
उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी और तापमान में लगातार हो रहे बदलाव के बीच पेट से जुड़ी बीमारियों के मामलों में तेजी देखी जा रही है। इसी को देखते हुए अपोलो स्पेक्ट्रा, कानपुर ने आम जनता के लिए फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त और पेट संक्रमण को लेकर महत्वपूर्ण स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। अस्पताल के गैस्ट्रो विशेषज्ञ डॉ. साद अनवर, सीनियर कंसल्टेंट – गैस्ट्रो सर्जरी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर के अनुसार, गर्मियों में अधिक तापमान और खराब फूड हैंडलिंग के कारण बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं, जिससे लूज मोशन, वॉमिटिंग, एसिडिटी, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 40°C के आसपास पहुंचने के साथ ही अस्पतालों की ओपीडी में स्टमक इन्फेक्शन और फूड पॉइजनिंग के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
लक्षण, जोखिम और बचाव- क्या रखें ध्यान
डॉ. साद अनवर ने बताया, “फूड पॉइजनिंग और पेट संक्रमण के प्रमुख लक्षणों में बार-बार वॉमिटिंग होना, दस्त लगना, पेट में मरोड़ या दर्द, बुखार, कमजोरी, भूख कम लगना और शरीर में पानी की कमी शामिल हैं। यह समस्या बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से लिवर, किडनी या डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों में अधिक गंभीर हो सकती है। गर्मियों में बाहर का खुला भोजन, कई घंटों तक रखा खाना, कटे हुए फल, दूषित पानी और अस्वच्छ तरीके से तैयार भोजन संक्रमण का सबसे बड़ा कारण बनते हैं।”
उन्होंने सलाह दी कि लोग बाहर का खुला और बासी खाना खाने से बचें, पर्याप्त मात्रा में साफ पानी और ओआरएस का सेवन करें, भोजन से पहले और बाद में हाथ जरूर धोएं तथा ज्यादा ऑयली और मसालेदार खाने को सीमित रखें। इसके अलावा, बच्चों को सड़क किनारे मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थों से दूर रखें और घर में बने ताजे व हल्के भोजन को प्राथमिकता दें। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि गर्मी में शरीर में पानी की कमी बहुत तेजी से हो सकती है, इसलिए डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अपोलो स्पेक्ट्रा, कानपुर में पेट संक्रमण और फूड पॉइजनिंग से पीड़ित मरीजों के लिए 24×7 इमरजेंसी सुविधा, आईवी फ्लूड मैनेजमेंट और गैस्ट्रो विशेषज्ञों की विशेष टीम उपलब्ध है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज और सही हाइड्रेशन से अधिकांश मामलों को गंभीर होने से रोका जा सकता है। यदि उल्टी-दस्त लंबे समय तक बने रहें, पेशाब कम होने लगे, तेज बुखार आए या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।


































