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लखनऊ : सरोजनीनगर के अलीनगर खुर्द में पुलिस- प्रशासन की नाक के नीचे RMC प्लांट और ओवरलोड वाहनों से सड़क हुई तबाह! ग्रामीण बोले- बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, करोड़ों की सड़कें टूट रही हैं, जिम्मेदार कौन ?

  • सरोजनी नगर तहसील के अलीनगर खुर्द गांव में RMC प्लांट से भारी वाहन गुजर रहे हैं, बच्चों की पढ़ाई में रोड़ा बना RMC प्लांट
  • ओवरलोड डंपरों से गांव की सड़कें तेजी से टूट रही हैं, राजस्व की भरी क्षति
  • ग्रामीणों का आरोप: करोड़ों की सड़कें गड्ढों में बदल गईं, कैसे बनेंगी अब सड़कें
  • स्कूल जाने वाले बच्चों और मरीजों को आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है
  • बरसात के मौसम में भारी ट्रकों की आवाजाही से बने गड्ढों से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है, पुलिस-प्रशासन के हस्तक्षेप की तरफ ग्रामीणों की नजरें टिकी
  • ग्रामीणों ने जांच और ओवरलोड वाहनों पर रोक के साथ ही RMC प्लांट के जांच की भी मांग की, ग्रामीण बोले – मुश्किल से बनती हैं सड़कें, तोड़ दिया
  • स्थानीय पुलिस और तहसील प्रशासन से RMC प्लांट संचालक और डंपरों के संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के साथ ही त्वरित गति से सड़क मरम्मत करवाने की उठी मांग

लखनऊ, 25 जुलाई 2026 : TRUE NEWS UP : राजधानी लखनऊ के सरोजनीनगर क्षेत्र स्थित अलीनगर खुर्द गांव में संचालित रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांट से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट में आने-जाने वाले ओवरलोड डंपर और ट्रांजिट मिक्सर गांव की संकरी सड़कों से दिन-रात गुजर रहे हैं, जिससे करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कें कुछ ही समय में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।

सरोजनीनगर के अलीनगर खुर्द गांव में स्थापित RMC प्लांट, ग्रामीणों ने प्लांट को हटाने की मांग की

स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य मार्गों पर निगरानी होने के कारण भारी वाहन गांव के अंदर से निकलते हैं। परिणामस्वरूप अलीनगर खुर्द से आसपास के गांवों को जोड़ने वाली सड़कें जगह-जगह गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बरसात के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि कमलापुर जूनियर स्कूल जाने वाले बच्चे रोज इसी सड़क से गुजरते हैं। कई बच्चे और दोपहिया चालक गड्ढों में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। पांच मिनट का सफर अब एक घंटे तक का हो गया है। मरीजों, बुजुर्गों और किसानों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सड़क निर्माण पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो ओवरलोड वाहनों के कारण सड़कें बार-बार टूटने से होने वाले सरकारी नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या सड़कों को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली की जाएगी या फिर हर बार जनता के टैक्स का पैसा ही खर्च होता रहेगा?

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि भारी वाहनों के लिए अलग मार्ग निर्धारित है तो गांव के अंदर से इनकी आवाजाही क्यों हो रही है? परिवहन विभाग, पुलिस, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां इस समस्या पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर रही हैं?

स्थानीय लोगों ने संबंधित RMC प्लांट के संचालन और उससे जुड़े भारी वाहनों के संबंध में सक्षम अधिकारियों से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्लांट सभी आवश्यक नियमों, अनुमतियों और पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रहा है या नहीं। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में ओवरलोड वाहनों की नियमित जांच होनी चाहिए, गांव के अंदर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए और सड़क को नुकसान पहुंचाने वाले वाहनों तथा जिम्मेदार एजेंसियों से क्षतिपूर्ति वसूली जाए। साथ ही सड़क का स्थायी पुनर्निर्माण, जल निकासी की व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट को तत्काल चालू कराया जाए।

अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह ग्रामीणों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

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