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वॉशिंगटन: ट्रंप और रामाफोसा की बैठक में देखने को मिला जबरदस्त ड्रामा, जानिए पूरी घटना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के साथ मुलाकात के दौरान तीखी बहस की और इस दौरान भरपूर ड्रामा देखने को मिला। ट्रंप ने इल्जाम लगाया कि साउथ अफ्रीका में गोरे किसानों की व्यवस्थित ढंग से हत्या हो रही है। उन्होंने ओवल ऑफिस की लाइट्स धीमी करके एक वीडियो भी चलाया, जिसमें एक कट्टरपंथी नेता ‘किल द फार्मर’ (किसान को मारो) के नारे वाला गाना गा रहा था। ट्रंप ने कुछ न्यूज़ आर्टिकल्स भी दिखाए और कहा कि गोरे किसानों को ‘भयानक मौत’ का सामना करना पड़ रहा है।

‘साउथ अफ्रीका में गोरे किसानों का हो रहा नरसंहार’

ट्रंप ने पहले ही साउथ अफ्रीका को दी जाने वाली सारी अमेरिकी मदद रोक दी थी और कई गोरे साउथ अफ्रीकन किसानों को अमेरिका में शरणार्थी के तौर पर बुलाया था। उनका दावा है कि साउथ अफ्रीका में गोरे किसानों का ‘नरसंहार’ हो रहा है। ट्रंप ने साउथ अफ्रीका की अश्वेत नेतृत्व वाली सरकार पर कई इल्जाम लगाए, जिसमें गोरे किसानों की जमीन छीनने, गोरों की विरोधी नीतियां लागू करने और अमेरिका विरोधी विदेश नीति अपनाने जैसे आरोप शामिल हैं।

ट्रंप के इल्जामों का रामाफोसा ने सख्ती से किया खंडन

रामाफोसा ने ट्रंप के इल्जामों का सख्ती से खंडन किया। उन्होंने कहा, ‘हम इन इल्जामों के पूरी तरह खिलाफ हैं। यह हमारी सरकार की नीति नहीं है।’ रामाफोसा इस मुलाकात में दोनों देशों के रिश्तों को सुधारने और सच सामने लाने की कोशिश में आए थे। रामाफोसा ने पूरी मीटिंग के दौरान कई बार हल्की-फुल्की बातों से माहौल को सही करने की भी कोशिश की। बता दें कि साउथ अफ्रीका और अमेरिका के रिश्ते 1994 में रंगभेद (अपारथाइड) खत्म होने के बाद से सबसे खराब दौर में हैं

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में चलवाया जूलियस मालेमा का वीडियो

ट्रंप ने मुलाकात की शुरुआत में ही पत्रकारों के सामने एक बड़ा टीवी सेट लगवाया और उसमें एक वीडियो चलाया। वीडियो में साउथ अफ्रीका की विपक्षी पार्टी के नेता जूलियस मालेमा एक पुराना रंगभेद-विरोधी गाना गा रहे थे, जिसमें ‘किल द बोअर’ और ‘शूट द बोअर’ जैसे बोल थे। ‘बोअर’ शब्द का मतलब गोरा किसान होता है। यह गाना साउथ अफ्रीका में सालों से विवाद का विषय रहा है। मालेमा की पार्टी साउथ अफ्रीका की सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा नहीं है।

ट्रंप ने सड़क किनारे सफेद क्रॉस का वीडियो भी दिखाया

ट्रंप ने एक और वीडियो दिखाया, जिसमें सड़क किनारे सफेद क्रॉस दिखाए गए, जिन्हें उन्होंने गोरे किसानों की कब्रों का मेमोरियल बताया। रामाफोसा ने हैरानी जताते हुए कहा, ‘मुझे नहीं पता यह कहां है, मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा।’ वहीं, साउथ अफ्रीका के एक्सपर्ट्स का कहना है कि व्हाइट लोगों को उनके रंग की वजह से निशाना नहीं बनाया जा रहा। उनका कहना है कि साउथ अफ्रीका में क्राइम रेट बहुत ज्यादा है, और सभी नस्लों के किसान हिंसक चोरी और हमलों का शिकार होते हैं।

‘लोग जान बचाने के लिए साउथ अफ्रीका से भाग रहे’

ट्रंप ने रामाफोसा से कहा, ‘लोग अपनी जान बचाने के लिए साउथ अफ्रीका से भाग रहे हैं। उनकी ज़मीन छीनी जा रही है और कई मामलों में उनकी हत्या हो रही है।’ रामाफोसा ने जवाब दिया कि उनकी सरकार ऐसी किसी नीति का समर्थन नहीं करती। ट्रंप ने मुलाकात की शुरुआत में रामाफोसा को ‘कई हलकों में सम्मानित नेता’ बताया, लेकिन साथ ही कहा कि ‘कुछ जगहों पर वे थोड़े विवादास्पद हैं।’ रामाफोसा ने हल्के अंदाज में जवाब दिया, ‘हम सब ऐसे ही हैं’। दरअसल, उनका इशारा ट्रंप से जुड़े विवादों की तरफ था।

अमेरिका की नाराजगी की और भी वजहें हैं

ट्रंप प्रशासन साउथ अफ्रीका की कुछ नीतियों से नाराज है। फरवरी में ट्रंप ने एक आदेश जारी कर साउथ अफ्रीका को दी जाने वाली सारी मदद रोक दी थी। उन्होंने साउथ अफ्रीका की सरकार पर श्वेत विरोधी नीतियां अपनाने और हमास व ईरान का समर्थन करने का इल्जाम लगाया था। इसके अलावा, साउथ अफ्रीका ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में इजरायल के खिलाफ गाजा में नरसंहार का इल्जाम लगाया, जिससे ट्रंप प्रशासन और नाराज है। रामाफोसा का ईरान की टेलीकॉम कंपनी MTN ग्रुप से पुराना रिश्ता भी विवाद का कारण बना।

जेलेंस्की जैसी स्थिति से बचना चाहते थे रामाफोसा

रामाफोसा इस मुलाकात में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की जैसी स्थिति से बचना चाहते थे, जिन्हें फरवरी में ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने व्हाइट हाउस में अपमानित किया था और उन्हें वहां से जाने को कहा गया था। रामाफोसा ने अपनी डेलिगेशन में मशहूर गोल्फर अर्नी एल्स और रेटीफ गूसन को शामिल किया, क्योंकि ट्रंप को गोल्फ बहुत पसंद है। उन्होंने ट्रंप को साउथ अफ्रीका के गोल्फ कोर्स की एक बड़ी किताब भी भेंट की। रामाफोसा ने हल्के अंदाज में कहा कि वे अपनी गोल्फ स्किल्स सुधार रहे हैं।

अपने साथ कई ‘खास’ लोगों को लेकर गए थे रामाफोसा

रामाफोसा के डेलिगेशन में अफ्रीकनर बिजनेसमैन जोहान रूपर्ट भी थे, ताकि ट्रंप के जमीन छीनने के आरोपों पर जवाब दिया जा सके। रामाफोसा ने साउथ अफ्रीका की ट्रेड यूनियनों की अध्यक्ष जिंगिस्वा लोसी को भी बुलाया, जिन्होंने ट्रंप को बताया, ‘साउथ अफ्रीका में हिंसा कई कारणों से है। यह सिर्फ रंग का मसला नहीं, बल्कि क्राइम का मसला है।’ लोसी ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में अश्वेत पुरुष और महिलाएं भी भयानक अपराधों का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों से मिलकर निवेश और क्राइम कम करने पर काम करने की बात कही।

रामाफोसा के साथ ट्रंप की मीटिंग में मौजूद थे मस्क

दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात में साउथ अफ्रीका में जन्मे एलन मस्क भी मौजूद थे, जो ट्रंप के सलाहकार हैं। मस्क ने साउथ अफ्रीका की सरकार पर श्वेत विरोधी नीतियों का इल्जाम लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि उनकी कंपनी स्टारलिंक को साउथ अफ्रीका में लाइसेंस नहीं मिला, क्योंकि वे ब्लैक नहीं हैं। साउथ अफ्रीका के अधिकारियों का कहना है कि स्टारलिंक ने औपचारिक रूप से आवेदन ही नहीं किया। साउथ अफ्रीका की अफर्मेटिव एक्शन नीतियां विदेशी कंपनियों को 30% हिस्सेदारी अश्वेत या अन्य वंचित समूहों को देने के लिए कहती हैं, जो रंगभेद के दौर में पीड़ित थे।

Weather Update:दिल्ली में आंधी और बारिश के बीच पेड़ उखड़ गए, कई इलाकों में बिजली गुल, BSES ने जारी किया बयान

दिल्ली में मौसम अचानक बदला और ऐसा बदला कि कोई सोच नहीं सकता था। दिल्ली में मई के महीने में ओले गिरे हैं। आज दिन का तापमान 42 डिग्री था और तेज गर्मी से लोग परेशान थे कि अचानक शाम को मौसम का मिजाज बदला और तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। आंधी बारिश से गर्मी से तो राहत मिली लेकिन दिल्ली-NCR में सड़क पर चलने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लोग बारिश और ओलों से बचने के लिए शेल्टर खोजते हुए दिखे। कई जगह आंधी की वजह से पेड़ गिरे। सड़क पर ट्रैफिक जाम हो गया। आंधी की वजह से दिल्ली मेट्रो पर भी असर पड़ा। रेड, येलो और पिंक लाइन पर चलने वाली मेट्रो की लाइन में कई चीजें आकर गिरी जिससे ट्रेनों को रोकना पड़ा। नोएडा मेट्रो ने अपने ऑपरेशन को सस्पेंड किया।

दिल्ली-NCR में तेज आंधी-बारिश से भारी नुकसान

दिल्ली, गाज़िबाद, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में देर शाम से तेज़ हवाओं और आंधी-तूफान का जो सिलसिला शुरू हुआ, उससे कई जगह काफी नुकसान पहुंचा। पेड़ उखड़ गए, सड़कों के किनारे लगे होर्डिंग गिर गए, कुछ कारों को भी नुकसान पहुंचा। जो कमजोर मकान थे, वो गिर गए।

दिल्ली से उड़ने वाली कई फ्लाइट्स लेट

दिल्ली में एक शख्स की मौत हो गई, जबकि कुछ लोग घायल भी हुए हैं। हर जगह पावर सप्लाई पर भी असर पड़ा है। मौसम में अचानक आए इस बदलाव का असर रोड और ट्रेन ही नहीं बल्कि एयर ट्रैफिक पर भी दिखा। मौसम में आए इस बदलाव की वजह से दिल्ली से उड़ने वाली कई फ्लाइट्स लेट भी हुई हैं। खराब मौसम की वजह से दिल्ली से श्रीनगर जा रही इंडिगो फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। श्रीनगर में इंडिगो की फ्लाइट की आपात लैंडिंग हुई है। राहत की बात ये है कि विमान में बैठे सभी 227 यात्री और क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं।

बिजली का पोल गिरने से एक की मौत

दिल्ली के निजामुद्दीन थाने के गेट के बाहर दो कारों के ऊपर पेड़ गिरा जिससे दोनों गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गई। निजामुद्दीन इलाके में ही बिजली का पोल गिरने से एक व्यक्ति की भी मौत हो गई है। यहां हाई मास्क लाइट का खंभा एक विकलांग के ऊपर गिर गया। विकलांग अपनी ट्राई साइकिल से जा रहा था। इस दौरान खंभे के चपेट में एक गाड़ी भी आ गई।

BSES और टाटा पावर-डीडीएल ने जारी किया बयान

इस बीच दिल्ली में बिजली वितरण करने वाली टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लि. (टाटा पावर डीडीएल) और बीएसईएस ने बयान जारी किया है। बीएसईएस ने कहा, तेज हवाओं, बारिश के साथ आंधी और ओलावृष्टि के कारण शहर के कई हिस्सों में बिजली बाधित हुई, जिसका मुख्य कारण बिजली के तारों पर पेड़ और उनकी शाखाएं गिरना था। बीएसईएस संचालन और रखरखाव दल हाई अलर्ट पर हैं, शिकायतों पर ध्यान देने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) को तुरंत तैनात किया गया है। अधिकांश मामलों में, बिजली आपूर्ति तेजी से बहाल की जा रही है। हालांकि, कुछ इलाकों में, गिरे हुए पेड़ों और उनकी शाखाओं से बिजली के बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण बहाली में सामान्य से अधिक समय लग रहा है। इसके अलावा गिरे हुए पेड़ों की वजह से यातायात की भीड़ कुछ स्थानों पर हमारी टीमों की आवाजाही में देरी कर रही है। एहतियाती उपाय के रूप में हमें बिजली के झटके को रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ क्षेत्रों में अस्थायी रूप से बिजली की आपूर्ति बंद करनी पड़ी। नागरिकों की सुरक्षा और भलाई हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से निलंबित

वहीं, टाटा पावर-डीडीएल ने कहा, “दिल्ली में धूल भरी आंधी के बाद गरज, ओलावृष्टि और बारिश के कारण राजधानी के कई इलाकों जैसे बवाना, नरेला, जहांगीरपुरी, सिविल लाइंस, शक्ति नगर, मॉडल टाउन, वजीराबाद, धीरपुर, बुराड़ी में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। बिजली की लाइनें पेड़ों और शाखाओं के गिरने से क्षतिग्रस्त हो गईं। लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, बिजली के झटके से बचने के लिए एहतियात के तौर पर कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति को अस्थायी रूप से निलंबित करना पड़ा। टाटा पावर-डीडीएल की परिचालन और रखरखाव टीमें उच्च स्तर की तत्परता बनाए हुए हैं, जिसमें क्यूआरटी सेवा शिकायतों का तेजी से समाधान कर रहे हैं। अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों में बिजली बहाली तेजी से आगे बढ़ रही है। हमारी टीमें क्षतिग्रस्त बिजली बुनियादी ढांचे की तेजी से बहाली और मरम्मत में लगी हुई हैं। हम अपने उपभोक्ताओं के धैर्य की सराहना करते हैं। टाटा पावर-डीडीएल में, आपकी सुरक्षा और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

Latest Sports News: IPL इतिहास में पहली बार दिल्ली कैपिटल्स के नाम एक बेहद शर्मनाक रिकॉर्ड दर्ज हुआ

इंडियन प्रीमियर लीग के 18वें सीजन में प्लेऑफ में पहुंचने वाली चौथी टीम का फैसला 21 मई को मुंबई इंडियंस और दिल्ली कैपिटल्स के बीच खेले गए मुकाबले के साथ हो गया। इस मैच में मुंबई इंडियंस की टीम का दबदबा पूरी तरह से देखने को मिला जिसमें उन्होंने पहले बल्लेबाजी करते हुए जहां 180 रनों का स्कोर बनाया तो वहीं दिल्ली कैपिटल्स की टीम को 121 रनों पर समेटने के साथ मैच को 59 रनों से अपने नाम किया। इसी के साथ मुंबई इंडियंस की टीम ने प्लेऑफ के लिए अपनी जगह को भी पक्का कर लिया। वहीं दिल्ली कैपिटल्स जो सीजन की शुरुआत में प्वाइंट्स टेबल में नंबर-1 पर चल रही थी वह प्लेऑफ के लिए अपनी जगह बनाने से चूक गई। इसी के साथ आईपीएल के 18 साल के इतिहास में दिल्ली कैपिटल्स के नाम एक ऐसा शर्मनाक रिकॉर्ड भी दर्ज हो गया।

शुरुआती चार मुकाबले जीतने के बाद भी प्लेऑफ में जगह नहीं बना सकी दिल्ली कैपिटल्स

आईपीएल के अभी तक के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी टीम ने सीजन की शुरुआत शानदार तरीके से करते हुए अपने शुरुआती चारों मुकाबलों में जीत दर्ज की लेकिन बाद में वह टीम प्लेऑफ में अपनी जगह को पक्का करने में कामयाब नहीं हो सकी। दिल्ली कैपिटल्स के नाम अब ये बेहद घटिया रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। अक्षर पटेल की कप्तानी में दिल्ली कैपिटल्स ने सीजन की शुरुआत काफी बेहतरीन की थी, जिसमें उन्होंने अपने पहले चार मैचों में लखनऊ, हैदराबाद, चेन्नई और आरसीबी को मात दी थी, इसके बाद उन्हें इस सीजन की अपनी पहली हार का मुंबई इंडियंस के खिलाफ हुए 13 अप्रैल को मुकाबले में मिली।

दिल्ली कैपिटल्स की पिछले 7 मैचों में सिर्फ एक जीत

दिल्ली कैपिटल्स ने इस सीजन की शुरुआत काफी शानदार की थी जिसमें उन्होंने पहले 6 मैचों में से 5 में जीत दर्ज की थी तो वहीं उन्हें सिर्फ एक मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। वहीं इसके बाद पिछले 7 मैचों में दिल्ली कैपिटल्स की गाड़ी पूरी तरह से पटरी से उतरी दिखी और वह जहां सिर्फ एक मुकाबला जीतने में कामयाब हो सके तो वहीं 5 मैचों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा जबकि एक मैच बारिश के चलते रद्द हो गया था।

क्या पाकिस्तान में एक बार फिर तख्तापलट होने वाला है? फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की चाल में उलझे पीएम शहबाज

पाकिस्तान में फील्ड मार्शल बनने का मतलब है क़ानून से ऊपर होना यानी फील्ड मार्शल पर पाकिस्तान की किसी अदालत में मुक़दमा नहीं चलाया जा सकता। तो अब आसिम मुनीर अब कुछ भी करें उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा नहीं चलेगा। वो पाकिस्तान के क़ानून से ऊपर हो गए हैं। पाकिस्तान के 78 साल के इतिहास में फील्ड मार्शल बनने वाले आसिम मुनीर दूसरे शख़्स हैं। इससे पहले 1959 में सरकार का तख़्तापलट करके सत्ता हथियाने वाले अयूब ख़ान ने ख़ुद को फील्ड मार्शल की रैंक दे दी थी। हालांकि सेना के जनरल आसिम मुनीर ने भी खुद को फील्ड मार्शल बनाया है, हालांकि बस फर्क इतना है कि उन्होंने इस फैसले पर मुहर सरकार से लगवाई और इसका एलान वज़ीर-ए-आज़म शहबाज़ शरीफ़ से करवाया।

फील्ड मार्शल का जो पद है, याद रहे ये ताउम्र होता है। अगर कोई अपनी मर्जी से खुद को अलग कर ले तो उसकी अपनी मर्जी है, लेकिन कोई उसको हटा नहीं सकता है। जो सबसे इंपॉर्टेंट बात है वो ये कि उसको कोई पद से हटा नहीं सकता। जैसे आर्मी चीफ़ को पीएम तो हटा सकते हैं, ये ऑप्शन संविधान में है लेकिन किसी फील्ड मार्शल को कोई हटा नहीं सकता है, ये पद उसके पास ताउम्र रहता है।

वर्दी पर लगवा लिया फाइव स्टार

जनरल आसिम मुनीर इससे पहले आर्मी चीफ थे जो फोर स्टार जनरल होते हैं लेकिन फील्ड मार्शल की रैंक फाइव स्टार की होती है। युद्ध में असाधारण बहादुरी दिखाने वाले अफसर को फील्ड मार्शल की रैंक दी जाती है लेकिन, पाकिस्तान में कुछ भी हो सकता है। आर्मी चीफ की जो मर्ज़ी होती है वो करते हैं इसलिए ऑपरेशन सिंदूर में बुरी तरह पिटने के बाद भी बड़ी बेशर्मी ने जनरल आसिम मुनीर ने अपनी वर्दी पर एक स्टार और लगवा लिया है।

खुद का प्रमोशन करवाया मुनीर ने

आसिम मुनीर ने पिछले दस दिन में पाकिस्तान में ये झूठा प्रचार करवाया कि उन्होंने भारत के ऑपरेशन सिंदूर को नाकाम कर दिया। भारत को बहुत नुकसान पहुंचाया और फिर अपने पपेट प्राइम मिनिस्टर शहबाज़ शरीफ़ से फील्ड मार्शल की ये देश की सबसे बड़ी रैंक ले ली, लेकिन हकीकत सब समझ रहे हैं। पाकिस्तान के लोग कह रहे हैं कि तानाशाह मुनीर ने ख़ुद अपना प्रमोशन किया है इसलिए आसिम मुनीर के फील्ड मार्शल बनने की कोई वैल्यू नहीं है।

आर्मी प्रमुख का पद भी नहीं छोड़ेंगे मुनीर

पाकिस्तान के पत्रकार वक़ार मलिक ने बताया, अब सवाल ये है कि फील्ड मार्शल बनने के बाद क्या आसिम मुनीर आर्मी चीफ का पद छोड़ देंगे। पाकिस्तान के लोगों का मानना है कि आसिम मुनीर आर्मी चीफ भी बने रहेंगे। क्योंकि असली ताक़त तो जनरल के पास होती है। फील्ड मार्शल तो सिर्फ ऑनररी रैंक है और इसीलिए आसिम मुनीर आर्मी चीफ की पावर अपने हाथ में रखेंगे और उन्हें आर्मी चीफ के तौर पर दो साल की एक्सटेंशन मिलना भी तय है। वैसे पाकिस्तान में आर्मी चीफ का कार्यकाल तीन साल का होता था लेकिन, पिछले साल शहबाज़ शरीफ ने क़ानून में बदलाव किया और आर्मी चीफ का कार्यकाल तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया।

आसिफ मुनीर को बादशाह घोषित कर देते

आर्मी चीफ के तौर पर आसिम मुनीर का कार्यकाल 29 नवंबर को ख़त्म होने वाला है लेकिन ये तय है कि मुनीर को एक्सटेंशन मिलेगा..और वो 2027 तक पाकिस्तानी फ़ौज के चीफ बने रहेंगे। आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाए जाने पर इमरान ख़ान की पार्टी के नेताओं ने ज़बरदस्त नाराजगी जाहिर की है। इमरान की बहन अलीमा ख़ान ने कहा कि, शहबाज़ शरीफ़ को, आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाने के बजाय, पाकिस्तान का बादशाह घोषित करना चाहिए था।

अमेरिका की खुफिया एजेंसी FBI ने एक गुजराती युवक को मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची में शामिल किया

साल 2015 में मैरीलैंड में अपनी पत्नी की हत्या करने का आरोपी गुजराती व्यक्ति अभी भी फरार है और अब वह FBI की दस सबसे वांछित भगोड़ों की सूची में शामिल हो गया है। जानकारी के अनुसार, 12 अप्रैल, 2015 को 34 वर्षीय भद्रेशकुमार पटेल ने कथित तौर पर अपनी पत्नी पलक पटेल की हत्या कर दी थी। आरोपी ने पत्नी पर कई बार वार किया था। जिसके परिणामस्वरूप अंततः उसकी मृत्यु हो गई थी। हत्या के बाद से पटेल फरार है। हत्या के आठ दिन बाद पटेल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।

10 साल से फरार है आरोपी

संघीय एजेंट और काउंटी पुलिस अधिकारी ने मीटिंग की और कहा कि हत्यारोरी के फरार हुए दस साल बीत चुके हैं। पुलिस ने लोगों भद्रेशकुमार पटेल का पता लगाने में मदद करने का आग्रह किया। FBI के अनुसार, पटेल पर हत्या और चोट पहुंचाने के इरादे से खतरनाक हथियार रखने का आरोप लगाया गया है।

भारत आना चाहती थी पत्नी

सीसीटीवी फुटेज में जो दिख रहा था, उससे पता चलता है कि दंपत्ति रसोई की ओर गए और फिर गायब हो गए। एक ग्राहक को संदेह हुआ जब किसी ने उसके ऑर्डर का जवाब नहीं दिया। एफबीआई के अनुसार, उसने पलक का शव रसोई में मिलने के बाद पुलिस को सूचित किया। जांचकर्ताओं के अनुसार, पलक पटेल जो उस समय 21 वर्ष की थी, भारत जाना चाहता थी।  जिसका उसके पति ने विरोध किया। हत्या से एक महीने पहले उनके वीजा की अवधि भी समाप्त हो गई थी।

एफबीआई के बाल्टीमोर डिवीजन के विशेष एजेंट जोनाथन शैफर ने कहा, “सबसे अच्छा अनुमान यह है कि वह नहीं चाहता था कि वह जाए। शैफर ने कहा, “संभव है कि उसने सोचा हो कि पलक के जाने और भारत वापस आने से वह बदनाम हो जाएगा पुलिस प्रमुख अमल ई. अवाद ने यह भी कहा कि पलक पटेल अमेरिका में अपने जीवन और भारत में अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सप्ताह में सात दिन काम करती थी। अधिकारियों को अब संदेह है कि वह भारत वापस भाग गया होगा।