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Ukraine Drone Attack in Russsia:AI और सोवियत काल के म्यूजियम की मदद से यूक्रेन ने रूस में कैसे मचाई भीषण तबाही, जानिए पूरी कहानी

 रूस के सामरिक बेस पर यूक्रेन के स्वार्म-ड्रोन अटैक से पूरी दुनिया हैरान है. हालांकि, यूक्रेन ने इस हमले को लेकर कहा है कि पिछले डेढ़ साल से प्लानिंग चल रही है. लेकिन अब जानकारी सामने आई है कि यूक्रेन ने एआई और सोवियत-काल के म्यूजियम की मदद से द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार इतने बड़े हमले को अंजाम दिया है.

दरअसल, यूक्रेन ने रूस के जिन पांच एयरबेस पर अटैक किया, उन सभी पर स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स तैनात रहते हैं यानी ऐसे मिलिट्री विमान, जो परमाणु बम ले जाने में सक्षम हैं. इन पांच एयरबेस में से एक इरकुत्स्क तो यूक्रेन बॉर्डर से करीब पांच हजार किलोमीटर दूर सुदूर-पूर्व के साइबेरिया में है. इसी तरह अमुर एयरबेस भी रूस के सुदूर-पूर्व में है.

बम और एक्सप्लोजिव से लैस ड्रोन्स ने बॉम्बर्स विमानों को बनाया निशाना

जानकारी के मुताबिक, यूक्रेन की इंटेलिजेंस एजेंसी एसबीयू ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से सोवियत काल के टीयू-95 स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स पर हमले की तैयारी की. यूक्रेन ने अपने एफपीबी (फर्स्ट पर्सन व्यू) ड्रोन के एल्गोरिथ्म को इस तरह तय किया कि बम और एक्सप्लोजिव से लैस ड्रोन सीधे इन बॉम्बर्स पर ही जाकर गिरे. ये टीयू-95 बॉम्बर (विमान) यूक्रेन में सोवियत-काल के म्यूजियम में मौजूद थे. रूस ने कुछ साल पहले इन बॉम्बर्स को अपग्रेड कर फिर से अपने जंगी बेड़े का हिस्सा बनाया है. रूस के पास अभी भी 55 ऐसे टीयू-95 बॉम्बर हैं.

रूस के 600 किमी भीतर अंदर तक यूक्रेन के स्वार्म-ड्रोन ने किए हमले

यूक्रेन का दावा है कि रविवार (1 जून) के हमले में रूस के करीब 40 बॉम्बर तबाह हुए हैं. रूस ने भी माना है कि जिन पांच एयरबेस पर यूक्रेन ने अपने स्वार्म-ड्रोन से अटैक किया था, उनमें से तीन पर बड़ा नुकसान हुआ है. रविवार (1 जून) को यूक्रेन ने रूस के पांच अलग-अलग प्रांतों में बड़ी संख्या में एफपीवी-ड्रोन से अटैक किए थे. स्वार्म-ड्रोन यानी ड्रोन के झुंडों के जरिए रूस के चार बड़े और स्ट्रेटेजिक महत्व के एयरबेस को इन ड्रोन के जरिए बड़ा नुकसान पहुंचाए जाने की खबर है. रूस के भीतर 600 किलोमीटर दूर तक यूक्रेन के इन स्वार्म-ड्रोन ने हमले किए.

हवाई रास्ते के बजाए यूक्रेन ने सड़क के माध्यम से ट्रक से भेजे ड्रोन

ग्रीस की विश्व-प्रसिद्ध पौराणिक कथा, ट्रोजन-हॉर्स से प्रेरणा लेते हुए यूक्रेन ने इन ड्रोन को रूस के भीतर पहुंचा दिया. यूक्रेन को पता था कि सीमावर्ती एयरस्पेस में रूस का एयर-डिफेंस बेहद मजबूत है. ऐसे में बॉर्डर एरिया से बड़ी संख्या में ड्रोन को फ्लाई कर रूस के एयरबेस तक अटैक करने के लिए पहुंचाना टेढ़ी खीर हो सकती है. ऐसे में यूक्रेनी इंटेलिजेंस एजेंसी ने सड़क के रास्ते बड़ी संख्या में सिविलयन ट्रकों को रूस के पांच अलग-अलग प्रांतों में पहुंचा दिया.

यूक्रेन ने ड्रोन हमले को नाम दिया ऑपरेशन स्पाइडरवेब

यूक्रेन के इन ट्रकों में फाल्स-सीलिंग तैयार की गई. इन फाल्स सीलिंग में यूक्रेन ने स्वार्म ड्रोन छिपाकर रख दिए थे. ये ड्रोन, बम और दूसरे एक्सप्लोजिव मटेरियल से लैस थे. बॉर्डर पुलिस को गच्चा देकर यूक्रेन ने इन ट्रकों को रूस के चार स्ट्रेटेजिक एयरबेस के करीब ले जाकर खड़ा कर दिया. फिर रिमोट के जरिए दूर से ही ट्रकों की सीलिंग खोलकर स्वार्म ड्रोन से रूसी एयरबेस पर खड़े स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स पर हमला कर दिया. ड्रोन अटैक में रूस के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम विमान धू-धू कर जल उठे. रूस के पांच अलग-अलग एयरबेस पर एक ही मोडस-ऑपरेंडी के जरिए हमले किए गए. यूक्रेन ने इस ऑपरेशन को स्पाइडर-वेब नाम दिया है.

यूक्रेनी हमले की जापान के पर्ल हार्बर पर हमले से हो रही तुलना

अगर यूक्रेन का दावा सही है तो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ये किसी जंग में इतनी बड़ी संख्या में दुश्मन के मिलिट्री एयरक्राफ्ट तबाह करने माना जा सकता है. यही वजह है कि सामरिक एक्सपर्ट इसे रूस पर यूक्रेन का पर्ल-हार्बर जैसा हमला मान रहे हैं. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर (हवाई द्वीप) पर बड़ा हवाई हमला किया था. जापान के इस हमले के बाद ही अमेरिका ने नागासाकी और हिरोशिमा पर न्यूक्लियर अटैक किया था, जिसमें लाखों लोगों की जान चली गई थी.

यूक्रेन के ड्रोन हमले को जवाब में रूस ने दागे ओरेसनिक मिसाइल

यूक्रेन ने रूस पर स्पाइडर-वेब हमला ऐसे समय में किया जब सोमवार (2 जून) को दोनों देशों के प्रतिनिधि इस्तांबुल में शांति-वार्ता के लिए मिल रहे हैं. वहीं, पूरी दुनिया की निगाहें पुतिन पर टिकी हैं कि रूस का अलग पलटवार कैसा होगा. यूक्रेन के हमलों का जवाब देने के लिए रूस ने भी यूक्रेन के उन एयरबेस पर ‘ओरेसनिक’ मिसाइल से अटैक शुरू कर दिए हैं, जहां स्वार्म-ड्रोन तैनात रहते हैं यहां कमांड एंड कंट्रोल सेंटर हैं.

Russia Ukraine War: ड्रोन हमले के बाद तुर्किए में यूक्रेन ने रूस के साथ शांति वार्ता की, जानिए किन मुद्दों पर बनी सहमति

रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से जारी जंग के बीच सोमवार (2 जून 2025) को तुर्किए के सिरागन पैलेस में शांति वार्ता को लेकर बातचीत हुई. दोनों देशों के बीच यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन ने रूस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करते हुए उसके 40 बॉम्बर्स प्लेन को तबाह कर दिया. दोनों देशों के बीच शांति को लेकर एक घंटे से ज्यादा देर तक बातचीत हुई.

एक-दूसरे के कैदियों को रिहा करने पर बनी सहमति

यूक्रेन के रक्षा मंत्री रुस्तम उमरोव ने इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया. उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे के कैदियों को रिहा करने पर सहमत हुए हैं. युद्ध रोकने की प्रमुख शर्तों के मामले में दोनों देशों के बीच अभी भी काफी मतभेद हैं. तुर्किए के विदेश मंत्री हकान फिदान ने इस शांति वार्ता की अध्यक्षता की. इस बैठक में तुर्की की खुफिया एजेंसी के अधिकारी भी मौजूद थे.

यूक्रेन ने किन-किन जगहों को निशाना बनाया?

रूस मे इस बात की पुष्टि की है कि यूक्रेन ने उसके एयरबेस को निशाना बनाया. रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “कीव शासन ने मरमंस्क, इरकुत्स्क, इवानोवो, रियाजान और अमूर में स्थित हवाई क्षेत्रों पर एफपीवी ड्रोन का उपयोग करके एक आतंकी हमला किया. इवानोवो, रियाजान और अमूर में सैन्य हवाई क्षेत्रों पर हुए सभी हमलों के विफल कर दिया गया.”

तत्काल सीजफायर की उम्मीद कम

रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा, “मरमंस्क और इरकुत्स्क क्षेत्रों में सैन्य हवाई अड्डों के नजदीकी इलाकों से एफपीवी ड्रोन छोड़े जाने के परिणामस्वरूप कई विमानों में आग लग गई.” यूक्रेन के इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच तत्काल सीजफायर की उम्मीद कम ही है. यूक्रेन के वायु सेना ने कहा कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने रूस की ओर से छोड़े गए 80 ड्रोनों में से 52 को तबाह कर दिया.

उत्तरपूर्वी यूक्रेनी शहर खारकीव के मेयर ने कहा कि सोमवार की सुबह दो बैलिस्टिक मिसाइल ने शहर के एक आवासीय इलाके पर हमला किया. उन्होंने कहा कि इसमें से एक मिसाइल स्कूल के पास तो दूसरा एक इमारत के पास गिरी.

आईपीएस राजीव कृष्ण का डीजीपी बनने के बाद पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में बडा संकल्प: उत्तर प्रदेश पुलिस को देश का सर्वश्रेष्ठ और सबसे विश्वसनीय बल बनाने की दिशा में व्यापक कार्ययोजना

आईपीएस राजीव कृष्ण का डीजीपी बनने के बाद पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में बडा संकल्प: उत्तर प्रदेश पुलिस को देश का सर्वश्रेष्ठ और सबसे विश्वसनीय बल बनाने की दिशा में व्यापक कार्ययोजना
आईपीएस राजीव कृष्ण का डीजीपी बनने के बाद पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में बडा संकल्प: उत्तर प्रदेश पुलिस को देश का सर्वश्रेष्ठ और सबसे विश्वसनीय बल बनाने की दिशा में व्यापक कार्ययोजना
आईपीएस राजीव कृष्ण का डीजीपी बनने के बाद पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में बडा संकल्प: उत्तर प्रदेश पुलिस को देश का सर्वश्रेष्ठ और सबसे विश्वसनीय बल बनाने की दिशा में व्यापक कार्ययोजना
  • डीजीपी राजीव कृष्ण ने यूपी पुलिस को देश का सबसे भरोसेमंद बल बनाने का संकल्प लिया।
  • कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और माफियावाद पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।
  • जनसुनवाई को पारदर्शी और पुलिस को संवेदनशील व जनोन्मुखी बनाया जाएगा।
  • तकनीक, AI और साइबर क्राइम नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • हर पुलिसकर्मी में सेवा भाव, उत्तरदायित्व और जवाबदेही को प्रोत्साहित किया जाएगा।

लखनऊ, 31 मई 2025 | True News Up
उत्तर प्रदेश के नव नियुक्त पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने शुक्रवार को अपनी प्राथमिकताओं और प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नीति और विजन को सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सशक्त और दृढ़ नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस को देश की सबसे आधुनिक, तकनीकी रूप से सशक्त, जवाबदेह और संवेदनशील बल के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस कार्ययोजना बनाई जा रही है।

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“यह सिर्फ पद नहीं, बल्कि जनसेवा का एक बड़ा संकल्प है”

पदभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले सार्वजनिक वक्तव्य में डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा:

“मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार प्रकट करता हूं जिन्होंने मुझ पर यह विश्वास जताया। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की पुलिस का नेतृत्व करना केवल एक प्रशासनिक पद नहीं, बल्कि 25 करोड़ नागरिकों की सुरक्षा, न्याय और विश्वास की जिम्मेदारी है। मैं इस जिम्मेदारी को ईमानदारी, पारदर्शिता और प्रतिबद्धता से निभाने का संकल्प करता हूं।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पुलिस सुधारों की निरंतरता

डीजीपी राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वर्ष 2017 से प्रारंभ की गई पुलिस सुधार की मुहिम को “भारत के कानून-व्यवस्था इतिहास में मील का पत्थर” बताते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस ने जिस गति से माफियाओं का सफाया किया, संगठित अपराध पर अंकुश लगाया और आम नागरिकों के बीच भरोसा कायम किया, वह अभूतपूर्व है।

उन्होंने कहा कि वे इस विरासत को और आगे ले जाएंगे — नई तकनीक, जनसुनवाई, पुलिसिंग में मानव संवेदनाओं का समावेश और अधिकारियों की जवाबदेही को केंद्र में रखते हुए।

डीजीपी की प्राथमिकताएं: 10 सूत्रीय विजन डॉक्यूमेंट

डीजीपी राजीव कृष्ण ने अपने कार्यकाल की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए 10 प्रमुख लक्ष्य और रणनीतियाँ प्रस्तुत कीं:

1. अपराधियों, माफियाओं और संगठित गिरोहों के खिलाफ निर्णायक और कठोर अभियान

  • “कानून के खिलाफ खड़ा हर व्यक्ति उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई का सामना करेगा।”
  • माफिया राज को पूरी तरह खत्म कर प्रदेश में कानून का शासन स्थापित करना प्राथमिकता होगी।

2. महिला सुरक्षा को सर्वोपरि बनाना

  • महिला हेल्पलाइन 1090, मिशन शक्ति, पिंक पेट्रोल जैसी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
  • प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क को संवेदनशील और प्रोफेशनल बनाया जाएगा।

3. जन सुनवाई तंत्र को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना

  • हर शिकायत पर समयबद्ध और डिजिटल ट्रैकिंग आधारित निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।
  • थानों में ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।

4. कानून व्यवस्था पर सख्त नियंत्रण

  • दंगों, साम्प्रदायिक तनाव और राजनीतिक उकसावे की घटनाओं पर त्वरित और रणनीतिक कार्रवाई की जाएगी।
  • “शांति और सौहार्द किसी भी कीमत पर बिगड़ने नहीं दिया जाएगा।”

5. साइबर अपराध के विरुद्ध एकीकृत और तकनीकी लड़ाई

  • जिला स्तर पर साइबर क्राइम सेल को प्रशिक्षित और आधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा।
  • “साइबर अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।”

6. पुलिस की सेवा-संवेदनशीलता और आचरण में सुधार

  • पुलिस की भाषा, व्यवहार, कार्यशैली को जनोन्मुखी और संवेदनशील बनाया जाएगा।
  • प्रत्येक पुलिसकर्मी को प्रशिक्षण के माध्यम से “People Friendly Policing” का हिस्सा बनाया जाएगा।

7. पुलिसिंग में नेतृत्व विकास और टीम भावना

  • योग्य अधिकारियों को ज़िम्मेदारियाँ और स्वायत्तता दी जाएगी।
  • “लीडरशिप क्वालिटी को हर स्तर पर प्रोत्साहित किया जाएगा।”

8. पुलिस बल में विशेषज्ञता और अनुभव का बेहतर इस्तेमाल

  • अनुभवी अधिकारियों की विशेषज्ञता का लाभ लेकर विशेष टास्क फोर्स बनाए जाएंगी।
  • थाना प्रभारी से लेकर पुलिस अधीक्षक तक की पोस्टिंग में अनुभव और निष्पक्षता को प्राथमिकता दी जाएगी।

9. तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का प्रयोग

  • अपराध विश्लेषण, हॉटस्पॉट मैपिंग, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, ड्रोन निगरानी और फेशियल रिकग्निशन जैसे टूल्स का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाएगा।
  • यूपी-112 और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को और उन्नत किया जाएगा।

10. निरंतर प्रशिक्षण और स्किल अपग्रेडेशन

  • पुलिस बल के सभी स्तरों पर Regular Training Calendar लागू किया जाएगा।
  • आधुनिक अपराधों की जांच, साइबर स्पेस, जनसंचार और तनाव प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण होंगे।

डीजीपी का प्रदेशवासियों और पुलिसबल के नाम संदेश

डीजीपी राजीव कृष्ण ने प्रदेश के नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा:

“उत्तर प्रदेश पुलिस तभी सफल हो सकती है जब नागरिकों का विश्वास और सहभागिता उसके साथ हो। समाज के हर वर्ग से संवाद स्थापित कर पुलिसिंग को सहभागी बनाया जाएगा।”

उन्होंने पुलिस बल को संदेश दिया:

“हर पुलिसकर्मी यह याद रखे कि उसकी वर्दी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और जिम्मेदारी का द्योतक है। हमारी छवि नागरिकों की नजर में हमारे कार्य से बनेगी।”

उत्तरप्रदेश के नवनियुक्त डीजीपी राजीव कृष्ण एक तेजतर्रार, संवेदनशील और तकनीकी दृष्टिकोण वाले अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने लखनऊ, आगरा और नोएडा जैसे संवेदनशील जिलों में प्रभावी पुलिसिंग की मिसाल पेश की है। अब जब उन्हें डीजीपी जैसे शीर्ष पद की जिम्मेदारी मिली है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि वह कैसे अपनी रणनीति को धरातल पर क्रियान्वित करते हैं।

रिपोर्ट: True News Up | संपर्क:

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UP के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रशान्त कुमार के सेवानिवृत्ति पर पुलिस मुख्यालय में गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन: डीजीपी राजीव कृष्ण ने किया सम्मानित, वरिष्ठ अधिकारियों ने साझा किए संस्मरण, प्रशान्त कुमार बोले – “सबके सहयोग से ही संभव हो सका सफल कार्यकाल”

UP के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रशान्त कुमार के सेवानिवृत्ति पर पुलिस मुख्यालय में गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन: डीजीपी राजीव कृष्ण ने किया सम्मानित, वरिष्ठ अधिकारियों ने साझा किए संस्मरण, प्रशान्त कुमार बोले - "सबके सहयोग से ही संभव हो सका सफल कार्यकाल"
UP के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रशान्त कुमार के सेवानिवृत्ति पर पुलिस मुख्यालय में गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन: डीजीपी राजीव कृष्ण ने किया सम्मानित, वरिष्ठ अधिकारियों ने साझा किए संस्मरण, प्रशान्त कुमार बोले - "सबके सहयोग से ही संभव हो सका सफल कार्यकाल"
UP के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रशान्त कुमार के सेवानिवृत्ति पर पुलिस मुख्यालय में गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन: डीजीपी राजीव कृष्ण ने किया सम्मानित, वरिष्ठ अधिकारियों ने साझा किए संस्मरण, प्रशान्त कुमार बोले - "सबके सहयोग से ही संभव हो सका सफल कार्यकाल"
  • यूपी पुलिस मुख्यालय में 2 जून को पूर्व डीजीपी प्रशान्त कुमार के सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया गया।
  • डीजीपी राजीव कृष्ण ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
  • वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके कार्यकाल की सराहना करते हुए संस्मरण साझा किए।
  • प्रशान्त कुमार ने पूरे पुलिस बल और परिवार को सहयोग के लिए आभार प्रकट किया।
  • 33 वर्ष की सेवा में उन्हें राष्ट्रपति पदक, वीरता पदक समेत अनेक राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए।

लखनऊ, 2 जून 2025 : उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय, लखनऊ में आज एक भावनात्मक एवं गरिमामय माहौल के बीच पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री प्रशान्त कुमार जी के सेवानिवृत्त होने के उपलक्ष्य में विदाई समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वर्तमान पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश श्री राजीव कृष्ण की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।

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पुलिस विभाग के योगदान के लिए प्रशान्त कुमार को किया गया सम्मानित

समारोह के आरंभ में डीजीपी राजीव कृष्ण ने पूर्व डीजीपी प्रशान्त कुमार को पुलिस विभाग के प्रति उनके 33 वर्षों के समर्पित सेवाकाल, अनुकरणीय नेतृत्व और प्रशंसनीय कार्यों के लिए स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने श्री कुमार एवं उनके परिवार को सुख, समृद्धि और स्वस्थ जीवन की शुभकामनाएं देते हुए कहा,

“प्रशान्त कुमार जी ने जिस तरह उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य की कानून व्यवस्था को अपने नेतृत्व में संभाला, वह हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।”

वरिष्ठ अधिकारियों ने सराहे कार्य, साझा किए अनुभव: समारोह में सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक एवं यूपीएसएसएससी के चेयरमैन एस.एन. साबत एवं सेवानिवृत्त अपर पुलिस महानिदेशक एवं वर्तमान राज्य मानवाधिकार आयोग सदस्य बृज भूषण ने भी अपने उद्बोधन में प्रशान्त कुमार के साथ बिताए कार्यकाल की यादें साझा कीं। उन्होंने श्री कुमार की कार्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और नैतिक नेतृत्व को सराहा और कहा कि उन्होंने हमेशा संगठन को प्राथमिकता दी और हर परिस्थिति में संतुलित निर्णय लिए।

प्रशान्त कुमार ने विदाई भाषण में व्यक्त की कृतज्ञता

अपने उद्बोधन में प्रशान्त कुमार भावुक होते नजर आए। उन्होंने कहा,

“मुझे गर्व है कि मैं दुनिया की सबसे बड़ी पुलिस फोर्स में कार्यरत रहा और इस संस्था का नेतृत्व करने का अवसर मिला। मेरे कार्यकाल की सफलता मेरे अधीनस्थ अधिकारियों, सहयोगियों और मेरे परिवार की वजह से ही संभव हो सकी।”

उन्होंने अपने माता-पिता, भाई-बहनों, पत्नी और बच्चों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया। श्री कुमार ने पुलिस बल द्वारा मिले सहयोग और स्नेह को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया।

पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण का संबोधन – निर्णयों में रहा जनहित का भाव

पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने समारोह के अंत में अपने विशेष संबोधन में कहा,

“किसी भी पुलिस महानिदेशक द्वारा लिये गये निर्णयों में पुलिस बल का हित, आम जनता की सुरक्षा तथा शासन की नीति सभी का समावेश होता है। प्रशान्त कुमार जी ने इन सभी पहलुओं को समाहित करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस का संचालन जिस कुशलता से किया, वह अद्वितीय है।”

उन्होंने आशा व्यक्त की कि श्री प्रशान्त कुमार के सेवाभाव, नेतृत्व और अनुशासन की प्रेरणा से भविष्य की पीढ़ी भी मार्गदर्शन लेती रहेगी।

प्रशान्त कुमार का जीवन परिचय — 33 वर्षों का अनुकरणीय सेवाकाल

जन्म: 16 मई 1965, सीवान (बिहार)
आईपीएस चयन: 1990 बैच, तमिलनाडु कैडर से सेवा की शुरुआत
उत्तर प्रदेश कैडर में स्थानांतरण: वर्ष 1994

प्रमुख पदों पर सेवाएं:

  • सहायक पुलिस अधीक्षक, बरेली
  • पुलिस अधीक्षक (नगर), वाराणसी, बरेली
  • एसपी: भदोही, पौड़ी गढ़वाल, सोनभद्र, जौनपुर, बाराबंकी
  • एसएसपी: गाजियाबाद, फैजाबाद, सहारनपुर
  • डीआईजी: सहारनपुर, मिर्जापुर, फैजाबाद, मेरठ परिक्षेत्र
  • एडीजी: पीएसी, यातायात, मेरठ जोन, कानून व्यवस्था
  • विशेष पुलिस महानिदेशक: कानून व्यवस्था, ईओडब्ल्यू, एसएसआईटी
  • डीजीपी, उत्तर प्रदेश: जनवरी 2024 से 31 मई 2025 तक

सम्मान एवं पदक:

  • 2007: दीर्घ सेवा के लिए पुलिस पदक (स्वतंत्रता दिवस)
  • 2014: राष्ट्रपति द्वारा विशिष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक (गणतंत्र दिवस)
  • 2018: मुख्यमंत्री उत्कृष्ट सेवा पदक
  • 2020: वीरता के लिए पुलिस पदक, पराक्रम पदक
  • 2021 व 2022: दो बार वीरता पदक
  • 2024: गणतंत्र दिवस पर वीरता पदक, डीजीपी प्रशंसा पत्र
  • साथ ही ITBP, CISF, DGP UP के कमेंडेशन रोल व गोल्ड/सिल्वर डिस्क आदि

पूर्व डीजीपी प्रशान्त कुमार का सेवाकाल कर्मठता, ईमानदारी और निष्ठा का उदाहरण रहा। उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को नई दिशा दी और संगठनात्मक मजबूती के साथ जनहित को सर्वोपरि रखा। पुलिस मुख्यालय में आयोजित यह विदाई समारोह न केवल उनके योगदान का सम्मान था, बल्कि भावी पुलिस अधिकारियों के लिए प्रेरणा भी।

श्री कृष्ण दत्त एकेडमी वृंदावन में आर्ट वर्कशॉप: फैलाओ पंख, भरो उड़ान- कैनवास के रंग से हो नई पहचान, छह दिवसीय फाइन आर्ट वर्कशॉप का उत्साहपूर्वक आगाज़

श्री कृष्ण दत्त एकेडमी वृंदावन में आर्ट वर्कशॉप: फैलाओ पंख, भरो उड़ान- कैनवास के रंग से हो नई पहचान, छह दिवसीय फाइन आर्ट वर्कशॉप का उत्साहपूर्वक आगाज़
श्री कृष्ण दत्त एकेडमी वृंदावन में आर्ट वर्कशॉप: फैलाओ पंख, भरो उड़ान- कैनवास के रंग से हो नई पहचान, छह दिवसीय फाइन आर्ट वर्कशॉप का उत्साहपूर्वक आगाज़
श्री कृष्ण दत्त एकेडमी वृंदावन में आर्ट वर्कशॉप: फैलाओ पंख, भरो उड़ान- कैनवास के रंग से हो नई पहचान, छह दिवसीय फाइन आर्ट वर्कशॉप का उत्साहपूर्वक आगाज़
  • श्री कृष्ण दत्त एकेडमी वृंदावन में छह दिवसीय फाइन आर्ट वर्कशॉप की शुरुआत उत्साहपूर्वक हुई।
  • कार्यशाला में कैनवास पेंटिंग, क्ले मॉडलिंग, डिजिटल पेंटिंग और फोटोग्राफी की विधाएं सिखाई जा रही हैं।
  • उद्घाटन समारोह में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, समाजसेवियों व अभिभावकों ने भाग लिया।
  • बच्चों की रुचि व रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
  • 6 जून को प्रतिभागियों की कलाकृतियों की एग्जीबिशन आयोजित कर आमजन के लिए प्रदर्शनी व खरीदारी की सुविधा होगी।

लखनऊ (वृंदावन), 2 जून 2025 — गर्मी की छुट्टियों में प्रकृति की गोद में रचनात्मक प्रतिभा को परवान चढ़ाने और बच्चों तथा युवाओं को कला के विविध आयामों से जोड़ने के उद्देश्य से श्री कृष्ण दत्त एकेडमी, वृंदावन में आज एक विशेष छह दिवसीय फाइन आर्ट वर्कशॉप का शुभारंभ हुआ। इस वर्कशॉप के माध्यम से प्रतिभागियों को कैनवास पेंटिंग, क्ले मॉडलिंग, डिजिटल पेंटिंग और फोटोग्राफी जैसी विधाओं की गहन समझ एवं प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे अपनी कल्पनाशक्ति को आकार दे सकें और आत्मविश्वास के साथ अपने हुनर को प्रदर्शित कर सकें।

परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम

कार्यशाला का उद्घाटन एकेडमी की आर्ट गैलरी में विधिवत रूप से किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता एकेडमी की अतिरिक्त निदेशक कुसुम बत्रा ने की, जिनके साथ सरोजनी नगर की पार्षद द्रोपदी रावत, महाराजा बिजली पासी किले की प्राचार्या सुमन गुप्ता, गौतम बुद्ध डिग्री कॉलेज की प्राचार्या रश्मि शर्मा, सर्वांगीण विकास के मैनेजर विवेक सिंह, मां विंध्यवासिनी इंटर कॉलेज से शील्मथाओं के प्रतिनिधि वीरेंद्र यादव, और माँ सरस्वती की वंदना के बाद दीप प्रज्जवलन करके कार्यक्रम को आध्यात्मिक पावनता दी गई। उपस्थित रहे रिटायर्ड कर्नल सत्येंद्र सिंह, शिक्षक प्रतिनिधि एवं समाजसेवी रीना त्रिपाठी, मुकुल पांडे, सुदीर मिश्रा सहित अभिभावक एवं कला के प्रति रूचि रखने वाले अनेक लोग। उद्घाटन के पश्चात बच्चों, युवाओं एवं अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

कार्यशाला की रूपरेखा और संचालन की जानकारी एस.के.डी. एकेडमी के प्रशिक्षकों—सुभाष तिवारी, एस.डी. त्रिपाठी, निमिषा, प्रेरणा एवं अस्मित कौर द्वारा दी गई। इस अवसर पर प्रशिक्षकों ने बताया कि यह वर्कशॉप सिर्फ रंग-रोगन सिखाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रतिभागियों के अंदर रचनात्मकता को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें समय का सदुपयोग करना भी सिखाया जाएगा।

प्रकृति से जुड़ाव एवं रचनात्मक विकास

अतिरिक्त निदेशक कुसुम बत्रा ने उद्घाटन के दौरान कहा,

“गर्मी की छुट्टियों में बच्चों और युवाओं का सही दिशा में मार्गदर्शन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस वर्कशॉप के माध्यम से हम उन्हें प्रकृति के करीब लाकर उनकी रचनात्मक शक्ति को निखारना चाहते हैं। प्रत्येक प्रतिभागी को उसकी रुचि अनुसार मार्गदर्शन मिलेगा, जिससे आत्मविश्वास और कला के प्रति प्रेम दोनों का विकास हो सके।”

कार्यशाला 2 जून से लेकर 6 जून तक दो सत्रों—प्रातः 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक तथा दोपहर 3 बजे से सांयकाल 5 बजे तक— निर्देशकीय और व्यावहारिक सत्रों के संयोजन में संचालित होगी। प्रतिदिन दो घंटे के प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को निम्नलिखित प्रमुख विधाओं की बारीकियाँ सिखाई जाएँगी:

  1. कैनवास पेंटिंग:
    • रंगों का चयन, संतुलन, और चित्रों में प्रकाश-छाया का महत्व।
    • प्राकृतिक दृश्यों, पुष्पों और स्थानीय स्थापत्य कला को कैनवास पर उकेरने की तकनीक।
    • रचनात्मक दृष्टिकोण और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के माध्यम से अपनी कहानी कहना।
  2. क्ले मॉडलिंग:
    • मिट्टी की बनावट समझना, उसे आकार देना और बुनियादी आकृतियाँ बनाना।
    • मानव-प्राणी और वास्तुशिल्पीय आकृतियों की डिज़ाइनिंग तकनीक।
    • मिट्टी से जुड़ाव एवं पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का विकास।
  3. डिजिटल पेंटिंग:
    • टैबलेट या कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर के माध्यम से रंगों का मिश्रण, ब्रश टेक्निक, और लेयरिंग।
    • आधुनिक कला की नई दिशाएँ और डिजिटल माध्यम से चित्र निर्माण की प्रक्रिया।
    • टेक्नोलॉजी का उपयोग कर पारंपरिक कला को डिजिटल युग में ढालना।
  4. फोटोग्राफी:
    • बेसिक कैमरा हैंडलिंग (मोबाइल कैमरा समेत), फ्रेमिंग, फोकसिंग और प्रकाश व्यवस्था।
    • प्रकृति, मानव आकृतियाँ और जनजीवन को कॅप्चर करने के विशेष उपाय।
    • संपादन सॉफ्टवेयर के माध्यम से फोटो को प्रोसेस करना और उसकी प्रस्तुति में सुधार।

नवाचारी एवं समग्र प्रशिक्षण

लोकेश वर्मा, जिन्हें पारंपरिक एवं आधुनिक कला दोनों का अनुभव है, ने बताया,

“इस वर्कशॉप में हमने परंपरागत चित्रकला के साथ-साथ फोटोग्राफी को भी शामिल किया है, ताकि प्रतिभागियों को संपूर्ण तरीके से फाइन आर्ट का एक पैकेज प्राप्त हो सके। कम समय में उन्हें रंगों, मिट्टी और कैमरे की बारीकियाँ समझना होगी, जिससे उनकी कल्पनाशक्ति को दिशा मिल सके।”

राज किरण द्विवेदी, डिजिटल पेंटिंग और फोटोग्राफी के विशेषज्ञ प्रशिक्षक, ने कहा,

“आज के समय में फ़ोटो और डिजिटल कला का महत्व बढ़ गया है। बच्चे और बड़े सभी मोबाइल या कैमरा लेकर चलते हैं, इसलिए यहां सीखाया जाएगा कि कैसे सही तरीके से दृश्य को कैप्चर करें, प्रकाश का उपयोग किस तरह करें और अंततः संपादन के माध्यम से एक उत्कृष्ट कलाकृति तैयार करें।”

रीना त्रिपाठी, जो स्वयं एक शिक्षिका एवं समाजसेवी हैं, ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा,

“यह वर्कशॉप बच्चों के लिए सिर्फ कला सीखने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी स्वयं की हॉबी को निखारने का भी मंच है। अभिभावक और बच्चे मिलकर इस कार्य में हिस्सा ले रहे हैं और इसके माध्यम से क्रिएटिविटी डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा।”

सीखने से लेकर प्रदर्शन तक का सफर

  • मनोरंजक एवं शैक्षिक दोनों पहलूः बच्चों को केवल कला की तकनीकी जानकारी नहीं, बल्कि एक रचनात्मक दृष्टिकोण भी सिखाया जाएगा, जिससे वे प्रकृति से जुड़े महसूस कर सकें।
  • समय का सदुपयोग एवं सुनियोजित दिनचर्या: दो घंटे के सत्र में प्रतिभागियों को एकाग्रता से सीखने के साथ-साथ समय प्रबंधन का भी महत्व समझाया जाएगा।
  • सर्टिफिकेट और पुरस्कार: कार्यशाला के समापन पर प्रशिक्षुओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को विशेष पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे, जो उनकी मेहनत को सार्थक बनाएंगे।
  • अंतर्दृश्य (इंस्टॉलमेंट) और प्रदर्शनी: 6 जून को श्री कृष्ण दत्त एकेडमी आर्ट गैलरी में एक विशेष आर्ट एग्ज़ीबिशन का आयोजन होगा, जहां प्रशिक्षण के दौरान बनाई गई विभिन्न कलाकृतियाँ प्रदर्शित की जाएँगी। इस अवसर पर क्षेत्र के सभी कला-प्रेमी, अभिभावक और आम नागरिक आमंत्रित हैं। प्रतिभागियों की कृतियाँ देखने के साथ-साथ इच्छुक लोग खरीदारी भी कर सकेंगे, जिससे बच्चों को अपने काम का वाणिज्यिक महत्व समझने का अवसर मिलेगा।

प्रतिभागियों की भागीदारी और उत्साह

वर्कशॉप के पहले दिन कैनवास के समक्ष रंगों का बिखराव देख उपस्थित सभी बच्चों, युवाओं एवं अभिभावकों ने ख़ूब उत्साह दिखाया। आरंभ में ड्राइंग स्केच, रंगों की पैलेट तैयार करना और क्ले मॉडलिंग के मूल तत्व सिखाए गए, जिसमें अधिकांश प्रतिभागियों ने अपनी सहज प्रतिभा का प्रदर्शन किया। युवा कलाकार अन्वेषा तिवारी ने बताया,

“मुझे यहां आकर बहुत अच्छा अनुभव हो रहा है। प्रकृति से जुड़कर कला सीखना अलग ही उत्साह देता है। मैंने आज पहली बार मिट्टी से छोटी-छोटी आकृतियाँ बनाईं, जिससे मेरी आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है।”

एक अन्य प्रतिभागी विराज मिश्रा ने कहा,

“डिजिटल पेंटिंग के बारे में मुझे पहले ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन आज प्रशिक्षक की सहायता से मैंने अपने पहले डिजिटल चित्र का निर्माण किया। इससे मेरी रूचि और बढ़ गई है।”

आत्मविश्वास और कौशल विकास

अतिरिक्त निदेशक कुसुम बत्रा ने बताया कि इस वर्कशॉप का उद्देश्य केवल कला सिखाना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास जगाना, समूह में काम करने की आदत डालना और समय का सदुपयोग सीखाना भी है। वे चाहती हैं कि प्रतिभागी यह जानें कि कला केवल रंगों का मेल नहीं, बल्कि एक संदेश, एक दृष्टिकोण और जीवन-दृष्टि भी हो सकती है।

प्रशिक्षक लोकेश वर्मा का योगदान भी उल्लेखनीय है, जिन्होंने पारंपरिक कला विधियों के साथ-साथ नवाचार को भी सम्मिलित कर दिया है, ताकि बच्चे स्थापत्य कला, नैचुरल टेक्सचर और आधुनिक प्रिंट मेथड की जानकारी भी प्राप्त कर सकें।

प्रशिक्षक राज किरण द्विवेदी ने आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में यह वर्कशॉप अन्य जिलों में भी आयोजित की जाएगी, ताकि प्रदेश भर के बच्चे अपनी प्रतिभा को पहचाने और कला की नई दिशाएँ तलाश सकें।

प्रतिभाओं का उत्कर्ष

छह दिवसीय वर्कशॉप के अंत में—6 जून 2025 को—श्री कृष्ण दत्त एकेडमी की आर्ट गैलरी में आयोजित होने वाली आर्ट एग्ज़ीबिशन की तैयारियाँ पूरी चरणबद्ध तरीके से की जा रही हैं। इस प्रदर्शनी में निम्नलिखित विशेषताएँ होंगी:

  • प्रशिक्षण के दौरान निर्मित प्रत्येक कलाकृति की प्रदर्शनी एवं व्याख्या।
  • प्रतिभागी बच्चों का लाइव आर्ट डेमोंस्ट्रेशन, जिससे आगंतुक उनकी प्रक्रिया को समझ सकें।
  • उत्तम कलाकृतियों पर पुरस्कार वितरण कार्यकम, जहां प्रथम तीन स्थान प्राप्त कलाकारों को रंग, ब्रश, क्ले किट जैसी सामग्री के साथ प्रशंसा पुरस्कार दिया जाएगा।
  • कलाप्रेमियों के लिए खरीदारी स्टाल, जहां वे छपे हुए पोस्टर, कैनवास पेंटिंग और शिल्प उत्पाद खरीद सकते हैं तथा कलाकारों का समर्थन कर सकते हैं।
  • संस्थान द्वारा प्रकाशित एक संक्षिप्त कैटलॉग, जिसमें प्रतिभागियों के नाम, कलाकृतियों की संक्षेप जानकारी और प्रशिक्षकों के लेख शामिल होंगे, ताकि आगंतुकों को जानकारीपत्रिका के रूप में सौंपा जा सके।

कला की उड़ान के लिए नए पंख

श्री कृष्ण दत्त एकेडमी, वृंदावन की यह पहल केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं के रचनात्मक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कला की इस साप्ताहिक यात्रा में प्रतिभागी न केवल विविध कलात्मक विधाओं से रूबरू होंगे, बल्कि प्रकृति के साथ गहरा संवाद कर पाएंगे। कार्यशाला के समापन पर होने वाली एग्ज़ीबिशन उन्हें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने और समाज के समक्ष अपनी पहचान बनाने का सुनहरा अवसर देगी।

इस प्रकार, “फैलाओ पंख, भरो उड़ान: कैनवास के रंग से हो नई पहचान” का संदेश पूरी तरह सार्थक होता दिख रहा है। कला के माध्यम से बच्चों को आत्मविश्वासी, सृजनात्मक और प्रकृति-संवेदनशील बनाना—यह स्वप्न अब श्री कृष्ण दत्त एकेडमी के प्रयास से साकार हो रहा है।