घूमने-फिरने का शौक आखिर किसे नहीं होता है। ऐसे में जब भी लोगों को समय मिलता है, तो वह बैग पैक करके अपनी पसंदीदा जगह पर घूमने और मौज-मस्ती करने के लिए पहुंच जाते हैं। हालांकि कामकाज करने वाले लोगों को ट्रिप प्लान करने के लिए लंबी छुट्टियों का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में अगर आप भी घूमने जाने का प्लान कर रहे हैं, तो जून के पहले सप्ताह में घूमने के लिए जा सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे आप जून के पहले सप्ताह में पूरे 4 दिनों के लिए घूमने का शानदार लुत्फ उठा सकते हैं।
जून 2025 लॉन्ग वीकेंड
जून के फर्स्ट वीक में अगर आप भी घूमने जाना चाहते हैं, तो आप आसानी से अपनी फैमिली, पार्टनर या दोस्तों संग ट्रिप प्लान कर सकते हैं। इसके लिए आप 05 जून से लेकर 09 जून के बीच घूमने के लिए जा सकते हैं। वहीं अगर आप 05 जून या 09 जून में से किसी एक दिन भी छुट्टी लेते हैं, तो आप पूरे चार दिन के लिए घूमने जा सकते हैं।
लॉन्ग वीकेंड तारीख
5 जून- गुरुवार-ऑफिस से छुट्टी ले सकते हैं।
6 जून- शुक्रवार (ईद उल-अजहा) की छुट्टी
7 जून- शनिवार (वीकेंड की छुट्टी)
8 जून- रविवार (वीकेंड की छुट्टी)
9 जून- सोमवार को आप ऑफिस से छुट्टी ले सकते हैं।
ऐसे में आप भी यदि 05 जून या 09 जून में से किसी भी एक दिन छुट्टी लेते हैं, तो आप पूरे चार दिन फैमिली या दोस्तों के साथ घूमने जा सकते हैं। वहीं जून की छुट्टियों में आप इन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं।
सांगला
अगर आप भी हिमाचल में शिमला, धर्मशाला या मनाली की भीड़भाड़ से दूर किसी शांत और हसीन जगह पर घूमने का प्लान कर रहे हैं, तो आपको सांगला की हसीन वादियों में जाना चाहिए। हिमाचल के किन्नौर में स्थित यह जगह खूबसूरत होने के साथ काफी शांत भी है। वहीं जून के महीने में सांगला का मौसम एकदम सुहावना रहता है।
मुख्य आकर्षण
कामरू किला
रक्छम गांव
बटसेरी गांव
डीडीहाट
डीडीहाट समुद्र तल से करीब 5 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित उत्तराखंड का एक फेमस और खूबसूरत हिल स्टेशन है। डीडीहाट कुमाऊं के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है। यह जगह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। यहां का शुद्ध और शांत वातावरण सैलानियों को बहुत आकर्षित करता है। जून में अधिकतर लोग यहां पर घूमने के लिए आते हैं।
मुख्य आकर्षण
बिर्थी झरना
अस्कोट अभयारण्य
भुरमुनी वॉटरफॉल
इन जगहों को करें एक्सप्लोर
बता दें कि देश में अन्य कई शानदार और खूबसूरत जगहें मौजूद हैं, जिन्हें आपको एक्सप्लोर करना चाहिए। आप हिमाचल प्रदेश में रोहड़ू, उत्तराखंड में चोपटा, नॉर्थ ईस्ट इंडिया में शिलांग या नॉर्थ सिक्किम आदि घूमने के लिए जा सकते हैं। जून की छुट्टियों में आप यहां पर ठंडी हवाओं का लुत्फ उठा सकते हैं।
एक्शन और एडवेंचर से भरपूर फिल्म धूम के तीनों पार्ट्स ने दर्शकों को खूब एंटरटेन किया. सालों से फैंस फिल्म के अगले सीक्वल का इंतजार कर रहे हैं और ऐसे में उनके लिए खुशखबरी है. ‘धूम 4’ की शूटिंग शुरू होने से लेकर रिलीज डेट तक, कई बड़ी अपडेट्स सामने आ गई हैं. फिल्म की स्क्रिप्ट कौन लॉक करेगा और इसे कौन डायरेक्ट करेगा, ये सब यहां जान लें.
‘धूम 4’ की 5 बड़ी बातें
‘धूम 4’ में रणबीर कपूर लीड रोल में नजर आने वाले हैं.
फिल्म की स्क्रिप्ट के लिए आदित्य चोपड़ा और श्रीधर राघवन एक साथ आए हैं.
‘धूम 4’ की शूटिंग अगले साल, यानी अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली है.
फिल्म साल 2027 में बड़े पर्दे पर रिलीज हो सकती है.
रणबीर कपूर स्टारर फिल्म को अयान मुखर्जी डायरेक्ट करेंगे.
‘धूम 4’ के लिए एक्साइटेड हैं रणबीर कपूर पिंकविला के मुताबिक- ‘आदित्य चोपड़ा श्रीधर राघवन के साथ धूम 4 की कहानी और पटकथा को डेवलप करने में करीब से शामिल रहे हैं. वे फिलहाल कहानी के मसौदे पर काम कर रहे हैं जो धूम 4 के साथ रीबूट के आसपास प्रमोशन के काबिल है. लीड किरदार निभाने वाले रणबीर कपूर भी बाइक पर डकैती की यात्रा पर जाने के लिए एक्साइटेड हैं.’
रणबीर की पर्सनैलिटी के हिसाब से किरदार रिपोर्ट में लिखा है- ‘रणबीर ‘धूम 4′ के लिए परफेक्ट ऑप्शन हैं और किरदार को भी उनकी पर्सनैलिटी और औरा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है. नई धूम फिल्म को ग्लोबल एक्शन स्टैंडर्ड्स को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है और सीन पैलेट, साथ ही कहानी भी पहले से मौजूद वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स से बहुत अलग होगी.’
‘वॉर 2’ के बाद ‘धूम 4’ पर फोकस करेंगे अयान मुखर्जी ‘धूम 4’ अप्रैल 2026 से फ्लोर पर आएगी और साल के आखिर तक फिल्म की शूटिंग को पूरा करने की प्लानिंग की जा रही है. अयान मुखर्जी ‘वॉर 2’ की रिलीज के बाद इस फिल्म के प्री-प्रोडक्शन पर फोकस करेंगे.
संकटमोचन की छाया में सौहार्द का संदेश: मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरि ने सूचना विभाग के गेट पर किया पत्रकार एसोसिएशन के भंडारे का शुभारंभ, भंडारे में दिखी लखनऊ की जीवंत गंगा-जमुनी तहज़ीब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बढ़चढ़कर की सहभागिता, सुप्रसिद्ध होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. पीयूष शुक्ला समेत महान विभूतियों को किया गया सम्मानित
उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन ने राज्य सूचना विभाग के गेट पर भव्य भंडारे का आयोजन किया।
प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल वहीद व उनकी टीम द्वारा संकटमोचन श्री हनुमान जी के पावन भंडारे का आयोजन किया गया।
मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरि ने भंडारे का शुभारंभ किया।
हर धर्म के लोगों ने मिलकर सहयोग किया, मुस्लिम समुदाय का भी अमूल्य योगदान रहा।
स्वास्थ्य शिविर, राशन किट, स्कूल बैग और पौधे वितरित किए गए।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत कई मंत्री, विधायक और पत्रकार शामिल हुए।
पत्रकारों के मुख्य संगठन NUJ (I) उत्तरप्रदेश की पूरी टीम ने भी भंडारे में पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।
आयोजन ने सेवा, सौहार्द और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
लखनऊ, रिपोर्ट: शिवसागर सिंह चौहान | True News UP: लखनऊ की ऐतिहासिक मिट्टी में रचा-बसा बड़ा मंगल, जब श्रद्धा, सेवा और सौहार्द के त्रिवेणी संगम में परिणत होता है, तब दृश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का प्रतीक बन जाता है। ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला उत्तर प्रदेश सूचना विभाग के मुख्य द्वार पर, जहां उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन के तत्वावधान में प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल वहीद व उनकी टीम द्वारा ज्येष्ठ माह के चौथे बड़े मंगल के अवसर पर संकटमोचन श्री हनुमान जी के पावन भंडारे का आयोजन किया गया। इस आयोजन में उपमुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, विधायक, विधान परिषद के सभापति, पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री सहित कई प्रमुख राजनेता उपस्थित रहे, साथ ही प्रशासनिक अधिकारी, धर्मगुरु, वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, चिकित्सक, व्यापारी वर्ग और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोगों ने भी आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
यह आयोजन केवल प्रसाद वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण बन गया। हज़ारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। विशेष बात यह रही कि आयोजन में हर धर्म और समुदाय के लोगों ने भागीदारी की और मुस्लिम समुदाय ने विशेष सहयोग देकर भाईचारे की मिसाल पेश की। भव्य भंडारे में सभी धर्मों और समुदायों की सहभागिता ने सामाजिक सौहार्द और एकता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया, वहीं जरूरतमंदों के लिए आयोजित निःशुल्क चिकित्सा शिविर में न सिर्फ जांच व परामर्श दिया गया, बल्कि निशुल्क दवाएं भी वितरित की गईं। इसके साथ ही 21 गरीब परिवारों को एक महीने की राशन किट और 21 बच्चों को स्कूल बैग देकर सेवा भाव को प्राथमिकता दी गई। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अतिथियों को पौधे भेंट कर हरित जागरूकता का संदेश दिया गया, जबकि राजनीति, पत्रकारिता, प्रशासन, और समाजसेवा से जुड़े गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी प्रभावशाली और प्रेरणादायक बना दिया।
संवेदनशील पत्रकारिता और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल
इस भंडारे ने साबित किया कि पत्रकारिता केवल शब्दों की लड़ाई नहीं होती, बल्कि सेवा और सामाजिक दायित्व की गहराइयों तक उतरने की भी ताकत रखती है। उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन द्वारा किया गया यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक परंपरा को निभाने वाला था, बल्कि उसने जरूरतमंदों की सेवा, समाज में सहयोग की भावना और सांप्रदायिक सौहार्द का ऐसा संदेश दिया, जिसे आने वाले समय तक याद किया जाएगा।
पत्रकार एसोसिएशन द्वारा आयोजित यह भव्य भंडारा केवल एक धार्मिक आयोजन भर नहीं था, बल्कि यह उस सामाजिक चेतना, सद्भाव और जनसेवा का प्रतिनिधि बनकर सामने आया, जिसकी मिसाल कम ही देखने को मिलती है। संकट मोचन भगवान हनुमान की कृपा के साथ इस आयोजन ने लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब, साम्प्रदायिक सौहार्द और मानवीय संवेदना की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।
यह आयोजन इस मायने में भी ऐतिहासिक रहा कि इसमें पत्रकारों की जीवंत और प्रतिबद्ध भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई। पत्रकार, जो दिन-रात समाज के हर पहलू को जनता तक पहुंचाने का कार्य करते हैं, उन्होंने इस बार न केवल आयोजन में नेतृत्व किया, बल्कि अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण भी प्रस्तुत किया। यह आयोजन यह दर्शाता है कि पत्रकार केवल कलम और कैमरे तक सीमित नहीं हैं, वे समाज की सेवा और जागरूकता में भी अग्रणी भूमिका निभाते हैं।
विशेष रूप से सराहना के पात्र हैं डॉ. आदर्श त्रिपाठी और उनके सहयोगी चिकित्सक, जिन्होंने जरूरतमंदों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन कर, न केवल स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई, बल्कि पत्रकारिता और चिकित्सा क्षेत्र के बीच समन्वय और मानवीय सेवा का सेतु भी निर्मित किया।
इस आयोजन की गरिमा को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, ऊर्जा मंत्री एके शर्मा, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र चौधरी, विधायक अरमान खान, पूर्व एमएलसी सिराज मेहदी, पत्रकार नेता हेमंत तिवारी, रालोद प्रवक्ता रोहित अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस, शिवशरण सिंह, सुशील दुबे, अजय सिंह के अलावा NUJ के अजय जायसवाल, आशीष मौर्य, अनुपम सिंह चौहान, तीर्थांकर गुहा, अरुण कुमार “टीटू”, शिव सागर सिंह चौहान, नागेंद्र सिंह, किरण सिंह एवं अन्य पत्रकार साथियों के साथ ही अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने और अधिक ऊँचाई प्रदान की।
साथ ही, मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरी, वरिष्ठ कवयित्री डॉ. रीमा सिन्हा, राष्ट्रीय कवि वेदव्रत बाजपेई, व्यापारी नेता संजय गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता तनवीर सिद्दीकी, इंसानियत वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष कुदरत उल्ला खान और अन्य समाजसेवियों की भागीदारी ने इस आयोजन को और अधिक प्रेरक और समरस बनाया।
इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश पूरे समाज में गया कि धर्म, सेवा और पत्रकारिता जब एकत्र होकर आगे बढ़ते हैं, तो वे केवल परंपराओं का निर्वहन नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त और प्रेरक सामाजिक आदर्श स्थापित करते हैं।
यूक्रेन ने रविवार (1 जून 2025) को ऑपरेशन स्पाइडर वेब (Operation Spiderweb) के तहत रूस के सैन्य हवाई अड्डों को निशाना बनाते हुए 40 बॉम्बर्स प्लेन को तबाह कर दिया. यूक्रेन ने 18 महीने की प्लानिंग के बाद इस ऑपरेशन को अंजाम दिया. यूक्रेन ने कम लागत वाले 150 छोटे FPV ड्रोन का इस्तेमाल किया, जिसमें से 118 ड्रोन ने रूस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है.
रूसी एयर डिफेंस सिस्टम को दिया चकमा
यूक्रेन सुरक्षा सेवा (SBU) ने इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उन्होंने ड्रोन को गुप्त तरीके से रूस सीमा के भीतर पहुंचाया गया. इन ड्रोन्स को दिन में कम दूरी से हमला करने के लिए ट्रकों पर लकड़ी के ढांचों से लॉन्च किया गया. ड्रोन रूस के सामरिक हवाई अड्डों के पास मोबाइल ट्रकों से लॉन्च किए गए, जिससे रूसी एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देना आसान हुआ. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस ऑपरेशन को शानदार उपलब्धि बताया.
यूक्रेन ने बदल दी युद्ध की परिभाषा
ऑपरेशन स्पाइडर वेब को खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इसने पारंपरिक एयर पावर को चुनौती दी है. यूक्रेन ने फाइटर जेट या क्रूज मिसाइलों को तैनात करने के बजाय विस्फोटकों से लैस सस्ते ड्रोन पर भरोसा किया, जो कारगर साबित हुआ. एक FPV ड्रोन की लागत 430 से 600 डॉलर (लगभग 36,000 से 50,000 रुपये) थी. इन्हीं सस्ते ड्रोन से यूक्रेन ने रूस के चार हवाई अड्डों पर 40 विमानों (Tu-95, Tu-22M3, A-50) को तबाह किया.
दशकों से एयरफोर्स की ताकत को बढ़ाने में बड़े औद्योगिक क्षमता और हाई टेक्नोलॉजी वाले देशों का वर्चस्व रहा है. ये ऑपरेशन दर्शाता है कि कैसे पारंपरिक हवाई ताकत के बिना भी कम लागत में दुश्मनों को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सकता है. पारंपरिक हवाई ऑपरेशन में महीनों भर की प्लानिंग, बेस्ट फाइटर जेट, ईंधन भरने वाले टैंकर सैटेलाइट कॉर्डिनेशन की जरूरत होती है. ऑपरेशन स्पाइडर वेब इन सभी मामलों में कमजोर था, लेकिन फिर भी यूक्रेन ने युद्ध के क्षेत्र में नया इतिहास लिख दिया है.
भारत के लिए सबक
ड्रोन अब दुनिया भर में तेजी से मुख्य शक्ति बनता जा रहा है. स्पाइडर वेब हमला इस बात का सबूत है कि यूएवी या मानव रहित हवाई ताकत भविष्य के युद्धों की आधारशिला है. इससे सेना दुश्मन के इलाके में बहुत अंदर तक जा सकती है. इससे पायलट के जान को जोखिम भी नहीं होगा.
भारत को मानवरहित प्रणालियों की ओर तेजी से बढ़ना होगा. भारत ने अपने लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और हवाई परिवहन में दशकों तक खूब खर्च किए हैं, लेकिन अब भविष्य में मानव रहित और एआई के इस्तेमाल वाला ड्रोन होगा. भारत ने उस दिशा में शुरुआती कदम उठाए हैं, लेकिन उतनी तेजी से नहीं. यूक्रेनी ऑपरेशन से भारत को स्वदेशी ड्रोन, सशस्त्र यूएवी पर आगे बढ़ना चाहिए.
रूस-यूक्रेन के बीच तुर्किये के इस्तांबुल में सोमवार (2 जून 2025) को शांति वार्ता को लेकर बैठक हुई. करीब एक घंटे तक चली बैठक में दोनों देशों के तेवर को देखते हुए एक चीज तो साफ हो गई कि रूस-यूक्रेन के बीच तत्काल सीजफायर तो नहीं हो सकता है. हालांकि दोनों देशों के बीच कुछ चीजों को लेकर सहमति भी बनी है.
मारे गए सैनिकों के शवों की अदला-बदली
न्यूज एजेंसी एसोसिएट प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक शांति वार्ता में रूस और यूक्रेन युद्ध में मारे गए 6,000 सैनिकों के शवों की अदला-बदली करने पर सहमत हुए. रूस के प्रतिनिधि मेडिंस्की ने कहा कि ग्रे जोन के जरिए शवों को सौंपा जाएगा. हालांकि जिस क्षेत्र में शवों को आदान प्रदान होगा वहां सीजफायर जरूरी है. मेडिंस्की के अनुसार कुछ फ्रंटलाइन इलाकों के लिए सीजफायर प्रस्तावित किया गया है.
दोनों देशों के बीच स्थायी समिति का गठन होगा
रूस-यूक्रेन के बीच इस शांति वार्ता में 1000-1000 युद्धबंदियों की अदला-बदली पर भी सहमति बनी है. हालांकि इसकी प्रकिया कब शुरू होगी इसकी जानकारी नहीं दी गई है. इसके लिए एक स्थायी समिति के गठन पर दोनों देश राजी हुए हैं. इसके समिति के माध्यम से भविष्य में युद्धबंदियों की अदला-बदली की प्रकिया को तेजी और सुचारू ढंग से पूरा किया जाएगा.
यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले रक्षा मंत्री रुस्तम उमरोव ने बताया कि वार्ता की मेज पर रूस ने शत्रुता समाप्त करने के लिए क्रेमलिन की शर्तों को बताते हुए एक ज्ञापन प्रस्तुत किया. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि यूक्रेन के अधिकारियों को दस्तावेज़ की समीक्षा करने और प्रतिक्रिया पर निर्णय लेने के लिए एक सप्ताह का समय चाहिए. उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने 20 जून से 30 जून के बीच शांति वार्ता पर आगे की बातचीत का प्रस्ताव रखा है.
सीजफायर को लेकर रूस की शर्त
रूस की ओर से दिए गए ज्ञापन में सुझाव दिया गया कि यूक्रेन उन चार क्षेत्रों से अपनी सेना वापस ले ले, जिन्हें रूस ने सितंबर 2022 में कब्जा कर लिया था, लेकिन युद्धविराम की शर्त के रूप में कभी पूरी तरह से कब्जा नहीं किया. इसमें कहा गया कि यूक्रेन अपनी धरती पर किसी भी तीसरे देश की सैन्य उपस्थिति पर प्रतिबंध लगा दे.
रूसी दस्तावेज में आगे प्रस्ताव दिया गया, “यूक्रेन मार्शल लॉ समाप्त करे और चुनाव कराए, जिसके बाद दोनों देश एक व्यापक शांति संधि पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. यूक्रेन नाटो में शामिल होने के अपने प्रयास को त्याग दे. यूक्रेन अपने सशस्त्र बलों के आकार पर सीमा निर्धारित करेगा और यूक्रेनी भाषा के समान रूसी भाषा को देश की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता देगा.” हालांकि यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने पहले भी मास्को की सभी मांगों को अस्वीकार कर दिया.