पाकिस्तान की संसद ने देश के सैन्य कमांड ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए Defence Forces Act, 2026 को मंजूरी दे दी है। नेशनल असेंबली के बाद सीनेट ने भी विधेयक पारित कर दिया, जिससे सेना, नौसेना और वायुसेना के संयुक्त कमांड से जुड़े नए ढांचे को कानूनी आधार मिल गया।
इस बदलाव के बाद पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की भूमिका देश के सैन्य कमांड सिस्टम में और महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, इसे केवल ‘नंबर-2’ कहना पूरी तस्वीर नहीं बताता, क्योंकि CDF अब तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन से जुड़ी केंद्रीय भूमिका निभाएगा।
तीनों सेनाओं के लिए बनेगा संयुक्त मुख्यालय
नए कानून के तहत Defence Forces Headquarters (DFHQ) की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त संचालन और कमांड व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करना है। पाकिस्तान सरकार ने इसे 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद सैन्य कमांड ढांचे में किए गए बदलावों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
CDF के तौर पर आसिम मुनीर सेना, नौसेना और वायुसेना के संयुक्त ऑपरेशनल कमांड से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अधिकारियों में होंगे।
आसिम मुनीर को पहले ही मिल चुकी है CDF की जिम्मेदारी
आसिम मुनीर को दिसंबर 2025 में चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के साथ-साथ चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज नियुक्त किया गया था। पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने उनकी पांच साल की नियुक्ति को मंजूरी दी थी। वह इस पद पर नियुक्त होने वाले पाकिस्तान के पहले CDF बने।
अब संसद से कानून पारित होने के बाद इस पद और इससे जुड़े प्रशासनिक एवं कमांड ढांचे को स्पष्ट कानूनी आधार मिल गया है।
सिर्फ सेना नहीं, नौसेना और वायुसेना पर भी असर
नए सैन्य ढांचे का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि तीनों सेनाओं के संयुक्त ऑपरेशनल कमांड को CDF के तहत व्यवस्थित किया जा रहा है। इससे युद्ध या संयुक्त सैन्य अभियानों के दौरान अलग-अलग सेनाओं के बीच तालमेल की जिम्मेदारी केंद्रीय स्तर पर होगी।
रिपोर्टों के मुताबिक कानून में सैन्य अधिकारियों की नियुक्ति, सेवा, रिटायरमेंट और अन्य प्रशासनिक मामलों से संबंधित CDF की भूमिका को भी परिभाषित किया गया है। इससे सैन्य नेतृत्व के भीतर CDF का प्रभाव काफी बढ़ता है।
पुराने सैन्य कानूनों पर भी नए कानून का प्रभाव
नए कानून को पाकिस्तान के मौजूदा सैन्य कानूनों के साथ समन्वित करने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद बनाए गए नए कमांड ढांचे को पुराने कानूनी प्रावधानों के साथ जोड़ना है।
इसके साथ ही संसद ने National Command Authority Act, 2010 में भी संशोधन को मंजूरी दी है। यह बदलाव पाकिस्तान की रणनीतिक और परमाणु कमांड व्यवस्था को नए सैन्य ढांचे के अनुरूप बनाने से जुड़ा है।
विपक्ष ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल
दोनों विधेयकों को संसद में बहुमत से मंजूरी मिली, लेकिन विपक्ष ने इनके पेश किए जाने के तरीके पर आपत्ति जताई और विरोध में सदन से वॉकआउट भी किया। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने भी सरकार पर सहयोगी दलों को पर्याप्त रूप से विश्वास में नहीं लेने का आरोप लगाया, हालांकि उनकी पार्टी के सांसदों ने बाद में विधेयकों के पक्ष में मतदान किया।
पाकिस्तान के सैन्य ढांचे में बड़ा बदलाव
इस कानून का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व में पिछले वर्ष किए गए संवैधानिक बदलावों को व्यवहारिक और कानूनी रूप देता है। 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद Chairman Joint Chiefs of Staff Committee का पद समाप्त कर CDF का नया पद बनाया गया था।
अब Defence Forces Act के जरिए इस नई व्यवस्था के प्रशासनिक और कमांड पहलुओं को औपचारिक रूप दिया गया है। ऐसे में आसिम मुनीर की भूमिका पाकिस्तान के तीनों सैन्य अंगों के बीच संयुक्त कमांड व्यवस्था के केंद्र में आ गई है।


































