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Who Is Ayushi Soni: कौन हैं आयुषी सोनी? WPL में रिटायर्ड आउट होने वाली पहली बल्लेबाज़ बनकर रचा इतिहास

विमेंस प्रीमियर लीग 2026 में गुजरात जायंट्स के लिए खेलने वाली आयुषी सोनी का नाम रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो गया है. आयुषी डबल्यूपीएल में रिटायर्ड आउट होने वाली पहली बल्लेबाज बन गई हैं. दिल्ली की रहने वाली इस दाएं हाथ की बल्लेबाज ने डब्ल्यूपीएल 2026 के मैच नंबर 6 में डेब्यू किया, जो नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में मंगलवार यानी 13 जनवरी को गुजरात जायंट्स और मुंबई इंडियंस के बीच खेला गया. गुजरात जॉयंट्स की टीम मैनेजमेंट ने उन्हें नंबर 6 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा, लेकिन सोनी 14 गेंदों में सिर्फ 11 रन ही बना पाईं. इसके बाद पारी के 17वें ओवर की शुरुआत से पहले उन्हें रिटायर्ड आउट करने का फैसला किया गया.

आयुषी की रिप्लेसमेंट ने खेली ताबड़तोड़ पारी

आयुषी सोनी के रिटायर्ड आउट होने के बाद बल्लेबाजी करने भारती फूलमाली आईं, जिन्होंने ताबड़तोड़ बैटिंग की. इस दाएं हाथ की बल्लेबाज जो घरेलू क्रिकेट में विदर्भ के लिए खेलती हैं, उन्होंने मौके का पूरा फायदा उठाया और सिर्फ 15 गेंदों में 36 रन बनाकर नॉट आउट रहीं. इस पारी की मदद से गुजरात जायंट्स 20 ओवर में 192/5 का स्कोर बना पाई. फुलमाली ने अपनी ताबड़तोड़ पारी में 3 चौके और 3 छक्के लगाए.

कौन हैं आयुषी सोनी? 

घरेलू क्रिकेट में दिल्ली की ओर से खेलने वाली आयुषी सोनी 25 साल की दाएं हाथ की बल्लेबाज हैं. उन्हें 27 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली में हुई डब्ल्यूपीएल 2026 मेगा ऑक्शन में गुजरात जॉयंटस ने 30 लाख रुपये में खरीदा था. सोनी ने 23 मार्च, 2021 को लखनऊ में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत के लिए एक टी20 इंटरनेशनल मैच खेला है, लेकिन उस मैच में उन्हें बल्लेबाजी या गेंदबाजी करने का मौका नहीं मिला था. डब्ल्यूपीएल 2026 में मुंबई इंडियंस के खिलाफ अनुष्का शर्मा की जगह आयुषी को गुजरात की प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया. अनुष्का को रविवार यानी 11 जनवरी, 2026 को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मैच के दौरान चोट लगी थी, और वो अब कुछ समय के लिए मैदान से बाहर रहेंगी.

Effects Of Body Shaming On Mental Health:सावधान! आपका एक कमेंट किसी की जान के लिए बन सकता है खतरा, स्टडी में सामने आया बॉडी शेमिंग का डरावना सच

किसी के रंग को लेकर, किसी के शरीर की बनावट को लेकर. यहां तक कि कौन क्या खाता है, कैसे रहता है, क्या बोलता है जैसे तमाम मुद्दे हैं, जिनको लेकर इंसान को ट्रोल होना पड़ता है. यह दिक्कत सालों से चली आ रही है. इसको लेकर आई एक स्टडी में बताया गया है कि युवाओं में बॉडी इमेज को लेकर बढ़ती चिंता मेंटल हेल्थ समस्या बनती जा रही है. यह परेशानी सिर्फ मोटापे से जूझ रहे युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कम वजन वाले युवा भी उतनी ही गंभीर मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं. स्टडी में सामने आया है कि शरीर के वजन के दोनों छोरों पर मौजूद करीब हर दूसरा युवा बॉडी इमेज से जुड़ी मीडियम से गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहा है.

क्या निकला है रिसर्च में?

Journal of Education and Health Promotion में प्रकाशित यह अध्ययन, एम्स–आईसीएमआर के युवा एडल्ट में वजन कंट्रोल पर चल रहे रिसर्च प्रोग्राम का हिस्सा है. इसमें 18 से 30 साल के 1,071 युवाओं को शामिल किया गया, जो एम्स की ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे थे. स्टडी के मुताबिक, 49 प्रतिशत मोटे और 47 प्रतिशत कम वजन वाले युवाओं ने गंभीर बॉडी इमेज चिंता की शिकायत की, जबकि सामान्य या थोड़ा ज्यादा वजन वाले युवाओं में यह आंकड़ा करीब 36 प्रतिशत रहा.

स्टडी में शामिल युवाओं में करीब 25 प्रतिशत मोटापे से पीड़ित और 11 प्रतिशत कम वजन वाले थे. इनमें से ज्यादातर छात्र थे और मध्यम इनकम फैमिली से आते थे. आंकड़ों से पता चला कि कम वजन वाले युवा सामान्य वजन वालों की तुलना में करीब दोगुना, जबकि मोटापे से जूझ रहे युवा लगभग तीन गुना ज्यादा बॉडी इमेज तनाव झेल रहे थे.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

रिसर्च से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि वजन से जुड़ी समस्याओं का इलाज मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करके संभव नहीं है. मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर और रिसर्च प्रमुख डॉ पियूष रंजन के मुताबिक, “वजन कंट्रोल सिर्फ वजन घटाने तक सीमित नहीं है. अगर इमोशनल समस्याओं पर ध्यान न दिया जाए, तो युवा लाइफस्टाइल प्रोग्राम बीच में ही छोड़ देते हैं. इसलिए पोषण देखभाल के साथ मानसिक जांच को जोड़ना बेहद जरूरी है.” उन्होंने आगे बताया कि सामान्य वजन के लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं.

लोग वजन कम करने से पीछे हट जाते हैं

इस स्टडी का नेतृत्व न्यूट्रिशनिस्ट और पीएचडी स्कॉलर वारिशा अनवर ने किया. उन्होंने पाया कि कई युवा वजन घटाने की शुरुआत पूरे जोश के साथ करते हैं, लेकिन समय के साथ मानसिक थकान, बॉडी इमेज की चिंता, पढ़ाई का दबाव और जीवन में बदलाव उन्हें पीछे खींच लेते हैं. इससे भारत में वजन कंट्रोल को लेकर अपनाए जा रहे सिर्फ कैलोरी के नजरिए की कमी साफ झलकती है.

सामाजिक दबाव

रिसर्चर का मानना है कि समाज में मौजूद सुंदर बनने की होड़ मानसिक तनाव को और बढ़ाती है, जिससे युवाओं की प्रेरणा, इलाज से जुड़े रहने की क्षमता और लंबे समय की सेहत प्रभावित होती है. हमारे समाज में लोग लुक और बॉडी टेक्सचर से लोगों को जज करते हैं. यह सिर्फ समाज में ही नहीं, परिवार के अंदर भी इंसान को देखने को मिलता है

क्या होता है बॉडी शेमिंग?

बॉडी शेमिंग का सीधा मतलब है किसी के शरीर को लेकर कोई भी निगेटिव बात कहना. यह आप खुद के लिए भी कर सकते हैं और दूसरों के लिए भी. इसमें किसी के वजन, उम्र, बाल, कपड़े, खाने की पसंद या वो कैसा दिखता है, इन सबका मजाक उड़ाना शामिल है.

आजकल बॉडी शेमिंग हर जगह है. चाहे वह किसी के मोटापे पर मारा गया कोई कमेंट हो या सोशल मीडिया पर दिखने वाली वो “परफेक्ट बॉडी” वाली फोटो, जो असलियत में मुमकिन नहीं होती. ये सब चीजें हमें अपने शरीर को लेकर शर्मिंदा महसूस कराती हैं. चाहे कोई हमें सीधे बोले या किसी और को, यह हमारे मेंटल हेल्थ के लिए बहुत नुकसानदायक है. इससे मन में हीन भावना आती है और हमें लगता है कि हमारी वैल्यू सिर्फ हमारे लुक से है.

बॉडी शेमिंग से जुड़ी परेशानियां

  • हर वक्त घबराहट और बेचैनी रहना
  • अपनी बॉडी में कमियां ही ढूंढते रहना
  • खुद को नुकसान पहुंचाने के ख्याल आना
  • लाइफ की क्वालिटी खराब होना और हर वक्त टेंशन में रहना

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

ट्रंप का बड़ा फैसला: मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकी संगठन घोषित करेगा अमेरिका, किन देशों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

अमेरिका ने मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन को आतंकवादी घोषित किया है. इस संगठन को मिस्र, लेबनान, जॉर्डन में आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है. अमेरिका इजराइल विरोधी देशों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर रहा है. यह आदेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश के हफ्तों बाद आया है, जिसमें उन्होंने अपने प्रशासन को इस समूह को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था.

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बयान दिया है. इसमें उन्होंने कहा कि ये घोषणाएं मुस्लिम ब्रदरहुड चैप्टर की हिंसा और अस्थिरता को रोकने के लिए चल रहे लगातार प्रयास की शुरुआती कार्रवाई को दर्शाती है. चाहे वो कहीं भी हों.

उन्होंने कहा, ‘संयुक्त राज्य अमेरिका इन मुस्लिम ब्रदरहु़ड चैप्टर को आतंकवाद में शामिल होने या उसका समर्थन करने, संसाधनों से वंचित करने के लिए सभी उपलब्ध साधनों का उपयोग करेगा.’

अमेरिका की इन घोषणाओं के बाद अब किसी भी तरह की मदद देना गैरकानूनी हो गया है. इनपर अमेरिका में घुसने पर भी रोक लगाई गई है. साथ ही रेवन्यू रोकने के लिए कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं.

क्या है ब्रदरहुड संगठन? 

1928 में मिस्र के मुस्लिम विद्वान हसन अल बत्रा द्वारा इस ग्रुप को स्थापित किया गया था. मुस्लिम ब्रदरहुड की पूरे मध्यपूर्व में कई ब्रांच हैं. इनमें राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन शामिल हैं. इनमें यह शांतिपूर्ण राजनीतिक भागीदारी के लिए प्रतिबद्धता जाहिर करते हैं. लेबनान में मुस्लिम ब्रदरहुड चैप्टर लेबनान की संसद में प्रतिनिधित्व करता है. इसे अल जमा अल इस्लामिया के नाम से जाना जाता है.

साल 2012 में मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड ने 2012 में देश का एकमात्र लोकतांत्रिक रूप से आयोजित राष्ट्रपति चुनाव जीता था. हालांकि, राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को एक साल बाद हटा दिया गया था. 2019 में जेल में उनकी मौत हो गई थी.

इजिप्ट ने मुस्लिम ब्रदरहुड को भी गैरकानूनी घोषित किया

इजिप्ट ने भी मुस्लिम ब्रदरहुड को गैरकानूनी घोषित कर दिया है. 2013 से ग्रुप के नेताओं और सदस्यों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की गई है. इससे संगठन अंडरग्राउंड हो गया है और निर्वासन में चला गया है.

SleepFM Health Risk Prediction: दिल-दिमाग से लेकर किडनी तक… सिर्फ एक रात की नींद बताएगी भविष्य की 130 बीमारियों का संकेत

पहले आपको किसी भी बीमारी का पता तब चलता था, जब तक आपकी हालत काफी खराब हो चुकी होती थी. लेकिन साइंस के तरक्की के साथ ही अब आपको कौन सी बीमारी कितनी है और फ्यूचर में कौन सी बीमारी हो सकती है, इसका भी पता चल जाता है. ऐसे ही रिसर्चर  ने एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल तैयार किया है, जो नींद के डेटा के आधार पर किसी व्यक्ति में भविष्य में होने वाली 130 बीमारियों का खतरा बता सकता है. इस मॉडल का नाम स्लीप एफएम रखा गया है.

यह मॉडल अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी समेत कई संस्थानों के रिसर्चर ने मिलकर बनाया है. इसे करीब 6 लाख घंटे की नींद के डेटा से ट्रेन किया गया, जो 65,000 लोगों से जुटाया गया था. इस रिसर्च के नतीजे मेडिकल जर्नल नेचर मेडिसिन  में पब्लिश हुए हैं. चलिए आपको बताते हैं कि यह डिबाइस कैसे काम करती है और कैसे पता चल सकता है कि आपको कौन सी बीमारी भविष्य में होने वाली है.

कैसे काम करता है स्लीप एफएम?

शुरुआत में इस AI सिस्टम को नींद से जुड़ी आम चीजों की पहचान के लिए परखा गया,जैसे नींद के अलग-अलग स्टेज को ट्रैक करना या स्लीप एपनिया की गंभीरता बताना. इसके बाद, नींद के डेटा को मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड से जोड़कर यह देखा गया कि भविष्य में किन बीमारियों का खतरा हो सकता है. रिसर्चर ने बताया कि हेल्थ रिकॉर्ड में मौजूद 1,000 से ज्यादा बीमारियों में से 130 बीमारियों का अनुमान यह मॉडल काफी सटीकता के साथ लगा सका.

नींद में छिपे होते हैं सेहत के अहम संकेत

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में स्लीप मेडिसिन के प्रोफेसर Emmanuel Mignot के मुताबिक “नींद के दौरान शरीर से बहुत सारे संकेत रिकॉर्ड होते हैं। आठ घंटे तक शरीर की सामान्य गतिविधियों का इतना गहराई से अध्ययन होता है कि डेटा बेहद समृद्ध हो जाता है.”

किस तरह का डेटा लिया जाता है?

नींद की जांच के लिए पॉलीसोम्नोग्राफी का इस्तेमाल किया गया, जिसे स्लीप स्टडी का सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है. इसमें सेंसर के जरिए-

  • ब्रेन की एक्टिविटी
  • दिल की धड़कन
  • सांस लेने का पैटर्न
  • आंखों की मूवमेंट
  • मांसपेशियों की गतिविधि

जैसे कई संकेत रिकॉर्ड किए जाते हैं. स्लीपएफएम इन सभी डेटा स्ट्रीम्स को एक साथ समझकर उनके आपसी संबंधों का एनालिसिस करता है.

AI को ट्रेन करने का नया तरीका

टीम ने AI को ट्रेन करने के लिए ‘leave-one-out’ कंट्रास्टिव लर्निंग नाम की तकनीक अपनाई. इसमें जानबूझकर एक तरह का डेटा छिपा दिया जाता है और AI को बाकी संकेतों के आधार पर उस गायब जानकारी का अंदाजा लगाने की चुनौती दी जाती है. इससे मॉडल की समझ और सटीकता बेहतर होती है.

किन बीमारियों की पहचान में सबसे बेहतर?

रिसर्च में पाया गया कि यह AI खासतौर पर

  • कैंसर
  • प्रेग्नेंसी से जुड़ी मुश्किलें
  • हार्ट और ब्लड फ्लो से जुड़ी बीमारियां
  • मेंटल हेल्थ

जैसी तमाम भविष्यवाणी में काफी मजबूत है. कई मामलों में इसका सी- इंडेस्क स्कोर 0.8 से ज्यादा रहा, जो अच्छी भविष्यवाणी को दर्शाता है. रिसर्चर के अनुसार, सिर्फ एक रात की नींद के डेटा से स्लीप एफएम जिन बीमारियों का खतरा बता सका, उनमें शामिल हैं-

  • डिमेंशिया
  • हार्ट अटैक
  • हार्ट फेल्योर
  • क्रॉनिक किडनी डिजीज
  • स्ट्रोक
  • एट्रियल फिब्रिलेशन

इसके अलावा,पार्किंसंस जैसी बीमारियों और बच्चों में विकास से जुड़ी दिक्कतों के जोखिम का अनुमान लगाने में भी यह मॉडल कारगर साबित हुआ. कुल मिलाकर, यह रिसर्च बताती है कि आपकी नींद सिर्फ थकान दूर करने का जरिया नहीं, बल्कि भविष्य की सेहत का आईना भी हो सकती है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

US Iran Trade Warning:ट्रंप का फिर चेतावनी भरा बयान, ईरान से कारोबार पर 25% टैरिफ, इन देशों पर होगा सीधा असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को इसकी कीमत चुकानी होगी. अमेरिका ने ऐसे देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है.

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अगर कोई भी देश ईरान के साथ कारोबार करता है तो उसे अमेरिका के साथ होने वाले हर व्यापार पर 25 प्रतिशत टैक्स देना होगा. उन्होंने कहा कि यह नियम तुरंत लागू होगा और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.

इन देशों पर पड़ सकता है इसका असर 

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन, ब्राजील, तुर्की और रूस जैसे देशों के ईरान के साथ व्यापारिक संबंध हैं. ऐसे में इन देशों पर इस फैसले का सीधा असर पड़ सकता है.

‘बातचीत से निकालना चाहते हैं हल’

ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि अमेरिका ईरान के अधिकारियों से बातचीत कर सकता है और वह ईरान के विपक्षी नेताओं से भी संपर्क में हैं. उन्होंने ईरान में प्रदर्शनकारियों की मौत पर नाराजगी जताई और सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी. हालांकि सोमवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने साफ किया कि अमेरिका की पहली पसंद अब भी बातचीत ही है. उन्होंने कहा कि हमला करना एक विकल्प जरूर है, लेकिन राष्ट्रपति पहले बातचीत के जरिए ही हल निकालना चाहते हैं.

लेविट ने यह भी बताया कि ईरान की तरफ से अमेरिका को साफ और एक जैसे संदेश नहीं मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि ईरान सरकार बाहर कुछ और कह रही है, जबकि अंदरूनी बातचीत में अलग बातें सामने आ रही हैं, और राष्ट्रपति इन्हीं संदेशों को समझने की कोशिश कर रहे हैं.

ईरान में हो रहे हैं प्रदर्शन 

ईरान में हाल के महीनों में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं. ये प्रदर्शन गंभीर आर्थिक संकट से शुरू हुए थे, लेकिन अब सरकार को हटाने की मांग तक पहुंच गए हैं. क्षेत्र में ईरान का प्रभाव भी कमजोर पड़ा है.