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Neetu Kapoor ने किया मुश्किल दौर का खुलासा, बोलीं- ‘ऋषि कपूर के निधन के बाद शराब के बिना नहीं आती थी नींद’

दिग्गज अभिनेता Rishi Kapoor के निधन के बाद उनकी पत्नी और अभिनेत्री Neetu Kapoor पूरी तरह टूट गई थीं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान नीतू कपूर ने उस मुश्किल दौर को याद करते हुए बताया कि वह कई महीनों तक ठीक से सो नहीं पाती थीं और धीरे-धीरे शराब का सहारा लेने लगी थीं।

‘2-3 महीने तक सो नहीं पाई’

Neetu Kapoor ने बताया कि पति के निधन के बाद उनकी मानसिक स्थिति बेहद खराब हो गई थी। उन्होंने कहा कि एक महीने बाद हालात ऐसे हो गए थे कि रातभर नींद नहीं आती थी।

उन्होंने कहा, “करीब दो-तीन महीने तक मैं सो नहीं पाती थी। हालत ऐसी हो गई थी कि बिना शराब पिए नींद ही नहीं आती थी।”

नीतू ने बताया कि वह हमेशा अपनी सेहत को लेकर सजग रही हैं, इसलिए खुद को इस स्थिति में देखकर उन्हें अच्छा नहीं लग रहा था।

डॉक्टर की मदद से बाहर आईं मुश्किल दौर से

अभिनेत्री ने बताया कि जब उन्हें महसूस हुआ कि स्थिति बिगड़ रही है, तब उन्होंने डॉक्टर से मदद मांगी। डॉक्टर रोज उनके घर आते थे और इलाज के तहत इंजेक्शन देते थे, ताकि उन्हें नींद आ सके।

उन्होंने कहा कि यह सिलसिला करीब 10 दिनों तक चला। बाद में जब उन्हें बेहतर महसूस होने लगा, तब उन्होंने डॉक्टर से कहा कि अब वह खुद को संभाल सकती हैं।

ट्रोलिंग पर भी तोड़ी चुप्पी

Neetu Kapoor ने यह भी बताया कि Jugjugg Jeeyo की शूटिंग के दौरान उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया गया था। कुछ लोगों ने सवाल उठाए थे कि पति के निधन के बाद वह इतनी जल्दी काम पर कैसे लौट आईं।

इस पर नीतू कपूर ने कहा कि वह दोबारा काम पर इसलिए लौटी थीं क्योंकि वह अपना आत्मविश्वास वापस पाना चाहती थीं और खुद को फिर से सामान्य जीवन में लाना चाहती थीं।

फिल्मों में साथ दिखी थी सुपरहिट जोड़ी

Neetu Kapoor और Rishi Kapoor हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय जोड़ियों में गिने जाते थे। दोनों ने कई सुपरहिट फिल्मों में साथ काम किया और बाद में शादी कर ली।

नई फिल्म को लेकर चर्चा में नीतू कपूर

वर्कफ्रंट की बात करें तो Neetu Kapoor इन दिनों अपनी नई फिल्म Daadi Ki Shaadi को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में Kapil Sharma और Riddhima Kapoor Sahni भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टकराव तेज, US ने दो ईरानी तेल टैंकरों को निष्क्रिय करने का दावा किया

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरानी झंडा लगे दो तेल टैंकरों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निष्क्रिय कर दिया। घटना के दौरान हुई फायरिंग में 10 ईरानी सैनिकों के घायल होने की खबर सामने आई है।

अमेरिकी सेना के अनुसार, M/T Sea Star III और M/T Sevda नाम के दोनों टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को पार कर ओमान की खाड़ी स्थित एक ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। अमेरिका का आरोप है कि ये जहाज लागू समुद्री प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे थे।

अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने की कार्रवाई

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि USS George H.W. Bush विमानवाहक पोत से उड़ान भरने वाले F/A-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमानों ने दोनों टैंकरों की चिमनियों को निशाना बनाया, जिससे वे आगे बढ़ने में असमर्थ हो गए।

इससे पहले अमेरिकी सेना ने एक अन्य ईरानी टैंकर M/T Hasna पर भी कार्रवाई की थी। बताया गया कि यह जहाज भी ओमान की खाड़ी में ईरानी बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा था। USS Abraham Lincoln से उड़ान भरने वाले लड़ाकू विमान ने टैंकर के रडर को निशाना बनाकर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया था।

CENTCOM का कहना है कि अब ये तीनों जहाज अपनी मंजिल की ओर आगे नहीं बढ़ रहे हैं।

अमेरिकी कमांडर का बयान

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर Brad Cooper ने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान आने-जाने वाले जहाजों पर लागू नाकेबंदी को सख्ती से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिक लगातार समुद्री गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं।

कई जहाजों का रास्ता बदला गया

अमेरिकी सेना के मुताबिक, हाल के दिनों में कई कॉमर्शियल जहाजों को रोका या उनका मार्ग बदला गया है। दावा किया गया कि 50 से अधिक जहाजों का रूट बदलकर नाकेबंदी के नियमों का पालन सुनिश्चित कराया गया।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इस कार्रवाई को बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा असर डाल सकती है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन ने दी तकनीकी मदद? इंजीनियरों के दावे से बढ़ी हलचल

ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा होने के बीच चीन को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। चीन के सरकारी मीडिया से जुड़े प्लेटफॉर्म पर प्रसारित एक इंटरव्यू में चीनी इंजीनियरों ने स्वीकार किया कि ऑपरेशन के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर काम किया था। इस खुलासे के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव में चीन की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन की एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन से जुड़े चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च संस्थान के इंजीनियरों के इंटरव्यू और CCTV फुटेज सामने आए हैं। यही संस्थान चीन के आधुनिक लड़ाकू विमान और ड्रोन विकसित करता है।

चीनी इंजीनियर ने क्या कहा?

संस्थान के इंजीनियर Zhang Heng ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान उनकी टीम लगातार पाकिस्तान के कर्मचारियों के साथ काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि सपोर्ट बेस पर लगातार फाइटर जेट्स की आवाजें और हवाई हमलों के सायरन सुनाई देते थे। अत्यधिक गर्मी और तनावपूर्ण माहौल में काम करना शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन था।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टीम का मुख्य उद्देश्य लड़ाकू विमानों और उनसे जुड़े सिस्टम को सुचारू रूप से सक्रिय रखना था।

पाकिस्तान के J-10CE फाइटर जेट पर चर्चा

रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान वायुसेना चीन में बने Chengdu J-10CE फाइटर जेट का इस्तेमाल करती है। यह चीन के J-10C मल्टीरोल लड़ाकू विमान का एक्सपोर्ट वर्जन माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की तकनीकी सहायता पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती थी।

ऑपरेशन सिंदूर क्या था?

7 मई 2025 को भारतीय सेना ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद Operation Sindoor शुरू किया था। इस अभियान का उद्देश्य पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाना था। भारतीय सेना ने दावा किया था कि इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया।

भारतीय सेना पहले भी जता चुकी थी शक

भारतीय सेना के डिप्टी चीफ Rahul R Singh ने पहले भी आरोप लगाया था कि चीन ने पाकिस्तान की मदद के लिए अपने सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल किया हो सकता है। उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान को भारतीय सैन्य गतिविधियों से जुड़ी रियल-टाइम जानकारी मिल रही थी।

उन्होंने चीन की रणनीति की तुलना प्राचीन चीनी सैन्य सिद्धांत “36 स्ट्रेटेजम्स” से करते हुए कहा था कि चीन ने भारत पर दबाव बनाने के लिए पाकिस्तान को एक प्रॉक्सी की तरह इस्तेमाल किया।

चीन की भूमिका पर बढ़े सवाल

हालांकि चीन ने आधिकारिक तौर पर भारतीय आरोपों का सीधा जवाब नहीं दिया था, लेकिन अब सामने आए इंजीनियरों के बयानों को कई विशेषज्ञ अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति के तौर पर देख रहे हैं। इससे दक्षिण एशिया में चीन-पाकिस्तान सैन्य सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

ऑपरेशन सिंदूर पर पाक सेना के बयान से मचा बवाल, सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर घेरा

भारत द्वारा पाकिस्तान में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को एक वर्ष पूरा होने पर भारतीय सैन्य अधिकारियों ने विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने पिछले साल हुए सैन्य अभियान और उससे जुड़ी रणनीतिक स्थिति पर जानकारी दी। प्रेस ब्रीफिंग के कुछ ही समय बाद पाकिस्तान की ओर से भी एक प्रेस मीटिंग आयोजित की गई, जिसे “मरका-ए-हक” नाम दिया गया। हालांकि, पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता का एक बयान सोशल मीडिया पर चर्चा और आलोचना का कारण बन गया।

अंग्रेजी भाषा पर उठाया सवाल

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने भारतीय अधिकारियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि भारतीय सैन्य अधिकारी मीडिया से अंग्रेजी में क्यों बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय डीजीएमओ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अंग्रेजी में प्रेस ब्रीफिंग की और पूछा कि क्या ऐसा इसलिए किया गया ताकि दुनिया को संदेश दिया जा सके।

उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी और इसे मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला बयान बताया।

सोशल मीडिया पर हुई आलोचना

सोशल मीडिया यूजर्स ने पाकिस्तान सेना की आलोचना करते हुए कहा कि भारत की ओर से आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बात की गई, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से भाषा पर सवाल उठाए गए। कई लोगों ने इसे पाकिस्तान की असहजता और रणनीतिक जवाब की कमी से जोड़कर देखा।

एक यूजर ने लिखा कि भारतीय अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक अपनी बात पहुंचाने के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल किया, जो वैश्विक स्तर पर सामान्य बात है। वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि पाकिस्तान को वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए थी, न कि प्रेस कॉन्फ्रेंस की भाषा पर।

ऑपरेशन सिंदूर की फिर हुई चर्चा

ऑपरेशन सिंदूर पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का बड़ा कारण बना था। भारतीय सेना ने इसे आतंकवाद विरोधी अभियान बताया था। इस अभियान की पहली वर्षगांठ पर दोनों देशों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, लेकिन पाकिस्तानी प्रवक्ता का बयान इंटरनेट पर सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य ब्रीफिंग में अंग्रेजी का इस्तेमाल आम बात है, क्योंकि इससे वैश्विक मीडिया और विदेशी सरकारों तक संदेश आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

Sports News:Virat Kohli क्या टी20 संन्यास से करेंगे वापसी? ओलंपिक क्रिकेट को लेकर बढ़ी चर्चा

भारतीय क्रिकेट टीम की ICC Men’s T20 World Cup 2024 जीत के बाद Virat Kohli और Rohit Sharma ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेकर फैंस को चौंका दिया था। लेकिन अब 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों को लेकर एक बार फिर विराट कोहली की वापसी की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

128 साल बाद ओलंपिक में लौटेगा क्रिकेट

2028 Summer Olympics में क्रिकेट की ऐतिहासिक वापसी होने जा रही है। 128 साल बाद क्रिकेट फिर से ओलंपिक का हिस्सा बनेगा। इससे पहले आखिरी बार साल 1900 के 1900 Summer Olympics में क्रिकेट खेला गया था।

लॉस एंजेलिस ओलंपिक में क्रिकेट टी20 फॉर्मेट में खेला जाएगा, जिससे क्रिकेट फैंस के बीच उत्साह काफी बढ़ गया है।

विराट कोहली को लेकर क्यों हो रही चर्चा?

ओलंपिक आयोजन समिति के स्पोर्ट्स डायरेक्टर Niccolo Campriani ने पहले कहा था कि क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल करने के पीछे एक बड़ा कारण Virat Kohli की वैश्विक लोकप्रियता भी है।

इसी बयान के बाद यह अटकलें तेज हो गईं कि क्या विराट कोहली ओलंपिक में खेलने के लिए टी20 संन्यास से वापसी कर सकते हैं।

विराट ने क्या कहा था?

कुछ समय पहले जब विराट कोहली से ओलंपिक में खेलने को लेकर सवाल पूछा गया था, तब उन्होंने कहा था कि ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद खास अनुभव होता है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि वह टी20 संन्यास से वापसी करेंगे या नहीं।

केवल 6 टीमें लेंगी हिस्सा

ओलंपिक क्रिकेट प्रतियोगिता में पुरुष और महिला वर्ग में सिर्फ 6-6 टीमें हिस्सा लेंगी। क्रिकेट मुकाबले जुलाई 2028 में खेले जाने प्रस्तावित हैं। ऐसे में टीम इंडिया में जगह बनाने की प्रतिस्पर्धा भी काफी दिलचस्प रहने वाली है।

अब फैंस की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या Virat Kohli ओलंपिक जैसे बड़े मंच के लिए एक बार फिर टी20 क्रिकेट में वापसी करेंगे या नहीं।