पाकिस्तान की राजधानी Islamabad में आयोजित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दौरान भले ही डोनाल्ड ट्रंप खुद मौजूद नहीं थे, लेकिन वे पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए हुए थे। वार्ता का नेतृत्व कर रहे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने खुलासा किया कि बातचीत के दौरान उन्होंने ट्रंप से कई बार संपर्क किया।
मीडिया ब्रीफिंग में वैंस ने बताया कि यह वार्ता करीब 21 घंटे तक चली, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति से लगभग 6 से 12 बार बातचीत की। उनका कहना था कि पूरी टीम लगातार संपर्क में थी ताकि बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।
वैंस ने यह भी बताया कि इस दौरान उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों से भी चर्चा की, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े प्रमुख लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से एक अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव रखा गया था, जिसे लेकर सहमति बनाने की कोशिश की गई।
वार्ता क्यों रही विफल?
वैंस के अनुसार, बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा। अमेरिका चाहता था कि Iran साफ तौर पर यह भरोसा दे कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। हालांकि, इस पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल सका, जिसके चलते वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता लाना और परमाणु हथियारों के खतरे को रोकना था, लेकिन फिलहाल इसमें सफलता नहीं मिल सकी।
इस असफल वार्ता के बाद मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका लगा है और आने वाले समय में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।


































