
लखनऊ। सरोजनीनगर में शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसा अभिनव प्रयोग शुरू हुआ है, जो विद्यार्थियों को स्कूल की पढ़ाई से आगे बढ़ाकर IIT विशेषज्ञों, तकनीक, नवाचार और आधुनिक करियर मार्गदर्शन से जोड़ रहा है। विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर विधानसभा क्षेत्र के 8 विद्यालयों को IIT विशेषज्ञों एवं IIT के पूर्व विद्यार्थियों की मेंटरशिप से जोड़ा गया है। CSR के माध्यम से संचालित इस पहल से करीब 1,000 विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस पहल की खास बात यह है कि IIT विशेषज्ञ सीधे विद्यालयों से जुड़कर विद्यार्थियों को शिक्षा, तकनीक, नवाचार और करियर के विभिन्न आयामों पर मार्गदर्शन दे रहे हैं। इसे भारत में किसी विधानसभा क्षेत्र के विद्यालयों के साथ IIT विशेषज्ञों की प्रत्यक्ष मेंटरशिप का अपनी तरह का पहला मॉडल बताया गया है।
8 विद्यालयों के विद्यार्थियों को मिलेगा IIT विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
IIT मेंटरशिप मॉडल से जुड़े विद्यालयों में एसकेडी एकेडमी, मणिपाल पब्लिक स्कूल, रेड रोज पब्लिक स्कूल, भोंवल कॉन्वेंट स्कूल, शक्ति एकेडमी हाई स्कूल, अनुज सिंह मैनेजमेंट नेशनल पब्लिक इंटर कॉलेज, अवध पब्लिक स्कूल और महामना मालवीय विद्या मंदिर शामिल हैं।
इन विद्यालयों के विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आधुनिक शिक्षा प्रणाली और विशेषज्ञ मार्गदर्शन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
24×7 स्मार्ट पढ़ाई से AI आधारित क्विज तक
पहल के तहत विद्यार्थियों को 24×7 स्मार्ट पढ़ाई की सुविधा, AI आधारित प्रश्नोत्तरी, डिजिटल अध्ययन सामग्री और आधुनिक लर्निंग टूल्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को तकनीक के साथ सहज बनाना और पढ़ाई को अधिक इंटरैक्टिव एवं रुचिकर बनाना है।
IIT विशेषज्ञ विद्यार्थियों को कठिन विषयों को समझने, समस्याओं का समाधान खोजने, तकनीकी सोच विकसित करने और भविष्य के करियर विकल्पों को लेकर मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
परीक्षा परिणाम नहीं, सोच बदलना है लक्ष्य
इस पहल का फोकस केवल विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम बेहतर करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए उनमें जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान क्षमता, रचनात्मकता और नवाचार की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उद्देश्य यह है कि सरोजनीनगर के विद्यार्थी IIT, रिसर्च, टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, उद्यमिता और अन्य अग्रणी क्षेत्रों में बड़े लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें हासिल करने के लिए शुरुआती स्तर से ही सही मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।
डॉ. राजेश्वर सिंह के अनुसार, ये विद्यार्थी केवल परीक्षार्थी नहीं, बल्कि सरोजनीनगर और उत्तर प्रदेश के भविष्य के बदलाव लाने वाले हैं। आने वाले समय में यही विद्यार्थी नवाचारी, पेशेवर, उद्यमी और शोधकर्ता बनकर प्रदेश के विकास में योगदान दे सकते हैं।
37 स्कूल-कॉलेजों में 450+ कंप्यूटर, 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभ
सरोजनीनगर में शिक्षा के आधुनिकीकरण को लेकर अन्य स्तरों पर भी पहल किए जाने की जानकारी दी गई है। क्षेत्र के 37 विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में 450 से अधिक कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे 30,000 से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।
इसके अलावा 44 विद्यालयों में इंटरैक्टिव डिजिटल बोर्ड लगाए गए हैं। बाल सेवा योजना के माध्यम से 550 से अधिक बच्चों को लाभ मिलने की जानकारी भी दी गई है।
शिक्षा के बुनियादी स्तर पर भी सरोजनीनगर ने उपलब्धि हासिल की है। निपुण अभियान के तहत सरोजनीनगर के प्राथमिक विद्यालयों ने लखनऊ जनपद में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
शिक्षा से भविष्य निर्माण तक का मॉडल
सरोजनीनगर में शुरू की गई IIT मेंटरशिप पहल को शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक, विशेषज्ञता और अवसरों के बीच की दूरी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
डॉ. राजेश्वर सिंह का लक्ष्य शिक्षा को केवल भवन, कंप्यूटर और डिजिटल बोर्ड जैसी आधारभूत सुविधाओं तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को श्रेष्ठ मार्गदर्शन, तकनीकी ज्ञान, व्यापक अनुभव और बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास देना है।
IIT विशेषज्ञों की मेंटरशिप से जुड़े 8 विद्यालयों के करीब 1,000 विद्यार्थियों के लिए यह पहल आने वाले वर्षों में उनके शैक्षिक और करियर सफर को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। सरोजनीनगर में शिक्षा का यह मॉडल यदि अपेक्षित परिणाम देता है, तो यह अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रभावी उदाहरण बन सकता है।


































