
लखनऊ। भारतीय शास्त्रीय कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में कार्यरत प्रेरणाकृति फाउंडेशन द्वारा आयोजित दस दिवसीय निःशुल्क कथक नृत्य कार्यशाला का सोमवार को राजीव गांधी नगर, डालीगंज स्थित प्रशिक्षण केंद्र में शुभारंभ किया गया। 8 जून से 17 जून 2026 तक चलने वाली इस विशेष कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर कथक नृत्य की परंपरा, तकनीक और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराना है।

कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर क्षेत्रीय पार्षद रंजीत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की पहचान उसकी कला, संगीत और नृत्य परंपराओं से होती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।
पहले दिन प्रतिभागियों ने सीखी कथक की बुनियादी तकनीकें
कार्यशाला के प्रथम दिवस में लगभग 15 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को कथक नृत्य की मूलभूत तकनीकों से परिचित कराया गया। इसमें विशेष रूप से तत्कार, हस्तक, शरीर की मुद्रा, संतुलन और लयबद्धता से जुड़े प्रारंभिक अभ्यास कराए गए।
प्रशिक्षण दे रहीं कथक प्रशिक्षक सुश्री प्रिया कश्यप ने प्रतिभागियों को कथक की आधारभूत विधाओं का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि कथक केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बच्चों और युवाओं को नियमित रियाज, अनुशासन और समर्पण के महत्व के बारे में भी जानकारी दी।
कला के माध्यम से व्यक्तित्व विकास पर जोर
कार्यशाला के दौरान आयोजकों ने बताया कि कथक नृत्य न केवल एक सांस्कृतिक कला है, बल्कि यह बच्चों और युवाओं के व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके माध्यम से आत्मविश्वास, एकाग्रता, शारीरिक संतुलन, अभिव्यक्ति क्षमता और अनुशासन जैसे गुणों का विकास होता है।
प्रेरणाकृति फाउंडेशन का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली और डिजिटल युग के बीच बच्चों को भारतीय शास्त्रीय कलाओं से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से संस्था द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे और युवा भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समझ सकें और उससे जुड़ सकें।
दस दिनों तक मिलेगा विशेषज्ञ प्रशिक्षण
आयोजकों के अनुसार आगामी दस दिनों तक प्रतिभागियों को कथक नृत्य के विभिन्न आयामों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें ताल, लय, भाव-भंगिमा, पद संचालन, प्रस्तुति शैली और कथक की पारंपरिक संरचना के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। साथ ही प्रतिभागियों को मंचीय प्रस्तुति के लिए भी तैयार किया जाएगा।
समापन समारोह में होगा प्रस्तुति का मंचन
कार्यशाला का समापन 17 जून को होगा। समापन अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा कार्यशाला के दौरान सीखी गई प्रस्तुतियों का मंचन किया जाएगा। इस विशेष कार्यक्रम में अभिभावकों, कला प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि वे बच्चों की प्रतिभा और दस दिनों के प्रशिक्षण के परिणाम को देख सकें।
प्रेरणाकृति फाउंडेशन का यह प्रयास न केवल कथक जैसी शास्त्रीय कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है, बल्कि बच्चों और युवाओं में भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता और सम्मान की भावना भी विकसित कर रहा है। ऐसी पहलें भविष्य में भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


































