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क्या बल्लेबाजों का रहेगा दबदबा या गेंदबाजों का होगा जलवा? जानिए नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच रिपोर्ट

गुजरात टाइटंस और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच IPL 2025 का 64वां मैच खेला जाएगा। ये मुकाबला मुंबई इंडियंस के होमग्राउंड वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा। लखनऊ के लिए इस मैच का कुछ खास महत्त्व नहीं रहेगा, क्योंकि उनकी टीम पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है। वहीं गुजरात की टीम प्लेऑफ में अपनी जगह बना चुकी है और वो इस वक्त 18 अंकों के साथ पॉइंट्स टेबल में पहले नंबर पर हैं और इस मैच को जीतकर नंबर 1 पर बने रहना चाहेंगे। इस बीच हम आपको बताएंगे कि GT vs LSG मुकाबले के दौरान नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच का मिजाज कैसा रहेगा।

GT vs LSG: नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच रिपोर्ट

अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार रहती है। हालांकि यहां कि पिच पर गेंदबाजों को भी हल्की मदद मिलती है। पारी की शुरुआत में गेंदबाजों को थोड़ी मदद मिलती है और जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है वैसे ही स्पिनर्स का रोल काफी अहम हो जाता है। हालांकि, अहमदाबाद में कई तरह की पिचें उपलब्ध हैं, जिनमें काली मिट्टी, लाल मिट्टी और दोनों के मिश्रण वाली शामिल है। इस मैदान पर दूसरी पारी में ओस गिरने की संभावना रहती है और अगर ऐसा होता है तो फिर टॉस की भूमिका काफी अहम हो जाती है। इस वेन्यू पर अब तक दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम को अधिक सफलता मिली है, ऐसे में जो भी कप्तान टॉस जीतेगा वो पहले गेंदबाजी करना चाहेगा।

GT vs LSG: नरेंद्र मोदी स्टेडियम के आईपीएल आंकड़े

अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आईपीएल के अब तक 40 मुकाबले खेले जा चुके हैं। इस मैदान पर पहले बल्‍लेबाजी करने वाली टीमों ने 19 मैचों में जीत दर्ज की है वहीं चेज करने वाली टीमों ने 21 मुकाबले में बाजी मारी है। इतना ही नहीं टॉस जीतने वाली टीमें 18 और हारने वाली टीमें 22 मैच अपने नाम कर चुकी हैं। इस मैदान पर हाइएस्‍ट स्‍कोर 243/5 है, ये स्कोर पंजाब किंग्‍स की टीम ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ बनाया था और लोएस्‍ट स्‍कोर बनाने का रिकॉर्ड गुजरात के नाम है। 2024 में दिल्ली के खिलाफ एक मैच में गुजरात 89 रनों पर ऑलआउट हो गई थी।

कियारा आडवाणी की बिकिनी तस्वीर पर राम गोपाल वर्मा ने किया आपत्तिजनक कमेंट, बिगड़ी जुबान

फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा हमेशा की चर्चा में बने रहते हैं। राम गोपाल का विवादों से पुराना नाता रहा है। सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहने वाले राम गोपाल वर्मा बड़ी बेबाकी से अपनी राय लोगों के बीच रखते हैं। कई बार उनकी बातें नेटिजन्स को जरा भी रास नहीं आती और उनकी क्लास लगा देते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। हाल ही में वो फिर विवादों में आ गए हैं। उन्होंने ‘वॉर 2’ के टीजर से अभिनेत्री कियारा आडवाणी की बिकिनी वाली फोटो को एक्स पोस्ट में साझा किया, लेकिन इसके कैप्शन में उन्होंने आपत्तिजनक और अनुचित बातें कहीं है, जिसे देख सोशल मीडिया यूजर्स को गुस्सा आ गया है और भड़के यूजर खूब खरीखोटी सुना रहे हैं।

ऐसा है राम गोपाल का पोस्ट

निर्माता राम गोपाल वर्मा का ये पोस्ट मंगलवार देर रात सामने आया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद उन्हें यूजर्स की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। बढ़ती नकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए राम गोपाल वर्मा ने बुधवार सुबह बिना कोई टिप्पणी किए चुपचाप ये पोस्ट हटा दिए। राम गोपाल वर्मा ने पोस्ट में लिखा, ‘देश और समाज की वॉर से परे ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर के बीच हो रही है कि किसको इसकी बैक मिलेगी। ये फिल्म एक बैकबस्टर होगी। उन्हें सामने आकर वॉर करने के लिए बहुत टाइम लगेगा।’

बेतुका बयान देकर किया डिलीट

बता दें, टीजर जूनियर एनटीआर के जन्मदिन पर रिलीज हुआ। इसमें ऋतिक रोशन, जूनियर एनटीआर और कियारा आडवाणी नजर आ रहे हैं। जहां यह टीजर मुख्य रूप से ऋतिक और जूनियर एनटीआर के आमने-सामने की भिड़ंत पर केंद्रित है, वहीं कियारा की एक झलक देखने को मिल रही है, जिसमें वह बिकिनी पहने पूल किनारे चलती हुई नजर आती हैं। उनके इस लुक ने दर्शकों का ध्यान खींचा। राम गोपाल वर्मा ने इसी दृश्य को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए अभद्र टिप्पणियों के साथ पोस्ट किया, जो कई यूजर्स को बेहद आपत्तिजनक लगी।

लोगों ने दी ऐसी प्रतिक्रिया

इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर ट्रोल किया गया। एक यूजर ने लिखा, ‘राम गोपाल वर्मा पागल हो गए हैं’ तो वहीं किसी ने उन्हें ‘ठरकी बुड्ढा’ कहा। एक और यूजर ने तंज कसते हुए कहा, ‘अगर ये पब्लिक में ऐसा बोलते हैं तो प्राइवेट में क्या करते होंगे, सोचिए!’ कियारा आडवाणी के प्रशंसकों ने राम गोपाल वर्मा की पोस्ट के कमेंट सेक्शन में नाराजगी जताते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया। विवाद बढ़ता देख राम गोपाल वर्मा ने बिना किसी सफाई या प्रतिक्रिया के अपने पोस्ट हटा दिए। दूसरी ओर कियारा आडवाणी ने ‘वॉर 2’ को लेकर एक सकारात्मक और भावुक पोस्ट इंस्टाग्राम पर साझा किया। उन्होंने लिखा, ‘यह मेरे लिए कई मायनों में पहली बार है, पहली YRF फिल्म, पहली एक्शन फिल्म, इन दो अद्भुत हीरोज के साथ पहली बार काम करने का मौका, अयान के साथ पहला कोलैबोरेशन और हां, मेरा पहला बिकिनी शॉट भी!’

‘भारत से जंग के लिए हमेशा तैयार हैं’, फील्ड मार्शल बने आसिम मुनीर के बाद पाकिस्तान ने दी चेतावनी

पाकिस्तान ने हाल ही में अपने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया है, जिसे देश में सर्वोच्च पद माना जाता है। इस पदोन्नति के साथ, असीम मुनीर पाकिस्तानी इतिहास में फील्ड मार्शल का पद पाने वाले दूसरे सैन्य अधिकारी बन गए हैं। उनके प्रमोशन के बाद पाकिस्तानी सेना ने फिर से भारत को गीदड़भभकी दी है। सेना ने कहा है कि भारत आग से खेल रहा है, अगर जरूरत पड़ी तो भारत से युद्ध संभव है। पाकिस्तान के DGISPR ने तो यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो युद्ध संभव है और भारत से युद्ध के लिए हम हमेशा तैयार हैं।

मुनीर ने चला है बड़ा दांव, जनता है हैरान

पाकिस्तान की शहबाज़ सरकार ने जनरल आसिम मुनीर को फ़ील्ड मार्शल बना दिया है। ये बड़ा फैसला किसी और ने नहीं खुद शहबाज सरकार की कैबिनेट ने तय कर इसका ऐलान किया है। मुनीर के फ़ील्ड मार्शल बनने के बाद पाकिस्तान में डर और आश्चर्य का माहौल है। इमरान ख़ान की पार्टी पीटीआई इसका ज़बरदस्त विरोध कर रही है। पार्टी समर्थकों का कहना है कि मुनीर के फ़ील्ड मार्शल बनने से इमरान ख़ान कभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। पाकिस्तान में कहा जा रहा है कि आर्मी की कुर्सी ना छोड़ने के लिए मुनीर ने फ़ील्ड मार्शल वाला दांव चला है क्योंकि फ़ील्ड मार्शल कभी रिटायर नहीं होते हैं।

पाकिस्तान में हो रहा फैसले का विरोध

आसिम मुनीर के कंधे पर एक सितारा और बढ़ गया है और अब उनकी वर्दी में पांच सितारे लगे होंगे। लेकिन इसका पाकिस्तान में विरोध शुरु हो गया है। वकार मलिक ने कहा है कि डिक्टेटर साहब ने अपने आप को ही फील्ड मार्शल का पद खुद दे दिया है। इससे पहले एक डिक्टेटर ये काम कर चुका है। जी हां, फील्ड मार्शल अयूब खान ने, ये बात पूरी कौम को आज भी याद है। इसके बाद आपको बहुत सारी चीज़ें सुनने को मिली होंगी। आपने सुना होगा कि फ़ील्ड मार्शल का पद महज़ नाम का पद होता है और पांचवा सितारा महज़ इज़्ज़त के लिए दिया जाता है। इसकी कोई ऑपरेशनल वैल्यू नहीं है, असल में तो ये आर्मी चीफ़ का ही पद है।

Health Tips:फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए रोजाना करें ये योगासन, संतान प्राप्ति में होगी मदद

वर्तमान समय में फर्टिलिटी एक बड़ी समस्या है। खास बात यह है कि महिला और पुरुषों दोनों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। अगर आप इस समस्या से प्रभावित हैं, तो इससे कपल के मां-बाप बनने के सपने में दिक्कतें आ सकती हैं। हालांकि फर्टिलिटी की समस्या को कम करने में योग सुरक्षित और प्रभावी तरीका हो सकता है। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका नियमित रूप से अभ्यास करने से गर्भ धारण की संभावना बढ़ सकती है।

असरदार हैं ये योगासन

सेतुबंधासन

इस आसन का अभ्यास करने से फर्टिलिटी में सुधार होता है। वहीं यह प्रजनन अंगों में ब्लड फ्लो को बढ़ाता है और फर्टिलिटी की समस्या दूर होती है। सेतुबंधासन का अभ्यास करने से डिप्रेशन, तनाव और थकान आदि के लक्षणों को भी कम करता है।

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन मांसपेशियों को स्ट्रेच करने के साथ फर्टिलिटी में भी सुधार हो सकता है। साथ ही यह स्ट्रेस को मैनेज करने में काफी प्रभावी होता है। यह योगासन महिला और पुरुष को बांझपन की समस्या से छुटकारा दिलाने वाला है।

बटरफ्लाई

बटरफ्लाई आसन भी फर्टिलिटी को बढ़ाने के लिए जाना जाता है। इस आसन का नियमित अभ्यास करने से प्रसव के दौरान होने वाला दर्द भी कम होता है और शरीर में भी लचीलापन आता है।

बालासन

फर्टिलिटी की समस्या को हल करने के लिए बालासन का अभ्यास करना चाहिए। नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने से हमारे शरीर का ब्लड फ्लो बढ़ता है और शरीर को लाभ मिलता है। फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए भी इस आसन का अभ्यास करना चाहिए। वहीं पीठ, घुटनों, कूल्हों और जांघों को भी मजबूत बनाने का काम करता है।

Travel Tips:ओडिशा की प्राचीन विरासत में शामिल हैं उदयगिरी और खंडगिरी की गुफाएँ

ओडिशा राज्य के भुवनेश्वर शहर के निकट स्थित उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएँ प्राचीन भारतीय कला, संस्कृति और धार्मिकता का अद्भुत उदाहरण हैं। ये गुफाएँ न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि शिल्पकला और वास्तुकला के दृष्टिकोण से भी अत्यधिक मूल्यवान हैं। उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएँ जैन धर्म से संबंधित हैं और ये गुफाएँ 2,000 साल पुरानी मानी जाती हैं। इन गुफाओं को देखकर हम प्राचीन भारत की धार्मिक आस्थाओं और उनकी जीवनशैली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाओं का इतिहास

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएँ मुख्य रूप से जैन साधुओं द्वारा 1st शताब्दी ईसा पूर्व में बनाई गई थीं। इन गुफाओं का निर्माण शासक कुमारगुप्त I के शासनकाल में हुआ था, जो गुप्त साम्राज्य के सम्राट थे। यह गुफाएँ उनके द्वारा प्रोत्साहित किए गए धार्मिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों के तहत बनाई गई थीं। उदयगिरी का नाम ‘उदय’ यानी सूर्योदय से जुड़ा हुआ है, जबकि खंडगिरी का अर्थ है ‘खंडित पर्वत’, जो यहाँ की पर्वत श्रृंखलाओं की विशेषता को दर्शाता है।

उदयगिरी गुफाएँ

उदयगिरी गुफाएँ पहाड़ी की ऊपरी चोटी पर स्थित हैं और यहाँ कुल 18 गुफाएँ हैं। इन गुफाओं में से कुछ का उपयोग ध्यान, पूजा, और साधना के लिए किया जाता था, जबकि अन्य गुफाएँ विश्राम स्थल के रूप में बनायीं गई थीं। यहाँ की गुफाओं में जैन धर्म से संबंधित चित्रकला और मूर्तिकला का अद्भुत उदाहरण देखने को मिलता है।

उदयगिरी की गुफाओं में प्रमुख गुफा हाथी गुफा है, जिसका नाम यहाँ की हाथी के आकार की मूर्ति के कारण पड़ा। इसके अलावा, गांधार गुफा भी प्रसिद्ध है, जहां एक बड़ी मूर्ति और शिलालेख पाए जाते हैं। ये गुफाएँ जैन साधुओं द्वारा ध्यान और तपस्या के लिए इस्तेमाल की जाती थीं। यहाँ की दीवारों और छतों पर उकेरी गई मूर्तियाँ और चित्र आज भी उस समय के कला और शिल्प कौशल की गवाही देती हैं।

खंडगिरी गुफाएँ

खंडगिरी गुफाएँ उदयगिरी के पास स्थित हैं और यहाँ कुल 15 गुफाएँ हैं। इन गुफाओं का आकार उदयगिरी की गुफाओं से थोड़ा अलग है, और इनका निर्माण भी जैन साधुओं द्वारा ध्यान और पूजा के उद्देश्य से किया गया था। खंडगिरी गुफाओं की दीवारों पर जैन धर्म के अनुयायियों के जीवन और उनके अनुशासन की छवियाँ उकेरी गई हैं।

खंडगिरी की एक प्रसिद्ध गुफा रानी गुफा है, जिसे शाही गुफा भी कहा जाता है। यह गुफा अपनी सुंदर वास्तुकला के लिए जानी जाती है। इसमें एक शाही परिवार की मूर्तियाँ और चित्रकला देखने को मिलती हैं। यहाँ की अन्य गुफाओं में साधारण साधुओं के चित्र और मूर्तियाँ हैं जो उनके जीवन की गाथाएँ बयान करती हैं।

शिल्पकला और मूर्तिकला

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाओं की दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियाँ और चित्र शिल्पकला और मूर्तिकला का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। यहाँ पर जैन धर्म से संबंधित कई दृश्य और भगवान महावीर की मूर्तियाँ, जो कि जैन धर्म के प्रमुख तीर्थंकर हैं, देखने को मिलती हैं। गुफाओं में शिलालेख भी पाए जाते हैं, जो उस समय की धार्मिक और सांस्कृतिक जीवनशैली के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।

इन गुफाओं की शिल्पकला में रचनात्मकता और सूक्ष्मता दिखाई देती है। उदाहरण के लिए, उदयगिरी की “हाथी गुफा” में उकेरी गई हाथी की मूर्ति और खंडगिरी की “रानी गुफा” में शाही सजावट इसकी विशेषता हैं।

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाओं का धार्मिक महत्व

इन गुफाओं का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है, खासकर जैन धर्म के अनुयायियों के लिए। इन गुफाओं में ध्यान और साधना के लिए विशेष स्थान बनाए गए थे। यहाँ की मूर्तियाँ और चित्र जैन धर्म के अनुयायियों के जीवन और उनकी आस्थाओं को व्यक्त करते हैं। इन गुफाओं के माध्यम से हम जैन धर्म के इतिहास, विचारधारा और आस्था को समझ सकते हैं।

पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण स्थल

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएँ न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख स्थल हैं। ये गुफाएँ ऐतिहासिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध हैं और यहां हर साल पर्यटक आते हैं। इन गुफाओं के आसपास की पहाड़ी पर चढ़ाई करके पर्यटक अद्भुत दृश्य का आनंद ले सकते हैं। गुफाओं में घुसते समय आपको प्राचीन भारतीय वास्तुकला, शिल्पकला और जैन धर्म की महिमा का अनुभव होता है।

यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाओं की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच है, जब मौसम ठंडा और सुखद रहता है। गर्मियों में यहाँ का तापमान बढ़ सकता है, जिससे यात्रा में असुविधा हो सकती है।

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएँ ओडिशा की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा हैं। इन गुफाओं का स्थापत्य, मूर्तिकला, और शिल्पकला भारतीय संस्कृति और कला के महत्व को दर्शाता है। यह स्थल न केवल जैन धर्म के अनुयायियों के लिए, बल्कि हर इतिहास प्रेमी और कला प्रेमी के लिए एक अद्भुत स्थल है। अगर आप भारतीय इतिहास, संस्कृति और धर्म में रुचि रखते हैं, तो उदयगिरी और खंडगिरी गुफाओं की यात्रा आपके लिए एक अद्वितीय अनुभव साबित होगी।