृत्यांगनाओं, रंगकर्मियों, वास्तु विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने भाग लिया तथा पंडित विष्णु नारायण भातखंडे की विरासत को केंद्र में रखते हुए विश्वविद्यालय के दीर्घकालिक विकास पर मंथन किया।

AI म्यूजिक लैब से लेकर डिजिटल सांस्कृतिक संग्रहालय तक की तैयारी

प्रस्तावित योजना के तहत काकराबाद परिसर को बहु-विषयक सांस्कृतिक कैंपस के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां संगीत, नृत्य, रंगमंच, दृश्य कला, फिल्म, योग, अध्यात्म और भारतीय ज्ञान परंपरा के अलग-अलग स्कूल स्थापित होंगे। वहीं ऐतिहासिक कैसरबाग परिसर को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आयोजनों का जीवंत केंद्र बनाया जाएगा।

योजना में भारत की पहली AI म्यूजिक लैब, म्यूजियम ऑफ इंडियन परफॉर्मिंग आर्ट्स, सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स एंड हेल्थ, राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी, पांडुलिपि संरक्षण केंद्र, ओरल हिस्ट्री आर्काइव, सांस्कृतिक स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर, 1500 सीटों वाला विष्णु नारायण भातखंडे ग्रैंड ऑडिटोरियम, ब्लैक बॉक्स थिएटर और ओपन एयर एम्फीथिएटर जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित करने पर विचार किया गया।

अमृत अभिजात बोले- दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों की बराबरी करेगा भातखंडे

बैठक को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास ऐसा संस्थान विकसित करने का अवसर है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत को भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़े।

उन्होंने कहा कि भातखंडे को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मिंग आर्ट्स संस्थानों के समकक्ष स्थापित करना सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर की वास्तु डिजाइन प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी, ताकि देश के श्रेष्ठ विशेषज्ञ इस परियोजना में अपना योगदान दे सकें।

परंपरा और तकनीक के समन्वय पर जोर

पूर्व राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय निदेशक एवं पद्मश्री प्रो. वामन केंद्रे ने डिजिटल आर्ट, एनीमेशन, डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण और वर्चुअल प्रोडक्शन जैसे आधुनिक विषयों को पारंपरिक कलाओं के साथ जोड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने कलाकारों और शोधकर्ताओं के लिए सहयोगात्मक नवाचार केंद्र विकसित करने की आवश्यकता भी बताई।

भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ेगा वैश्विक दृष्टिकोण

प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने सुझाव दिया कि संगीत विश्वविद्यालय से संस्कृति विश्वविद्यालय बनने की अवधारणा पाठ्यक्रम और वैश्विक दृष्टिकोण में भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने बौद्ध सांस्कृतिक दर्शन और भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे पाठ्यक्रम शुरू करने की वकालत की, जिससे विदेशी छात्रों को भी आकर्षित किया जा सके।

जीवंत सांस्कृतिक अनुभव बनेगा पूरा परिसर

प्रो. श्रुति बंद्योपाध्याय ने दुर्लभ वाद्ययंत्रों, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए सेंटर फॉर मेमोरीज़ स्थापित करने का सुझाव दिया।

लोकगायिका एवं पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित प्राकृतिक वातावरण वाले परिसर की कल्पना प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय संगीत का प्रकृति से गहरा संबंध है और खुले आंगन, छायादार गलियारे तथा प्राकृतिक वातावरण छात्रों की सृजनात्मकता को नई ऊर्जा देंगे।

पद्मश्री डॉ. शोभना नारायण ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि जीवंत सांस्कृतिक केंद्र होना चाहिए, जहां नियमित प्रस्तुतियां, कार्यशालाएं, व्याख्यान और कलाकारों के साथ संवाद होते रहें।

वास्तु विशेषज्ञ डॉ. वंदना सहगल ने परिसर को इंटरएक्टिव सार्वजनिक स्थलों, प्रदर्शन प्रांगणों और सहयोगात्मक शिक्षण वातावरण के साथ विकसित करने का सुझाव दिया।

वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी

बैठक में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, कलाकार रेजिडेंसी, अंतर्विषयक शोध, सांस्कृतिक पर्यटन, परफॉर्मिंग आर्ट्स आधारित वेलनेस तथा आधुनिक विश्वविद्यालय व्यवस्था में गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उद्देश्य भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय को ऐसा वैश्विक संस्थान बनाना है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए भविष्य की पीढ़ियों को नई दिशा प्रदान करे।

बैठक के अंत में कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने सभी विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए इसे विश्वविद्यालय के इतिहास का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।

नर सेवा को नारायण सेवा मानकर 25 करोड़ प्रदेशवासियों के हित के लिए कार्य कर रही सरकारः मुख्यमंत्री

  • मुख्यमंत्री ने सोमवार को किया ‘जनता दर्शन’, प्रदेश के विभिन्न कोने से आए हर फरियादी की सुनीं शिकायत
  • जरूरतमंदों के इलाज, मकान की व्यवस्था के साथ ही हर उचित समस्या का कराएंगे प्रभावी निस्तारणः सीएम योगी

लखनऊ, 6 जुलाईः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए प्रत्येक फरियादी से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने जरूरतमंद लोगों को आवास दिलाने और गंभीर बीमारियों से पीड़ितों के इलाज में भरपूर आर्थिक सहायता देने का आत्मीय भरोसा देते हुए कहा कि हमारी सरकार ‘नर सेवा को नारायण सेवा’ मानकर 25 करोड़ प्रदेशवासियों के हित के लिए कार्य कर रही है।

‘जनता दर्शन’ के दौरान मुख्यमंत्री खुद फरियादियों तक पहुंचे और एक-एक कर उनकी समस्याओं को सुना। उनके प्रार्थना पत्र लिए और निस्तारण के लिए संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और प्रभावी होना चाहिए।

इस अवसर पर सीएम ने लोगों से कहा कि सरकार हर जरूरतमंद और पात्र व्यक्ति को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा हर समस्या के प्रभावी निस्तारण के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जन समस्याओं पर संवेदनशीलता दिखाएं।

अवैध कब्जा संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि यदि कोई दबंग किसी की जमीन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। राजस्व व पुलिस से जुड़े मामले में समयसीमा के भीतर न्याय दिलाया जाए और मामले का निस्तारण कर पीड़ित की संतुष्टि पर ध्यान दिया जाए।

अखिलेश यादव की ‘राम भक्ति’ पर सरोजिनी नगर से भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कसा तंज : बोले- “राम आस्था हैं, चुनावी रीचार्ज पैक नहीं”

  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव पर साधा निशाना।
  • सपा के “रामायण सीजन” और बढ़ती धार्मिक सक्रियता पर कसा तंज।
  • कहा- “राम आस्था हैं, चुनावी रीचार्ज पैक नहीं।”
  • “भक्तिभाव कैमरे के सामने नहीं, चरित्र में दिखना चाहिए।”
  • सपा की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की हालिया धार्मिक गतिविधियों और भगवान श्रीराम से जुड़े बयानों को लेकर सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की बदलती राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए और इसे चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा कि समाजवादी पार्टी का नया “रामायण सीजन” देखकर ऐसा लगता है कि चुनावी कैलेंडर के साथ अब भक्ति का कैलेंडर भी अपडेट हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव ने शायद अपने पूरे राजनीतिक जीवन में जितनी बार प्रभु श्रीराम का नाम नहीं लिया होगा, उससे अधिक बार पिछले एक महीने में उनका उल्लेख किया है।

उन्होंने आगे लिखा कि लगता है किसी ने अखिलेश यादव को समझा दिया है कि उत्तर प्रदेश में बिना “जय श्रीराम” बोले राजनीति की गाड़ी आगे नहीं बढ़ती। डॉ. राजेश्वर सिंह ने आरोप लगाया कि जो लोग पहले राम मंदिर पर चुप्पी साधते थे, रामभक्तों पर टिप्पणी करते थे और अयोध्या के विकास पर सवाल उठाते थे, आज उनके हर दूसरे बयान में राम, हर तीसरे भाषण में अयोध्या और हर चौथे ट्वीट में आस्था दिखाई दे रही है।

अपने पोस्ट में उन्होंने प्रभु श्रीराम की महिमा का उल्लेख करते हुए लिखा कि श्रीराम की कृपा ऐसी है कि वह वनवासियों को ही नहीं, बल्कि “राजनीतिक वनवास” में पड़े लोगों को भी रास्ता दिखा देती है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अखिलेश यादव से अपील करते हुए कहा कि राम-नाम को चुनावी “रीचार्ज पैक” न बनाया जाए। उन्होंने लिखा कि “राम आस्था हैं, ट्रेंडिंग टॉपिक नहीं। राम मर्यादा हैं, राजनीतिक मजबूरी नहीं।”

पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “देर आए, दुरुस्त आए… पर भक्तिभाव कैमरे के सामने नहीं, चरित्र में दिखना चाहिए।”

हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से डॉ. राजेश्वर सिंह के इस बयान पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकार इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और सपा के बीच तेज होती बयानबाजी का हिस्सा मान रहे हैं।

500 किलोमीटर दूर से आई पुकार, एक फोन कॉल और फरिश्ता बन गया इंस्पेक्टर का बेटा: उत्तर प्रदेश पुलिस के एक परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल, रक्तदान कर बचाई जान

लखनऊ/बलिया। कहते हैं कि इंसानियत की कोई सीमा नहीं होती और न ही रिश्तों की कोई शर्त। जब किसी की जिंदगी बचाने का सवाल हो तो अनजान लोग भी अपनों से बढ़कर साथ खड़े हो जाते हैं। ऐसी ही एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी उत्तर प्रदेश के बलिया और लखनऊ के बीच सामने आई है, जहां 500 किलोमीटर दूर से आई एक मदद की पुकार पर उत्तर प्रदेश पुलिस में तैनात इंस्पेक्टर के परिवार ने ऐसा उदाहरण पेश किया, जो समाज के लिए प्रेरणा बन गया।

बलिया जिले के बंकवा गांव निवासी अजीत कुमार पटेल अपनी मां बेबी देवी को गंभीर हार्ट स्ट्रोक आने के बाद उपचार के लिए लगभग 500 किलोमीटर दूर लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लेकर पहुंचे। जांच के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि उनकी जान बचाने के लिए हृदय में वाल्व प्रत्यारोपण (हार्ट वाल्व सर्जरी) आवश्यक है। लेकिन ऑपरेशन से पहले तत्काल रक्त की जरूरत थी। घर से इतनी दूर न कोई रिश्तेदार था और न कोई परिचित। अस्पताल के बाहर खड़े अजीत कुमार के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि आखिर रक्त की व्यवस्था कैसे हो।

इसी दौरान उन्हें अपने गांव के निवासी, पत्रकार एवं पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री के मीडिया सलाहकार अभिषेक सिंह की याद आई। उन्होंने तुरंत उन्हें फोन कर पूरी स्थिति बताई। मामला गंभीर था, इसलिए अभिषेक सिंह ने बिना देर किए अपने पत्रकार साथियों से मदद की अपील शुरू कर दी।

कुछ ही समय बाद लखनऊ में ही कार्यरत एक पत्रकार साथी शिवसागर सिंह चौहान के माध्यम से वर्तमान समय में बलिया जनपद में ही तैनात इंस्पेक्टर संजय शुक्ला तक बात पहुंची। उस समय वह बलिया में अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। जैसे ही उन्हें पता चला कि बलिया जिले का ही एक परिवार लखनऊ में रक्त के अभाव में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है, उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपने 20 वर्षीय पुत्र रूद्रेश शुक्ला को रक्तदान के लिए हॉस्पिटल भेज दिया।

रूद्रेश शुक्ला अस्पताल पहुंचे और तुरंत रक्तदान किया। रक्त मिलते ही ऑपरेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी और अजीत कुमार के परिवार के चेहरे पर राहत लौट आई। जिस परिवार के लिए कुछ देर पहले हर रास्ता बंद दिखाई दे रहा था, उसके लिए एक अनजान परिवार देवदूत बनकर सामने आ गया।

रक्तदान इस परिवार की परंपरा बन चुका है

यह घटना केवल एक बार की मदद नहीं, बल्कि वर्षों से निभाए जा रहे मानव सेवा के संकल्प का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश पुलिस के वर्ष 2001 बैच के उपनिरीक्षक (इंस्पेक्टर) संजय शुक्ला अब तक 15 बार स्वेच्छा से रक्तदान कर चुके हैं। उनकी पत्नी विनीत शुक्ला 14 बार रक्तदान कर चुकी हैं। वहीं, महज 20 वर्षीय पुत्र रूद्रेश शुक्ला ने बीटेक (कंप्यूटर साइंस) के तीसरे वर्ष का छात्र होने के बावजूद पांचवीं बार रक्तदान कर किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने में योगदान दिया।

परिवार का कहना है कि रक्तदान उनके लिए केवल सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि मानवता की सेवा है।

माता-पिता बने प्रेरणा, बेटे ने बनाया जीवन का संकल्प

संजय शुक्ला बताते हैं कि शुरुआत उन्होंने स्वयं रक्तदान से की। उनके इस कार्य से प्रेरित होकर उनकी पत्नी विनीत शुक्ला ने भी नियमित रक्तदान शुरू किया। बचपन से माता-पिता को लोगों की जान बचाते देखकर रूद्रेश ने भी संकल्प लिया कि वह भी बड़ा होकर इसी सेवा को आगे बढ़ाएगा।

आज पूरा परिवार रक्तदान को एक संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में निभा रहा है।

“बस मन में सेवा का भाव होना चाहिए”

इंस्पेक्टर संजय शुक्ला कहते हैं,

“रक्तदान के लिए किसी विशेष शक्ति या असाधारण क्षमता की जरूरत नहीं होती। केवल मन में सेवा का भाव होना चाहिए। यदि व्यक्ति स्वस्थ खान-पान अपनाए, नियमित योग और व्यायाम करे तो वह बार-बार भी सुरक्षित तरीके से रक्तदान कर सकता है। किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने से बड़ा कोई संतोष नहीं होता।”

कर्तव्य के साथ मानवता की भी मिसाल

48 वर्षीय संजय शुक्ला उत्तर प्रदेश पुलिस में वर्ष 2001 बैच के अधिकारी हैं। अपने सेवा काल में उन्होंने सिद्धार्थनगर, बस्ती, बहराइच, लखनऊ में सर्विलांस, स्वाट प्रभारी तथा विभूतिखंड थाना प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती बलिया में है। उनका गृह जनपद गोरखपुर है। उनके पिता सुरेंद्रनाथ शुक्ला का गोलोकगमन हो चुका है।

पुलिस की वर्दी पहनकर कानून व्यवस्था संभालने के साथ-साथ उनका पूरा परिवार समाज में मानवता और सेवा का संदेश भी लगातार दे रहा है।

समाज के लिए एक प्रेरणा

आज जब अक्सर समाज में नकारात्मक खबरें सुर्खियां बनती हैं, ऐसे समय में संजय शुक्ला, उनकी पत्नी विनीत शुक्ला और पुत्र रूद्रेश शुक्ला का यह परिवार उम्मीद की एक नई रोशनी बनकर सामने आया है। यह घटना बताती है कि इंसानियत आज भी जिंदा है और कई बार एक फोन कॉल, कुछ मिनट का रक्तदान और निस्वार्थ सेवा किसी परिवार के लिए पूरी जिंदगी बदल सकती है।

रक्तदान केवल रक्त देना नहीं, बल्कि किसी मां, किसी पिता, किसी बेटे या किसी बेटी को नया जीवन देने का माध्यम है। यदि समाज का हर स्वस्थ व्यक्ति इसी भावना के साथ आगे आए तो देश में रक्त की कमी से किसी मरीज की जान नहीं जाएगी।

ऐसे परिवार वास्तव में समाज के लिए प्रेरणा हैं, जो सेवा को केवल शब्दों में नहीं बल्कि अपने जीवन के संस्कारों में उतार चुके हैं।

“योगी की पाती” बनी युवाओं की नई प्रेरणा: खेल क्रांति से विश्व मंच पर चमक रहा उत्तर प्रदेश का गौरव; नई पाती में खेल संस्कृति, खिलाड़ियों की उपलब्धियों और विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को किया रेखांकित; कहा- “मैदान की मिट्टी हार नहीं, हर बार उठकर आगे बढ़ना सिखाती है”

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समय-समय पर लिखी जाने वाली “योगी की पाती” लगातार जनमानस, विशेषकर युवाओं और खिलाड़ियों के बीच प्रेरणा का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। अपनी सरल, प्रेरक और सकारात्मक शैली के कारण यह पत्र श्रृंखला प्रदेश ही नहीं, देशभर में व्यापक रूप से पढ़ी और सराही जा रही है। इसमें मुख्यमंत्री प्रदेश के विकास, युवा शक्ति, खेल संस्कृति और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर अपने विचार साझा करते हैं, जिससे लाखों युवाओं को नई दिशा और ऊर्जा मिलती है।

इसी क्रम में खेलों को समर्पित अपनी नवीनतम पाती में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की खेल उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि “मैदान की मिट्टी जीत-हार नहीं, बल्कि हर बार गिरकर उठना और आगे बढ़ना सिखाती है।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल आर्थिक और आधारभूत विकास में ही नहीं, बल्कि खेलों के क्षेत्र में भी देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा, अनुशासन और अथक मेहनत के बल पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने 65वीं राष्ट्रीय अंतरराज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पहली बार उत्तर प्रदेश की पुरुष टीम के चैंपियन बनने तथा कुल 20 पदक जीतकर नया इतिहास रचने को प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

उन्होंने अंडर-18 हॉकी एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम में उत्तर प्रदेश के पांच खिलाड़ियों के महत्वपूर्ण योगदान का भी विशेष उल्लेख किया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों दीप्ति शर्मा, प्रवीण कुमार, अन्न रानी, सिमरन शर्मा और वंशिका अग्रवाल की उपलब्धियों पर प्रदेशवासियों को गर्व होने की बात कही।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पाती में स्पष्ट किया कि “चैंपियन एक दिन में नहीं बनते और खेल संस्कृति भी रातों-रात विकसित नहीं होती।” उन्होंने कहा कि सरकार खिलाड़ियों के कौशल विकास, आधुनिक प्रशिक्षण और विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार की योजना के तहत हर ग्राम पंचायत में खेल मैदान, हर ब्लॉक में मिनी स्टेडियम, हर जनपद में आधुनिक स्टेडियम विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय तैयार किया जा रहा है तथा भविष्य में हर मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें। सरकार उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी और अन्य प्रोत्साहन भी उपलब्ध करा रही है।

मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की खेल प्रतिभा को कभी न रोकें। उन्होंने कहा कि खेल न केवल शारीरिक और मानसिक विकास का माध्यम हैं, बल्कि युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने का सबसे प्रभावी साधन भी हैं। खेल अनुशासन, समर्पण, सकारात्मक सोच और टीम भावना का विकास करते हैं, जो जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की आधारशिला बनते हैं।

प्रदेश में खेल अवसंरचना के विस्तार, खिलाड़ियों को मिल रही नई सुविधाओं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ती उपलब्धियों को मुख्यमंत्री ने “विकसित उत्तर प्रदेश” के संकल्प का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खेल भावना और युवा शक्ति के बल पर उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी नई पहचान स्थापित करेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व शैली, सुशासन, विकासोन्मुख नीतियों और युवाओं को प्रेरित करने वाले संदेशों के कारण उनकी लोकप्रियता निरंतर बढ़ी है। देश और विदेश में बसे उत्तर प्रदेश मूल के लोग भी प्रदेश में हो रहे बदलावों, बेहतर खेल सुविधाओं और नई उपलब्धियों को गौरव के साथ साझा कर रहे हैं। खेल, शिक्षा, निवेश, आधारभूत संरचना और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों ने उत्तर प्रदेश की सकारात्मक पहचान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई मजबूती प्रदान की है।