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Sports Update:युवा सितारों पर नजर, श्रीलंका ए के खिलाफ मजबूत संयोजन के साथ उतर सकती है इंडिया ए

इंडिया ए की टीम एक बार फिर युवा प्रतिभाओं को परखने के उद्देश्य से मैदान में उतरने जा रही है। श्रीलंका ए और अफगानिस्तान ए के साथ खेली जा रही त्रिकोणीय एकदिवसीय श्रृंखला भारतीय खिलाड़ियों के लिए अपनी क्षमता साबित करने का बड़ा अवसर मानी जा रही है।

इस टूर्नामेंट में कई ऐसे युवा खिलाड़ी शामिल हैं जिन्होंने हाल के घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है। खास तौर पर उभरते बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर सभी की नजरें रहेंगी। युवा बल्लेबाज पहले भी जूनियर और ए स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से प्रभावित कर चुके हैं और अब एक बार फिर बड़ी पारी खेलने की उम्मीद उनसे की जा रही है।

टीम की कमान तिलक वर्मा के हाथों में होगी, जिनके पास घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मौजूद है। बल्लेबाजी क्रम में ऋतुराज गायकवाड़, प्रियांश आर्य, आयुष बडोनी और प्रभसिमरन सिंह जैसे खिलाड़ियों से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।

गेंदबाजी विभाग में अंशुल कंबोज, यश ठाकुर, अरशद खान और हर्ष दुबे जैसे युवा खिलाड़ी विपक्षी बल्लेबाजों के लिए चुनौती पेश कर सकते हैं। वहीं निशांत सिंधु अपनी ऑलराउंड क्षमता से टीम को संतुलन प्रदान कर सकते हैं।

संभावित प्लेइंग इलेवन

  • वैभव सूर्यवंशी
  • प्रियांश आर्य
  • तिलक वर्मा (कप्तान)
  • ऋतुराज गायकवाड़
  • आयुष बडोनी
  • प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर)
  • निशांत सिंधु
  • हर्ष दुबे
  • यश ठाकुर
  • अंशुल कंबोज
  • अरशद खान

भारतीय टीम के लिए अहम मौका

यह श्रृंखला केवल खिताब जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय दौरों और चयन प्रक्रियाओं के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कई युवा खिलाड़ी इस मंच का उपयोग चयनकर्ताओं को प्रभावित करने और भविष्य की राष्ट्रीय टीम में अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए करेंगे।

टूर्नामेंट के प्रारूप के अनुसार तीनों टीमें एक-दूसरे के खिलाफ दो-दो मुकाबले खेलेंगी। लीग चरण के अंत में शीर्ष दो टीमें फाइनल में पहुंचेंगी, जहां खिताब का फैसला होगा। ऐसे में प्रत्येक मैच का महत्व काफी बढ़ जाता है।

क्रिकेट प्रशंसकों की नजर विशेष रूप से उन युवा खिलाड़ियों पर रहेगी जो आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट के भविष्य का चेहरा बन सकते हैं।

H-1B वीजा पर प्रस्तावित भारी शुल्क को झटका, कोर्ट के फैसले से आवेदकों को राहत

अमेरिका में H-1B वीजा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में संघीय अदालत ने प्रशासन की उस योजना को खारिज कर दिया है, जिसके तहत वीजा आवेदन शुल्क में भारी बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई थी। अदालत के फैसले के बाद हजारों विदेशी पेशेवरों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।

मामला तब शुरू हुआ जब कई राज्यों ने नई वीजा शुल्क नीति को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि प्रस्तावित शुल्क वृद्धि न केवल अत्यधिक है, बल्कि इसे लागू करने के लिए आवश्यक वैधानिक अधिकार भी स्पष्ट रूप से मौजूद नहीं हैं।

सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि प्रस्तावित शुल्क सामान्य प्रशासनिक शुल्क की बजाय कर (टैक्स) की प्रकृति का प्रतीत होता है। न्यायालय का मत था कि इस प्रकार का आर्थिक भार लगाने के लिए विधायी स्वीकृति आवश्यक होती है और केवल प्रशासनिक निर्णय के आधार पर इसे लागू नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी माना कि इस तरह की नीति का असर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, तकनीक और अनुसंधान जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जो बड़ी संख्या में विदेशी विशेषज्ञों पर निर्भर रहते हैं। न्यायाधीश ने कहा कि संबंधित एजेंसियां ऐसी व्यवस्था लागू नहीं कर सकतीं, जिसके लिए स्पष्ट कानूनी अधिकार उपलब्ध न हों।

हालांकि प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दे सकता है। अधिकारियों का कहना है कि वे कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं और आगे की कार्रवाई जल्द तय की जाएगी।

H-1B वीजा अमेरिका में कुशल विदेशी पेशेवरों को काम करने की अनुमति देने वाला प्रमुख कार्यक्रम माना जाता है। हर वर्ष बड़ी संख्या में तकनीकी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य और अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों के पेशेवर इस वीजा के माध्यम से अमेरिका पहुंचते हैं। इनमें भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी सबसे अधिक मानी जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत के इस फैसले से उन कंपनियों और आवेदकों को राहत मिलेगी जो बढ़ी हुई लागत को लेकर चिंतित थे। साथ ही, इससे भविष्य में वीजा नीति और आव्रजन नियमों पर होने वाली बहस को भी नई दिशा मिल सकती है।

फिलहाल इस मामले पर अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया के अगले चरणों पर निर्भर करेगा, लेकिन मौजूदा फैसले को वीजा आवेदकों और उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है।

श्रद्धा कपूर की वापसी तय, नई फिल्म ‘ईथा’ इस दिन सिनेमाघरों में देगी दस्तक

करीब दो वर्षों के अंतराल के बाद अभिनेत्री Shraddha Kapoor एक नई फिल्म के साथ दर्शकों के बीच वापसी करने जा रही हैं। उनकी आगामी फिल्म Eetha की रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है, जिसके बाद फैंस में उत्साह बढ़ गया है।

ट्रेड सर्किट में साझा की गई जानकारी के अनुसार, फिल्म को आगामी रक्षाबंधन के अवसर पर सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा। निर्माताओं ने इसके लिए 28 अगस्त 2026 की तारीख तय की है। त्योहार के माहौल में रिलीज होने वाली इस फिल्म से बॉक्स ऑफिस पर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है।

फिल्म का निर्माण Dinesh Vijan और Laxman Utekar की टीम कर रही है, जिन्होंने पहले भी कई सफल प्रोजेक्ट्स पर साथ काम किया है। दोनों की जोड़ी से दर्शकों को इस फिल्म से भी काफी उम्मीदें हैं।

स्टार कास्ट की बात करें तो श्रद्धा कपूर के साथ Randeep Hooda अहम भूमिका में दिखाई देंगे। इसके अलावा Zeeshan Ayyub भी फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। फिल्म की कहानी और अन्य विवरण फिलहाल गोपनीय रखे गए हैं, जिससे दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

श्रद्धा कपूर को आखिरी बार सुपरहिट फिल्म Stree 2 में देखा गया था। उस फिल्म को दर्शकों का शानदार समर्थन मिला था और इसने बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। अब उनकी नई फिल्म से भी दर्शकों को बड़े मनोरंजन की उम्मीद है।

रक्षाबंधन के मौके पर रिलीज होने जा रही ईथा को लेकर इंडस्ट्री और फैंस दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले महीनों में फिल्म से जुड़े पोस्टर, टीजर और ट्रेलर भी चर्चा का विषय बन सकते हैं।

डॉ. राजेश्वर सिंह का सामुदायिक विकास मॉडल बना मिसाल : 106 ओपन जिम, 62 पुस्तकालय और 8 सोलर प्लांट से बदली सरोजनीनगर की तस्वीर- ज्ञान, स्वास्थ्य, खेल और हरित ऊर्जा के माध्यम से आरडब्ल्यूए को बनाया जा रहा आदर्श सामुदायिक केंद्र

लखनऊ। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में सामुदायिक विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा संचालित अभियान आज एक सफल और अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। उनका लक्ष्य केवल सड़क, नाली और भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक आरडब्ल्यूए, आवासीय सोसायटी और बहुमंजिला आवासीय परिसर को ज्ञान, स्वास्थ्य, खेल, सामाजिक सहभागिता और हरित ऊर्जा से युक्त आदर्श सामुदायिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।

डॉ. राजेश्वर सिंह का मानना है कि किसी क्षेत्र का वास्तविक विकास तभी संभव है जब वहां के बच्चे सुरक्षित वातावरण में खेल सकें, युवा शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ सकें, बुजुर्ग स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन जी सकें तथा समाज का प्रत्येक वर्ग एक-दूसरे के सहयोग से आगे बढ़े। इसी सोच के साथ सरोजनीनगर में व्यापक सामुदायिक सशक्तिकरण अभियान चलाया जा रहा है।


106 ओपन एयर जिम से बढ़ा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का दायरा

22 दिसंबर 2022 से शुरू हुए इस अभियान के तहत सरोजनीनगर में अब तक 106 ओपन एयर जिम स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें 56 जिम कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) निधि तथा 50 जिम लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के सहयोग से स्थापित किए गए हैं। हाल ही में विभिन्न आरडब्ल्यूए परिसरों में स्थापित 15 नए ओपन एयर जिम भी इसी संख्या में शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा 94 अन्य ओपन जिमों को भी स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है, जिससे आने वाले समय में क्षेत्र के और अधिक नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।


62 आरडब्ल्यूए में 1,600 से अधिक पुस्तकों वाले पुस्तकालय

शिक्षा और ज्ञान को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने सरोजनीनगर के 62 आरडब्ल्यूए में सामुदायिक पुस्तकालयों की स्थापना कराई है। इन पुस्तकालयों में 1,600 से अधिक पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध कराया गया है, जिससे बच्चों, युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है।

25 जुलाई 2022 को शुरू किए गए डिजिटल पुस्तकालय एवं स्मार्ट कक्षा अभियान के अंतर्गत 37 शिक्षण संस्थानों में डिजिटल लैब स्थापित की गईं, 43 विद्यालयों में इंटरैक्टिव डिजिटल बोर्ड लगाए गए तथा 450 से अधिक कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए।

इसके साथ ही 2,000 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप, टैबलेट एवं अन्य डिजिटल उपकरण वितरित कर शिक्षा को तकनीक से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास किया गया है।


50 आरडब्ल्यूए के बच्चों को खेल किट, युवाओं को डिजिटल प्रशिक्षण

खेल एवं युवा सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सरोजनीनगर की 50 आरडब्ल्यूए में बच्चों को खेल किट वितरित की गई हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना और उन्हें स्वस्थ एवं अनुशासित जीवनशैली की ओर प्रेरित करना है।

इसके अतिरिक्त 19 जून 2024 को प्रारंभ किए गए रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केंद्रों के 17 केंद्रों के माध्यम से अब तक 8,000 से अधिक नागरिकों को निःशुल्क ई-गवर्नेंस सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं।

इन केंद्रों में 1,250 से अधिक बच्चों और युवाओं को एमएस वर्ड, एमएस एक्सेल, टैली, ग्राफिक डिजाइनिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग जैसे आधुनिक विषयों का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे उन्हें रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं के लिए तैयार किया जा रहा है।


हरित ऊर्जा की दिशा में सरोजनीनगर बना मॉडल विधानसभा

डॉ. राजेश्वर सिंह की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण आयाम पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता है। सोलर सिटी परियोजना के अंतर्गत सरोजनीनगर में 60 मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता विकसित की जा चुकी है।

इसके तहत लगभग ₹1.64 करोड़ की लागत से 8 आरडब्ल्यूए में कम्युनिटी सोलर प्लांट स्थापित किए गए हैं। वहीं प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत लगभग ₹1 करोड़ की लागत से माती गांव को लखनऊ का पहला सोलर विलेज विकसित किया जा रहा है।

इसके अलावा जोनल पार्क में ₹25.18 लाख की लागत से सोलर पावर प्लांट स्थापित किया गया है। विधानसभा क्षेत्र में 1,800 से अधिक सोलर लाइटें, 750 से अधिक स्ट्रीट लाइटें, 160 से अधिक हाईमास्ट लाइटें, 5 सोलर ट्री तथा ₹1.40 करोड़ की लागत से 7 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं।


पार्क, झूले और सार्वजनिक सुविधाओं से बढ़ी जीवन गुणवत्ता

स्वास्थ्य और मनोरंजन के क्षेत्र में भी सरोजनीनगर ने उल्लेखनीय प्रगति की है। सीजी सिटी में लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से दिव्यांगजन अनुकूल पार्क विकसित किया गया है। वहीं सार्वजनिक-निजी सहभागिता मॉडल पर 11 करोड़ रुपये की लागत से हार्मनी म्यूजिकल पार्क तथा 8 करोड़ रुपये की लागत से सौर ऊर्जा एवं अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र युक्त जोनल पार्क का निर्माण कराया गया है।

इसके अतिरिक्त 1.54 करोड़ रुपये की लागत से सिंथेटिक जॉगिंग ट्रैक का निर्माण कर नागरिकों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।


‘सुविधाएं नहीं, मजबूत समाज निर्माण के साधन हैं ये परियोजनाएं’

डॉ. राजेश्वर सिंह का कहना है कि जिम, पुस्तकालय, खेल किट, बच्चों के झूले और सौर ऊर्जा संयंत्र केवल विकास कार्य नहीं हैं, बल्कि ऐसे समाज के निर्माण के साधन हैं जो स्वस्थ, शिक्षित, संगठित और आत्मनिर्भर हो।

उनके अनुसार विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाना आवश्यक है और इसी उद्देश्य से सरोजनीनगर में सामुदायिक विकास का यह मॉडल तैयार किया गया है।


सरोजनीनगर बना उत्तर प्रदेश के लिए सामुदायिक विकास का रोल मॉडल

भाजपा सरोजनीनगर मंडल, विभिन्न आरडब्ल्यूए, युवा संगठनों और हजारों नागरिकों की सक्रिय सहभागिता से संचालित यह अभियान आज उत्तर प्रदेश में सामुदायिक सशक्तिकरण का एक सफल उदाहरण बन चुका है। ज्ञान, स्वास्थ्य, खेल और हरित ऊर्जा को एक साथ जोड़कर डॉ. राजेश्वर सिंह ने सरोजनीनगर में ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जो भविष्य में अन्य विधानसभा क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

“जनसेवा ही ईश्वर सेवा है” के मूल मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा यह अभियान सरोजनीनगर को उत्तर प्रदेश की आदर्श विधानसभा बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में स्थापित हो चुका है।

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प्रेरणाकृति फाउंडेशन की दस दिवसीय निःशुल्क कथक नृत्य कार्यशाला का शुभारंभ, बच्चों और युवाओं को मिलेगा भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर

लखनऊ। भारतीय शास्त्रीय कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में कार्यरत प्रेरणाकृति फाउंडेशन द्वारा आयोजित दस दिवसीय निःशुल्क कथक नृत्य कार्यशाला का सोमवार को राजीव गांधी नगर, डालीगंज स्थित प्रशिक्षण केंद्र में शुभारंभ किया गया। 8 जून से 17 जून 2026 तक चलने वाली इस विशेष कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर कथक नृत्य की परंपरा, तकनीक और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराना है।

कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर क्षेत्रीय पार्षद रंजीत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की पहचान उसकी कला, संगीत और नृत्य परंपराओं से होती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।

पहले दिन प्रतिभागियों ने सीखी कथक की बुनियादी तकनीकें

कार्यशाला के प्रथम दिवस में लगभग 15 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को कथक नृत्य की मूलभूत तकनीकों से परिचित कराया गया। इसमें विशेष रूप से तत्कार, हस्तक, शरीर की मुद्रा, संतुलन और लयबद्धता से जुड़े प्रारंभिक अभ्यास कराए गए।

प्रशिक्षण दे रहीं कथक प्रशिक्षक सुश्री प्रिया कश्यप ने प्रतिभागियों को कथक की आधारभूत विधाओं का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि कथक केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बच्चों और युवाओं को नियमित रियाज, अनुशासन और समर्पण के महत्व के बारे में भी जानकारी दी।

कला के माध्यम से व्यक्तित्व विकास पर जोर

कार्यशाला के दौरान आयोजकों ने बताया कि कथक नृत्य न केवल एक सांस्कृतिक कला है, बल्कि यह बच्चों और युवाओं के व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके माध्यम से आत्मविश्वास, एकाग्रता, शारीरिक संतुलन, अभिव्यक्ति क्षमता और अनुशासन जैसे गुणों का विकास होता है।

प्रेरणाकृति फाउंडेशन का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली और डिजिटल युग के बीच बच्चों को भारतीय शास्त्रीय कलाओं से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से संस्था द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे और युवा भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समझ सकें और उससे जुड़ सकें।

दस दिनों तक मिलेगा विशेषज्ञ प्रशिक्षण

आयोजकों के अनुसार आगामी दस दिनों तक प्रतिभागियों को कथक नृत्य के विभिन्न आयामों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें ताल, लय, भाव-भंगिमा, पद संचालन, प्रस्तुति शैली और कथक की पारंपरिक संरचना के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। साथ ही प्रतिभागियों को मंचीय प्रस्तुति के लिए भी तैयार किया जाएगा।

समापन समारोह में होगा प्रस्तुति का मंचन

कार्यशाला का समापन 17 जून को होगा। समापन अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा कार्यशाला के दौरान सीखी गई प्रस्तुतियों का मंचन किया जाएगा। इस विशेष कार्यक्रम में अभिभावकों, कला प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि वे बच्चों की प्रतिभा और दस दिनों के प्रशिक्षण के परिणाम को देख सकें।

प्रेरणाकृति फाउंडेशन का यह प्रयास न केवल कथक जैसी शास्त्रीय कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है, बल्कि बच्चों और युवाओं में भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता और सम्मान की भावना भी विकसित कर रहा है। ऐसी पहलें भविष्य में भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।