Donald Trump बुधवार को अपने दो दिवसीय दौरे पर Beijing पहुंच गए। ऐसे समय में यह यात्रा हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और Iran से जुड़े हालात वैश्विक राजनीति पर असर डाल रहे हैं। ट्रंप के दौरे से पहले China ने अमेरिका के सामने अपनी चार प्रमुख “रेड लाइन्स” स्पष्ट कर दी हैं।
चीन ने सोशल मीडिया पोस्ट में जताया रुख
अमेरिका में मौजूद चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर चीन-अमेरिका संबंधों को लेकर अपनी प्राथमिकताओं और चिंताओं को सार्वजनिक किया। इन संदेशों में बीजिंग ने जहां द्विपक्षीय संबंधों के लिए तीन मूल सिद्धांतों की बात की, वहीं चार ऐसे मुद्दों को भी रेखांकित किया जिन्हें उसने “रेड लाइन्स” बताया।
क्या हैं चीन की चार रेड लाइन्स?
1. ताइवान मुद्दा
Taiwan को चीन अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। बीजिंग का कहना है कि ताइवान की स्वतंत्रता के समर्थन या किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को वह अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है।
2. मानवाधिकार और लोकतंत्र
चीन ने कहा कि लोकतंत्र और मानवाधिकार के मुद्दों का इस्तेमाल उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
3. राजनीतिक व्यवस्था और विकास मॉडल
बीजिंग का मानना है कि हर देश को अपनी राजनीतिक व्यवस्था और विकास का रास्ता चुनने का अधिकार है। चीन ने संकेत दिया कि वह बाहरी दबाव स्वीकार नहीं करेगा।
4. आर्थिक और तकनीकी विकास
चीन ने साफ किया कि उसके आर्थिक और तकनीकी विकास को रोकने या सीमित करने की किसी भी कोशिश को वह चुनौती के रूप में देखेगा।
चीन ने बताए संबंधों के तीन सिद्धांत
चीनी दूतावास ने एक अन्य संदेश में चीन-अमेरिका संबंधों के लिए तीन प्रमुख सिद्धांतों का भी उल्लेख किया।
- पारस्परिक सम्मान
- शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व
- दोनों देशों के लिए लाभकारी सहयोग
बीजिंग का कहना है कि व्यापार, वैश्विक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
क्यों अहम मानी जा रही है ट्रंप की यात्रा?
United States और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, तकनीक, ताइवान और वैश्विक प्रभाव को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में ट्रंप की यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ट्रंप के बीजिंग पहुंचने पर उनका स्वागत चीन के उपराष्ट्रपति ने किया। इस दौरान दोनों देशों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि यह दौरा वैश्विक राजनीति और एशियाई क्षेत्रीय संतुलन पर क्या असर डालता है।


































