ह्यूस्टन: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रवासियों को देश से बाहर करने की योजना के समर्थन में टेक्सास ने अमेरिकी-मेक्सिको सीमा के पास राज्य सरकार के स्वामित्व वाली 1400 एकड़ खेती की जमीन को इस्तेमाल के लिए देने की पेशकश की है। ‘टेक्सास लैंड कमिश्नर’ डॉन बकिंघम ने ट्रंप को लिखे एक पत्र में होमलैंड सुरक्षा विभाग और आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) सहित संघीय एजेंसियों के साथ सहयोग में मदद करने की बात कही। उन्होंने स्टैर काउंटी में स्थित संपत्ति को ‘हिंसक अपराधियों’ को हिरासत और देश से निकालने से पहले यहां रखने के लिए इसके एक स्थल के रूप में इस्तेमाल करने की पेशकश की।
यह भी जानें
बकिंघम ने खेती की जमीन पर दीवार के निर्माण कार्य का विरोध करने के लिए अपने पूर्ववर्ती की आलोचना की और आरोप लगाया कि इस कदम से आपराधिक गिरोहों के बीच हिंसा और प्रवासियों के शोषण को बढ़ावा मिला। टेक्सास ने दीवार की लिए योजना सहित सीमा सुरक्षा प्रयासों को मजबूत बनाने के लिए पिछले महीने जमीन अधिग्रहित की थी।
इरादे साफ कर चुके हैं ट्रंप
ट्रंप आव्रजन संबंधी राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने के अपने इरादे जगजाहिर कर चुके हैं। इस कदम से लाखों लोगों को देश से निकालने के मानवीय और तार्किक निहितार्थों के बारे में समर्थकों के बीच चिंताएं बढ़ गई हैं। टेक्सास ने जहां ट्रंप की आव्रजन नीतियों का समर्थन किया तो वहीं अन्य राज्यों में इस फैसले के प्रति रोष बढ़ रहा है। बकिंघम के समर्थन प्रस्ताव के साथ ही लॉस एंजिलिस ने प्रवासियों की रक्षा करने और संघीय आव्रजन अधिकारियों के साथ स्थानीय सहयोग को सीमित करने के लिए एक अध्यादेश पारित किया है।
एक महीने के भीतर HEW कर्मियों के चयन की प्रक्रिया पूरी करने का है लक्ष्य
HEW कर्मियों को कौशल विकास, लैंगिक समानता और घरेलू हिंसा से बचाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर दिया जा रहा है प्रशिक्षण
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की ओर अग्रसर है यूपी
महिलाओं को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक जिले में सेवा केंद्रों का संचालन
लखनऊ, 21 नवंबर 2024: योगी सरकार महिला सशक्तिकरण की दिशा में लगातार नए आयाम स्थापित कर रही है। प्रदेश में महिलाओं को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन’ और ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ को एक नई गति दी जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे प्रदेश में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई राहें खुल रही हैं। योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए प्रदेश भर में जिलास्तर पर निर्धारित 07 कर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसे आगामी एक महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
‘हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन’ (HEW) और ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ (PMMVY) जैसी योजनाओं को मजबूती से लागू कर, राज्य सरकार महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में अग्रसर है। ‘हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन’ को लेकर भारत सरकार द्वारा 2022 में जारी नई गाइडलाइन्स को अपनाते हुए योगी सरकार ने सभी जिलों में सेवा केंद्रों का संचालन सुनिश्चित किया है। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। योगी सरकार ने HEW के माध्यम से महिलाओं को राज्य और राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं के बारे में जानकारी देने, उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया को और सुदृढ़ किया है। HEW कर्मियों को कौशल विकास, लैंगिक समानता, और घरेलू हिंसा से बचाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
HEW कर्मियों की नियुक्ति में अपनाई जाएगी आउटसोर्सिंग प्रक्रिया
HEW योजना में जिलास्तर पर निर्धारित 07 कर्मियों की भर्ती की जानी है। योगी सरकार ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए HEW और PMMVY कर्मियों की नियुक्ति में आउटसोर्सिंग प्रक्रिया अपनाई है। इन कर्मियों की भर्ती में पूर्ववर्ती महिला शक्ति केंद्र योजना तथा प्रधानमंत्री मात्र वन्दन योजना के अंतर्गत कार्य कर चुके कर्मियों को योग्यता व पात्रता के अनुरूप प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। यह प्रक्रिया जेम (GEM) पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी, जिससे नियुक्तियों में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके। इसके साथ ही, कर्मियों को उनके कार्य के लिए मानदेय का भुगतान जिला स्तर पर किया जाएगा।
महिलाओं के पोषण और स्वास्थ्य का रखा जा रहा ध्यान
प्रदेश में महिला और बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से 2017 से 2024 तक ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ (PMMVY) का संचालन किया गया। मार्च 2024 से इस योजना को बाल विकास सेवा और पुष्टाहार विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनके पोषण और स्वास्थ्य का ध्यान रखना है।
PMMVY के माध्यम से महिलाओं को 5,000 रुपये की सहायता राशि तीन किस्तों में दी जाती है। इस योजना से लाखों महिलाओं को लाभ हुआ है, जिससे उनकी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली है। योगी सरकार ने इस योजना को लागू करने में पारदर्शिता और कुशलता का विशेष ध्यान रखा है, ताकि हर लाभार्थी तक इसका लाभ पहुंचे।
एक महीने के भीतर भर्ती HEW कर्मियों के भर्ती का लक्ष्य
योगी सरकार की प्रतिबद्धता के कारण, इन योजनाओं का कार्यान्वयन बेहद प्रभावी तरीके से किया जा रहा है। विशेष रूप से, महिला शक्ति केंद्र (MSK) योजना के अंतर्गत कार्य कर चुके कर्मियों को प्राथमिकता देकर योजनाओं में निरंतरता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है। इसके अलावा, वर्तमान वित्तीय वर्ष में, केवल एक महीने के भीतर सेवा प्रदाता एजेंसियों के माध्यम से कर्मियों के चयन की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
‘हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन’ और ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ के माध्यम से योगी सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, और आर्थिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने में जुटी है। प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों में इन योजनाओं के साथ-साथ अन्य पहलें भी शामिल हैं, जैसे कौशल विकास केंद्रों की स्थापना, महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना और उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना। योगी सरकार का यह प्रयास महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
मुंशी पुलिया चौराहे का नाम बदलने की मांग: सपा ने महापौर से इसे स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के नाम पर रखने का आग्रह किया।
चौमुखी प्रतिमा की स्थापना: चौराहे पर नेताजी की प्रतिमा लगाने की भी मांग की गई।
इस्माइलगंज-प्रथम वार्ड का नाम बदलने का प्रस्ताव: सपा ने वार्ड का नाम नेताजी के नाम पर करने की मांग की।
सपा प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व: ज्ञापन देने में लखनऊ महानगर अध्यक्ष फ़ाख़िर सिद्दीकी और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल रहे।
महापौर का आश्वासन: महापौर ने मांगों पर विचार करने का भरोसा दिलाया।
लखनऊ, 21 नवंबर 2024: समाजवादी पार्टी (सपा) पदाधिकारियों ने लखनऊ महानगर के महापौर सुषमा खर्कवाल को ज्ञापन सौंपते हुए मुंशी पुलिया चौराहे का नाम पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के नाम पर रखने की मांग की है। सपा प्रतिनिधि मंडल ने यह ज्ञापन ‘नेता जी’ की जयंती की पूर्व संध्या पर सौंपा। सपा ने यह भी मांग की कि चौराहे पर स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की चौमुखी प्रतिमा स्थापित की जाए।
महापुरुषों के सम्मान में नामकरण की परंपरा का दिया हवाला सपा प्रतिनिधियों ने नगर निगम की पूर्व परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि लखनऊ के कई प्रमुख चौराहे, वार्ड और स्थान महापुरुषों, पूर्व प्रधानमंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम पर रखे गए हैं। उसी क्रम में, इंदिरा नगर स्थित मुंशी पुलिया चौराहे का नाम बदलकर स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के नाम पर रखा जाए। साथ ही, इस्माइलगंज-प्रथम वार्ड का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री और भारत के रक्षा मंत्री रहे पद्म विभूषण मुलायम सिंह यादव के नाम पर कर दिया जाए।
महापौर को सौंपा ज्ञापन ज्ञापन सौंपने वाले सपा प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व लखनऊ महानगर अध्यक्ष फ़ाख़िर सिद्दीकी ने किया। उनके साथ महानगर महासचिव इरशाद अहमद गुड्डू, मीडिया प्रभारी गौरव सिंह यादव, सपा पार्षद दल नेता कामरान बेग, सपा पूर्व पार्षद दल नेता यावर हुसैन ‘रेशु’, वरिष्ठ पार्षद शफीकुर्रहमान चचा और प्रदेश सचिव प्रदीप कन्नौजिया उपस्थित रहे।
सपा की यह मांग ‘नेता जी’ के प्रति सम्मान का प्रतीक सपा ने कहा कि मुलायम सिंह यादव का योगदान न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश की राजनीति में ऐतिहासिक रहा है। उनकी स्मृति को जीवित रखने और नई पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा देने के लिए यह कदम उठाना आवश्यक है।
महापौर का आश्वासन महापौर सुषमा खर्कवाल ने सपा की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि इस पर नगर निगम स्तर पर विचार किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने फॉर्च्यून ग्लोबल-500 कंपनियों को आकर्षित करने के लिए नई बल्क लैंड अलॉटमेंट पॉलिसी का मसौदा तैयार किया।
100% एफडीआई और 100 करोड़ से अधिक पूंजी निवेश वाली कंपनियों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा।
औद्योगिक क्षेत्रों में प्लग एंड प्ले सुविधाओं और प्राइवेट इंडस्ट्रियल जोन का होगा विकास।
तीन श्रेणियों में परियोजनाओं को वर्गीकृत कर भूमि आवंटन में तेजी लाई जाएगी।
इन्वेस्ट यूपी नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करते हुए भू-आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगी।
लखनऊ, 21 नवंबर 2024: उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को औद्योगिक केंद्र बनाने और बड़े निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई बल्क लैंड अलॉटमेंट पॉलिसी का मसौदा तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस पॉलिसी का उद्देश्य फॉर्च्यून ग्लोबल-500, फोर्ब्स ग्लोबल-2000 और , वाली कंपनियों को राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और 100 करोड़ रुपये से अधिक के पूंजी निवेश वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
पॉलिसी के प्रमुख लाभ
फॉर्च्यून ग्लोबल-500 जैसी कंपनियों के लिए विशेष सुविधाएं: लैंड पार्सल चयन, भू-आवंटन और अन्य बुनियादी ढांचे से संबंधित प्रक्रियाओं को फास्ट-ट्रैक करने के लिए आईआईडीसी स्तर पर समिति का गठन किया गया है।
औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर जोर: प्लग एंड प्ले इंडस्ट्रियल जोन, इनोवेशन सेंटर्स और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के निर्माण को प्राथमिकता मिलेगी।
दिग्गज कंपनियों के निवेश प्रस्तावों को गति: सिंगापुर की सेंबकॉर्प, जापान की एपीएसईजेड और मारुबेनी जैसी कंपनियों ने राज्य में निवेश करने की रुचि दिखाई है।
विशेष श्रेणियों में परियोजनाओं की वरीयता: 201-750 करोड़ के निवेश पर 100-200 एकड़ भूमि, 751-1500 करोड़ पर 201-300 एकड़, और 1500 करोड़ से अधिक निवेश पर 301 एकड़ से अधिक भूमि आवंटित की जाएगी।
एफडीआई और राजस्व आधारित प्रोत्साहन: 3 वित्तीय वर्षों में 1000 करोड़ रुपये से अधिक के औसत राजस्व वाली कंपनियों को भी इस पॉलिसी का लाभ मिलेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश का ‘मोस्ट फेवर्ड डेस्टिनेशन’ बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। फॉर्च्यून ग्लोबल-500, फोर्ब्स ग्लोबल-2000 और एशिया बेस्ट 200 में शामिल कंपनियों को राज्य में भूमि आवंटन में सहूलियत देने के लिए बल्क लैंड अलॉटमेंट पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।
लैंड अलॉटमेंट प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी
इस पॉलिसी के तहत, प्रदेश में बड़े निवेश वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता मिलेगी। औद्योगिक भूमि का आवंटन और प्लग एंड प्ले सुविधाओं का विकास तेजी से किया जाएगा। लैंड पार्सल चयन और भू-आवंटन के लिए आईआईडीसी स्तर पर फास्ट ट्रैक अलॉटमेंट कमेटी का गठन किया गया है।
दिग्गज कंपनियों के लिए आकर्षक निवेश माहौल
फॉर्च्यून-500 और अन्य वैश्विक कंपनियों के लिए राज्य में निवेश को आसान बनाने के लिए सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित किया है। इस पॉलिसी के तहत सिंगापुर, जापान और अन्य देशों की कंपनियों ने रुचि दिखाई है।
राजस्व और एफडीआई आधारित प्रोत्साहन
100% एफडीआई और 100 करोड़ रुपये से अधिक पूंजी निवेश करने वाली कंपनियों को विशेष छूट दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, जिन कंपनियों ने तीन वर्षों में 1000 करोड़ रुपये से अधिक का औसत राजस्व अर्जित किया है, उन्हें भी वरीयता दी जाएगी।
तीन श्रेणियों में निवेश परियोजनाओं की वर्गीकरण
इस पॉलिसी में परियोजनाओं को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
201-750 करोड़ रुपये के निवेश पर: 100-200 एकड़ भूमि का आवंटन।
751-1500 करोड़ रुपये के निवेश पर: 201-300 एकड़ भूमि का आवंटन।
1500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर: 301 एकड़ से अधिक भूमि का आवंटन।
इन परियोजनाओं को 5 से 7 वर्षों की समयावधि में पूरा करना होगा। आवश्यकतानुसार, अधिकतम 2 वर्षों का विस्तार प्रदान किया जा सकता है।
पॉलिसी से जुड़े प्रमुख बिंदु
औद्योगिक क्षेत्र: नई पॉलिसी के जरिए राज्य में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
CSR प्रोजेक्ट्स का समर्थन: सामाजिक दायित्व के तहत कंपनियों को सीएसआर परियोजनाओं में भी योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
नोडल एजेंसी: इन्वेस्ट यूपी इस पॉलिसी के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगी।
तेजी से भू-आवंटन प्रक्रिया: भूमि आवंटन को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए तकनीकी हस्तक्षेप किया जाएगा।
महाकुंभ से पहले एक दिसंबर को लाइव हो जाएगा डिजिटल खोया पाया केंद्र
योगी सरकार के निर्देश पर केंद्र को बनाया गया हाईटेक, 328 एआई कैमरे किए जा रहे इंस्टॉल
मेला क्षेत्र की चार प्रमुख लोकेशन पर एआई कैमरों की टेस्टिंग संपन्न
प्रयागराज, 21 नवम्बर 2024: महाकुंभ की तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगी योगी आदित्यनाथ सरकार पहली बार इतने व्यापक स्तर पर महाआयोजन का डिजिटलाइजेशन कर रही है। यहां एआई की मदद से ऐसे कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो 45 करोड़ श्रद्धालुओं की हिफाजत में 24 घंटे तैनात रहेंगे। एआई लाइसेंस वाले इन कैमरों के साथ ही फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म भी बिछड़ने वाले परिजनों को खोजने में तत्काल मदद करेंगे।
मदद करेगा डिजिटल खोया पाया केंद्र, पलक झपकते काम करेगी तकनीक
इस बार महाकुंभ में देश विदेश से बड़ी संख्या में आने वाले लोगों को अपनों को खोने का डर नहीं सताएगा। मेला प्रशासन ने इसकी व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसके लिए डिजिटल खोया पाया केंद्र को एक दिसंबर से लाइव किया जाएगा। इसके माध्यम से 328 एआई लाइसेंस वाले कैमरे पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रखेंगे। इन सभी कैमरों का परीक्षण कर लिया गया है। पूरे मेला क्षेत्र को इन विशेष कैमरों से लैस किया जा रहा है। योगी सरकार के निर्देश पर बड़े पैमाने पर कैमरे इंस्टॉल करने का काम अपने अंतिम चरण में है। मेला क्षेत्र की चार लोकेशन पर इन विशेष एआई कैमरों का परीक्षण भी किया जा चुका है। महाकुंभ में अब कोई भी अपना बिछड़ने नहीं पाएगा। महाकुंभ 2025 में शामिल होने वाले श्रृद्धालुओं के लिए सरकार ने ऐसे डिजिटल खोया-पाया केंद्रों की स्थापना की है, जो तकनीक के सहारे चलेंगे और पलक झपकते ही अपनों से मिलाएंगे। इसमें हर खोए हुए व्यक्ति का डिजिटल पंजीकरण तुरंत किया जाएगा। पंजीकरण होने के बाद एआई कैमरे गुमशुदा की तलाश में जुट जाएंगे। यही नहीं, गुमशुदा की जानकारी को फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी शेयर किया जाएगा। यह व्यवस्था महाकुंभ मेले को न केवल सुरक्षित बनाएगी, बल्कि परिवारों को जल्दी और आसानी से अपने प्रियजनों से जोड़ने का काम करेगी।
फोटो से मिलान करेगा एआई, पहचान का देना होगा प्रमाण
महाकुंभ में अपनों से बिछड़ने वाले व्यक्तियों की पहचान के लिए फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह तत्काल काम करेगा। यहां 45 करोड़ लोगों के आने की संभावना है। ऐसे में एआई कैमरे तत्काल फोटो खींचकर व्यक्ति की पहचान कर लेंगे। इस काम में सोशल मीडिया भी तत्पर रहेगा। जो भी व्यक्ति महाकुंभ मेले में अपनों से बिछड़ेगा, उसका सुरक्षित, व्यवस्थित और जिम्मेदार प्रणाली के तहत ख्याल भी रखा जाएगा। किसी भी वयस्क को बच्चे या महिला को ले जाने से पहले सुनिश्चित करना होगा कि वह उसे पहचानते हैं और उनकी पहचान प्रमाणिक है।