पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर अब एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक वरिष्ठ सलाहकार ने संकेत दिया है कि तेहरान लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने की रणनीति अपना सकता है।
उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि ईरान का लक्ष्य केवल मौजूदा टकराव से बाहर निकलना नहीं, बल्कि भविष्य में किसी संभावित अमेरिकी हमले को रोकने के लिए ऐसी स्थिति बनाना भी है, जिसमें विरोधी को हमले की भारी कीमत चुकाने का डर रहे।
IRGC सलाहकार ने क्या कहा?
IRGC कमांडर के वरिष्ठ सलाहकार मोहम्मद रजा नकदी ने युद्ध की अवधि को लेकर अहम टिप्पणी की है। उनका कहना है कि ईरान को ऐसी प्रतिरोधक क्षमता विकसित करनी होगी, जिससे किसी भी दुश्मन को उस पर हमला करने से पहले कई बार सोचना पड़े।
उन्होंने संकेत दिया कि संघर्ष को अमेरिका में अगले राष्ट्रपति के कार्यकाल की शुरुआत तक जारी रखा जा सकता है। उनके अनुसार, इस दौरान विरोधी को इतना नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जानी चाहिए कि भविष्य में ईरान पर हमला करने की इच्छा रखने वाले किसी भी देश को संभावित कीमत का अंदाजा हो।
नकदी के बयान को ईरान की दीर्घकालिक सैन्य रणनीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह आधिकारिक तौर पर युद्ध की कोई तय समयसीमा है या एक वरिष्ठ अधिकारी के सलाहकार की रणनीतिक राय।
ट्रंप का होर्मुज स्ट्रेट पर बड़ा दावा
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर पूरा नियंत्रण है और वह इसे बनाए रखने की स्थिति में है।
ट्रंप ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का भी जिक्र किया और ईरान की सैन्य क्षमता पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना बेहद कमजोर स्थिति में हैं और IRGC को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
ट्रंप ने ईरान की आर्थिक स्थिति पर भी हमला बोला। उनके मुताबिक, ईरान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और महंगाई की स्थिति लगातार खराब हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अब पहले की तरह क्षेत्रीय दबदबा कायम करने की स्थिति में नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।
इस क्षेत्र में किसी भी लंबे सैन्य संघर्ष या समुद्री आवाजाही में रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमत और एशिया सहित दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
क्या जल्द खत्म होगा युद्ध?
फिलहाल सामने आए बयानों से ऐसा संकेत नहीं मिलता कि अमेरिका-ईरान संघर्ष का तत्काल अंत निश्चित है। एक ओर ईरान की तरफ से लंबी अवधि तक प्रतिरोध जारी रखने के संकेत दिए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर अमेरिकी नेतृत्व ईरान की सैन्य क्षमता और रणनीतिक स्थिति पर लगातार दबाव बनाने का दावा कर रहा है।
ऐसे में युद्ध कितने समय तक चलेगा, यह सैन्य कार्रवाई, कूटनीतिक बातचीत और दोनों देशों के अगले रणनीतिक फैसलों पर निर्भर करेगा। यदि बातचीत का कोई प्रभावी रास्ता नहीं निकलता है, तो पश्चिम एशिया में जारी तनाव लंबे समय तक बना रह सकता है।


































