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भारत से दुश्मनी का खामियाजा, चीन भी नाराज़: अफगान नीति पर मौलाना फजलुर रहमान का शहबाज़ सरकार पर हमला

पाकिस्तान की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने खास तौर पर अफगानिस्तान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों और पाकिस्तान की विदेश नीति को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

अफगान नीति की विफलता पर सवाल

एरियानान्यूज (ariananews) के मुताबिक, रविवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि बीते कई दशकों में पाकिस्तान ने कभी गंभीरता से यह सवाल नहीं उठाया कि उसकी अफगान नीति आखिर क्यों असफल रही।
उन्होंने कहा कि जहां व्यापारिक सामान तक सीमा पार नहीं कर पाता, वहीं आतंकवादी आसानी से पाकिस्तान में दाखिल हो जाते हैं। अगर आतंकवादी सीमा पार से आ रहे हैं, तो उन्हें रोका जाना चाहिए और इस चुनौती से सख्ती से निपटना चाहिए।

विदेश नीति पर कड़ी टिप्पणी

मौलाना रहमान ने पाकिस्तान की मौजूदा विदेश नीति को पूरी तरह विफल बताते हुए कहा कि हालात ऐसे बन गए हैं कि भारत को दुश्मन माना जाता है, अफगानिस्तान से रिश्ते खराब हैं, और ईरान व चीन जैसे करीबी माने जाने वाले देश भी नाराज़ हैं।
उन्होंने कहा कि देश की जनता इन नीतिगत विफलताओं का जवाब चाहती है।

सेना के प्रभाव पर भी उठाए सवाल

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की विदेश और सुरक्षा नीतियां निर्वाचित सरकार नहीं, बल्कि सेना तय करती है।
मौलाना रहमान के मुताबिक, “एक जनरल आता है और कहता है कि बातचीत होगी, दूसरा आता है और युद्ध की बात करता है। ऐसे में देश में स्पष्ट नीति कैसे बनेगी?”

CPEC को लेकर भी सरकार पर निशाना

मौलाना फजलुर रहमान ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह परियोजना इमरान खान के कार्यकाल में ठप पड़ी, लेकिन मौजूदा सरकार भी इसे आगे बढ़ाने में नाकाम रही है।
उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से चीन पाकिस्तान से नाखुश है और द्विपक्षीय रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं रही।

नीतियों के बिना देश नहीं चल सकता

अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि कोई भी देश ऐसी नीतियों के सहारे नहीं चल सकता, जो अलगाव, अविश्वास और असुरक्षा को बढ़ावा दें। मजबूत और स्पष्ट नीतियां ही किसी भी देश की स्थिरता की नींव होती हैं।

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