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संघ कार्य की ‘शताब्दी’ यात्रा : इतिहास से आगे भविष्य की संभावनाओं की नींव, पंच परिवर्तन उभरते भारत की चुनौतियों का समाधान करने में समर्थ- संघ के वरिष्ठ प्रचारक पदम सिंह

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या कार्य करता है- यह प्रश्न वर्षों से समाज में पूछा जाता रहा है और आज भी अधिक आग्रह के साथ पूछा जा रहा है। वर्ष 1925 की विजयादशमी पर अपनी स्थापना से लेकर वर्तमान तक संघ ने जिस पथ का अनुसरण किया है, उसमें मूल दृष्टि और ध्येय के स्तर पर किसी परिवर्तन का कारण उपस्थित नहीं हुआ है। ‘कथनी नहीं, करनी’ के सिद्धांत पर चलते हुए स्वयंसेवकों ने अपने व्यवहार से संघ कार्य को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया है।

वर्तमान वर्ष संघ कार्य का शताब्दी वर्ष है। इन सौ वर्षों की यात्रा में संघ का कार्य केवल शाखाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा प्रकल्पों, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और डिजिटल साक्षरता जैसे विविध क्षेत्रों तक विस्तृत हुआ है। स्वयंसेवक राष्ट्रहित में समाज के प्रत्येक वर्ग के बीच सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस दृष्टि से संघ की सौ वर्ष की यात्रा केवल अतीत का इतिहास नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं की सुदृढ़ नींव है।

आज जब भारत 2047 तक ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, तब ऐसे समाज की आवश्यकता है जो विज्ञान और अध्यात्म, परंपरा और नवाचार, सेवा और समरसता का समन्वय स्थापित कर राष्ट्रकार्य में योगदान दे सके। प्रत्येक नागरिक में सामाजिक प्रेरणा और भारत माता की सेवा का भाव जागृत हो—इसी उद्देश्य से पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने ‘पंच परिवर्तन’ का आह्वान किया।

पंच परिवर्तन : समाज परिवर्तन की दिशा

पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख आयाम-

  • सामाजिक समरसता,
  • कुटुंब प्रबोधन,
  • पर्यावरण संरक्षण,
  • स्व-आधारित जीवन शैली,
  • नागरिक कर्तव्य।

ये पांचों बिंदु भविष्य में परमवैभव सम्पन्न भारत के निर्माण की आधारशिला बन सकते हैं। परिवर्तन केवल नारों या योजनाओं से नहीं आता; वह व्यक्तिगत आचरण और सामूहिक प्रयास से साकार होता है। इसलिए पंच परिवर्तन को व्यवहार में उतारना आवश्यक है।

समाज में नवचेतना, राष्ट्रभाव और सकारात्मक नवाचार के लिए ये विषय अत्यंत प्रासंगिक हैं। संघ की स्थापना के समय ही डॉ. हेडगेवार जी ने कहा था कि स्वयंसेवक एकरस रहेंगे, सामूहिक चिंतन करेंगे और समाज में भारतीयता का नवजागरण करेंगे। जो श्रेष्ठ है, उसे अपनाना और उसे आचरण में लाना ही संघ की मूल प्रेरणा रही है।

व्यवहार में परिवर्तन की आवश्यकता

भाषा, भूषा, भोजन, भजन, भवन और भ्रमण से लेकर जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में ‘स्व’ का बोध जागृत करना आवश्यक है। स्वदेशी जीवन शैली केवल विचार न रहे, बल्कि आचरण का हिस्सा बने। जाति, वर्ग और क्षेत्र के भेद मिटाकर सामाजिक समरसता को दैनिक व्यवहार में उतारना होगा।

परिवार को समाज की आधारभूत इकाई मानते हुए संस्कार और गुण-संचय की परंपरा को सुदृढ़ करना ‘कुटुंब प्रबोधन’ का उद्देश्य है। पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का निरंतर चिंतन आवश्यक है। नागरिक कर्तव्य बोध का अर्थ है—कानून का पालन, अनुशासन और राष्ट्रहित में सक्रिय सहभागिता।

संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि “बौद्धिक आख्यान को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से बदलना और सामाजिक परिवर्तन के लिए सज्जन शक्ति को संगठित करना संघ के मुख्य कार्यों में शामिल है।”

कभी-कभी पूर्वाग्रहों के कारण संघ कार्य के विषय में भ्रांतियां उत्पन्न होती हैं। इस संदर्भ में डॉ. मोहन भागवत ने स्पष्ट कहा है कि जो संघ को बाहर से देखते हैं उन्हें केवल ढांचा दिखाई देता है, किंतु जो भीतर से जीते हैं उन्हें आत्मचिंतन और सतत संवाद की परंपरा दिखती है। संघ को जानने के लिए शाखा में आकर प्रत्यक्ष अनुभव करना आवश्यक है, जहां विभिन्न भाषाओं, जातियों और वर्गों के लोग बिना प्रचार-प्रदर्शन के मातृभूमि के लिए समर्पित भाव से कार्य करते हैं।

आज जब विश्व भारत की ओर आशा और विश्वास से देख रहा है, तब यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपने भीतर की श्रेष्ठता को जागृत करें और समाज में समरसता, सकारात्मकता तथा राष्ट्रभाव का संचार करें। पंच परिवर्तन केवल एक विचार नहीं, बल्कि उभरते भारत की चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में सामूहिक संकल्प है।

— लेखक पदम सिंह (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पश्चिमी उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड क्षेत्र के क्षेत्र प्रचार प्रमुख)

“एडवेंचर के शौकीनों के लिए खास: महाराष्ट्र से कर्नाटक तक ये 3 बेहतरीन ट्रेकिंग पीक्स”

अगर आप एडवेंचर और ट्रेकिंग के शौकीन हैं, तो भारत में घूमने के लिए सिर्फ उत्तराखंड या हिमाचल ही नहीं हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु की कुछ चोटियां भी आपकी ट्रेकिंग लिस्ट में शामिल होनी चाहिए।

1. कलसूबाई पीक, महाराष्ट्र

  • ऊंचाई: लगभग 5400 फीट
  • लोकेशन: नासिक जिला
  • ट्रेकिंग जानकारी: ट्रेकिंग बरी के बेस गांव से शुरू होती है। रास्ते में लोहे की सीढ़ियां और एडवेंचर ट्रैक का अनुभव मिलेगा।
  • खासियत: पीक पर पहुंचते ही मनमोहक नजारे आपका दिल जीत लेंगे।

2. नेत्रावती पीक, कर्नाटक

  • ऊंचाई: –
  • लोकेशन: कर्नाटक
  • ट्रेकिंग जानकारी: लगभग 6 किलोमीटर की ट्रेकिंग।
  • खासियत: रास्ते भर हरियाली और खूबसूरत दृश्य। शिखर से चारों ओर फैला अद्भुत नजारा।

3. कुलकुमलाई पीक, तमिलनाडु

  • ऊंचाई: –
  • लोकेशन: इडुक्कि जिला, तमिलनाडु
  • ट्रेकिंग जानकारी: सूर्योदय देखने के लिए सुबह 3 बजे शुरुआत करनी पड़ती है।
  • खासियत: सूर्योदय और शानदार नजारे।

इन तीनों पीक में ट्रेकिंग का अनुभव अलग और यादगार है। अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं, तो इन स्थानों को अपनी ट्रेकिंग लिस्ट में जरूर शामिल करें।

“संजय दत्त की ऑनस्क्रीन बेटी रहीं अदिती भाटिया, अब ‘केरला स्टोरी 2’ में आएंगी नजर”

टीवी की जानी-मानी एक्ट्रेस अदिती भाटिया अब फिल्म ‘केरला स्टोरी 2’ में नजर आने वाली हैं। इस फिल्म में उन्होंने दमदार रोल प्ले किया है और फिल्म 27 फरवरी 2026 को रिलीज होगी।


अदिती भाटिया की करियर जर्नी

  • चाइल्ड एक्टर के रूप में शुरुआत: अदिती ने 2004 में ‘होम स्वीट होम’ में करिश्मा का रोल किया।
  • फिल्मी करियर:
    • ‘विवाह’ में छोटी रजनी का रोल
    • ‘शूटआउट एट वडाला’ में संजय दत्त की बेटी का रोल, जिसने उन्हें खास पहचान दिलाई
    • 2017 में फिल्म ‘सरगोशियां’ में भी नजर आईं
  • टीवी करियर:
    • ‘तुझ संग प्रीत लगाई सजना’, ‘टशन-ए-इशक’
    • 2015 में ‘ये है मोहब्बतें’ में दिव्यांका त्रिपाठी की बेटी के रोल में दिखीं। इस शो में उन्होंने रूही भल्ला का रोल निभाया और 2016 से 2019 तक काम किया।
    • इसके अलावा ‘कॉमेडी नाइट्स बचाओ ताजा’, ‘कॉमेडी सर्कस’ जैसे शो में भी नजर आईं
  • सोशल मीडिया: अदिती सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और उनके फोटोशूट वायरल होते रहते हैं।

केरला स्टोरी 2 में रोल

  • अदिती फिल्म में राजस्थानी लड़की के रोल में हैं।
  • कहानी में उनका किरदार एक झूठे इंसान के प्यार में पड़ता है, जिससे उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाती है।
  • फिल्म में उल्का गुप्ता और ऐश्वर्या ओझा जैसी एक्ट्रेसेस भी नजर आएंगी।
  • फिल्म का कंटेंट विवादों में भी रहा है, लेकिन ट्रेलर में अदिती की एक्टिंग को काफी पसंद किया गया।

“AIIMS की नई पहल: खांसी की आवाज से ऐप बताएगा फेफड़ों की सेहत”

कर्नाटक के एक स्टार्टअप ने तैयार किया है AI आधारित मोबाइल एप ‘श्वासा’, जिसे अब AIIMS दिल्ली से मान्यता मिल चुकी है। यह एप खास एल्गोरिद्म तकनीक के जरिए मरीजों में क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) की स्क्रीनिंग करता है। भारत में यह बीमारी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है।

AIIMS में हुआ टेस्ट

पिछले साल AIIMS दिल्ली के बल्लभगढ़ केंद्र में 460 लोगों पर एप का परीक्षण किया गया। पारंपरिक स्पाइरोमेट्री से तुलना करने पर एप ने सटीकता में 82-90% तक प्रदर्शन किया। गंभीर मामलों में एप की सटीकता और भी बेहतर रही।

एप का तरीका

  • मरीज को सिर्फ स्मार्टफोन के सामने खांसना होता है।
  • फोन का माइक्रोफोन खांसी की आवाज रिकॉर्ड करता है।
  • AI सॉफ्टवेयर तुरंत एनालिसिस करता है।
  • कुछ ही मिनटों में पता चल जाता है कि लंग्स सामान्य हैं या सीओपीडी/अस्थमा के संकेत हैं।

क्यों है ये उपयोगी?

  • स्पाइरोमेट्री जैसी सुविधाएं ज्यादातर बड़े मेडिकल कॉलेज तक सीमित हैं।
  • श्वासा एप संसाधन सीमित इलाकों में प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य केंद्रों, यहां तक कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • जांच पूरी प्रक्रिया केवल लगभग 8 मिनट में पूरी हो जाती है।

आगे की योजना

AIIMS टीवी स्क्रीनिंग के जरिए भी एप की उपयोगिता का परीक्षण कर रहा है। कर्नाटक और कुछ अन्य राज्यों में फिलहाल इसे इस्तेमाल किया जा रहा है, और फरीदाबाद में निजी डॉक्टरों को जोड़कर इसके उपयोग को बढ़ाने की योजना है।

“सुपर-8 से पहले टीम इंडिया में बदलाव की चर्चा, अभिषेक शर्मा की जगह पर सस्पेंस”

अहमदाबाद: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लीग स्टेज में भारत के ओपनर अभिषेक शर्मा का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। तीन मैचों में तीनों बार बिना खाता खोले पवेलियन लौटने के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि सुपर-8 में उनकी जगह प्लेइंग 11 में बनी रहेगी या नहीं।

टीम में ओपनिंग के लिए संजू सैमसन एक विकल्प के रूप में मौजूद हैं। संजू को नामीबिया के खिलाफ मौके मिले थे, जिसमें उन्होंने केवल 22 रन बनाए। हालांकि उनका प्रदर्शन अभिषेक शर्मा की तुलना में बेहतर रहा, लेकिन पूरी तरह भरोसेमंद नहीं माना जा रहा।

सुपर-8 में भारत का पहला मुकाबला 22 फरवरी, रविवार को नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होगा। कप्तान सूर्यकुमार यादव के पास प्लेइंग 11 में बदलाव का विकल्प है। क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि संजू सैमसन को एक और मौका मिल सकता है, जबकि अभिषेक शर्मा के प्रदर्शन पर सवाल खड़े हैं।

संभावित भारत की प्लेइंग 11 (सुपर-8, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ)

ईशान किशन (विकेटकीपर), संजू सैमसन, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, रिंकू सिंह, वाशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह