पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को जंग का डर सता रहा है। भारत सरकार और सेना ने आतंक के आका पाकिस्तान पर बड़ी कार्रवाई के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। पहलगाम आतंकी हमले के मुद्दे पर पूरी दुनिया ने भारत के साथ अपना समर्थन जताया है। वहीं, भारत को मिल रहे व्यापक समर्थन से पाकिस्तान घबरा गया है। पाकिस्तान ने दवाब में आकर एक नया पैंतरा चला है। पाकिस्तान ने पहलगाम आतंकी हमले की जांच में रूस और चीन को शामिल करने की इच्छा जताई है।
दरअसल, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ रूस की RIA नोवोस्ती समाचार एजेंसी को इंटरव्यू दे रहे थे। इस दौरान आसिफ ने कहा कि रूस या चीन या यहां तक कि पश्चिमी देश इस संकट में बहुत ही सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं और वे एक जांच दल भी गठित कर सकते हैं। एक अंतरराष्ट्रीय दल इस बात का पता लगाए। बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी पहलगाम आतंकी हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच कराने का प्रस्ताव रखा था।
पाकिस्तान ने की सबूत की मांग
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय दल को ये पता लगाने दिया जाना चाहिए कि कश्मीर में हुई घटना का दोषी कौन है और इसे कौन अंजाम दे रहा है। ख्वाजा आसिफ ने आतंकी हमले में पाकिस्तान के खिलाफ लगे आरोपों पर सबूत की भी डिमांड की है। आसिफ ने कहा कि कुछ सबूत तो होने ही चाहिए कि पाकिस्तान इसमें शामिल है या इन लोगों को पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त था? ये सिर्फ बयान हैं और कुछ नहीं।
पहलगाम में 26 लोगों की हुई थी मौत
बीते मंगलवार को पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन में पर्यटकों को उनका धर्म पूछकर चुन-चुन कर मार दिया था। इस आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सार्वजनिक सभा में ऐलान किया था कि पहलगाम हमले के अपराधियों और षड्यंत्रकारियों को ऐसी सजा मिलेगी जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 26 लोगों की नृशंस हत्या के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जल्द ही सैन्य टकराव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे समय में इस तनाव के बीच अब चीन का रिएक्शन भी सामने आ गया है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से बातचीत की है। आइए जानते हैं कि इस पूरे मुद्दे पर चीन ने क्या कहा है।
चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि चीन के विदश मंत्री वांग यी ने अपने समकक्ष इशाक डार से फोन पर बातचीत के दौरान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निष्पक्ष जांच का समर्थन करने की बात कही है। चीन ने उम्मीद जताई है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश संयम बरतेंगे और एक दूसरे के साथ मिलकर तनाव कम करने के लिए काम करेंगे।
पाकिस्तान ने चीन को दिया ताजा अपडेट
पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने चीन के विदेश मंत्री को आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बारे में ताजा घटनाक्रमों से अवगत कराया है। बता दें कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार पर के खिलाफ कई कदम उठाए हैं, जिनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना और सभी पाकिस्तानी वीजा पर प्रतिबंध लगाना आदि शामिल हैं। वीजा प्रतिबंधित होने के बाद बीते 3 दिनों में 537 पाकिस्तानी नागरिक अटारी सीमा के माध्यम से अपने देश लौट गए हैं।
लखनऊ में निजी स्कूलों की बेलगाम मनमानी: सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS) ने फिर तोड़े सरकारी नियम, अप्रैल में ही अभिभावकों को थमा दिया जुलाई 2025 का फीस बिल
सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS) ने अप्रैल 2025 में ही जुलाई 2025 तक की फीस का बिल भेजा।
सरकार के उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अधिनियम, 2018 के स्पष्ट प्रावधानों का उल्लंघन।
नियमों के अनुसार बिना पूर्व अनुमति और अभिभावकों की सहमति के अतिरिक्त या समयपूर्व शुल्क वसूली नहीं की जा सकती।
अभिभावकों पर अचानक वित्तीय दबाव, मध्यम वर्गीय परिवार सबसे अधिक प्रभावित।
शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन लगातार शिकायतों के बावजूद निष्क्रिय।
स्कूल कार्यक्रमों में बड़े राजनेताओं व अधिकारियों को बुलाकर बनाया जाता है प्रभाव, लेकिन लगातार बढ़ती फीस पर किसी की नजर नहीं।
लखनऊ, 27 अप्रैल 2025: शिक्षा का क्षेत्र, जो समाज निर्माण का आधार माना जाता है, आज बड़े शहरों में मुनाफाखोरी और मनमानी का पर्याय बनता जा रहा है। लखनऊ, जो शिक्षा के क्षेत्र में पूरे देश में अपनी पहचान रखता है, वहीं अब निजी स्कूलों द्वारा खुलेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। ताज़ा मामला प्रतिष्ठित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS) का है, जिसने एक बार फिर शिक्षा विभाग के निर्देशों और राज्य सरकार के आदेशों की अनदेखी करते हुए अप्रैल 2025 में ही छात्रों के अभिभावकों को जुलाई 2025 तक की फीस का बिल भेज दिया है।
शिक्षा के नाम पर व्यापार: अभिभावकों की मजबूरी और स्कूलों की मनमानी
लखनऊ के अनेक निजी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर कमाई का खेल अब नया नहीं रह गया है। लेकिन CMS जैसे बड़े और प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा बार-बार नियमों की अवहेलना करना यह दर्शाता है कि स्कूल प्रशासन खुद को सरकारी तंत्र से ऊपर मान बैठा है। सरकारी आदेशों के बावजूद समय से पहले फीस वसूली, पारदर्शिता के अभाव, और आर्थिक दबाव के चलते मध्यमवर्गीय परिवार परेशान हैं। अभिभावकों के अनुसार, स्कूलों द्वारा जबरन वसूली अब उनकी सहनशक्ति की सीमा पार कर चुकी है।
कानूनी प्रावधानों का खुला उल्लंघन
उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अधिनियम, 2018 के अनुसार, कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों की पूर्व सहमति और उचित सूचना के बिना न तो फीस बढ़ा सकता है, न ही समय से पहले फीस वसूल सकता है।
कानून के तहत, फीस में किसी भी प्रकार का संशोधन करने से पहले स्कूल प्रबंधन को एक स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी होती है, जिसमें स्कूलों को फीस संरचना सार्वजनिक करनी होती है।
इसके अलावा, शिक्षा विभाग ने समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि एक साथ कई महीनों की अग्रिम फीस वसूलना पूर्णतः प्रतिबंधित है।
बावजूद इसके, CMS जैसे संस्थान ने अप्रैल में ही छात्रों के अभिभावकों से जुलाई तक की फीस की मांग कर दी।
CMS की पुरानी परंपरा: नियमों की अनदेखी
यह पहला मौका नहीं है जब CMS पर इस तरह के आरोप लगे हों। हर साल समय से पहले फीस वसूली, कार्यक्रमों के नाम पर अतिरिक्त शुल्क, किताबों और ड्रेस के नाम पर महंगे सामान की अनिवार्यता जैसी शिकायतें लगातार उठती रही हैं। लेकिन शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की निष्क्रियता के चलते ऐसे संस्थानों का दुस्साहस दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। CMS जैसे स्कूल अपने विशाल नेटवर्क और रसूख का लाभ उठाकर कानून को धता बताते रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी और नेताओं की अनदेखी
निजी स्कूलों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री से लेकर बड़े-बड़े राजनेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति देखी जाती है।
यह उपस्थिति स्कूलों को सामाजिक प्रतिष्ठा तो देती है, लेकिन अभिभावकों की समस्याओं और बढ़ती फीस पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
“नेताओं का आना तो केवल एक औपचारिकता रह गई है, अभिभावकों की दर्दभरी आवाज कोई नहीं सुनता,” एक अभिभावक ने नाराजगी जताते हुए कहा।
शिक्षा विभाग तक शिकायतें पहुंचती हैं, पत्राचार होता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर फाइलों में धूल जमती रहती है।
अभिभावकों की पीड़ा: मध्यम वर्ग पर दोहरी मार
मध्यम वर्गीय परिवार पहले से ही महंगाई, स्वास्थ्य खर्च, और अन्य जीवन-यापन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं।
ऐसे में अगर चार महीने पहले ही जुलाई की फीस मांगी जाए, तो यह उनके लिए असहनीय आर्थिक बोझ बन जाता है।
“बच्चे को पढ़ाना एक सपना था, अब यह सपना हमारे लिए कर्ज में डूबने की वजह बनता जा रहा है,” एक महिला अभिभावक ने रोते हुए बताया।
समय से पहले फीस वसूली के कारण कई परिवारों को ऋण लेना पड़ता है या अपनी जरूरतों में कटौती करनी पड़ती है।
सरकारी घोषणाएं बनाम जमीनी हकीकत
योगी सरकार ने कई मंचों से बार-बार यह दोहराया है कि निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती से रोक लगेगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही को शिक्षा क्षेत्र में सर्वोपरि बनाए जाने की नीति घोषित की गई है।
लेकिन ज़मीनी स्तर पर न तो फीस वसूली के नियमों का पालन हो रहा है और न ही दोषी स्कूलों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई दे रही है।
इसके चलते अभिभावकों के बीच सरकार की नीयत और उसके प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
अभिभावकों की प्रमुख माँगें:
निजी स्कूलों द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही फीस और समय से पहले फीस वसूली पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
CMS समेत सभी निजी स्कूलों के वित्तीय लेनदेन और फीस वसूली प्रक्रियाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
दोषी स्कूलों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिसमें लाइसेंस रद्द करने तक के प्रावधान शामिल हों।
शिक्षा विभाग के अंतर्गत एक पारदर्शी और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र का गठन किया जाए, जिसमें 30 दिन के भीतर समाधान अनिवार्य हो।
शिक्षा को मुनाफे का माध्यम नहीं, समाज सेवा का क्षेत्र बनाने के लिए ठोस और दीर्घकालिक नीतियाँ लागू की जाएं।
आगे क्या?
यदि समय रहते शिक्षा विभाग और प्रशासन ने निजी स्कूलों की बेलगाम वसूली और मनमानी पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया, तो लखनऊ के हजारों अभिभावक मिलकर सड़कों पर उतर सकते हैं। यह मामला धीरे-धीरे एक बड़े जन आंदोलन का रूप भी ले सकता है, जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया जाएगा। लखनऊ, जो देशभर में शिक्षा के लिए एक आदर्श के रूप में देखा जाता था, वहां की गिरती स्थिति देश भर के लिए एक चेतावनी बन सकती है। शिक्षा, जो किसी भी सभ्य समाज की नींव होती है, यदि व्यापार और मुनाफाखोरी की भेंट चढ़ेगी, तो समाज का पतन निश्चित है। लखनऊ जैसे शिक्षा के केंद्र में CMS जैसे बड़े संस्थान द्वारा लगातार नियमों की अवहेलना चिंताजनक है। सरकार, शिक्षा विभाग और समाज — सभी को मिलकर इस स्थिति को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, वरना आने वाला समय शिक्षा के क्षेत्र में एक गहरी गिरावट का गवाह बन सकता है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने ऐतिहासिक आंकड़ों के साथ प्रस्तुत की योगी सरकार में उत्तर प्रदेश की प्रगति की अद्वितीय गाथा
25 करोड़ प्रदेशवासियों की प्रगति, समृद्धि एवं खुशहाली को समर्पित है योगी सरकार – डॉ. राजेश्वर सिंह
बीमारू राज्य की छवि से निकलकर उत्तर प्रदेश नए भारत के निर्माण और आर्थिक महाशक्ति बनने में निभा रहा अग्रणी भूमिका : डॉ. राजेश्वर सिंह
डॉ. राजेश्वर सिंह ने आंकड़ों के साथ गिनाई योगी सरकार की उपलब्धियां, कहा- 27 लाख करोड़ की जीडीपी ग्रोथ वाला राज्य है उत्तर प्रदेश
8 वर्षों में ₹12.75 लाख करोड़ से बढ़कर ₹27.5 लाख करोड़ पहुंची प्रदेश की अर्थव्यवस्था : डॉ. राजेश्वर सिंह
*प्रति व्यक्ति आय बढ़कर ₹1,24,000 तथा विदेशी निवेश बढ़कर हुआ ₹14,808 करोड़, विधायक राजेश्वर ने बताए यूपी के प्रगति के आंकड़े
लखनऊ: हर विषय पर अपनी स्पष्ट, निर्भीक और प्रखर राय रखने वाले सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विकास यात्रा पर अपने विचार व्यक्त किए। एक्स के माध्यम से जारी अपने प्रभावशाली और तथ्यात्मक संदेश में डॉ. सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अद्वितीय, सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज उत्तर प्रदेश नए भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
डॉ सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने एक अविश्वसनीय परिवर्तन की गाथा लिखी है और एक बीमारू राज्य की छवि से निकलकर भारत की आर्थिक महाशक्ति बनने का गौरव प्राप्त किया है। आगे डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रदेश की ऐतिहासिक उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया:
डॉ. राजेश्वर सिंह: उत्तर प्रदेश की प्रगति की गाथा – योगी सरकार की उपलब्धियां डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने एक अविश्वसनीय परिवर्तन की गाथा लिखी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था 2017 में ₹12.75 लाख करोड़ से बढ़कर ₹27.5 लाख करोड़ हो गई है, और प्रति व्यक्ति आय ₹46,000 से बढ़कर ₹1,24,000 हो गई है।
विदेशी निवेश और औद्योगिक विकास डॉ. सिंह ने बताया कि विदेशी निवेश में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है, जो 2000 से 2017 के बीच ₹3,300 करोड़ तक ही था, वो 2017 से 2024 के बीच बढ़कर ₹14,808 करोड़ तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास के संदर्भ में प्रदेश में लगभग 13,000 उद्योग थे, जो अब बढ़कर 26,900 से अधिक हो गए हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और एक्सप्रेसवे क्रांति डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि प्रदेश में 6 एक्सप्रेसवे चालू हैं और 11 का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे के पूरा होने पर उत्तर प्रदेश देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 55% हिस्सा संभालेगा।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और वित्तीय नेतृत्व डॉ. सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में उल्लेखनीय प्रगति की है, और प्रदेश ने 14वें स्थान से छलांग लगाकर अब देश में दूसरा स्थान प्राप्त कर लिया है। उन्होंने कहा कि आरबीआई के अनुसार देश में प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग में उत्तर प्रदेश का 16.2% का अग्रणी योगदान है।
पूंजी बाजार में भी प्रभावी उपस्थिति पूंजी बाजार में भी प्रदेश की मजबूती दर्शाते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की 132 कंपनियाँ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं, जिनकी कुल बाजार पूंजी ₹3.68 लाख करोड़ से अधिक है।
उत्तर प्रदेश की भविष्य की संभावनाएं डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भारत की पहली $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने, वैश्विक विनिर्माण हब के रूप में उभरने और न्यू इंडिया के चमकते चेहरे के रूप में दुनिया में अपनी पहचान स्थापित करने के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह तो केवल शुरुआत है, और प्रदेश अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर दृढ़तापूर्वक अग्रसर है। साथ ही विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सभी नागरिकों से इस परिवर्तन यात्रा में सहभागी बनने और उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए अपने सक्रिय योगदान का आह्वान भी किया।
लखनऊ में दो दिवसीय श्रीराम हनुमत महोत्सव का भव्य शुभारंभ: अशोक मार्ग स्थित बलरामपुर गार्डेन में भक्ति, संस्कृति और श्रद्धा का अद्वितीय संगम
लखनऊ, TrueNewsUP ब्यूरो, 26 अप्रैल 2025: श्रीराम हनुमत महोत्सव के पहले दिन बलरामपुर गार्डन में भक्ति, श्रद्धा और भारतीय संस्कृति का ऐसा अद्वितीय संगम देखने को मिला, जिसने समूचे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
हनुमत सेवा समिति द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव का आरंभ शनिवार को हुआ, जो रविवार तक चलेगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक समर्पण का भी सुंदर उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
श्रीराम हनुमत महोत्सव का पहला दिन भक्ति भूषण अजय याग्निक के सस्वर पाठ से गूंज उठा।
सुंदरकांड के शब्दों ने जैसे ही वातावरण को स्पंदित किया, श्रद्धालुओं के नेत्र बंद हो गए और हृदयों में राम भक्ति का सागर उमड़ पड़ा।
हजारों भक्तों ने एक साथ “जय श्रीराम” और “जय बजरंग बली” का उद्घोष किया, जिससे पूरा बलरामपुर गार्डन गुंजायमान हो उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक मंगलाचरण से हुई, जिसमें वैदिक मंत्रों के उच्चारण ने वातावरण को और भी पवित्र कर दिया।
मनोकामना बैलून प्रार्थना: एक अनूठा प्रयोग
इस बार महोत्सव में एक अभिनव प्रयोग किया गया – “मनोकामना बैलून प्रार्थना”। भक्तों ने अपने हृदय की गुप्त इच्छाओं को छोटे-छोटे रंगीन गुब्बारों में बाँधा और प्रार्थना करते हुए उन्हें आकाश में उड़ाया। आकाश में उड़ते इन रंग-बिरंगे गुब्बारों ने जैसे श्रद्धालुओं की भावनाओं को ईश्वर तक पहुँचाने का माध्यम बनकर एक दिव्य दृश्य उपस्थित कर दिया। यह दृश्य न केवल भक्ति से भरा हुआ था, बल्कि श्रद्धालुओं के आंसुओं और मुस्कान के बीच गहरे विश्वास का अद्भुत प्रमाण भी था।
न्यायमूर्तियों की गरिमामयी उपस्थिति
लखनऊ में दो दिवसीय श्रीराम हनुमत महोत्सव का भव्य शुभारंभ: भक्ति, संस्कृति और श्रद्धा का अद्वितीय संगम
श्रीराम हनुमत महोत्सव के उद्घाटन समारोह में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया और न्यायमूर्ति राजीव कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। उनकी उपस्थिति ने न केवल महोत्सव की गरिमा को बढ़ाया, बल्कि धर्म और न्याय के अटूट संबंध की भी सुंदर झलक प्रस्तुत की। न्यायमूर्तियों ने कार्यक्रम स्थल पर मौजूद सभी श्रद्धालुओं को श्रीराम और हनुमान जी के आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश भी दिया।
हनुमत संग्रहालय: अद्भुत भक्ति संग्रह
कृष्ण कुमार चौरसिया द्वारा निर्मित विश्व प्रसिद्ध हनुमत संग्रहालय महोत्सव का प्रमुख आकर्षण बना। यह संग्रहालय न केवल आकार में विशाल है, बल्कि इसमें संकलित 40,000 से अधिक दुर्लभ चित्र, मूर्तियाँ, सिक्के, डाक टिकट और पांडुलिपियाँ, हनुमान जी के प्रति भक्तिभाव का अनूठा दस्तावेज प्रस्तुत करती हैं।
यह संग्रह लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है। संग्रहालय में दर्शाई गई एक विशालकाय हनुमान प्रतिमा के समक्ष श्रद्धालु नतमस्तक होकर आशीर्वाद ग्रहण करते दिखे।
सजावट और आध्यात्मिक सौंदर्य का अनुपम मेल
महोत्सव स्थल को सच्चे पुष्पों से सुसज्जित राम दरबार, भव्य रंगोली और दीपों से सजाया गया था। उपासना टीम द्वारा बनाई गई जय श्री राम की रंगोली ने जहां एक तरफ भक्तों को राममय कर दिया।
तो वहीं कमल और मयूर थीम वाली रंगोली ने चारों ओर भक्ति और आनंद का वातावरण रच दिया। आठ फीट ऊँची विशाल श्यामल हनुमान प्रतिमा भी श्रद्धालुओं का मुख्य आकर्षण बनी रही, जहाँ भक्त लंबी कतारों में दर्शन के लिए खड़े रहे।
हनुमत कृपा सम्मान: समर्पित विभूतियों का अभिनंदन: पहले दिन के कार्यक्रम में हनुमत कृपा सम्मान समारोह का आयोजन भी हुआ। समाजसेवा, शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक साधना के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विभूतियों को सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में पूर्व न्यायाधीश रंगनाथ पाण्डेय, सीएमएस की संस्थापक डॉ. भारती गांधी, समाजसेविका रजनी सिंह, गौसेविका रंजना अग्निहोत्री, आध्यात्मिक साधिका मोनिका सिन्हा, वरिष्ठ हास्य कवि सर्वेश अस्थाना जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। इन सभी विभूतियों को समिति द्वारा श्रीराम हनुमत पटका, प्रमाणपत्र और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
भजन संध्या: भक्ति रस की अविरल धारा
रात्रि को आयोजित भजन संध्या में भजन गायक विवेकानंद पाण्डेय और किशोर चतुर्वेदी ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। “निर्बल होकर कोई जब उन्हें पुकारा है…” और “सुनिए सुनिए श्री हनुमान…” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते और नाचते रहे। पूरे कार्यक्रम में श्रद्धा, समर्पण और भक्ति का एक महासंगम देखने को मिला। कार्यक्रम का समापन भव्य ज्योति प्रार्थना, आरती और दिव्य हनुमत भंडारे के प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
पीपल पत्र पर ‘जय श्रीराम’ लेखन: श्रद्धा की अनूठी पहल
महोत्सव में श्रद्धालुओं ने पीपल के पत्ते पर चंदन और रोली से “जय श्रीराम” लिखकर हनुमान जी को अर्पित किया। ऐसी मान्यता है कि पीपल के पत्र पर लिखी गई “जय श्रीराम” अर्पित करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है और संकटों का निवारण होता है। यह पहल भक्तों के लिए एक नई भक्ति अनुभूति लेकर आई। truenewsup.com के संस्थापक एवं मुख्य सम्पादक शिवसागर सिंह चौहान ने भी महोत्सव में पहुँचकर पीपल के पत्ते में जय श्री राम लिखकर हनुमान जी को अर्पित किया, साथ ही समस्त भक्तों के साथ प्रसाद ग्रहण किया।
बलरामपुर गार्डेन में रविवार 27 अप्रैल को महोत्सव के विशेष आकर्षण
रविवार को महोत्सव में भक्तों के लिए विशेष कार्यक्रम निर्धारित हैं:
सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ (रजनी सिंह व दल द्वारा)
आनंद त्रिपाठी द्वारा हनुमत चरित्र पर काव्य व प्रवचन
प्रयागराज के जितेन्द्र बजरंगी द्वारा दिव्य नृत्य प्रस्तुति
भजन गायक ओमकार शंकधर की भक्ति संध्या
और अंत में, बनारस की विश्वविख्यात गंगा महाआरती, जिसे देखना अपने आप में एक आध्यात्मिक अनुभव होगा।
श्रीराम हनुमत महोत्सव बना भक्ति, संस्कृति और भारतीय परंपराओं का उत्सव
TrueNewsUP की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, बलरामपुर गार्डन में आयोजित श्रीराम हनुमत महोत्सव ने न केवल लखनऊवासियों को आध्यात्मिक आनंद दिया, बल्कि भारतीय संस्कृति के मूल्यों, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया है।
रविवार का समापन समारोह निश्चित ही भक्तों के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक यात्रा साबित होगा।