पंजाब किंग्स ने मुंबई इंडियंस को 5 विकेट से हराकर फाइनल में जगह बना ली है. अब आईपीएल 2025 के फाइनल में 3 जून को RCB और पंजाब किंग्स का आमना-सामना होगा. इस मैच में मुंबई की टीम ने पहले खेलते हुए 203 रन बनाए थे, इसके जवाब में पंजाब ने 19 ओवर में ही लक्ष्य को हासिल कर लिया. यह इतिहास में सिर्फ दूसरी बार है जब पंजाब किंग्स फाइनल मैच में पहुंची है. श्रेयस अय्यर ने नाबाद 87 रनों की पारी खेल पंजाब की जीत में बड़ी भूमिका निभाई।
अहमदाबाद में खेले गए इस मैच में पंजाब किंग्स को 204 रनों का लक्ष्य मिला था. इसके जवाब में टीम की शुरुआत काफी खराब रही क्योंकि प्रभसिमरन सिंह केवल 6 रन बनाकर आउट हो गए. प्रियांश आर्या और जोश इंग्लिश ने पारी को संभालना शुरू ही किया था, तभी प्रियांश 20 रनों की कैमियो पारी खेल आउट हो गए. देखते ही देखते पंजाब ने 72 के स्कोर पर 3 विकेट गंवा दिए थे।
नेहल वाढ़ेरा और श्रेयस अय्यर ने पारी को संभालते हुए 84 रनों की बेहतरीन पार्टनरशिप की.वाढ़ेरा ने 29 गेंद में 48 रन बनाए. कप्तान श्रेयस अय्यर एक छोर से डटे हुए थे, जिन्होंने 41 गेंद में नाबाद 87 रनों की पारी खेल पंजाब की ऐतिहासिक जीत में बड़ा योगदान दिया।
11 साल बाद फाइनल में पंजाब
पंजाब किंग्स ने अभी तक एकमात्र IPL फाइनल साल 2014 में खेला था. उस सीजन KKR ने पंजाब को 3 विकेट से हराकर ट्रॉफी से वंचित रख दिया था. श्रेयस अय्यर को जादूगर कहें या कुछ और, उन्होंने 11 साल बाद पंजाब के फाइनल खेलने के सपने को पूरा किया है. बताते चलें कि अय्यर का यह बतौर कप्तान 5 साल में तीसरा आईपीएल फाइनल होगा।
अय्यर की कप्तानी में दिल्ली कैपिटल्स ने 2020 का फाइनल खेला. वहीं IPL 2024 में उन्हीं की कप्तानी में KKR ने ट्रॉफी जीती थी और अब पंजाब को फाइनल में पहुंचा कर उन्होंने इतिहास रच डाला है. IPL 2025 का फाइनल अब 3 जून को RCB और पंजाब किंग्स के बीच खेला जाएगा।
डॉ. राजेश्वर सिंह की जनसेवा पहल बनी जनविश्वास का आधार: हसनपुर खेवली में आयोजित हुआ 122 वां 'आपका विधायक-आपके द्वार' जनसुनवाई शिविर
गाँव की शान पहल : 600 से अधिक मेधावियों को डॉ. राजेश्वर सिंह ने साइकिल देकर किया सम्मानित
“समाधान की संस्कृति और सेवा का संकल्प: हर रविवार जनता के नाम, अबतक 5200 से अधिक समस्याओं के समाधान का प्रयास”
122वां ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ शिविर: जन संवाद, जन सेवा और जन सम्मान का सजीव उदाहरण
लखनऊ: जनता की समस्याओं को सरकार तक नहीं, सरकार को जनता तक ले जाने की अनूठी सोच को साकार कर रहे हैं सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह। इसी क्रम में रविवार को ग्राम पंचायत हसनपुर खेवली 122वां ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ जनसुनवाई शिविर आयोजित किया गया। यह शिविर केवल समस्याएं सुनने का मंच नहीं, बल्कि समाधान की संस्कृति का जीवंत उदाहरण है।
समस्याओं से समाधान तक – भरोसे की सीढ़ी
जनसुनवाई शिविर के दौरान ग्रामीणों ने पेंशन, सड़क, नाली, सिलाई मशीन जैसी जन समस्याओं और आवश्यकताओं को साझा किया। हर प्रश्न को गम्भीरता से सुनते हुए डॉ. सिंह की टीम ने समाधान का भरोसा दिलाया और संबंधित विभागों को त्वरित समाधान के आवश्यक निर्देश भी दिए। अब तक इस अभियान के अंतर्गत 5,200 से अधिक समस्याओं के समाधान का सार्थक प्रयास किया जा चुका है। यह आंकड़ा केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि सेवा को संकल्प के रूप में निभाने की मिसाल है।
प्रतिभा को सम्मान – भविष्य को प्रोत्साहन
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के मेधावी छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया। हाईस्कूल परीक्षा में 88% अंक पाने वाली आरुषि यादव और 80.5% अंक पाने वाली भूमिका चौधरी तथा इंटरमीडिएट परीक्षा में 84% अंक पाने वाले आदित्य यादव और 73% अंक पाने वाली माही मौर्या को साइकिल, घड़ी और प्रशस्तिपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल पुरस्कार नहीं, युवाओं के भीतर आत्मविश्वास की लौ प्रज्वलित करने का प्रयास है। अब तक 600 से अधिक मेधावी छात्रों को साइकिलें प्रदान की जा चुकी हैं, ताकि वे अपने भविष्य की यात्रा में कोई दूरी महसूस न करें। साथ ही शिविर में आए सभी ग्रामीणों को अनवरत संचालित ‘तारा शक्ति निःशुल्क रसोई’ के माध्यम से ताजा – पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध कराया गया।
जनसेवा पहल – जनविश्वास का आधार हर रविवार आयोजित होने वाले इन जनसुनवाई शिविरों में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की विशेष प्रतिनिधि टीम ग्रामवासियों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनती है, उन्हें रिकॉर्ड करती है और संबंधित विभागों तक पहुँचाकर त्वरित समाधान सुनिश्चित करती है। डॉ. सिंह का मानना है “यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं जनसेवा का भाव है। जब कोई समस्या सुलझती है, तो मैं स्वयं को अनुग्रहीत अनुभव करता हूँ।” 122 सप्ताहों से जारी यह सतत पहल आज केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुका है, एक ऐसा आंदोलन जिसमें विकास, संवाद, समाधान और सम्मान साथ-साथ चलते हैं।
हसनपुर खेवली में आयोजित शिविर के दौरान मंडल अध्यक्ष मोहित तिवारी, सद्गुरु रावत, शैलेन्द्र सिंह, कमलेश शुक्ला, रामदेव रावत, अनिल कुमार रावत, वृज किशोर रावत, शिव कुमार सिंह, आजाद पाल, हनुपाल रावत, अमर पाल, ओम प्रकाश यादव, वासुदेव सिंह , दिनेश कुमार पाल, श्याम मुरारी, अखिलेश यादव, राम सूचित यादव सहित अनेक भाजपा नेता और ग्रामीण मौजूद रहे।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश: भारत की सुरक्षा शक्ति का नया केंद्र बना सरोजनीनगर- डॉ. राजेश्वर सिंह
7 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियाँ, 3 HAL प्लांट्स, और 6 रक्षा कॉरिडोर नोड्स के माध्यम से यूपी रक्षा उत्पादन का आधार बन गया है।
AK-203 राइफल और ब्रह्मोस मिसाइल जैसी अत्याधुनिक परियोजनाएँ राज्य की रणनीतिक क्षमता दर्शाती हैं।
Adani Defence, PTC Industries, MKU, और Lohia Aerospace जैसी निजी कंपनियाँ राज्य को वैश्विक रक्षा बाजार से जोड़ रही हैं।
अनुसंधान, उत्पादन, परीक्षण और निर्यात में यूपी की बहुआयामी उपस्थिति भारत को सैन्य आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रही है।
मोदी-योगी युग में उत्तर प्रदेश आज भारत का रणनीतिक शस्त्रागार बनकर उभरा है।
लखनऊ, 1 जून 2025: उत्तर प्रदेश आज जिस गति से भारत के रक्षा क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, वह केवल एक राज्य की प्रगति नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की उस राष्ट्रव्यापी भावना का जीवंत उदाहरण है, जिसकी कल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मजबूत नेतृत्व और प्रशासनिक समर्पण ने इस राज्य को भारत के रक्षा उत्पादन और वैश्विक निर्यात का केंद्र बना दिया है।
सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने रविवार को सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से एक विस्तृत पोस्ट में उत्तर प्रदेश की रक्षा क्षेत्र में उपलब्धियों और वर्तमान भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कैसे उत्तर प्रदेश अब भारत की रणनीतिक सुरक्षा नीति का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा, “उत्तर प्रदेश केवल हथियार नहीं बना रहा, यह भारत का रक्षा भविष्य गढ़ रहा है। आज हमारा राज्य नवाचार, आत्मनिर्भरता और औद्योगिक क्षमता का प्रतीक बन चुका है। AK-203 राइफल से लेकर ब्रह्मोस मिसाइल तक — यूपी भारत की रक्षा शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है।”
उन्होंने उत्तर प्रदेश को ‘राइफल से रॉकेट तक’ की संज्ञा देते हुए विस्तार से बताया कि कैसे यह राज्य रक्षा उत्पादन से लेकर परीक्षण और वैश्विक निर्यात तक पूरे रक्षा मूल्य श्रृंखला में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
उत्तर प्रदेश में रक्षा अवसंरचना का तेज़ी से विकास
डॉ. सिंह द्वारा साझा किए गए तथ्यों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में रक्षा क्षेत्र की बुनियादी ढांचा कुछ इस प्रकार विस्तार पा रही है:
1. सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इकाइयाँ:
स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री, कानपुर
फील्ड गन फैक्ट्री, कानपुर
7 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियाँ, जिनमें से:
3 फैक्ट्रियाँ कानपुर में
1-1 मुरादनगर, शाहजहाँपुर, फिरोजाबाद और अमेठी में
2. HAL (हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड):
3 प्लांट्स: लखनऊ, कानपुर और अमेठी
2 अनुसंधान एवं विकास केंद्र: लखनऊ और कानपुर
3. भारत-रूस की संयुक्त परियोजनाएँ:
AK-203 राइफल निर्माण इकाई, अमेठी
ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण इकाई, लखनऊ
4. विशेष औद्योगिक संरचना:
6 रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर नोड्स: कानपुर, लखनऊ, झांसी, चित्रकूट, आगरा और अलीगढ़
3 रक्षा परीक्षण केंद्र: 2 कानपुर, 1 लखनऊ
निजी क्षेत्र की अग्रणी भूमिका:
उत्तर प्रदेश के रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी ने राज्य को वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ा है:
Adani Defence द्वारा कानपुर में एशिया की सबसे बड़ी हथियार व गोला-बारूद निर्माण इकाई
PTC Industries, लखनऊ — भारत का पहला स्ट्रैटेजिक मैटेरियल्स टेक्नोलॉजी कॉम्प्लेक्स
MKU Limited, कानपुर — 100+ देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करने वाली कंपनी
Lohia Aerospace, कानपुर — भारत की पहली बहुराष्ट्रीय एयरोस्पेस कंपोज़िट कंपनी
वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में यूपी की भूमिका
डॉ. सिंह ने कहा कि यह सब सिर्फ एक राज्य का औद्योगिक विकास नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक सुरक्षा आपूर्ति श्रृंखला का पुनर्निर्माण है। उत्तर प्रदेश अब केवल हथियार निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि अनुसंधान, उत्पादन, परीक्षण और निर्यात जैसे हर चरण में भारत की सैन्य आत्मनिर्भरता की रीढ़ बन चुका है।
उन्होंने लिखा, “यह परिवर्तन दिखाता है कि कैसे एक राज्य नीति, प्रतिबद्धता और तकनीकी समन्वय से राष्ट्रीय रणनीतिक लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।”
मोदी-योगी नेतृत्व: नीति, निष्ठा और निष्पादन का संगम
डॉ. राजेश्वर सिंह ने केंद्र व राज्य सरकारों के प्रयासों को निर्णायक बताते हुए कहा: “यह सब कुछ संभव हुआ है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की दूरदर्शी नीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कठोर प्रशासनिक दृष्टिकोण से। उत्तर प्रदेश का रक्षा क्षेत्र आज रोज़गार, नवाचार और वैश्विक साझेदारियों का एक मज़बूत मॉडल बन चुका है।”
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश न केवल भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि एशिया और विश्व के रक्षा आपूर्ति केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
भारत की रक्षा शक्ति का नया केंद्र बना उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश अब केवल ‘एक राज्य’ नहीं, बल्कि भारत की रक्षा नीति का ‘हृदयस्थल’ बन चुका है। जहां एक ओर यह राज्य रोज़गार और नवाचार का द्वार खोल रहा है, वहीं दूसरी ओर यह भारत की वैश्विक रणनीतिक पहचान को भी नई ऊंचाई दे रहा है।
डॉ. राजेश्वर सिंह जैसे दूरदर्शी नेताओं की सक्रिय सहभागिता इस विकास को ज़मीनी स्तर पर लागू करने में मदद कर रही है — जिससे आने वाला भविष्य उत्तर प्रदेश को विश्व रक्षा मानचित्र पर शीर्ष पंक्ति में स्थापित कर देगा।
उत्तर प्रदेश को मिला नया पुलिस मुखिया: वरिष्ठ आईपीएस राजीव कृष्ण ने डीजीपी के रूप में संभाला पदभार— बेदाग छवि, पारदर्शी कार्यशैली और रणनीतिक सोच वाले अफसर से जनता को बेहतर कानून व्यवस्था की नई उम्मीद
1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस राजीव कृष्ण को उत्तर प्रदेश का कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया गया है।
वे दो बार राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक सहित कई राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुके एक अत्यंत सम्मानित अधिकारी हैं।
लखनऊ, नोएडा, आगरा और BSF जैसी अहम जगहों पर जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और उनका फील्ड अनुभव बेहद मजबूत रहा है।
उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस की 60,000 सिपाहियों की ऐतिहासिक भर्ती पारदर्शिता और निष्पक्षता की मिसाल बनी थी।
लखनऊ, 31 मई 2025: उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में एक और नया अध्याय उस समय जुड़ गया, जब वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण ने प्रदेश के कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (DGP) के रूप में शनिवार शाम पुलिस मुख्यालय, लखनऊ में विधिवत रूप से पदभार ग्रहण किया। प्रशासनिक सेवा में अपनी ईमानदारी, दूरदर्शिता और निष्पक्ष कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले श्री कृष्ण की यह नियुक्ति न सिर्फ एक पद परिवर्तन है, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था में नई ऊर्जा, नई सोच और भरोसेमंद नेतृत्व के आगमन का संकेत भी है।
राजीव कृष्ण, 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी, वर्तमान में डीजी विजिलेंस और उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के चेयरमैन के रूप में कार्यरत थे। उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे भरोसेमंद और अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है। उनका जन्म 26 जून 1969 को नोएडा में हुआ था और उन्होंने IIT रुड़की से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। देश के सबसे प्रतिभाशाली आईपीएस अधिकारियों में शामिल श्री कृष्ण ने कड़ी मेहनत, स्पष्ट सोच और निष्पक्ष प्रशासनिक रुख के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है।
सेवा का स्वर्णिम रिकॉर्ड
राजीव कृष्ण ने अपने अब तक के तीन दशक के पुलिस सेवाकाल में जिन जिम्मेदारियों का निर्वहन किया, वे उन्हें विशिष्ट बनाते हैं:
एसएसपी, लखनऊ और नोएडा जैसे संवेदनशील जिलों में कुशल नेतृत्व
डीआईजी व आईजी, लखनऊ रेंज/ज़ोन के रूप में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य
एडीजी, आगरा ज़ोन के तौर पर फील्ड में सख्त और सक्रिय उपस्थिति
बीएसएफ में IG ऑपरेशन्स, जहां उन्होंने भारत-पाक सीमा पर बाड़बंदी जैसे सामरिक महत्त्व के अभियान में निर्णायक भूमिका निभाई
सबसे पारदर्शी भर्ती अभियान के सूत्रधार
राजीव कृष्ण की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक है — उत्तर प्रदेश पुलिस में 60,000 से अधिक कांस्टेबल्स की पारदर्शी भर्ती। इस अभूतपूर्व अभियान को न सिर्फ मीडिया और प्रशासन से सराहना मिली, बल्कि यह निष्पक्ष चयन प्रणाली का राष्ट्रीय मानक बन गया। उन्होंने यह दिखाया कि सरकारी भर्तियां भी पूर्ण पारदर्शिता और विवादरहित ढंग से की जा सकती हैं।
निष्पक्षता, सक्रियता और कठोरता का संगम
राजीव कृष्ण की छवि एक सख्त लेकिन संवेदनशील अफसर की रही है। वे न सिर्फ कागज़ों पर योजनाएं बनाने वाले अधिकारी हैं, बल्कि मैदान में उतरकर अमल करने वाले प्रशासक हैं। वर्ष 2004 में आगरा के एसएसपी रहते हुए उन्होंने बीहड़ों में सक्रिय अपहरण गिरोहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर अपराधियों की कमर तोड़ दी थी। यही नहीं, लखनऊ, नोएडा जैसे शहरी क्षेत्रों में भी उन्होंने कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में अपनी रणनीतिक समझ और फील्ड अनुभव का परिचय दिया।
उत्तर प्रदेश को पिछले तीन वर्षों में लगातार कार्यवाहक डीजीपी
राज्य सरकार ने वर्ष 2024 में “उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक चयन एवं नियुक्ति नियमावली” को मंजूरी दी थी, जिसमें डीजीपी चयन के लिए एक समिति के गठन का प्रावधान था। लेकिन समिति का गठन अब तक नहीं हो सका, जिसके चलते पिछले तीन वर्षों से प्रदेश को पूर्णकालिक डीजीपी नहीं मिल सका है, मई 2022 से अब तक कोई भी पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त नहीं हुआ है। नीचे देखें अब तक के कार्यवाहक डीजीपी की सूची:
नाम
बैच
कार्यकाल
डीएस चौहान
1988
13 मई 2022 – 31 मार्च 2023
डॉ. राजकुमार विश्वकर्मा
1988
1 अप्रैल 2023 – 31 मई 2023
विजय कुमार
1988
1 जून 2023 – 31 जनवरी 2024
प्रशांत कुमार
1990
1 फरवरी 2024 – 31 मई 2025
राजीव कृष्ण
1991
1 जून 2025 – वर्तमान
ऐसे में अब वरिष्ठ आईपीएस ऑफिसर राजीव कृष्ण की नियुक्ति यह दर्शाती है कि राज्य सरकार अब सिर्फ और सिर्फ ऐसे तेज-तर्रार छवि वाले अधिकारियों को प्राथमिकता दे रही है, जो प्रदेश की कानून व्यवस्था को पूरी तरह से मजबूत बनाए रखने में सक्षम हों और जिन पर प्रशासनिक दृष्टि से भरोसा किया जा सकता है और जो मौजूदा चुनौतियों से निपटने में भी पूरी तरह सक्षम हैं।
जनता और शासन को उनसे क्या अपेक्षाएं?
अपराध नियंत्रण के लिए नये सिरे से रणनीति
पुलिस विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की संस्कृति को प्रोत्साहन
साइबर क्राइम और महिला सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर विशेष फोकस
जनता और पुलिस के बीच विश्वास की नई बुनियाद
राजीव कृष्ण की नियुक्ति न केवल उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक नए युग की शुरुआत है, बल्कि यह संकेत भी है कि शासन अब उन अधिकारियों को आगे ला रहा है, जो कर्म से नेतृत्व करते हैं, शब्दों से नहीं। वे सिर्फ एक पुलिस प्रमुख नहीं हैं, बल्कि प्रेरणादायक नेतृत्व, नैतिक मूल्यों और प्रशासनिक दक्षता के प्रतीक हैं।
उत्तर प्रदेश अब एक ऐसे DGP के नेतृत्व में है जो न केवल प्रशासनिक रूप से मज़बूत हैं, बल्कि जिनके साथ जनता की उम्मीदें, विश्वास और सुरक्षा की भावना जुड़ी है। आगामी समय में यह देखना रोचक होगा कि श्री कृष्ण किस तरह से पुलिस विभाग को नई दिशा और गति प्रदान करते हैं।
रिपोर्ट: शिवसागर सिंह चौहान, True News Up | सम्पर्क: info@truenewsup.com | राज्य ब्यूरो
साई सुदर्शन ने अपना नाम IPL के दिग्गजों में दर्ज करवा लिया है. सुदर्शन इतिहास में ऐसे केवल 9वें खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने एक ही सीजन में 700 से अधिक रन बनाए हैं. सुदर्शन ने यह उपलब्धि मुंबई इंडियंस के खिलाफ एलिमिनेटर मैच में हासिल की है. वो IPL 2025 में 700 रनों का आंकड़ा छूने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं, इसलिए ऑरेंज कैप भी अभी उन्हीं के पास है.
मुंबई इंडियंस के खिलाफ एलिमिनेटर मैच से पूर्व सुदर्शन ने 14 मैचों में 679 रन बना लिए थे. MI के खिलाफ मैच में 21 रन बनाते ही उन्होंने 700 रनों का आंकड़ा छू लिया है. उनसे पहले विराट कोहली और शुभमन गिल ही ऐसे 2 भारतीय बल्लेबाज हैं, जिन्होंने एक IPL सीजन में 700 या उससे ज्यादा रन बनाए हों. साई सुदर्शन ने मुंबई के खिलाफ एलिमिनेटर मैच में भी पचासा ठोक दिया है, जो आईपीएल 2025 में उनकी कुल छठी फिफ्टी है. वो इसके अलावा एक शतक भी लगा चुके हैं.
एक सीजन में 700 या ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज
विराट कोहली (2 बार), क्रिस गेल (2 बार), डेविड वॉर्नर, फाफ डु प्लेसिस, शुभमन गिल, जोस बटलर, केन विलियमसन और माइक हसी, वे 8 क्रिकेटर हैं जिन्होंने अब तक एक IPL सीजन में 700 या उससे ज्यादा रन बनाने का कारनामा किया है.
विराट कोहली – 973 रन (2016)
शुभमन गिल – 890 रन (2023)
जोस बटलर – 863 रन (2022)
डेविड वॉर्नर – 848 रन (2016)
विराट कोहली – 741 रन (2024)
केन विलियमसन – 735 रन (2018)
क्रिस गेल – 733 रन (2012)
माइकल हसी – 733 रन (2013)
फाफ डु प्लेसिस – 730 रन (2023)
क्रिस गेल – 708 रन (2013)
साई सुदर्शन ऑरेंज कैप की दौड़ में काफी आगे निकल गए हैं. दूसरे स्थान पर मौजूद सूर्यकुमार यादव ने 673 रन बनाए हैं, जबकि सुदर्शन उनपर 60 रनों से भी ज्यादा की बढ़त कायम कर चुके हैं. सुदर्शन का व्यक्तिगत प्रदर्शन सीजन दर सीजन बेहतर होता जा रहा है. पिछले सीजन उन्होंने 527 रन बनाए थे. बताते चलें कि शानदार फॉर्म के बलबूते उन्हें इंग्लैंड टूर के लिए भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली है.