Home Blog Page 663

“उत्कृष्टता का सम्मान – समाज का उत्थान”: डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर 16 मेधावी छात्र-छात्राओं और 5 समाजसेवियों समेत 21 का किया गया भव्य सम्मान

"उत्कृष्टता का सम्मान – समाज का उत्थान": डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर 16 मेधावी छात्र-छात्राओं और 5 समाजसेवियों को किया गया भव्य सम्मान
"उत्कृष्टता का सम्मान – समाज का उत्थान": डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर 16 मेधावी छात्र-छात्राओं और 5 समाजसेवियों को किया गया भव्य सम्मान
"उत्कृष्टता का सम्मान – समाज का उत्थान": डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर 16 मेधावी छात्र-छात्राओं और 5 समाजसेवियों को किया गया भव्य सम्मान
  • सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने “उत्कृष्टता का सम्मान – समाज का उत्थान” कार्यक्रम में 16 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया।
  • कार्यक्रम में 5 छात्रों को लैपटॉप, 6 को साइकिल और 5 को नकद पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।
  • डॉ. सिंह ने कहा कि “जब प्रतिभा को सम्मान मिलता है, तो राष्ट्र का भविष्य खुद संवरता है।”
  • 5 समाजसेवियों को समाज के उत्थान में योगदान के लिए विशेष रूप से अलंकृत किया गया।
  • डॉ. सिंह ने गोंदौली के महात्मा बुद्ध विद्यालय में डिजिटल लाइब्रेरी के लिए कंप्यूटर देने की घोषणा भी की।

लखनऊ, विशेष रिपोर्ट – True News Up : “जब प्रतिभा को सम्मान मिलता है, तब प्रगति स्वयं राह बना लेती है” – यह कथन रविवार को पूरी तरह चरितार्थ हुआ, जब सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक और जनप्रिय नेता डॉ. राजेश्वर सिंह ने क्षेत्र के मेधावी छात्र-छात्राओं और समाजसेवा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठजनों को सम्मानित किया।

यह भव्य सम्मान समारोह लखनऊ के सरोसा मोड़ स्थित ‘ए-आर्यन फैमिली रेस्टोरेंट एंड होटल’ में “उत्कृष्टता का सम्मान – समाज का उत्थान” शीर्षक से आयोजित किया गया, जिसमें कुल 16 मेधावी छात्रों को लैपटॉप, साइकिल एवं नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया, वहीं समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान देने वाले 5 प्रबुद्ध जनों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। यह आयोजन पाल समाज के प्रेरणास्त्रोत, पुरोधा जनों को समर्पित था, जिसमें शिक्षा, सेवा और सामाजिक योगदान के त्रिवेणी संगम की झलक देखने को मिली।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा – “प्रतिभा को सम्मान देना राष्ट्र निर्माण का प्रथम चरण है” – अपने संबोधन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा: “युवा प्रतिभाओं को आगे लाना और उन्हें प्रोत्साहित करना केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नींव है। उत्कृष्टता संयोग से नहीं, साधना और संकल्प से प्राप्त होती है। हम जब प्रतिभाओं को पहचानते हैं और उन्हें मंच देते हैं, तो समाज प्रगति की ओर आगे बढ़ता है।”

लैपटॉप से सम्मानित – 5 होनहार छात्र-छात्राएं

डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा शिक्षा में विशिष्ट प्रदर्शन करने वाले निम्नलिखित 5 विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से लैपटॉप प्रदान कर सम्मानित किया गया:

  1. नंदनी पाल – निवासी: काजीखेड़ा ऐन
  2. विशाल पाल – निवासी: निजामपुर मझिगंवा
  3. अभिषेक पाल – निवासी: गोंदौली
  4. गौरव पाल – निवासी: सकरा
  5. मुस्कान पाल – निवासी: बेहटा

इन विद्यार्थियों ने ना केवल शैक्षिक क्षेत्र में अपने परिश्रम से उच्च अंक प्राप्त किए, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है ।

साइकिल पुरस्कार – 6 छात्र-छात्राओं को मिली नई गति

जिन छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए रोजाना दूरदराज से स्कूल जाना पड़ता है, उनके लिए साइकिल एक जरूरी साधन है। इसे ध्यान में रखते हुए निम्न विद्यार्थियों को साइकिल से सम्मानित किया गया:

  1. प्रिंसी पाल – अमौसी
  2. सिद्धार्थ पाल – बेहटा
  3. अनिता पाल – सहिजनपुर
  4. प्रिया पाल – ईंटगांव
  5. अमर पाल – बेहटा
  6. अश्वनी पाल – ईंटगांव

डॉ. सिंह ने कहा कि यह साइकिलें सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि इन बच्चों की उड़ान को रफ्तार देंगी।

समाजसेवा में विशिष्ट योगदान – 5 प्रबुद्धजन हुए सम्मानित

समाज के निर्माण में शिक्षा के साथ-साथ सेवा और नेतृत्व की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी क्रम में जिन वरिष्ठजनों को डॉ. सिंह द्वारा सम्मानित किया गया, वे हैं:

  1. जगदीश पाल – पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य, निवासी: बेहटा
  2. बुद्धिलाल पाल – वरिष्ठ समाजसेवी, निवासी: अमौसी
  3. रघुनन्दन पाल – सामाजिक कार्यकर्ता, निवासी: खुशहालगंज
  4. मेंहीलाल पाल – शिक्षाविद्, निवासी: गोंदौली
  5. नन्हे लाल एवं पुष्पा पाल – सामाजिक कार्यकर्ता दंपति

इनका जीवन समाज के प्रति समर्पित रहा है और इनका कार्य भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।

नकद प्रोत्साहन – 5 मेधावियों को मिली प्रोत्साहन राशि

आर्थिक सहयोग के रूप में निम्न विद्यार्थियों को नकद प्रोत्साहन प्रदान किया गया:

  1. भूपेंद्र पाल – बंथरा
  2. काजल पाल – अमौसी
  3. सीमा पाल – खुशहालगंज
  4. शिवानी पाल – दोना
  5. नंदनी पाल – विशेश्वर खेड़ा

इन छात्रों की लगन, कठिन परिश्रम और विपरीत परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन को देखकर यह आर्थिक सहयोग दिया गया।

डिजिटल शिक्षा की दिशा में नई पहल – Digital Library की घोषणा

डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस अवसर पर एक और महत्वपूर्ण घोषणा की – गोंदौली स्थित महात्मा बुद्ध विद्यालय में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना के लिए जल्द ही कंप्यूटर और डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा:

“डिजिटल युग में गांव के बच्चे भी तकनीक से जुड़ें, यही हमारी प्राथमिकता है। यह लाइब्रेरी ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।”

सामाजिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता

इस कार्यक्रम में पाल समाज के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:

  • सज्जन पाल – जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय पाल महासभा
  • सुरेन्द्र पाल – व्यापार मंडल अध्यक्ष, काकोरी
  • मोले पाल – ग्राम प्रधान, ईंटगांव
  • रवि पाल – पूर्व ग्राम प्रधान, सहिजनपुर
  • पारस पाल – BDC, दोना
  • राम नरेश पाल, कमलेश पाल, राज कुमार पाल, आशीष पाल, राम लखन पाल, खुशीलाल पाल, विशाल पाल, मुनेश्वर पाल, हरीश पाल सहित समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए।

डॉ. राजेश्वर सिंह की यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में प्रतिभा को पहचान और सम्मान देने की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। सरोजनीनगर जैसे क्षेत्र में जहां प्रतिभाएं हैं, वहां प्रोत्साहन और सहयोग की आवश्यकता होती है, और डॉ. सिंह यह जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं।

125वीं जयंती पर सरोजनीनगर में विशेष श्रद्धांजलि सभा: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने राष्ट्रवादी संबोधन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बताया ‘राष्ट्र प्रथम’ विचारधारा का प्रेरणास्रोत– “अगर डॉ. मुखर्जी की दूरदृष्टि न होती तो बंगाल और कश्मीर की तस्वीर अलग होती”

125वीं जयंती पर सरोजनीनगर में विशेष श्रद्धांजलि सभा: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने राष्ट्रवादी संबोधन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बताया 'राष्ट्र प्रथम' विचारधारा का प्रेरणास्रोत– “अगर डॉ. मुखर्जी की दूरदृष्टि न होती तो बंगाल और कश्मीर की तस्वीर अलग होती”
125वीं जयंती पर सरोजनीनगर में विशेष श्रद्धांजलि सभा: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने राष्ट्रवादी संबोधन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बताया 'राष्ट्र प्रथम' विचारधारा का प्रेरणास्रोत– “अगर डॉ. मुखर्जी की दूरदृष्टि न होती तो बंगाल और कश्मीर की तस्वीर अलग होती”
125वीं जयंती पर सरोजनीनगर में विशेष श्रद्धांजलि सभा: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने राष्ट्रवादी संबोधन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बताया 'राष्ट्र प्रथम' विचारधारा का प्रेरणास्रोत– “अगर डॉ. मुखर्जी की दूरदृष्टि न होती तो बंगाल और कश्मीर की तस्वीर अलग होती”
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें ‘राष्ट्र प्रथम’ विचारधारा का प्रतीक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
  • उन्होंने कहा कि अगर डॉ. मुखर्जी की दूरदृष्टि न होती, तो पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा नहीं होता।
  • धारा 370 के खिलाफ डॉ. मुखर्जी का संघर्ष आज कश्मीर में शांति और अखंडता के रूप में सिद्ध हो रहा है।
  • डॉ. सिंह ने मोदी-योगी सरकार के राष्ट्रवादी फैसलों को मुखर्जी जी की विचारधारा की सच्ची प्रेरणा बताया।
  • कार्यक्रम के अंत में वृक्षारोपण कर पर्यावरण-संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

लखनऊ, 7 जुलाई 2025 | True News Up ब्यूरो : भारत के महान राष्ट्रनायक, शिक्षाविद, स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर लखनऊ के बक्शी का तालाब स्थित श्रीपति लॉन में एक भावनात्मक एवं वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित होकर डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके जीवन, संघर्ष, विचारधारा एवं राष्ट्रहित में किए गए योगदानों को विस्तार से स्मरण किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य: डॉ. मुखर्जी के विचारों को जनमानस तक पहुँचाना

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य भारत के युवा वर्ग और समाज के प्रत्येक वर्ग को यह बताना था कि भारत की आज़ादी के बाद राष्ट्र के निर्माण की बुनियाद किन सिद्धांतों पर रखी गई और उन सिद्धांतों के लिए किसने अपने प्राणों की आहुति दी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती न केवल एक स्मृति दिवस थी, बल्कि एक वैचारिक पुनर्जागरण का माध्यम भी बनी।

‘राष्ट्र प्रथम’ ही भाजपा की आत्मा: डॉ. सिंह का उद्घोष

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा:

“डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की ‘राष्ट्र प्रथम’ की जो विचारधारा थी, वही आज भारतीय जनता पार्टी की आत्मा है। भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता इस राष्ट्रनिष्ठ सोच का संवाहक है। यह विचारधारा ही भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनने की ताकत देती है।”

डॉ. सिंह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपने जीवन में कभी सत्ता की लालसा नहीं रखी, बल्कि उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए ऐसे कई निर्णय लिए जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन गए।

डॉ. मुखर्जी का शिक्षा क्षेत्र में अपूर्व योगदान

डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि मात्र 33 वर्ष की आयु में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नवीन प्रयोगों की शुरुआत की, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद को पाठ्यक्रमों में स्थान दिलाया और शिक्षा को देश की प्रगति से जोड़ने का कार्य किया।

बंगाल को पाकिस्तान में जाने से रोका – राष्ट्रनायक की भूमिका

डॉ. सिंह ने ऐतिहासिक तथ्यों के साथ कहा कि डॉ. मुखर्जी ने विभाजन के समय मुस्लिम लीग की साम्प्रदायिक राजनीति का डटकर विरोध किया। उन्होंने बंगाल को पाकिस्तान में जाने से बचाने के लिए कठोर संघर्ष किया और हिंदू समाज की अस्मिता की रक्षा की।

“आज अगर पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा है, तो यह डॉ. मुखर्जी की निर्णायक भूमिका और राष्ट्रनिष्ठ दृष्टिकोण का प्रतिफल है। अगर वे उस समय निर्णायक नहीं होते, तो बंगाल की स्थिति पाकिस्तान जैसी हो सकती थी।”

राष्ट्रहित के लिए मंत्री पद से इस्तीफा

डॉ. राजेश्वर सिंह ने डॉ. मुखर्जी की सिद्धांतवादी राजनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वह देश के औद्योगिक मंत्री थे, तब उन्होंने चितरंजन रेल कारखाना, सिंदरी फर्टिलाइज़र फैक्ट्री, HAL जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रमों की नींव रखी। लेकिन जब उन्होंने देखा कि लियाकत-नेहरू समझौते में राष्ट्रहित की अनदेखी हो रही है, तो उन्होंने बिना हिचक मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

“डॉ. मुखर्जी के लिए पद नहीं, राष्ट्रहित सर्वोपरि था। उन्होंने सत्ता की परवाह नहीं की, राष्ट्र की आत्मा की रक्षा को प्राथमिकता दी।”

कश्मीर और धारा 370: डॉ. मुखर्जी की दृष्टि और बलिदान

डॉ. सिंह ने डॉ. मुखर्जी के बलिदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कश्मीर के लिए परमिट व्यवस्था और विशेष दर्जे (धारा 370) का कड़ा विरोध किया और “एक देश, एक प्रधान, एक निशान, एक विधान” का नारा दिया। वे बिना परमिट कश्मीर गए और गिरफ्तार होकर जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में बलिदान दे दिया।

“आज जब धारा 370 समाप्त हो चुकी है और कश्मीर भारत के साथ पूरी तरह से एकीकृत हो चुका है, तो यह डॉ. मुखर्जी के उस विचार और बलिदान की जीत है। अगर उनकी चेतावनी को पहले ही समझ लिया गया होता, तो कश्मीर 75 वर्षों तक आतंकवाद और अलगाववाद की चपेट में न आता।”

CAA, UCC और हिंदू समाज की सुरक्षा

डॉ. सिंह ने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की जनसंख्या क्रमश: 15% से घटकर 1.5% और 24% से घटकर 7.5% रह गई है। वहीं, भारत में कुछ राज्य आज भी सांप्रदायिक राजनीति की प्रयोगशाला बने हुए हैं।

“डॉ. मुखर्जी ने जिस संकट की कल्पना की थी, वह आज सच हो चुकी है। इसीलिए आज CAA और UCC जैसे निर्णय जरूरी हैं ताकि भारत में हर नागरिक को समानता, सुरक्षा और सम्मान मिल सके। यह राष्ट्रीय अखंडता की भावना को मजबूत करने का माध्यम है।”

योगी सरकार के कानून-व्यवस्था मॉडल की प्रशंसा

डॉ. सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की जीरो टॉलरेंस नीति की सराहना करते हुए कहा:

  • 70,000+ अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट
  • 1000 से अधिक अपराधियों पर NSA
  • 250 से अधिक अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए
  • हजारों करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त
  • 8.5 लाख युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी

“आज यूपी में हर वर्ग, हर क्षेत्र, हर जाति को बिना भेदभाव न्याय और अवसर मिल रहे हैं। यही नया उत्तर प्रदेश है।”

वृक्षारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम के अंत में डॉ. राजेश्वर सिंह ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण सुरक्षा का संदेश भी दिया और कहा कि विकास और प्रकृति का संतुलन राष्ट्रनिर्माण का मूल आधार है।

उपस्थित प्रमुख जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता

इस संगोष्ठी में कई गणमान्य भाजपा नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:
मंडल अध्यक्ष संदीप यादव, जिलाध्यक्ष महिला मोर्चा अंजू रस्तोगी, SC मोर्चा जिलाध्यक्ष कामता प्रसाद, पूर्व जिला मंत्री देवेन्द्र प्रताप सिंह, पूर्व जिला उपाध्यक्ष के.के. अवस्थी, जिला उपाध्यक्ष रवि प्रकाश तिवारी, पूर्व मंडल अध्यक्ष बनवारी सिंह, संजेश सिंह, विवेक सिंह, बाबा प्रदीप यादव, कौशल सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

डॉ. राजेश्वर सिंह का समापन संदेश:

“125वीं जयंती पर हमें संकल्प लेना होगा कि हम ‘राष्ट्र प्रथम’ की विचारधारा को न केवल अपनाएं, बल्कि उसे आगे की पीढ़ियों तक पहुँचाएं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान केवल इतिहास नहीं, वह एक चेतावनी और एक पथदर्शक है। उनकी सोच, आज के भारत की आत्मा है।”

“आपका विधायक – आपके द्वार” का 126वां जनसुनवाई शिविर: पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की उपस्थिति में डॉ. राजेश्वर सिंह का जनसंवाद अभियान बना लोकतंत्र का उदाहरण– मेधावी विद्यार्थियों को सम्मान, आयुष्मान कार्ड की सुविधा और ‘ताराशक्ति रसोई’ के जरिए समग्र जनकल्याण का संदेश

“आपका विधायक – आपके द्वार” का 126वां जनसुनवाई शिविर: पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की उपस्थिति में डॉ. राजेश्वर सिंह का जनसंवाद अभियान बना लोकतंत्र का उदाहरण– मेधावी विद्यार्थियों को सम्मान, आयुष्मान कार्ड की सुविधा और 'ताराशक्ति रसोई' के जरिए समग्र जनकल्याण का संदेश
“आपका विधायक – आपके द्वार” का 126वां जनसुनवाई शिविर: पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की उपस्थिति में डॉ. राजेश्वर सिंह का जनसंवाद अभियान बना लोकतंत्र का उदाहरण– मेधावी विद्यार्थियों को सम्मान, आयुष्मान कार्ड की सुविधा और 'ताराशक्ति रसोई' के जरिए समग्र जनकल्याण का संदेश
“आपका विधायक – आपके द्वार” का 126वां जनसुनवाई शिविर: पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की उपस्थिति में डॉ. राजेश्वर सिंह का जनसंवाद अभियान बना लोकतंत्र का उदाहरण– मेधावी विद्यार्थियों को सम्मान, आयुष्मान कार्ड की सुविधा और 'ताराशक्ति रसोई' के जरिए समग्र जनकल्याण का संदेश
  • पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की उपस्थिति ने जनसंवाद शिविर को मिला नई ऊर्जा और मार्गदर्शन।
  • शिविर में दर्ज हुईं 28 जनसमस्याएं, एक आयुष्मान कार्ड मौके पर ही किया गया जारी।
  • ‘गांव की शान’ अभियान के तहत 4 मेधावी विद्यार्थियों को साइकिल, घड़ी और प्रशस्तिपत्र से किया गया सम्मानित।
  • ‘ताराशक्ति नि:शुल्क रसोई’ के माध्यम से उपस्थित लोगों को मिला पौष्टिक एवं गर्म भोजन।
  • लगातार 126 सप्ताह से जन संवाद शिविर चला रहे डॉ. राजेश्वर सिंह ने फिर दिखाया जनता से जुड़ाव और सेवा का संकल्प।

लखनऊ, 6 जुलाई 2025 | True News Up ब्यूरो : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में जनसेवा और संवाद की मिसाल बन चुका “आपका विधायक – आपके द्वार” शिविर इस रविवार 126वें सप्ताह में प्रवेश कर गया। जनप्रतिनिधि और जनसंपर्क के बीच सेतु का कार्य कर रहे इस शिविर को इस बार और विशेष बना दिया आदरणीय पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की गरिमामयी उपस्थिति ने, जिन्होंने विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के इस जनसमर्पित अभियान को न केवल सराहा, बल्कि उसे लोकतांत्रिक सहभागिता का आदर्श मॉडल भी बताया।

खुशहालगंज मंडल कार्यालय बना संवाद का केंद्र

126वें सप्ताह का जनसुनवाई शिविर खुशहालगंज मंडल अध्यक्ष शिव बक्श सिंह के संयोजन में उनके कार्यालय परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्रीय नागरिकों की भारी उपस्थिति यह प्रमाणित कर रही थी कि डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा प्रारंभ किया गया यह मंच केवल जनसुनवाई तक सीमित नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और सेवा भाव का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

कौशल किशोर का मार्गदर्शन, जन संवाद को मिला बल

कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की उपस्थिति ने आयोजन को एक नई ऊंचाई दी। उन्होंने डॉ. राजेश्वर सिंह की निरंतर 126 सप्ताह से जारी जनसुनवाई श्रृंखला, समस्याओं के प्रति उनकी गंभीरता और छात्रों की प्रतिभा को सम्मान देने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा:

“यह केवल शिविर नहीं, यह लोकतंत्र की आत्मा का उत्सव है। जब जनप्रतिनिधि खुद जनता के बीच आकर उनकी बात सुनते हैं, समाधान करते हैं, और प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करते हैं, तब जनता का भरोसा मजबूत होता है और लोकतंत्र सशक्त बनता है।”

28 जन समस्याएं दर्ज, एक आयुष्मान कार्ड जारी

शिविर में कुल 28 नागरिकों की समस्याओं को विधिवत पंजीकृत किया गया, जिनमें मुख्यतः सड़क, पेंशन, शौचालय निर्माण, स्वास्थ्य सेवाएं, आयुष्मान योजना से संबंधित मुद्दे शामिल थे। इनमें से कई समस्याओं का मौके पर ही समाधान प्रारंभ कर दिया गया। साथ ही एक आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड को मौके पर जारी किया गया, जिससे जरूरतमंद को स्वास्थ्य सुरक्षा की सुविधा सुनिश्चित हो सके।

‘गांव की शान’ अभियान में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया

शिविर के दौरान ‘गांव की शान’ अभियान के अंतर्गत शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 4 होनहार विद्यार्थियों को मंच पर सम्मानित किया गया:

  • इंटरमीडिएट वर्ग से:
    • मुदित दीक्षित (61%)
    • धर्मवीर (71%)
  • हाईस्कूल वर्ग से:
    • अंजली रावत (66%)
    • अनुभव पटेल (77%)

इन विद्यार्थियों को साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनकी प्रतिभा और परिश्रम को प्रोत्साहित किया गया।

‘ताराशक्ति नि:शुल्क रसोई’ – सेवा की संवेदनशील मिसाल

शिविर उपरांत उपस्थित नागरिकों के लिए ‘ताराशक्ति नि:शुल्क रसोई’ की ओर से सभी को गर्म, स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया। यह व्यवस्था न केवल सामाजिक सेवा का प्रतिबिंब थी, बल्कि यह भी दर्शाती है कि विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का यह अभियान केवल समस्या समाधान तक सीमित नहीं, बल्कि हर वर्ग के कल्याण और सम्मान की भावना से प्रेरित है।

समाजसेवियों और कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति

शिविर में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। प्रमुख उपस्थिति में शामिल रहे:
मंडल अध्यक्ष शिव बक्श सिंह, पूर्व जिला महामंत्री राजेन्द्र सिंह, तेज नारायण दीक्षित, नवीन तिवारी, दिनेश गुप्ता, दल बहादुर सिंह, दुर्गेश सिंह, प्रभात पुष्कर, रमेश कुमार, राम दयाल मौर्या, जगदीश प्रसाद साहू, राजेश पटेल, शिव कुमार सिंह, सरवन साहू समेत अनेक गणमान्य जन।

जनसेवा के 126 सप्ताह: विश्वास, संकल्प और सहभागिता की प्रेरणा

डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा लगातार आयोजित किए जा रहे “आपका विधायक – आपके द्वार” जन संवाद शिविर ने आज जनभागीदारी और लोकतंत्र को एक नई पहचान दी है। यह केवल सुनने का नहीं, बल्कि समझने, समाधान देने और सशक्त करने का मंच है। हर सप्ताह का शिविर एक नयी प्रेरणा, नया विश्वास और जनसेवा का नया अध्याय जोड़ता जा रहा है।

Travel Tips:जुलाई में इन जगहों का ट्रिप प्लान करने से बचें, परिवार के साथ घूमने के लिए नहीं हैं सुरक्षित

जुलाई के महीने में देश के हर हिस्से में मानसून आ जाता है। इस महीने में आए दिन बारिश होने की संभावना रहती है। वहीं जुलाई हरियाली और ठंडी हवाओं से भरा होता है। जहां कुछ जगहें इस मौसम में जन्नत जैसी लगती हैं और कुछ जगहों पर जाना खतरनाक साबित हो सकता है। अगर आप भी मानसून में यात्रा कर रहे हैं, तो पहले मौसम विभाग की एडवाइजरी जरूर चेक करना चाहिए। भारी बारिश वाले राज्यों में रोड ट्रिप से बचना चाहिए। साथ ही बीमा और बुकिंग कैंसिलेशन पॉलिसी की जांच कर लेना चाहिए। वहीं मानसून में ऐसी जगहों पर जाना चाहिए, जहां ड्रेनेज और परिवहन सुविधाएं बेहतर हो सकें। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि मानसून में किन जगहों पर जाने से बचना चाहिए।

ट्रेकिंग वाले रास्ते

बारिश के मौसम में भूस्खलन और ट्रेल्स फिसलन भरे हो सकते हैं। बारिश में पहाड़ी क्षेत्रों खासकर ट्रेकिंग रूट्स पर जाना खतरनाक हो सकता है। क्योंकि यहां पर पहाड़ टूटकर गिरने और रास्ते बंद होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस वजह से मानसून में उत्तराखंड में ट्रेकिंग बंद रहती है। वहीं अचानक मौसम बदलने से जान को खतरा हो सकता है। अगर रोमांचक ट्रिप के लिए उत्तराखंड जा रहे हैं, तो आपको जुलाई-अगस्त के महीने में ग्लेशियर, पिंडारी, रूपकुंड और केदारकांता जैसी जगहों पर भूल से न जाएं। यह वो ट्रेकिंग रूट्स हैं, जिनको बारिश में बंद कर दिया जाता है।

लेह लद्दाख

जून के महीने में लद्दाख बेस्ट डेस्टिनेशन होता है, लेकिन जुलाई में बारिश की वजह से रोहतांग और जोजिला पास में मिट्टी धंसने की घटनाएं होती हैं। वहीं ज्यादा बारिश होने पर सड़कें भी बंद हो जाती हैं। ऐसे में अगर आप सड़क के जरिए लेह जा रहे हैं, तो आपको इस योजना से बचना चाहिए। रास्ते बंद होने की वजह से वापसी करनी पड़ सकती है। वहीं आपका पैसा और समय भी व्यर्थ हो जाएगा।

पश्चिम बंगाल का सुंदरवन

पश्चिम बंगाल में स्थित सुंदरबन पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है। लेकिन मानसून में यहां पर दलदली इलाकों में कीचड़, मच्छरों की भरमार और पानी भराव होती है। बोट सफारी भी प्रभावित हो सकती है। वहीं बारिश में सुंदरवन में नदियों का जल स्तर काफी बढ़ जाता है। वहीं कीटों व मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है और जल भराव की स्थिति आ जाती है। जिस वजह से लोग बाहर नहीं निकल पाते हैं और जंगलों में प्रवेश में समस्याएं होने लगती हैं। इसलिए बारिश के मौसम में जंगल सफारी और बोट राइडिंग से बचना चाहिए।

झारखंड और छत्तीसगढ़

मानसून में जलप्रपात की धारा काफी तेज हो जाती है। पानी का लेवल भी बढ़ जाता है। लेकिन कुछ स्थानों पर स्थिति काफी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। वहीं छत्तीसगढ़ और झारखंड के जलप्रपात क्षेत्र मानसून में काफी ज्यादा प्रभावित होते हैं। बारिश के मौसम में बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। वहीं झरनों के आसपास फिसलन और सुरक्षा की कमी होती है। मानसून में हुंडरु, राजरप्पा और चित्रकूट वॉटरफॉल्स के सफर पर नहीं जाना चाहिए।

गोवा

वॉटर एडवेंचर के लिए लोग गोवा ट्रिप का प्लान बनाते हैं। जुलाई के महीने में यहां पर भारी बारिश होती है। वहीं बीच पर तैराकी और वॉटर स्पोर्ट्स पर बैन लगा होता है। इस दौरान कई क्लब और शैक भी बंद रहते हैं। वहीं जुलाई में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर भी समुद्री तूफानों और भारी बारिश की वजह से फेरी सेवाएं रद्द हो सकती हैं। बीच और डाइविंग जैसी एक्टिवटी ठप्प पड़ जाती हैं। इसलिए मानसून में समुद्री टूर की योजना नहीं बनाना चाहिए।

Drinking Alcohol in Empty Stomach:खाली पेट शराब पीने से क्यों चढ़ता है ज्यादा नशा? ये बात नहीं जानते होंगे आप

 शाम की पार्टी हो या वीकेंड की छुट्टियां, शराब पीना आजकल कई लोगों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है. लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब आप खाली पेट शराब पीते हैं, तो उसका नशा ज्यादा तेज़ और जल्दी चढ़ता है? कुछ लोग इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, लेकिन इसके पीछे छिपा है शरीर का एक साइंटिफिक खेल, जिसे आम लोग नहीं जानते. कई बार खाली पेट शराब पीने से उल्टी, चक्कर, या बेहोशी जैसी हालत भी बन जाते हैं.

खाली पेट शराब पीने से क्यों चढ़ता है ज्यादा नशा?

डॉक्टरों के अनुसार, जब आप खाली पेट शराब पीते हैं, तो वह तेजी से पेट से छोटी आंत में पहुंचती है. छोटी आंत वह जगह है जहां से अल्कोहल तेजी से रक्त प्रवाह में प्रवेश करती है. जबकि अगर आपने खाना खाया होता, तो वह अल्कोहल के अवशोषण की प्रक्रिया को धीमा कर देता और नशा धीरे-धीरे चढ़ता.

खाली पेट शराब पीने के दुष्परिणाम

निर्णय क्षमता में कमी

निर्णय लेने की शक्ति कमजोर हो जाती है, जिससे दुर्घटना या झगड़े की आशंका बढ़ जाती है.

पेट की परत को नुकसान

शराब पेट की परत को प्रभावित करती है, जिससे गैस, एसिडिटी, जलन और अल्सर तक की समस्या हो सकती है.

ब्लड शुगर लेवल गिरना

खाली पेट शराब पीने से ब्लड शुगर तेजी से गिर सकता है, जिससे कमजोरी, चक्कर और बेहोशी हो सकती है.

लिवर पर प्रभाव

लिवर को अल्कोहल डिटॉक्स करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे लंबे समय में लिवर डैमेज की संभावना होती है.

डॉक्टरों की सलाह

शराब पीने से पहले कुछ खाएं

नट्स, ब्रेड, सलाद या हल्का खाना पेट में अल्कोहल के असर को कम करता है.

शराब के साथ-साथ पानी पीते रहें, ताकि डिहाइड्रेशन और हैंगओवर से बचा जा सके.

अगर आप शराब पीते हैं, तो यह समझना जरूरी है कि खाली पेट इसे लेना आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है. नशा जल्दी चढ़ता है और शरीर को अधिक नुकसान पहुंचता है. डॉक्टरों की सलाह के अनुसार, भोजन के बाद सीमित मात्रा में और सावधानी से पीना ही समझदारी है. क्योंकि समझदारी से लिया गया हर कदम, भविष्य में बड़ी परेशानी से बचा सकता है.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.