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Sports News:लगातार 5 हार से मुश्किल में पंजाब किंग्स, अब कैसे मिलेगा प्लेऑफ का टिकट?

Punjab Kings के लिए IPL 2026 का सफर अचानक मुश्किलों से भर गया है। कुछ हफ्ते पहले तक टीम पॉइंट्स टेबल में दबदबा बनाए हुए थी, लेकिन लगातार पांच हार ने उसका समीकरण पूरी तरह बदल दिया। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम अब चौथे स्थान पर खिसक गई है और प्लेऑफ की राह आसान नहीं रही।

पंजाब किंग्स ने अब तक 12 मुकाबले खेले हैं और टीम के खाते में 13 अंक हैं। अगर PBKS अपने बचे हुए दोनों मैच जीत लेती है तो उसके 17 अंक हो जाएंगे। IPL इतिहास के अनुसार 17 अंक आमतौर पर प्लेऑफ में जगह पक्की करने के लिए काफी माने जाते हैं।

हालांकि अगर पंजाब सिर्फ एक मुकाबला जीतती है, तो टीम 15 अंकों तक पहुंचेगी। ऐसे में उसका भविष्य दूसरे मुकाबलों के नतीजों पर निर्भर करेगा। पंजाब को अभी Royal Challengers Bengaluru और Lucknow Super Giants के खिलाफ मैच खेलने हैं, जो उसके लिए करो या मरो जैसे साबित हो सकते हैं।

टीम की सबसे बड़ी कमजोरी गेंदबाजी बनकर सामने आई है। पिछले पांच मैचों में चार बार पंजाब के गेंदबाज 200 से ज्यादा रन लुटा चुके हैं। इतना ही नहीं, टीम तीन बार 200 रन बनाने के बावजूद मुकाबला नहीं बचा पाई। यही कारण है कि शानदार शुरुआत करने वाली पंजाब अब दबाव में दिखाई दे रही है।

अमेरिका-ईरान विवाद के बीच रूस का बयान, भारत निभा सकता है अहम कूटनीतिक भूमिका

BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने भारत की कूटनीतिक क्षमता की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने में भारत भविष्य में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने और लंबे समय तक संवाद कायम रखने के लिए भारत एक भरोसेमंद और प्रभावशाली साझेदार साबित हो सकता है।

लावरोव ने कहा कि मौजूदा समय में पाकिस्तान तत्काल बातचीत शुरू कराने की कोशिशों में सहयोग कर रहा है, लेकिन यदि दीर्घकालिक समाधान और स्थायी मध्यस्थता की जरूरत पड़ी तो भारत बेहतर विकल्प बन सकता है। उनके अनुसार भारत के पास दशकों का कूटनीतिक अनुभव, वैश्विक स्तर पर मजबूत साख और पश्चिम एशियाई देशों के साथ संतुलित संबंध हैं।

रूसी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है और उसकी बड़ी तेल जरूरतें पश्चिम एशिया से पूरी होती हैं। ऐसे में क्षेत्र में किसी बड़े संघर्ष का असर सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। उन्होंने विशेष रूप से Strait of Hormuz का जिक्र करते हुए कहा कि यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

लावरोव के मुताबिक BRICS एक संगठन के रूप में औपचारिक मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाएगा, लेकिन उसके सदस्य देश व्यक्तिगत स्तर पर शांति और संवाद को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और बातचीत का रास्ता खुला रखना है।

अपने बयान में लावरोव ने बिना सीधे नाम लिए कुछ वैश्विक शक्तियों पर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ आक्रामक माहौल बनाने में United States और Israel की नीतियां अहम भूमिका निभा रही हैं। उनका कहना था कि किसी भी संघर्ष को समझने के लिए उसकी जड़ों और राजनीतिक परिस्थितियों का विश्लेषण जरूरी है।

इस दौरान उन्होंने यह भी पुष्टि की कि Narendra Modi इस वर्ष रूस में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दौरा करेंगे। रूस ने भारत के साथ ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत बताया।

रूस और भारत के बीच आर्थिक सहयोग पर बोलते हुए लावरोव ने कहा कि दोनों देश डॉलर पर निर्भरता कम करने और राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनका कहना था कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में संतुलन लाने के लिए वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों पर काम किया जा रहा है।

लावरोव के बयान के बाद एक बार फिर भारत की ‘शांति दूत’ वाली छवि पर चर्चा तेज हो गई है। भारत पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय संकटों और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा चुका है। हाल के वर्षों में भारत लगातार संवाद, संतुलन और शांतिपूर्ण समाधान की नीति पर जोर देता रहा है।

चीन यात्रा के आखिरी दिन ट्रंप को शी जिनपिंग ने दिया खास उपहार, मुलाकात बनी चर्चा का विषय

Donald Trump ने अपनी तीन दिवसीय चीन यात्रा पूरी कर बीजिंग से वापसी की। इस दौरान उनकी मुलाकात Xi Jinping के साथ कई अहम वैश्विक मुद्दों पर हुई। दोनों नेताओं ने वार्ता को सकारात्मक और महत्वपूर्ण बताया, हालांकि किसी बड़े विवादित मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से किसी समझौते की घोषणा नहीं की गई।

यात्रा के अंतिम दिन शी जिनपिंग ने ट्रंप को चीन के बेहद सुरक्षित और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परिसर Zhongnanhai का दौरा कराया। यह वही स्थान है जहां चीन के शीर्ष नेता काम करते और रहते हैं। आमतौर पर इस परिसर को बाहरी लोगों के लिए बेहद सीमित माना जाता है, इसलिए इसे विशेष सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है।

दौरे के दौरान ट्रंप वहां मौजूद बड़े गुलाबों से काफी प्रभावित दिखाई दिए। इसके बाद शी जिनपिंग ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन के लिए उन विशेष गुलाबों के बीज उपहार में देने की बात कही। इस gesture को दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक व्यक्तिगत संबंधों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि ट्रंप की यह यात्रा पूरी तरह विवादों से दूर नहीं रही। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बात पर चर्चा की कि बीजिंग पहुंचने पर ट्रंप का स्वागत स्वयं शी जिनपिंग ने नहीं किया। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत चीन के उपराष्ट्रपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने किया था। इसे लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

ट्रंप के प्रतिनिधिमंडल में Marco Rubio, Pete Hegseth, Elon Musk और Tim Cook जैसे प्रमुख नाम शामिल थे।

दोनों देशों के बीच हुई बातचीत में ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार, पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों नेताओं ने Strait of Hormuz को खुला रखने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न होने देने पर भी सहमति जताई।

इसके अलावा ट्रंप ने शी जिनपिंग और उनकी पत्नी को सितंबर में White House आने का निमंत्रण भी दिया। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच मतभेद बने रहने के बावजूद दोनों देश संवाद का रास्ता खुला रखना चाहते हैं।

भारत-UAE रिश्तों को नई मजबूती, PM मोदी की यात्रा में ऊर्जा, रक्षा और AI समेत कई बड़े करार

Narendra Modi के संयुक्त अरब अमीरात दौरे के दौरान भारत और United Arab Emirates के बीच ऊर्जा, रक्षा, बुनियादी ढांचा, शिपिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे कई रणनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए। इस दौरान यूएई ने भारत में करीब 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता भी जताई।

प्रधानमंत्री मोदी ने अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan के साथ उच्चस्तरीय वार्ता की। दोनों देशों ने कुल छह प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनका उद्देश्य दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना है।

भारत में बढ़ेगा तेल भंडारण

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और Abu Dhabi National Oil Company के बीच समझौता हुआ। इसके तहत यूएई भारत में अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को बढ़ाकर लगभग 3 करोड़ बैरल तक पहुंचाएगा। साथ ही भारत में रणनीतिक गैस भंडारण विकसित करने पर भी सहमति बनी है।

एलपीजी सप्लाई पर दीर्घकालिक समझौता

Indian Oil Corporation और ADNOC के बीच एलपीजी की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर भी करार हुआ है। इसका उद्देश्य भारत में घरेलू उपयोग के लिए रसोई गैस की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

रक्षा और टेक्नोलॉजी सहयोग होगा मजबूत

दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग, टेक्नोलॉजी शेयरिंग, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अलावा एडवांस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर भी साझेदारी मजबूत करने की योजना बनाई गई है।

भारत में बड़े निवेश की घोषणा

यूएई की विभिन्न संस्थाओं ने भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का भरोसा दिया है। इसमें अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और भारत के राष्ट्रीय अवसंरचना एवं निवेश कोष के बीच संभावित निवेश योजनाएं शामिल हैं।

इसके अलावा यूएई की वित्तीय संस्था Emirates NBD भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में निवेश करेगी, जबकि इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी ने भारत की सम्मान कैपिटल में बड़ा निवेश करने की योजना बनाई है।

गुजरात में बनेगा जहाज मरम्मत केंद्र

दोनों देशों के बीच गुजरात के वडीनार में जहाज मरम्मत केंद्र विकसित करने और बंदरगाह अवसंरचना को मजबूत करने पर भी समझौता हुआ। साथ ही जहाज मरम्मत क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।

AI और सुपरकंप्यूटिंग पर फोकस

भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सुपरकंप्यूटर क्लस्टर विकसित करने को लेकर भी अहम करार किया गया। इसे भविष्य की तकनीकी साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

दोनों देशों ने ‘वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर’ पहल का भी स्वागत किया, जिसका उद्देश्य बंदरगाहों और सीमा शुल्क प्रणालियों को डिजिटल रूप से जोड़कर व्यापार को तेज और आसान बनाना है। इससे माल ढुलाई की लागत कम करने और ट्रांजिट समय घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Health Update:कोरोना महामारी का बड़ा खुलासा! WHO रिपोर्ट में सामने आई मौतों की असली तस्वीर

कोरोना महामारी को लेकर दुनिया भर में जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों पर अब बड़े सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में सामने आई वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 से हुई वास्तविक मौतों की संख्या सरकारी रिकॉर्ड से कई गुना ज्यादा हो सकती है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि महामारी के दौरान जितनी मौतें दर्ज की गईं, असल संख्या उससे लगभग तीन गुना अधिक रही।

आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा थीं मौतें

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 से 2023 के बीच दुनियाभर में करीब 2.21 करोड़ अतिरिक्त मौतें हुईं। वहीं इसी अवधि में विभिन्न देशों ने लगभग 70 लाख कोविड मौतों की ही पुष्टि की थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़ी संख्या में मौतें या तो रिकॉर्ड नहीं हो सकीं या फिर उन्हें किसी अन्य बीमारी के खाते में दर्ज कर दिया गया।

सिर्फ कोरोना नहीं, स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ा असर

WHO ने साफ किया कि इन अतिरिक्त मौतों में केवल कोरोना संक्रमण से हुई मौतें शामिल नहीं हैं। महामारी के दौरान अस्पतालों पर भारी दबाव पड़ा, जिसके कारण अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल सका। कई देशों में डॉक्टरों, ऑक्सीजन, ICU बेड और जरूरी दवाइयों की भारी कमी देखने को मिली।

लॉकडाउन और स्वास्थ्य सेवाओं में रुकावट की वजह से हार्ट डिजीज, कैंसर, डायबिटीज और दूसरी गंभीर बीमारियों के मरीजों की हालत भी बिगड़ती चली गई।

2021 रहा सबसे खतरनाक साल

रिपोर्ट में बताया गया कि कोरोना महामारी का सबसे भयावह दौर साल 2021 था। इसी दौरान करीब 1.04 करोड़ अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं। उस समय दुनिया कई खतरनाक वेरिएंट्स की लहर से जूझ रही थी और स्वास्थ्य व्यवस्थाएं लगभग चरमरा गई थीं।

हालांकि 2021 के बाद हालात धीरे-धीरे सुधरने लगे, लेकिन महामारी का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में भी करीब 33 लाख अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं।

पुरुषों में ज्यादा रहा मौत का खतरा

WHO की रिपोर्ट के अनुसार महामारी के दौरान पुरुषों में मृत्यु दर महिलाओं की तुलना में काफी ज्यादा रही। साल 2021 में पुरुषों की मौत का जोखिम महिलाओं से लगभग 50 प्रतिशत अधिक पाया गया।

विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जैसे पहले से मौजूद बीमारियां, कामकाजी जोखिम और इलाज में देरी।

बुजुर्गों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 85 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में मृत्यु दर सबसे ज्यादा थी। इस आयु वर्ग में मौत का खतरा युवाओं की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक पाया गया।

डायबिटीज, दिल की बीमारी, फेफड़ों की समस्या और कमजोर इम्यून सिस्टम जैसी स्थितियों ने बुजुर्गों को कोरोना के प्रति अधिक संवेदनशील बना दिया।

गरीब देशों में सामने नहीं आ सकी पूरी तस्वीर

WHO ने यह भी कहा कि कई गरीब और विकासशील देशों में मौतों का वास्तविक डेटा कभी पूरी तरह रिकॉर्ड ही नहीं हो पाया। कमजोर स्वास्थ्य ढांचा और मृत्यु पंजीकरण की खराब व्यवस्था के कारण वास्तविक आंकड़े सामने आने में बड़ी दिक्कत रही।

महामारी ने दुनिया को क्या सिखाया?

विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी ने यह साफ कर दिया कि मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, समय पर डेटा रिकॉर्डिंग और आपातकालीन तैयारी कितनी जरूरी है। आने वाले समय में ऐसी वैश्विक स्वास्थ्य आपदाओं से निपटने के लिए देशों को अपनी मेडिकल और पब्लिक हेल्थ सिस्टम को और मजबूत करना होगा।