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अयोध्या पर राजनीति करने वालों को सनातन समाज नहीं भूला: “जिन्होंने प्रभु श्रीराम को काल्पनिक बताया, वे आज अयोध्या के नाम पर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे हैं”: : डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अयोध्या और श्रीराम मंदिर को लेकर विपक्षी दलों के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया, करोड़ों हिंदुओं की आस्था का उपहास उड़ाया और प्रभु श्रीराम को “काल्पनिक” तक बताया, वे आज अयोध्या के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सनातन समाज और देश की जनता इतिहास को अच्छी तरह याद रखती है और आस्था के प्रश्न पर राजनीतिक अवसरवाद को कभी स्वीकार नहीं करेगी।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि अयोध्या केवल एक नगर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, अध्यात्म और करोड़ों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण किसी राजनीतिक दल की उपलब्धि नहीं, बल्कि सदियों से चले संघर्ष, असंख्य बलिदानों, संतों की तपस्या और करोड़ों रामभक्तों के अटूट विश्वास की ऐतिहासिक विजय है।

उन्होंने कहा कि देश ने वह दौर भी देखा है जब राम जन्मभूमि के प्रश्न को वोट बैंक की राजनीति के कारण वर्षों तक उलझाकर रखा गया। रामभक्तों की भावनाओं को समझने के बजाय उनकी आस्था को संदेह और राजनीति की दृष्टि से देखा गया। ऐसे में वे लोग, जिन्होंने आंदोलन का विरोध किया या उसकी भावनाओं को कभी स्वीकार नहीं किया, आज स्वयं को अयोध्या का हितैषी बताने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं।

रामभक्तों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है श्रीराम मंदिर

डॉ. सिंह ने कहा कि अयोध्या की पवित्र भूमि उन लाखों रामभक्तों के संघर्ष, त्याग और तपस्या की साक्षी है जिन्होंने अपना जीवन श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल पत्थरों से निर्मित एक भव्य संरचना नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान है, जिनकी आस्था को लंबे समय तक अनदेखा किया गया।

उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर सत्य की असत्य पर, विश्वास की उपेक्षा पर और धैर्य की निराशा पर विजय का प्रतीक है। यह मंदिर भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय आत्मविश्वास और सभ्यतागत गौरव के पुनर्जागरण का सशक्त प्रतीक बन चुका है।

अयोध्या बन रही वैश्विक आस्था और विकास की राजधानी

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या आज वैश्विक आस्था केंद्र के रूप में नई पहचान बना रही है। श्रीराम मंदिर के निर्माण के साथ ही अयोध्या में आधुनिक बुनियादी ढांचे, पर्यटन, निवेश, रोजगार और सांस्कृतिक विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि आज अयोध्या में सड़कों, रेलवे, हवाई संपर्क, पर्यटन सुविधाओं और शहरी विकास से जुड़े अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। इसका लाभ स्थानीय व्यापार, रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिल रहा है तथा देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।

श्रीराम केवल आस्था नहीं, भारतीय जीवन मूल्यों के प्रतीक

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि प्रभु श्रीराम केवल धार्मिक आस्था के विषय नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय संस्कृति के आदर्श पुरुष, मर्यादा, न्याय, करुणा, त्याग और लोककल्याण के शाश्वत प्रतीक हैं। उनके आदर्श आज भी समाज को एकता, समरसता और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देते हैं तथा राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि अयोध्या को राजनीतिक अवसरवाद का मंच बनाने के बजाय सभी राजनीतिक दलों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को उसकी गरिमा, पवित्रता और सांस्कृतिक महत्व का सम्मान करना चाहिए।

“अयोध्या राष्ट्र की आत्मा का विषय है”

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि जो लोग कभी राम मंदिर आंदोलन और रामभक्तों की भावनाओं के विरोध में खड़े थे, वे आज बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण अपनी भूमिका बदलने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इतिहास और समाज दोनों सब कुछ याद रखते हैं।

उन्होंने कहा, “अयोध्या राजनीति का विषय नहीं, राष्ट्र की आत्मा का विषय है। श्रीराम मंदिर करोड़ों भारतीयों की आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक स्वाभिमान की अमर गाथा है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि उस सनातन चेतना का प्रतीक है जिसने सदियों की प्रतीक्षा, संघर्ष और बलिदान के बाद सत्य की विजय का इतिहास रचा है।”

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