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Health Update:क्या एस्पिरिन से कम हो सकता है कैंसर का खतरा? रिसर्च में सामने आए चौंकाने वाले संकेत

आम तौर पर दर्द और बुखार में इस्तेमाल होने वाली एस्पिरिन को लेकर हाल के शोधों में दिलचस्प खुलासे हुए हैं। कुछ स्टडीज यह संकेत देती हैं कि यह दवा कुछ खास परिस्थितियों में कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ इसे सावधानी के साथ समझने की सलाह देते हैं।

रिसर्च क्या कहती है?
एक महत्वपूर्ण क्लिनिकल ट्रायल में, जिसमें लिंच सिंड्रोम से पीड़ित मरीज शामिल थे, पाया गया कि नियमित रूप से एस्पिरिन लेने वालों में कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा लगभग आधा हो गया। यह अध्ययन कई वर्षों तक चला और इसके नतीजों के आधार पर कुछ देशों में स्वास्थ्य दिशानिर्देशों में बदलाव भी किए गए।

इसके अलावा, स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट में किए गए एक बड़े ट्रायल में सर्जरी के बाद रोजाना एस्पिरिन लेने वाले मरीजों में कैंसर के दोबारा होने का खतरा भी कम पाया गया।

कैसे काम करती है एस्पिरिन?
विशेषज्ञों के अनुसार, एस्पिरिन शरीर में उन जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है जो कैंसर कोशिकाओं के फैलाव से जुड़ी होती हैं। यह खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को कम करती है, जिससे कैंसर सेल्स इम्यून सिस्टम से छिप नहीं पातीं और शरीर उन्हें पहचानकर खत्म कर सकता है।

क्या सावधानी जरूरी है?
हालांकि, एस्पिरिन कोई चमत्कारी इलाज नहीं है। इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं, जैसे पेट में जलन, अल्सर या आंतरिक रक्तस्राव। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के इसे नियमित रूप से लेना खतरनाक हो सकता है।

निष्कर्ष:
रिसर्च यह जरूर दिखाती है कि एस्पिरिन कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती है, लेकिन इसका असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है। ऐसे में इसे अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहद जरूरी है।

Disclaimer: यह जानकारी विभिन्न शोधों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सा सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी दवा का नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Health News:क्या पेन किलर से किडनी को होता है नुकसान? जानें सुरक्षित डोज और जरूरी सावधानियां

सिर दर्द, बुखार या शरीर के दर्द में लोग अक्सर तुरंत राहत पाने के लिए पेन किलर का इस्तेमाल करते हैं। ये दवाएं दर्द और सूजन को कम करने में असरदार होती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इनका गलत या ज्यादा इस्तेमाल शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है, खासकर किडनी के लिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, पेन किलर का असर सीधे तौर पर किडनी में ब्लड फ्लो और उसके टिश्यू पर पड़ सकता है। लंबे समय तक या अधिक मात्रा में सेवन करने से किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है। जिन लोगों को पहले से किडनी, दिल की बीमारी या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उनके लिए यह खतरा और बढ़ जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य दर्द निवारक दवाएं (पेन किलर) सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन इन्हें सीमित मात्रा और सीमित समय के लिए ही लेना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक इनका सेवन करना खतरनाक हो सकता है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि शरीर में पानी की कमी से भी किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। साथ ही एक साथ कई दवाओं का सेवन करने से भी बचना चाहिए, खासकर जब उनमें एक जैसे सक्रिय तत्व मौजूद हों।

अगर किसी को लंबे समय तक दर्द की दवाओं की जरूरत पड़ रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खून और यूरिन टेस्ट के जरिए किडनी की स्थिति का शुरुआती स्तर पर पता लगाया जा सकता है।

कुल मिलाकर, पेन किलर पूरी तरह हानिकारक नहीं हैं, लेकिन इनका गलत उपयोग शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, खासकर किडनी, के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

AI की दौड़ में उत्तर प्रदेश बनेगा ग्लोबल लीडर : डॉ. राजेश्वर सिंह ने CM योगी को भेजे बड़े सुझाव, युवाओं से किया ‘टेक्नोलॉजी क्रिएटर’ बनने का आह्वान

लखनऊ, 25 अप्रैल 2026। सरोजनीनगर से विधायक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि 21वीं सदी का सबसे बड़ा युद्ध अब हथियारों का नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता का है। उन्होंने इसे “AI War” बताते हुए कहा कि जो देश AI में अग्रणी होगा, वही भविष्य की दिशा तय करेगा।

AI ही तय करेगा भविष्य की दिशा

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि दुनिया की प्रमुख शक्तियां तेजी से के क्षेत्र में निवेश कर रही हैं। आने वाले समय में AI न सिर्फ वैश्विक अर्थव्यवस्था बल्कि रक्षा, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्रों को भी पूरी तरह बदल देगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे युवा आबादी है, लेकिन इस जनसंख्या लाभ को तभी वास्तविक ताकत में बदला जा सकता है जब युवा केवल टेक्नोलॉजी के उपभोक्ता न बनकर उसके निर्माता बनें।

युवाओं के लिए स्पष्ट संदेश

डॉ. सिंह ने युवाओं को नई दिशा देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वे खुद को भविष्य के लिए तैयार करें। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा-

  • Coding सीखें
  • Data की समझ विकसित करें
  • Critical Thinking पर काम करें
  • Technology creation की दिशा में आगे बढ़ें

उन्होंने कहा, “जो देश AI लिखेगा, वही भविष्य का इतिहास लिखेगा।”

उत्तर प्रदेश को बनाना होगा AI हब

विधायक ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश को केवल AI अपनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे AI innovation और talent creation का केंद्र बनना होगा। इसके लिए उन्होंने बड़े स्तर पर निवेश, मजबूत innovation ecosystem और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने की जरूरत बताई।

CM को दिए महत्वपूर्ण सुझाव

डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य में AI सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई अहम प्रस्ताव दिए हैं, जिनमें-

  • UP AI Research & Innovation Fund की स्थापना
  • UP AI Commission का गठन
  • AI स्टार्टअप्स, incubators और innovation hubs के लिए Seed Funding Policy

जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं।

“युवा ही भविष्य का निर्माता”

अपने संदेश के अंत में उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा-
“Gear Up, Skill Up, Rise Up – भारत का युवा ही भविष्य का निर्माता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है जब उत्तर प्रदेश और भारत, दोनों को AI के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए।

धुरंधर 2 की शानदार कमाई के बाद भी दंगल–बाहुबली 2 का रिकॉर्ड क्यों रहा बरकरार?

आदित्य धर के निर्देशन में बनी रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए 1764.15 करोड़ रुपये का वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर लिया। इसके बावजूद यह आमिर खान की दंगल और एस.एस. राजामौली की बाहुबली 2 का रिकॉर्ड तोड़ने से चूक गई।

जहां बाहुबली 2 का कुल कलेक्शन 1788.06 करोड़ रहा, वहीं दंगल 2070.3 करोड़ के साथ अब भी सबसे आगे है। धुरंधर 2 और बाहुबली 2 के बीच महज करीब 28 करोड़ का अंतर रह गया, लेकिन फिर भी फिल्म इतिहास रचने से थोड़ा पीछे रह गई।

क्या रही पीछे रहने की वजह?

1. चीन और ओवरसीज मार्केट का असर
दंगल की ऐतिहासिक सफलता में चीन का बड़ा योगदान रहा, जहां फिल्म ने अकेले 1300 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी। वहीं धुरंधर 2 को ऐसा अंतरराष्ट्रीय सपोर्ट नहीं मिला।
इसके अलावा, गल्फ देशों में फिल्म पर बैन लगने की वजह से करीब 100 करोड़ तक का संभावित बिजनेस भी प्रभावित हुआ।

2. रीजनल भाषाओं में कमजोर प्रदर्शन
फिल्म ने हिंदी में शानदार कमाई (1000 करोड़+ नेट) की, लेकिन साउथ की भाषाओं—तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़—में इसका प्रदर्शन काफी सीमित रहा।
इसके उलट बाहुबली 2 और RRR जैसी फिल्मों ने पैन-इंडिया स्तर पर मजबूत पकड़ बनाई थी।

3. ‘A’ सर्टिफिकेट बना बाधा
फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट मिलने के कारण परिवारिक दर्शक वर्ग का बड़ा हिस्सा सिनेमाघरों से दूर रहा। इसका सीधा असर टिकट सेल्स पर पड़ा, क्योंकि जहां एक परिवार कई टिकट ले सकता था, वहां सीमित दर्शक ही फिल्म देख पाए।

4. लंबा रनटाइम
करीब 3 घंटे 49 मिनट (लगभग 4 घंटे) के लंबे रनटाइम ने भी फिल्म की पहुंच को सीमित किया। हर दर्शक इतना लंबा और हिंसक कंटेंट देखने के लिए तैयार नहीं होता, जिससे फुटफॉल पर असर पड़ा।

फिर भी बड़ी उपलब्धि
हालांकि धुरंधर 2 रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाई, लेकिन इसने खुद को एक सफल फ्रेंचाइजी के रूप में स्थापित कर लिया है। धुरंधर सीरीज के दोनों पार्ट मिलाकर 3000 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुके हैं, जो इसे इंडियन सिनेमा की बड़ी हिट फ्रेंचाइजी में शामिल करता है।

निष्कर्ष:
फिल्म की कमाई शानदार रही, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट, सर्टिफिकेशन, भाषा पहुंच और कंटेंट फैक्टर जैसे कारणों ने इसे दंगल और बाहुबली 2 से आगे निकलने से रोक दिया।

ईरान में एयर डिफेंस सक्रिय, इजरायल की चेतावनी—US के ग्रीन सिग्नल का इंतजार

मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। ईरान ने अपनी राजधानी तेहरान समेत कई इलाकों में एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सिस्टम संदिग्ध हवाई लक्ष्यों को इंटरसेप्ट करने के लिए लगातार काम कर रहा है, जिससे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनते दिख रहे हैं।

इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर टकराव और तेज हो गया है। नाकेबंदी के चलते वैश्विक तेल सप्लाई पर असर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नौसेना को निर्देश दिया है कि माइन्स बिछाने वाली किसी भी संदिग्ध नाव को तुरंत नष्ट कर दिया जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस समय होर्मुज क्षेत्र पर अमेरिका का नियंत्रण है।

इजरायल की सख्त चेतावनी
हालात को और गंभीर बनाते हुए इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि उनकी सेना पूरी तरह तैयार है और संभावित लक्ष्यों की पहचान कर ली गई है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए अमेरिका की ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार किया जा रहा है।

ईरान की शर्त
ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसकी कथित जब्त की गई लगभग 11 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति वापस नहीं की जाती, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला जाएगा।

भारत की एडवाइजरी और बढ़ती चिंता
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने या क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी है। हाल ही में एक जहाज को ईरानी बलों द्वारा रोके जाने की घटना ने भी चिंता बढ़ा दी है, हालांकि भारतीय नागरिक सुरक्षित बताए गए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया को एक बड़े संकट की ओर धकेल दिया है, जहां सैन्य तैयारियां, आर्थिक दबाव और कूटनीतिक गतिरोध एक साथ सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।