Khawaja Asif ने संसद में बजट और आर्थिक स्थिति पर बोलते हुए कहा कि पिछले कुछ समय में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर दबाव में थी, लेकिन अब धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के शुरुआती दौर में देश की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और दिवालिया होने की आशंकाएं बनी हुई थीं। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग और आर्थिक शर्तों के पालन के बाद स्थिति में सुधार आया है।
हाल ही में पाकिस्तान सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए बड़ा बजट पेश किया है, जिसमें खर्च का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज और ब्याज भुगतान के लिए निर्धारित किया गया है।
टैक्स व्यवस्था पर सरकार को सलाह
ख्वाजा आसिफ ने टैक्स सिस्टम को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि टैक्स दरें ऐसी होनी चाहिए जिन्हें लोग आसानी से स्वीकार कर सकें। उनका मानना था कि अत्यधिक कर दरें लोगों को टैक्स से बचने के रास्ते खोजने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक मजबूती के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है जहां लोग स्वेच्छा से टैक्स भुगतान करें और कारोबारी माहौल बेहतर बने।
बलूचिस्तान पर क्या कहा?
बलूचिस्तान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वहां की स्थिति लंबे समय से बनी हुई है और इसका समाधान सामूहिक जिम्मेदारी के साथ निकाला जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी समाधान को स्थानीय लोगों की स्वीकृति और भागीदारी के साथ आगे बढ़ाना जरूरी है।
ईरान–अमेरिका समझौते पर बयान
ख्वाजा आसिफ ने संसद में यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान की भूमिका रही और इसका श्रेय राजनीतिक तथा सैन्य नेतृत्व को दिया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान आर्थिक स्थिरता, क्षेत्रीय कूटनीति और घरेलू चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।


































