मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच Pakistan की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ पाकिस्तान क्षेत्रीय तनाव कम कराने और मध्यस्थता की कोशिशों में जुटा दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर Saudi Arabia में उसकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने की खबरों ने चर्चा तेज कर दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने रक्षा सहयोग समझौते के तहत सऊदी अरब में हजारों सैनिकों के साथ लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं। बताया जा रहा है कि इस तैनाती में चीन निर्मित JF-17 फाइटर जेट, ड्रोन स्क्वाड्रन और HQ-9 मिसाइल सिस्टम भी शामिल हैं।
रक्षा सहयोग या रणनीतिक संदेश?
सूत्रों के अनुसार, यह तैनाती दोनों देशों के पुराने रक्षा समझौते के तहत की गई है, जिसके तहत पाकिस्तान जरूरत पड़ने पर बड़ी संख्या में सैनिक सऊदी अरब भेज सकता है। माना जा रहा है कि क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को देखते हुए इस सहयोग को और मजबूत किया गया है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इन सैन्य संसाधनों की निगरानी पाकिस्तान कर रहा है, जबकि खर्च सऊदी अरब की ओर से उठाया जा रहा है। साथ ही भविष्य में पाकिस्तानी युद्धपोतों की तैनाती की संभावना भी जताई गई है।
मध्यस्थता और सैन्य सहयोग पर बहस
दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान खुद को क्षेत्रीय तनाव कम कराने वाले देश के रूप में पेश कर रहा है। इसी दौरान Asim Munir और अमेरिकी नेतृत्व के बीच कई दौर की बातचीत की खबरें भी सामने आईं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, Donald Trump ने भी दावा किया था कि पाकिस्तान की अपील पर कुछ सैन्य कदमों को टाला गया। ऐसे में सऊदी अरब में बढ़ती पाकिस्तानी सैन्य मौजूदगी को लेकर विरोधाभास की चर्चा हो रही है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी तैनाती
जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने पहले भी सऊदी अरब की सुरक्षा जरूरतों के तहत सैनिक और सैन्य संसाधन तैनात किए थे। खासकर तब, जब क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे और रणनीतिक ठिकानों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी थीं।
हालांकि, इस नई तैनाती को लेकर पाकिस्तान या सऊदी अरब की ओर से आधिकारिक स्तर पर विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। लेकिन मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच रहा है।


































