Home Blog Page 295

Sports News:अभिषेक शर्मा के नाम दर्ज हुई दूसरी सबसे ‘धीमी’ टी20 फिफ्टी

लगातार चार मैचों में फ्लॉप रहने के बाद आखिरकार Abhishek Sharma का बल्ला टी20 वर्ल्ड कप में चला। चेन्नई के M. A. Chidambaram Stadium में जिम्बाब्वे के खिलाफ सुपर-8 मुकाबले में उन्होंने अर्धशतक जड़ा।

यह टी20 विश्व कप में उनका पहला अर्धशतक था, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक अनचाहा रिकॉर्ड भी बना लिया।

26 गेंदों में पूरी की फिफ्टी

  • अभिषेक ने 26 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया।
  • यह उनके टी20 इंटरनेशनल करियर की दूसरी सबसे धीमी फिफ्टी रही।
  • इससे पहले उनकी सबसे धीमी फिफ्टी 33 गेंदों में आई थी।

टूर्नामेंट की शुरुआत उनके लिए बेहद खराब रही थी। शुरुआती तीन मैचों में वह बिना खाता खोले आउट हो गए थे, जबकि चौथे मैच में सिर्फ 15 रन बना सके थे।


जिम्बाब्वे के खिलाफ बदला अंदाज़

इस मुकाबले में अभिषेक ने आक्रामक शुरुआत के बजाय संयम से बल्लेबाजी की। आमतौर पर पहली गेंद से बड़े शॉट खेलने वाले अभिषेक ने इस बार पारी को संभालते हुए खेला और 30 गेंदों में 55 रन (4 चौके, 4 छक्के) बनाए।


भारत का रिकॉर्ड टोटल

भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 4 विकेट पर 256 रन बनाए।

  • यह टी20 वर्ल्ड कप में भारत का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है।
  • इससे पहले भारत का सर्वोच्च स्कोर 218 रन था।
  • टी20 विश्व कप इतिहास में यह दूसरा सबसे बड़ा टोटल है।
  • सबसे बड़ा स्कोर 2007 में Sri Lanka national cricket team ने केन्या के खिलाफ 260/6 रन बनाकर दर्ज किया था।

अन्य बल्लेबाजों का योगदान

  • Hardik Pandya – 23 गेंदों में 50* (2 चौके, 4 छक्के)
  • Tilak Varma – 16 गेंदों में 44* (3 चौके, 4 छक्के)

इस तरह टीम इंडिया की विस्फोटक बल्लेबाजी के बीच अभिषेक शर्मा की संयमित पारी चर्चा का विषय बन गई।

Health News:बिहार में सबसे ज्यादा एड्स मरीज किस जिले में?

बिहार में एचआईवी/एड्स के ताजा आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। राज्य में एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या 1,00,044 के पार पहुंच चुकी है। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री Mangal Pandey ने विधान परिषद में दी।

किस जिले में सबसे ज्यादा मामले?

आंकड़ों के मुताबिक, Patna जिले में सबसे अधिक एचआईवी/एड्स के मरीज पाए गए हैं।

टॉप प्रभावित जिले:

  • Patna – 8,270 मामले
  • Gaya – 5,760 मामले
  • Muzaffarpur – 5,520 मामले
  • Sitamarhi – 5,026 मामले
  • Begusarai – 4,716 मामले
  • Bhagalpur – 3,078 मामले

राज्य के 13 जिलों को ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में रखा गया है। खासकर शहरी और घनी आबादी वाले इलाकों में संक्रमण का दबाव अधिक देखा जा रहा है।


क्यों बढ़ रहे हैं मामले?

विशेषज्ञों और Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के अनुसार, एचआईवी संक्रमण बढ़ने के प्रमुख कारण हो सकते हैं:

  • जागरूकता की कमी
  • समय पर जांच न कराना
  • असुरक्षित शारीरिक संबंध
  • एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में अधिक आवाजाही (माइग्रेशन)

हालांकि राज्य सरकार ने जांच और परामर्श सेवाओं को मजबूत करने का दावा किया है। बिहार में 196 समेकित परामर्श एवं जांच केंद्र (ICTC) संचालित हो रहे हैं, जहां मुफ्त जांच और काउंसलिंग उपलब्ध है।


सरकार की सहायता योजना

राज्य सरकार ‘Bihar Shatabdi AIDS Peedit Kalyan Yojana’ के तहत एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को:

  • ₹1,500 प्रतिमाह आर्थिक सहायता
  • 18 वर्ष से कम आयु के दो आश्रित बच्चों को ₹1,000 प्रतिमाह सहायता

वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 63.81 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं।


निष्कर्ष

आंकड़े साफ बताते हैं कि पटना समेत हाई रिस्क जिलों में एचआईवी संक्रमण तेजी से फैल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रोकथाम के लिए जागरूकता, नियमित जांच और सुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है।

Disclaimer: यह जानकारी शोध और उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है। इसे चिकित्सीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

ईरान पर वार या वार्ता? जिनेवा में अमेरिका की 5 सख्त शर्तें

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच 26 फरवरी को जिनेवा में परमाणु मुद्दे पर अहम बैठक हुई। तेहरान पर दबाव है कि वह नए समझौते पर सहमत हो, अन्यथा अमेरिकी कार्रवाई का सामना करे।

ओमान की मध्यस्थता में चल रही यह बातचीत तीसरे दौर में पहुंच चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ संकेत दिया है कि यदि परमाणु समझौते पर सहमति नहीं बनी तो इसके “गंभीर परिणाम” होंगे।

अमेरिका की 5 प्रमुख शर्तें

  1. तीनों परमाणु संयंत्रों को नष्ट करना
    अमेरिका ने ईरान से Fordow Fuel Enrichment Plant, Natanz Nuclear Facility और Isfahan Nuclear Technology Center को नष्ट करने की मांग की है।
  2. संवर्धित यूरेनियम सौंपना
    तेहरान को अपने पास मौजूद सभी संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका को सौंपने की शर्त रखी गई है।
  3. यूरेनियम संवर्धन शून्य या न्यूनतम स्तर पर लाना
    अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह बंद या बेहद सीमित स्तर तक लाए। हालांकि तेहरान रिसर्च रिएक्टर को अपने पास रख सकता है।
  4. प्रतिबंधों में चरणबद्ध ढील
    अमेरिका ने संकेत दिया है कि शुरुआत में सीमित प्रतिबंध राहत दी जाएगी। शर्तें पूरी होने पर और ढील संभव है, लेकिन असफलता की स्थिति में प्रतिबंध और कड़े किए जाएंगे।
  5. सनसेट क्लॉज से इनकार
    अमेरिका किसी भी नए समझौते में समय-सीमा (सनसेट क्लॉज) शामिल करने के पक्ष में नहीं है। यानी समझौता तय अवधि के बाद स्वतः समाप्त नहीं होगा।

ईरान का रुख

ईरान ने अब तक यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करने की शर्त पर सहमति नहीं जताई है। 8 फरवरी को ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा था कि ईरान युद्ध की धमकियों से नहीं डरेगा और अपने परमाणु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।

अब देखना होगा कि जिनेवा वार्ता से कोई ठोस समझौता निकलता है या दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ता है।

“गोविंदा के अफेयर की खबरें पढ़ने को बेताब हूं”, जब Sunita Ahuja ने हंसते हुए कही थी ये मजेदार बात

बॉलीवुड स्टार Govinda और उनकी पत्नी Sunita Ahuja अक्सर अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। कुछ समय पहले गोविंदा के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की खबरें चर्चा में थीं, जिन पर दोनों ने अलग-अलग अंदाज में प्रतिक्रिया दी थी।

अफेयर की खबरों पर क्या बोली थीं सुनीता?

दरअसल, एक पुराना इंटरव्यू फिर से वायरल हो रहा है, जिसमें सुनीता ने बेहद मजाकिया अंदाज में अफेयर की खबरों पर प्रतिक्रिया दी थी। यह इंटरव्यू Simi Garewal के शो में हुआ था।

जब उनसे पूछा गया कि क्या गोविंदा के को-एक्ट्रेस के साथ लिंकअप की खबरों से वह परेशान होती हैं, तो सुनीता ने हंसते हुए कहा—
“मैं तो मैग्जीन खरीदती हूं ताकि पढ़ सकूं कि गोविंदा का लेटेस्ट अफेयर किसके साथ है। मुझे तो दुख होता है कि उनके बारे में कोई खबर ही नहीं आती। मैं उनके अफेयर की खबरें पढ़ने के लिए मरी जा रही हूं।”

गोविंदा ने भी दिया मजेदार जवाब

सुनीता की बात पर गोविंदा ने भी मजाक में कहा था, “मैं अच्छा एक्टर बन रहा हूं, क्योंकि मैं अपने अफेयर अच्छे से छुपा पा रहा हूं।”

जब सिमी गरेवाल ने पूछा कि क्या इसका मतलब है कि आप पकड़े नहीं जाएंगे? तो इस पर गोविंदा ने हंसते हुए कहा था, “कह नहीं सकता।”

‘वो फैमिली मैन हैं’

इसी इंटरव्यू में सुनीता ने साफ कहा था कि उन्हें इन बातों से टेंशन नहीं होती, क्योंकि वह जानती हैं कि गोविंदा एक फैमिली मैन हैं और अपने बच्चों, पत्नी और मां से बेहद प्यार करते हैं।

हालांकि हाल के दिनों में अफेयर की खबरों को लेकर गोविंदा ने एक इंटरव्यू में आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि उन पर आरोप लगना कोई नई बात नहीं है।

कुल मिलाकर, यह पुराना इंटरव्यू दिखाता है कि सुनीता आहूजा ने अफवाहों को हमेशा हल्के-फुल्के अंदाज में लिया और अपने रिश्ते में भरोसे को प्राथमिकता दी।

मास्क, बीमारी और खौफ: Delhi NCR की जहरीली हवा से बच्चों की मुस्कान पर संकट

राजधानी Delhi और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में बढ़ता वायु प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य का संकट बन चुका है।

पर्यावरण संस्था Chintan Environmental Research and Action Group की हालिया रिपोर्ट “A Generation Under Siege” में सामने आया है कि जहरीली हवा बच्चों की सेहत, मानसिक स्थिति, पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर गहरा असर डाल रही है।

रिपोर्ट में क्या सामने आया?

दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 6 से 15 वर्ष के 1,257 बच्चों से बातचीत के आधार पर तैयार इस अध्ययन में:

  • 86% बच्चों ने माना कि प्रदूषित हवा सीधे उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा रही है।
  • अक्टूबर 2025 के बाद 44% बच्चों को डॉक्टर के पास जाना पड़ा।
  • कई बच्चों को सांस लेने में तकलीफ, खांसी, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं हुईं।
  • 77% बच्चों ने कहा कि जहरीली हवा उन्हें बेचैन, चिड़चिड़ा या डरा हुआ महसूस कराती है।
  • लगभग 46.6% बच्चे मौका मिलने पर दिल्ली-NCR छोड़ना चाहते हैं।
  • 55% बच्चों को स्वास्थ्य कारणों से स्कूल से छुट्टी लेनी पड़ी।

यह आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा को भी प्रभावित कर रहा है।

बचाव की कोशिश, फिर भी असुरक्षा

जब AQI खतरनाक स्तर पर पहुंचता है, तो बच्चे और उनके परिवार खुद को बचाने की कोशिश करते हैं:

  • 39% बच्चों ने N95 मास्क या एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया।
  • 37% बच्चों ने घर के अंदर रहना या बाहरी गतिविधियां कम कर दीं।

इसके बावजूद 85% बच्चों ने आंखों में जलन, खांसी, सिरदर्द और थकावट जैसे लक्षण महसूस किए। इससे साफ है कि एहतियात के बावजूद वे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।

मानसिक और सामाजिक असर

रिपोर्ट बताती है कि कई बच्चे गंभीर प्रदूषण के बावजूद स्कूल जाने या बाहर खेलने को मजबूर होते हैं। इससे:

  • खेलकूद कम हो रहा है
  • सामाजिक मेलजोल घट रहा है
  • तनाव और चिंता बढ़ रही है

नीतियों को सिर्फ शहर के औसत AQI आंकड़ों तक सीमित रखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि बच्चे घर, स्कूल और रोजाना के सफर में कैसी हवा में सांस ले रहे हैं।

एक पीढ़ी पर संकट

दिल्ली-NCR की जहरीली हवा बच्चों की सेहत, पढ़ाई और मानसिक विकास पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के अनुभवों को नीति निर्माण के केंद्र में रखना समय की मांग है।


Disclaimer:
यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।