Xi Jinping ने बीजिंग में हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने में रुचि दिखाई है। यह बातचीत Donald Trump की चीन यात्रा के दौरान हुई, जहां दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा और वैश्विक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की।
बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल’ में हुई इस मुलाकात में शी जिनपिंग ने कहा कि साल 2026 चीन-अमेरिका संबंधों के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, चीन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका से अधिक कच्चा तेल आयात करने में दिलचस्पी दिखाई है।
हालांकि चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है, लेकिन अमेरिका से उसका तेल आयात सीमित रहा है। कुछ वर्षों पहले चीन अमेरिका से प्रतिदिन लगभग 3.95 लाख बैरल तेल खरीदता था, लेकिन बाद में इसमें लगातार गिरावट देखने को मिली। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवाद का असर ऊर्जा कारोबार पर भी पड़ा।
ट्रेड वॉर के बाद चीन ने अमेरिका से तेल खरीद में भारी कटौती कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 के बाद से चीन ने अमेरिकी तेल आयात लगभग बंद कर दिया था। अब मौजूदा हालात में ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाने के लिए दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत तेज होती दिखाई दे रही है।
बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने यह भी कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार की तरह काम करना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में से एक बताया।
वहीं ताइवान मुद्दे पर भी चीन ने अपनी चिंता दोहराई। Taiwan को लेकर शी जिनपिंग ने चेतावनी दी कि यदि इस विषय को सावधानी से नहीं संभाला गया तो दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
Ministry of Foreign Affairs of the People’s Republic of China की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे संवेदनशील विषय बना हुआ है और इसे संतुलित तरीके से संभालना बेहद जरूरी है।


































