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पाकिस्तान में हिंदुओं की अनदेखी पर विधानसभा में हंगामा, सरकार पर भेदभाव के आरोप

Pakistan के पंजाब प्रांत में अल्पसंख्यक समुदायों की उपेक्षा को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। प्रांतीय विधानसभा में विधायकों ने सरकार पर आरोप लगाया कि नए बजट में मंदिरों और चर्चों के संरक्षण के लिए पर्याप्त फंड नहीं रखा गया, जबकि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों के विकास की भी अनदेखी की गई है।

मंदिर और चर्चों के लिए ‘एक पैसा भी नहीं’

सत्तारूढ़ Baba Falbus Christopher ने विधानसभा में कहा कि 2025-26 के बजट में चर्चों और मंदिरों की मरम्मत तथा संरक्षण के लिए कोई राशि आवंटित नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ईसाई बहुल बस्तियों के विकास के लिए भी सरकार ने बेहद कम बजट रखा है।

उन्होंने मांग की कि अगले बजट में अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों और बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग से पर्याप्त फंड तय किया जाए।

हिंदू इलाकों के विकास पर भी उठे सवाल

Pakistan Peoples Party के हिंदू विधायक Basro Ji ने कहा कि दक्षिण पंजाब में बड़ी संख्या में हिंदू आबादी रहती है, लेकिन उनके लिए कोई ठोस कल्याणकारी योजना शुरू नहीं की गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए जो सीमित बजट रखा गया था, उसे बाद में वापस ले लिया गया।

स्पीकर ने भी जताई नाराजगी

पंजाब विधानसभा के स्पीकर Malik Muhammad Ahmad Khan ने भी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई अल्पसंख्यक समुदाय आज भी पीने के पानी, सफाई और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

स्पीकर ने कहा कि विकास निधि का इस्तेमाल सबसे पहले इन जरूरी सुविधाओं पर होना चाहिए।

मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा की सफाई

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री Ramesh Singh Arora ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों से जुड़ी समस्याएं 1947 से चली आ रही हैं और उन्हें तुरंत खत्म नहीं किया जा सकता।

उन्होंने दावा किया कि Maryam Nawaz सरकार ने पिछले दो वर्षों में अल्पसंख्यक मामलों के विभाग का बजट करीब 300 प्रतिशत तक बढ़ाया है।

मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान में हिंदू, ईसाई, सिख और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय अक्सर भेदभाव, गरीबी और असुरक्षा का सामना करते हैं। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि देश की कुल आबादी में हिस्सा होने के बावजूद इन समुदायों को बराबरी के अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

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