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“शाहरुख खान ने भावुक होकर धर्मेंद्र को अंतिम विदाई दी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र उनके लिए पिता जैसे थे और हमेशा उनकी यादों में जीवित रहेंगे.”

दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र के निधन से पूरी इंडस्ट्री शोक में है. धर्मेंद्र का 24 नवंबर को निधन हो गया. धर्मेंद्र के फैंस का रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं फैमिली भी पूरी तरह टूट गई है. अब एक्टर शाहरुख खान ने धर्मेंद्र को ट्रिब्यूट दिया है और उनके लिए एक पोस्ट शेयर किया है. शाहरुख ने धर्मेंद्र के साथ एक फोटो शेयर की है. इस फोटो में धर्मेंद्र शाहरुख के चेहरे पर हाथ रखकर प्यार लुटाते नजर आ रहे  हैं.

शाहरुख खान ने दिया ट्रिब्यूट

शाहरुख खान ने लिखा, ‘रेस्ट इन पीस धरम जी. आप मेरे लिए फादर फिगर समान थे. मुझ पर आशीर्वाद और प्यार बरसाने के लिए थैंक्यू. ये न सिर्फ उनके परिवार के लिए बल्कि दुनियाभर के सिनेमा और फिल्म लवर के लिए एक बहुत बड़ा और कभी न पूरा होने वाला नुकसान है. आप अमर हैं और आपकी आत्मा आपकी फिल्मों और आपके खूबसूरत परिवार के जरिए हमेशा जिंदा रहेगी. आपसे हमेशा बहुत सारा प्यार.’

एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा, प्रियंका चोपड़ा, करीना कपूर, करण जौहर, आशा पारेख जैसे एक्टर्स ने धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि दी. सलमान खान, अभिषेक बच्चन, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, गोविंदा, दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह श्मशान घाट पहुंचे थे. वहीं एक्ट्रेस काजोल को धर्मेंद्र के घर देखा गया था.

मालूम हो कि धर्मेंद्र काफी समय से बीमार थे. उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसी वजह से उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था. हॉस्पिटल में धर्मेंद्र का कुछ दिन तक इलाज चला. हालांकि, एक बार उनकी तबीयत गंभीर हो गई थी. लेकिन फिर धीरे-धीरे वो ट्रीटमेंट को रिस्पॉन्ड करने लगे. बाद उनकी फैमिली उन्हें घर ले आई थी. घर से ही धर्मेंद्र का इलाज चला था. हालांकि, 24 नंवबर को धर्मेंद्र इस दुनिया को छोड़कर चले गए. धर्मेंद्र के जाने से पूरी फैमिली शॉक्ड रह गई है. हेमा मालिनी को श्मशान घाट देखा गया. हेमा ने पैपराजी के सामने हाथ भी जोड़े

Chromium Exposure Health Risks:“मानव शरीर में क्रोमियम का स्तर कब बढ़ जाता है, और ऐसा होने पर किन बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है?”

क्रोमियम एक नेचुरल तत्व है, जो धरती की सतह, पानी, भोजन और हमारे आस-पास के एटमॉस्फियर में थोड़ी मात्रा में मौजूद रहता है. इसकी दो प्रमुख स्थिति होती है. जिसमें, जो हमारे हेल्थ के लिए सही है वह है ट्राइवैलेंट क्रोमियम, जो बहुत कम मात्रा में शरीर के लिए जरूरी माना जाता है,और हेक्सावैलेंट क्रोमियम, जो बेहद जहरीला होता है और एक साबित मानव कार्सिनोजन माना जाता है।

जब शरीर में खासकर हेक्सावैलेंट क्रोमियम का लेवल बढ़ जाता है, तो यह कई तरह के गंभीर स्वास्थ्य असर पैदा कर सकता है. हेक्सावैलेंट क्रोमियम सेल्स के भीतर आसानी से प्रवेश कर लेता है और अंदर पहुंचकर रिएक्टिव ऑक्सीजन बनने लगता है, जिससे डीएनए को नुकसान होता है. खून में पहुंचने के बाद यह लिवर, किडनी, लंग्स और हड्डियों तक जाकर सेल्स को नुकसान पहुंचा सकता है और कई बीमारियों की शुरुआत कर सकता है.

खून में क्रोमियम बढ़ने से क्या बीमारियां हो सकती हैं?

कैंसर

National library of medical science के अनुसार, इससे सबसे बड़ा खतरा कैंसर का है. IARC (International Agency for Research on Cancer) ने Cr(VI) यानी हेक्सावैलेंट क्रोमियम को ग्रुप-1 कार्सिनोजन माना है. इसका मतलब इसमें इंसानों में कैंसर पैदा करने के पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं. क्रोमियम-VI को सांस के साथ लेना फेफड़ों, नाक और साइनस के कैंसर से जुड़ा हुआ पाया गया है. क्रोमियम से दूषित पानी पीने पर डाइजेशन सिस्टम से जुड़े कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है.

 खून से संबंधित बीमारियां

तमाम मेडिकल रिपोर्ट्स बताते हैं कि खून में क्रोमियम की मात्रा बढ़ने से ब्लड सेल्स  की सामान्य काम करने की क्षमता प्रभावित होती है. कई स्टडीज में माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान, डीएनए डैमेज और रेड ब्लड सेल्स के टूटने  जैसे प्रभाव देखे गए हैं. इससे एनीमिया, थकान और शरीर की ऑक्सीजन वहन क्षमता कम हो सकती है.

किडनी और लिवर डैमेज

किडनी और लिवर शरीर के मुख्य डिटॉक्सीफिकेशन ऑर्गन हैं. क्रोमियम की हाई मात्रा, खासकर Cr(VI), इन अंगों में जमा होकर किडनी की ट्यूब्यूल्स को नुकसान पहुंचा सकती है और लिवर की काम करने की क्षमता को कम कर सकती है.

लंग्स पर असर

क्रोमियम के जर्रे या धुएं को सांस के साथ लेने पर वायुमार्गों में जलन, सांस फूलना, अस्थमा का बढ़ना और क्रॉनिक लंग्स की बीमारियां हो सकती हैं. खून में इसका स्तर बढ़ा मिले तो यह शरीर में भारी एक्सपोजर का संकेत है.

क्रोमियम कैसे बढ़ता है?

    • क्रोमियम शरीर में अलग-अलग माध्यमों से अधिक पहुंच सकता है:
    • उद्योगों में क्रोमियम की धूल या धुआं सांस के साथ अंदर जाने से
    • दूषित पानी या भोजन के सेवन से
    • मिट्टी या धातु के संपर्क से
    • कुछ मामलों में त्वचा के जरिए

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

WTC Record: “WTC में अब तक का सबसे बड़ा स्कोर क्या है? वॉर्नर से लेकर शुभमन गिल तक—जानें पूरी सूची.”

आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में एक बल्लेबाज की असली परीक्षा होती है – लंबी पारी, मुश्किल हालात और टीम को मैच में मजबूत स्थिति में पहुंचाना. अब तक इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में कई बल्लेबाजों ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किए हैं, जिनमें डेविड वॉर्नर, हैरी ब्रूक, शुभमन गिल जैसे बड़े नाम शामिल हैं. आईये नजर डालते हैं WTC इतिहास की पांच सबसे बड़ी पारियों पर.

डेविड वॉर्नर – ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया के विस्फोटक ओपनर डेविड वॉर्नर ने 2019 में एडिलेड टेस्ट में पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 335 रन की पारी खेली. 418 गेंदों की इस मैराथन पारी में वॉर्नर ने 39 चौके और 1 छक्का जड़ा. यह अभी तक WTC की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी है, जिसने विपक्षी गेंदबाजों को पूरी तरह बेबस कर दिया.

हैरी ब्रूक – इंग्लैंड

इंग्लैंड के युवा बल्लेबाज हैरी ब्रूक ने अक्टूबर 2024 में पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान में 317 रन ठोक कर दुनिया का ध्यान खींच लिया. 322 गेंदों की इस तेज तर्रार पारी में उन्होंने 98 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 29 चौके और 3 छक्के लगाए. ब्रूक की यह पारी इंग्लैंड टेस्ट इतिहास की भी सबसे खास पारियों में शामिल है.

शुभमन गिल – भारत

टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल ने जुलाई 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम में 269 रन की धैर्यपूर्ण और क्लासिक पारी खेली. 387 गेंदों में खेली गई इस पारी में गिल ने 30 चौके और 3 छक्के जड़े. उनकी यह पारी भारत की WTC यात्रा में टर्निंग पॉइंट मानी जाती है. गिल ने लगभग 8 घंटे क्रीज पर बिताकर इंग्लैंड के गेंदबाजों को थका दिया था.

जैक क्रॉउली – इंग्लैंड 

इंग्लैंड के लंबे कद के ओपनर जैक क्रॉउली ने 2020 में साउथैम्पटन में पाकिस्तान के खिलाफ 267 रन बनाए थे. 393 गेंदों में 34 चौकों की मदद से खेली गई यह पारी उनकी टेस्ट करियर की सबसे बड़ी पारी है. उन्होंने इंग्लैंड को विशाल बढ़त दिलाई और मैच का रुख बदल दिया.

जो रूट – इंग्लैंड

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जो रूट ने अक्टूबर 2024 में पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान में 262 रन ठोक दिए. 375 गेंदों की इस शानदार पारी में उन्होंने 17 चौके लगाए. रूट की यह पारी बेहतरीन तकनीक और धैर्य की मिसाल रही.

Ozone Pollution Health Effect:“दिल्ली और मुंबई में ओजोन प्रदूषण बढ़ने से खतरा बढ़ा—जानें, यह आपकी फेफड़ों की सेहत पर कितना गंभीर असर डाल सकता है.”

 कुछ महीने महीने पहले सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को बताया था कि ग्राउंड-लेवल ओज़ोन (O₃) प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका नेशनल कैपिटल रीजनहै, जबकि इसके बाद नंबर आता है मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन  का. ट्रिब्यूनल में दाखिल हलफनामे में CPCB ने देश के 10 बड़े क्षेत्रों में ओजोन लेवल का एनालिसिस किया. रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में NCR के 57 में से 25 एयर मॉनिटरिंग स्टेशन राष्ट्रीय आठ घंटे वाले ओजोन मानक से 2 प्रतिशत से अधिक ऊपर थे. मुंबई में भी स्थिति अलग नहीं थी, यहां 45 में से 22 स्टेशन सुरक्षित सीमा को पार कर चुके थे. NGT ने इस मामले पर पिछले अगस्त एक न्यूज़ रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें भारत में बढ़ते ओजोन प्रदूषण को लेकर चिंता जताई गई थी. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे ये आपके लंग्स को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

इससे कौन सी दिक्कत होती है?

पीआईबी की एक रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण उन प्रमुख कारणों में से एक है जो सांस संबंधी बीमारियों और उनसे जुड़ी दिक्कतों को बढ़ाता है. CPCB ने ग्राउंड-लेवल ओजोन के संपर्क से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर कोई स्पेशल सर्वे नहीं किया है, लेकिन ओजोन (O₃) के प्रभाव को लेकर यह तथ्य सामने आते हैं:

    • ओजोन को सांस के साथ अंदर लेने पर सीने में दर्द, खांसी, जी मिचलाना, गले में जलन और कंजेशन जैसी समस्याएं दिख सकती हैं.
    • O₃ का प्रभाव ब्रोंकाइटिस, हार्ट रोग, एम्फीसिमा और अस्थमा जैसी बीमारियों को और गंभीर बना देता है और लंग्स की क्षमता घटा सकता है.
    • लंबे समय तक ओजोन के संपर्क में रहने से लंग्स को स्थायी नुकसान भी हो सकता है.
    • यह शरीर को एलर्जेन यानी एलर्जी पैदा करने वाले कारकों के प्रति और अधिक संवेदनशील बना देता है.

लंग्स को कितना नुकसान पहुंचाता है?

अमेरिकी पर्यावरण एजेंसी (EPA) के अनुसार, ग्राउंड-लेवल ओजोन लंग्स की कार्यक्षमता को सीधे कम कर देता है. ओजोन सांस लेते ही वायुमार्गों  की अंदरूनी परत पर असर डालता है, जिससे सूजन और जलन हो सकती है. EPA बताता है कि ओजोन के संपर्क में आने से गहरी सांस लेना मुश्किल हो सकता है और FEV₁ जैसी लंग्स की क्षमता मापने वाली रीडिंग भी तुरंत कम पाई गई है. यह असर उन लोगों में और ज्यादा दिखता है जिन्हें पहले से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या अन्य सांस संबंधी समस्याएं होती हैं.

EPA यह भी बताता है कि बार-बार या लंबे समय तक ओजोन प्रदूषण में रहने से लंग्स के टिश्यू को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है. लगातार सूजन और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस की वजह से एयरवेज मोटे होने लगते हैं और समय के साथ लंग्स में स्कारिंग तक बन सकती है, जो रिवर्स नहीं होती. यही कारण है कि ओजोन को एक साइलेंट लंग डैमेजर माना जाता है, जो धीरे-धीरे लंग्स की क्षमता घटाता रहता है और सांस की बीमारियों को और गंभीर कर देता है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Watery Eyes In The Morning: “सुबह उठते ही आंखों से पानी आने लगे तो यह शरीर में किसी ज़रूरी तत्व की कमी का संकेत हो सकता है.”

हमारी आंखों से पानी आना कई वजहों से हो सकता है. अगर सुबह उठते ही आपकी आंखें ज्यादा नम या पानी से भरी लगती हैं, तो यह एपिफोरा नाम की स्थिति भी हो सकती है. एपिफोरा का मतलब है आंखों का अत्यधिक पानी बहाना या तो आंखें जरूरत से ज्यादा आंसू बना रही होती हैं या फिर आंसू निकालने वाला सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा होता. चलिए, आपको बताते हैं कि सुबह आंखों में पानी क्यों आता है

सुबह आंखों से पानी आने की वजह

rauteyecare के अनुसार, कई बार सुबह-सुबह आंखों से पानी आने के पीछे ये सामान्य कारण होते हैं. अचानक रोशनी बदलने से आंखें आंसू बनाने लगती हैं. ठंडी हवा, तेज रोशनी, धुआं, धूल, केमिकल्स या मच्छर भगाने वाली स्प्रे जैसी चीजें भी आंखों को चुभन देकर पानी ला सकती हैं. कई लोगों को एलर्जिक राइनाइटिस होता है, जिसमें छींक आना, नाक बहना और आंखों से पानी आना, ये सब बेडरूम में मौजूद धूल, मिट्टी, पालतू जानवरों की डैंडर या ठंडी हवा से ट्रिगर हो सकता है.

कभी-कभी यह किसी आंख की बीमारी का संकेत भी होता है

1. सूखी आंखें 

अजीब लगता है, लेकिन हां, सूखी आंखें भी पानी ला सकती हैं. आंखों के ऊपर एक टीयर फिल्म होती है जिसमें तीन लेयर होती हैं म्यूकस, पानी और तेल की परत. ड्राई आई में पानी वाली परत कम बनती है या तेल वाली परत कमजोर होने से आंसू जल्दी सूख जाते हैं. जब आंख सूखती है, तो शरीर तुरंत ज्यादा पानी वाली परत बनाने लगता है. पर अगर तेल की परत कमजोर है, तो ये नए आँसू आँख पर टिक नहीं पाते और बाहर बह जाते हैं. इसलिए आँख अंदर से सूखी रहती है, लेकिन बाहर पानी आता है.

2. नींद में पलकें पूरी तरह बंद न होना

कुछ लोगों की पलकें सोते समय पूरी तरह बंद नहीं होतीं, जिससे आंख का एक हिस्सा रातभर सूख जाता है. सुबह उठते ही शरीर सूखी आँख को बचाने के लिए अचानक आंसू बना देता है, जिससे आंख पानी-पानी लगती है.

3. कॉर्नियल इरोजन

कभी हल्की चोट, जैसे नाखून या कागज के किनारे से कॉर्निया पर लग जाती है. शुरू में ठीक लगती है, लेकिन ऊपर की परत ठीक से चिपकती नहीं. सुबह आंख खोलते ही यह परत फिर छिल सकती है, जिससे, तेज पानी, चुभन रोशनी से परेशानी (फोटोफोबिया जैसे लक्षण आते हैं.

सुबह आंखों में पानी आने पर क्या करें?

    • सुबह कमरे में रोशनी धीरे-धीरे आने दें सीधे तेज लाइट न पड़े.
    • पंखे या AC की सीधी हवा में न सोएं.
    • कमरे में नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर या पानी से भरा कटोरा रखें.
    • एलर्जी हो तो साफ और धुले हुए बेडशीट-पिलो कवर का इस्तेमाल करें; एयर प्यूरीफायर फायदेमंद है.
    • रात में कमरे में मच्छर-रोधी स्प्रे या तेज केमिकल वाली चीजें न प्रयोग करें.

सुबह वॉक के समय ठंडी हवा से बचने के लिए चश्मा पहनें; बाहर निकलने से पहले आर्टिफिशियल टीयर या सलाइन ड्रॉप डालना मददगार हो सकता है. अगर पलक की किनारों पर इंफेक्शन, ऑयल लेयर की समस्या, कॉर्नियल इरोजन या एक्सपोजर केराटोपैथी हो, तो डॉक्टर का इलाज जरूरी है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.