Home Blog Page 375

How To Detox Body Naturally At:शरीर खुद करने लगेगा डिटॉक्स, बस अपनाने होंगे ये आसान उपाय

 आजकल लोग शरीर को डिटॉक्स करने के लिए तरह-तरह के ट्रेंड्स और महंगे प्रोडक्ट्स अपनाते हैं. लेकिन सच यह है कि हमारा शरीर खुद ही टॉक्सिन्स बाहर निकालने की क्षमता रखता है. जरूरत सिर्फ इतनी है कि हम उसे सही सपोर्ट दें. कुछ आसान आदतें और घरेलू डिटॉक्स ड्रिंक्स इस नेचुरल प्रक्रिया को तेज करने में मदद कर सकती हैं. चलिए आपको बताते हैं कि आप इसके लिए क्या अपना सकते हैं.

कैसे कर सकते हैं बॉडी डिटॉक्स

पटना स्थित ऑरो सुपर स्पेशलिटी क्लीनिक की डॉक्टर अंजली सौरभ बताती हैं कि “शरीर में टॉक्सिन्स का जमा होना कई बीमारियों की जड़ माना जाता है. इसलिए शरीर को समय-समय पर डिटॉक्स करना जरूरी है. यह डिटॉक्स सिर्फ डाइट से नहीं, बल्कि तेल मालिश, पसीना निकालने वाली एक्सरसाइज और सही तरल पदार्थों के सेवन से भी होता है. इनमें डिटॉक्स ड्रिंक्स सबसे आसान और असरदार तरीका मानी जाती हैं.”

कौन सा ड्रिंक्स फायदेमंद

डिटॉक्स ड्रिंक्स इसलिए फायदेमंद होती हैं क्योंकि तरल रूप में ये जल्दी शरीर में घुल जाती हैं और ब्लड व अंगों की गहराई से सफाई में मदद करती हैं. इससे लिवर, किडनी और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करने लगते हैं और शरीर अपने आप टॉक्सिन्स बाहर निकालने लगता है. ऐसी ही एक असरदार ड्रिंक है ऑलस्पाइस इन्फ्यूजन. इसमें दालचीनी, लौंग, अदरक, काली मिर्च, करी पत्ता, गुड़हल, तुलसी, इलायची, शहद और नींबू जैसे तत्व शामिल होते हैं. इसे रातभर पानी में भिगोकर सुबह पिया जाता है. यह ड्रिंक एंटी-इंफ्लेमेटरी होती है और मेटाबॉलिज्म को संतुलन में रखने में मदद करती है.

एलोवेरा जूस भी शरीर की नेचुरल डिटॉक्स प्रक्रिया को सपोर्ट करता है. पानी, एलो जेल, नींबू और थोड़ी सी काली मिर्च से बना यह ड्रिंक शरीर में पानी की कमी को रोकता है. इससे टॉक्सिन्स का जमाव कम होता है और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस घटता है, जिससे शरीर खुद को हील करने लगता है. सेब और दालचीनी से बनी डिटॉक्स ड्रिंक दिन की शुरुआत के लिए बेहतर मानी जाती है. सेब में मौजूद विटामिन और मिनरल्स शरीर को पोषण देते हैं, जबकि दालचीनी ब्लड शुगर और वजन को कंट्रोल करने में मदद करती है. इसे रातभर भिगोकर सुबह पीने से शरीर में ताजगी महसूस होती है.

इन समस्याओं से मिलती है राहत

इन डिटॉक्स ड्रिंक्स को नियमित रूप से अपनाने से शरीर का होमियोस्टैसिस बना रहता है. शरीर की सफाई के साथ-साथ इनमें मौजूद मसाले सूजन कम करते हैं, इम्युन सिस्टम मजबूत करते हैं, दिल की सेहत सुधारते हैं और मतली जैसी समस्याओं में भी राहत देते हैं. यह आपके ओवरऑल सेहत के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

US Greenland Dispute: ‘रूस-चीन से निपट लेंगे’, व्हाइट हाउस में ग्रीनलैंड और डेनमार्क के शीर्ष मंत्रियों से बातचीत के दौरान बयान

ग्रीनलैंड को लेकर पैदा हुआ अंतरराष्ट्रीय संकट अभी टला नहीं है. व्हाइट हाउस में ग्रीनलैंड और डेनमार्क के शीर्ष मंत्रियों के साथ अमेरिकी नेतृत्व की हुई अहम बैठक से कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका. बैठक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर विवादित बयान दिया है.

दरअसल, बुधवार को ग्रीनलैंड और डेनमार्क के विदेश मंत्री व्हाइट हाउस पहुंचे थे. यहां उनकी मुलाकात अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से हुई. इस हाईलेवल बैठक में ग्रीनलैंड के भविष्य, क्षेत्रीय सुरक्षा और ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने से जुड़े बयानों पर विस्तार से चर्चा हुई. डेनमार्क, जिसके अधीन ग्रीनलैंड एक स्वशासित क्षेत्र है, उसने ट्रंप के बयानों पर कड़ी आपत्ति भी दर्ज कराई.

ग्रीनलैंड ने साफ किया रुख

व्हाइट हाउस में बैठक के बाद ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्ज़फेल्ट ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ सहयोग को आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा बनना चाहता है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि ग्रीनलैंड ने अपनी सीमाएं तय कर दी हैं और सभी पक्षों के हित में यही है कि इस मुद्दे पर सही और संतुलित रास्ता निकाला जाए.

हाईलेवल वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति

वहीं, डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने बताया कि अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने मिलकर एक हाईलेवल वर्किंग ग्रुप बनाने का फैसला किया है. यह समूह भविष्य की रणनीति और साझा समाधान पर काम करेगा. रासमुसेन ने कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर ट्रंप प्रशासन के साथ अब भी मूलभूत मतभेद बने हुए हैं. ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वशासित क्षेत्र है और इसी बिंदु पर तीनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी. उन्होंने यह भी बताया कि बैठक का माहौल सकारात्मक रहा और इसमें सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. रासमुसेन के मुताबिक, फिलहाल चीन या रूस से ऐसा कोई तात्कालिक खतरा नहीं है, जिसे डेनमार्क संभाल न सके.

ट्रंप ने बयान में कही ये बात

राष्ट्रपति ट्रंप व्हाइट हाउस की बैठक से अलग एक अन्य कार्यक्रम में शामिल थे. वहां उनसे ग्रीनलैंड और डेनमार्क के अधिकारियों के साथ हुई बैठक को लेकर सवाल किया गया. इस पर ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है, न सिर्फ अमेरिका के लिए बल्कि डेनमार्क की सुरक्षा के लिए भी. ट्रंप ने दावा किया कि अगर रूस या चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं तो डेनमार्क कुछ खास नहीं कर पाएगा, जबकि अमेरिका बहुत कुछ कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि वह इस भरोसे पर नहीं रह सकते कि डेनमार्क खुद अपनी सुरक्षा करने में सक्षम है.

‘हमें ग्रीनलैंड की जरूरत है’

ट्रंप ने यह कहा कि अमेरिका और डेनमार्क के रिश्ते बहुत अच्छे हैं. उन्होंने कहा, ‘अब देखते हैं आगे क्या होता है, लेकिन हमें इसकी जरूरत है.’ बाद में उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि कोई न कोई हल निकल आएगा.’ इससे कुछ देर पहले ही ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर भी ग्रीनलैंड को लेकर सख्त रुख अपनाया था. उन्होंने लिखा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है क्योंकि उसके बिना गोल्डन डोम से जुड़ा अमेरिकी लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि इससे कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है.

Why Non Smokers Get Lung Cancer:2030 तक देश में फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ने की आशंका, जानिए कैसे यह बीमारी घरों तक पहुंच रही है

 कैंसर का मामले लगातार पूरी दुनिया में बढ़ रहा है. हाल ही में  Indian Journal of Medical Research (IJMR) में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, भारत में 2030 तक लंग्स के कैंसर के मामलों में तेजी देखने को मिल सकती है. रिपोर्ट में बताया गया है कि देश का नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, जबकि महिलाओं में मामलों की रफ्तार सबसे तेज रहने की आशंका है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर पब्लिक हेल्थ समस्या है. साल 2022 में दुनियाभर में करीब 2 करोड़ नए कैंसर मामले सामने आए और 97 लाख लोगों की मौत हुई. आंकड़े बताते हैं कि हर पांच में से एक व्यक्ति को जीवनकाल में कभी न कभी कैंसर हो सकता है.

कब होता है लंग्स कैंसर

लंग्स कैंसर तब होता है, जब लंग्स की सेल्स अनकंट्रोल तरीके से बढ़ने लगती हैं. ये खराब सेल्स आपस में मिलकर गांठ या ट्यूमर बना लेती हैं, जिससे लंग्स का सामान्य कामकाज प्रभावित होने लगता है और धीरे-धीरे शरीर के अन्य अंग भी असर में आ जाते हैं.

किस हिस्से में सबसे ज्यादा मामले देखने को मिलेंगे

ICMR की नई स्टडी के अनुसार, नॉर्थ-ईस्ट में लंग्स के कैंसर की दर सबसे ज्यादा रहने की संभावना है. खास बात यह है कि यहां महिलाओं में इसके मामले पुरुषों के लगभग बराबर पहुंच रहे हैं. स्टडी में देश के छह अलग-अलग क्षेत्रों की 57 आबादियों के आंकड़ों का ऑब्जर्व किया गया. इनमें आइजोल सबसे ऊपर रहा, जहां पुरुषों में प्रति लाख आबादी पर 35.9 और महिलाओं में 33.7 मामले दर्ज किए गए, साथ ही मृत्यु दर भी सबसे अधिक रही.

इस कारण से बढ़ रहे मामले

TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में तंबाकू का अत्यधिक इस्तेमाल अब भी एक बड़ा कारण है. यहां पुरुषों में 68 प्रतिशत से ज्यादा और महिलाओं में करीब 54 प्रतिशत लोग तंबाकू का सेवन करते हैं. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि अब बीमारी का स्वरूप बदल रहा है. AIIMS के पल्मोनोलॉजी विभाग के डॉक्टर सौरभ मित्तल के अनुसार, “हम बिना स्मोकिंग वाली महिलाओं में भी फेफड़ों के कैंसर के मामले देख रहे हैं, जो इनडोर एयर पॉल्यूशन, बायोमास ईंधन, सेकेंड-हैंड स्मोक और काम से जुड़े प्रदूषण से जुड़े हैं.”

पुरुषों में बढ़ रहे मामले 

स्टडी में यह भी सामने आया कि दक्षिण भारत के कन्नूर, कासरगोड और कोल्लम जैसे जिलों में पुरुषों में लंग्स के कैंसर की दर ज्यादा है, जबकि यहां तंबाकू और शराब का सेवन अपेक्षाकृत कम है. दक्षिण में महिलाओं के सबसे ज्यादा मामले हैदराबाद और बेंगलुरु में दर्ज किए गए. उत्तर भारत में श्रीनगर में पुरुषों में मामले ज्यादा रहे, जबकि श्रीनगर और पुलवामा में महिलाओं में भी कम नशे के बावजूद उच्च दर देखी गई. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ इलाकों में महिलाओं में लंग्स के कैंसर के मामले हर साल करीब 6.7 प्रतिशत और पुरुषों में 4.3 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं. तिरुवनंतपुरम में महिलाओं और डिंडीगुल में पुरुषों के मामलों में सबसे तेज उछाल दर्ज किया गया

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

‘तू मेरी, मैं तेरा—मैं तेरा, तू मेरी’ बॉक्स ऑफिस पर पिटी, जानें फिल्म का वर्ल्डवाइड लाइफटाइम कलेक्शन

कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे स्टारर फिल्म ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ का सिनेमाघरों में रन लगभग खत्म हो चुका है. समीर विद्वान्स द्वारा निर्देशित ये रोमांटिक कॉमेडी फिल्म दर्शकों को इम्प्रेस करने में नाकामयाब साबित हुई और इसी के साथ ये बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही. चलिए यहां जानते हैं ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ का दुनियाभर में लाइफटाइम कलेक्शन कितना रहा है?

‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ का वर्ल्डवाइड लाइफटाइम कलेक्शन
रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ से काफी उम्मीदें थी कि ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ परफॉर्म करेगी. हालांकि रिलीज के बाद फिल्म को क्रिटिक्स और दर्शकों से मिक्स्ड रिव्यू मिले जिसके चलते इसकी कमाई चौपट हो गई. वहीं अब फिल्म के दुनियाभर में हुए लाइफटाइम कलेक्शन के आंकड़े आ गए हैं. इसके मुताबिक इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड 49 करोड़ रुपये की लाइफटाइम कमाई की है. इसमें से 39 करोड़ रुपये इसने (नेट कमाई 32.50 करोड़ रुपये) घरेलू बाजार से और 10 करोड़ रुपये (11 लाख अमेरिकी डॉलर) वर्ल्डवाइड कमाए हैं.

मेकर्स को कितना हुआ नुकसान?
पिंकविला की रिपोर्ट के मुताबिक कार्तिक आर्यन की ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई है जिससे निर्माताओं को करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. शुरुआत में ही ये फिल्म दर्शकों को इम्प्रेस करने में नाकाम रही, और फिर पहले ही दिन मिले एवरेज रिव्यू ने इसकी किस्मत तय कर दी. अगर फिल्म को पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिलत, तो यह कहीं बेहतर परफॉर्म करती.

क्यों  नहीं चली  कार्तिक की फिल्म? 
‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ के बॉक्स ऑफिस पर न चलने का एक प्रमुख कारण इसका जॉनर हो सकता है. आम तौर पर, महामारी के बाद के दौर में रोमांटिक कॉमेडी जॉनर दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने के लिए संघर्ष कर रही है. इस शैली में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म रणबीर कपूर की ‘तू झूठी मैं मक्कार’ है, जो भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी.

सरक्रीक में पाकिस्तान की बड़ी सैन्य तैनाती, मिसाइलें और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात, नौसेना अलर्ट- किस बात से डरे मुनीर?

पाकिस्तान ने सर क्रीक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य पुनर्गठन और तैनाती शुरू कर दी है. यह क्षेत्र सिंधु नदी के मुहाने पर स्थित एक दलदली इलाका है, जिस पर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. उच्च-स्तरीय सुरक्षा सूत्रों के अनुसार यह कदम सामान्य सैन्य गतिविधि नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है, जो पाकिस्तान की असामरिक (Asymmetrical) युद्ध नीति को दर्शाता है.

इस सैन्य जमावड़े में वायु रक्षा, निगरानी रडार, मरीन ब्रिगेड, ड्रोन गतिविधियां और तेज़ी से बढ़ती नौसैनिक शक्ति शामिल हैं. सर क्रीक की भौगोलिक स्थिति की बात करें तो ये गुजरात तट, अरब सागर और भारत के पश्चिमी नौसैनिक रूट के काफी नजदीक है, जो इसे अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक बनाती है.

मकरान तट पर बहु-स्तरीय रडार और वायु-रक्षा नेटवर्क

पाकिस्तान की सैन्य तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है मकरान तट के साथ-साथ स्थापित घना और बहु-स्तरीय रडार नेटवर्क. सूत्रों के अनुसार इसमें शॉर्ट-रेंज, मीडियम-रेंज और लॉन्ग-रेंज रडार शामिल हैं, जिनकी निगरानी क्षमता 1,000 किलोमीटर तक बताई जा रही है. इस नेटवर्क की खास बात यह है कि इसमें अमेरिकी और चीनी दोनों तकनीक के रडार शामिल हैं. इससे पाकिस्तान को हवाई क्षेत्र की समय रहते निगरानी, समुद्री गश्ती विमानों पर नजर, मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की पहचान करने की बेहतर सुविधा मिलती है. माना जा रहा है कि इन रडारों के साथ-साथ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAMs) भी तैनात की जाएगी, जिससे यह क्षेत्र एक तरह का एरिया-डिनायल ज़ोन बन सकता है.

नई मरीन ब्रिगेड और ड्रोन गतिविधि

पाकिस्तान ने इस क्षेत्र में करीब 3,000 सैनिकों वाली एक नई मरीन ब्रिगेड भी तैयार कर ली है. सर क्रीक का दलदली, नदी-नालों वाला हिस्सा परंपरागत युद्ध से अधिक असामरिक और हाइब्रिड युद्ध के लिए उपयुक्त माना जाता है. इसके साथ ही इलाके में ड्रोन देखे गए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में निरंतर निगरानी रख रहा है. वह कम लागत में खुफिया जानकारी जमा करके लक्ष्य को पहचाने पर जोर दे रहा है.

पनडुब्बी शक्ति में इजाफा

पाकिस्तान अपनी नौसेना को भी तेजी से मजबूत कर रहा है. साल 2026 में ही दो या तीन हैंगर-क्लास पनडुब्बियां नौसेना में शामिल की जा सकती हैं. ये कुल 8 पनडुब्बियों की परियोजना का हिस्सा हैं, जिनमें से कुछ चीन में और कुछ कराची में बन रही हैं. इन पनडुब्बियों की प्रमुख विशेषताएं ये है कि इसमें एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक है. इसका वजन 2,800 टन है, जो अधिक समय तक पानी के भीतर रहने की क्षमता रखता है. ये बेहतर गोपनीयता और मारक क्षमता से लैस है. AIP तकनीक पनडुब्बियों को बिना सतह पर आए लंबे समय तक ऑपरेशन करने में सक्षम बनाती है. उल्लेखनीय है कि भारत भी जर्मनी के साथ मिलकर ऐसे ही पनडुब्बियां बनाने की योजना पर काम कर रहा है.