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AI से बदलेगा युवाओं का भाग्य: सरोजनीनगर में डॉ. राजेश्वर सिंह ने लॉन्च किया जनरेटिव AI क्रैश कोर्स, डिजिटल युग में युवाओं को सक्षम बनाने की ऐतिहासिक पहल, देश का पहला AI-सक्षम विधायक कार्यालय, 14 केंद्रों और वर्चुअल मोड में प्रशिक्षण सुविधा

  • सरोजनीनगर में डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुफ्त जनरेटिव AI क्रैश कोर्स लॉन्च किया
  • 14 डिजिटल केंद्रों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा प्रशिक्षण
  • कोर्स में ChatGPT, Google Maps जैसे टूल्स का प्रैक्टिकल उपयोग
  • पहले दिन 60+ युवाओं की भागीदारी, नई तकनीकों को लेकर जबरदस्त उत्साह
  • भारत का पहला AI-सक्षम विधायक कार्यालय बना सरोजनीनगर कार्यालय

लखनऊ, सरोजनीनगर : 7 जुलाई 2025 : युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने और डिजिटल क्रांति से जोड़ने के उद्देश्य से सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्रैश कोर्स की शुरुआत की है। यह कोर्स युवाओं को न केवल तकनीकी दक्षता देगा, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

डॉ. सिंह ने इस कार्यक्रम को अपनी समाज सेवा की प्रतिबद्धता और दिवंगत पिता को समर्पित श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि “AI सिर्फ कोडिंग नहीं, बल्कि सोचने का एक नया तरीका है।” उनका विज़न है कि सरोजनीनगर का प्रत्येक युवा आने वाली AI-प्रेरित अर्थव्यवस्था में नेतृत्वकारी भूमिका निभाए।

कोर्स की प्रमुख विशेषताएं

  1. AI, Machine Learning, Deep Learning का आसान और प्रभावी परिचय
  2. ChatGPT, Google Maps, Canva AI जैसे प्रमुख टूल्स का प्रायोगिक अभ्यास
  3. AI आधारित करियर सलाह, जॉब असिस्टेंस और नेटवर्किंग गाइडेंस
  4. प्रोजेक्ट निर्माण, प्रेजेंटेशन, और प्रमाण-पत्र वितरण

यह कोर्स पूरी तरह नि:शुल्क है और इसे ऐसे डिज़ाइन किया गया है कि तकनीकी बैकग्राउंड के बिना भी युवा इसे समझ सकें और अपना करियर गढ़ सकें।

कोर्स का संचालन: विशेषज्ञ मार्गदर्शन में प्रैक्टिकल लर्निंग

प्रशिक्षण का नेतृत्व विनय प्रिय मिश्रा कर रहे हैं, जो AI में PhD शोधार्थी हैं। उन्होंने बताया कि कोर्स का उद्देश्य केवल टूल सिखाना नहीं, बल्कि युवाओं की सृजनात्मक क्षमता, समस्या समाधान और नेतृत्व विकास को बढ़ावा देना है। उनका अनुभव पेटेंट, पब्लिकेशन और इनोवेशन के क्षेत्र में गहन है।

14 डिजिटल शिक्षा केंद्र और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ट्रेनिंग सुविधा

यह कोर्स डॉ. सिंह द्वारा स्थापित ‘रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केंद्रों’ पर उपलब्ध है। कुल 14 केंद्रों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

तेलीबाग, लतीफ नगर, भटगांव, गौरी बाजार, बंथरा, स्कूटर इंडिया, कल्ली पश्चिम, आशियाना, हरौनी, विधायक कार्यालय (पराग चौराहा), नीलमथा आदि।
साथ ही वर्चुअल मोड में भी कोर्स उपलब्ध रहेगा, जिससे दूरस्थ क्षेत्र के युवा भी लाभान्वित हो सकें।

पहले दिन 60 से अधिक युवाओं की भागीदारी

AI क्रैश कोर्स के प्रारंभिक बैच में 60 से अधिक युवाओं ने भाग लिया। इन युवाओं में छात्र, टेक-एंथुज़ियास्ट, स्थानीय मेधावी छात्राएं और विधायक कार्यालय के तकनीकी सदस्य भी शामिल रहे।

सभी प्रतिभागियों ने कोर्स को लेकर उत्साह और कृतज्ञता जताई और कहा कि यह पहल उन्हें AI जैसी जटिल तकनीक को सरल तरीके से सीखने का अवसर दे रही है।

भारत का पहला AI-सक्षम विधायक कार्यालय: तकनीक से प्रशासनिक दक्षता

डॉ. सिंह ने सरोजनीनगर विधायक कार्यालय को देश का पहला AI-सक्षम कार्यालय बनाने की घोषणा पहले ही की थी, और अब इस पहल को अमल में लाते हुए वे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में AI-सहायता प्राप्त पारदर्शिता और फुर्ती लेकर आ रहे हैं।

इससे न केवल जन सेवा में गुणवत्ता आई है, बल्कि नागरिकों को भी सरकारी सेवाओं के प्रति भरोसा बढ़ा है।

डॉ. सिंह का विज़न: हर गांव, हर युवा तक तकनीकी क्रांति

डॉ. सिंह ने कहा,

“मेरा सपना है कि सरोजनीनगर का हर युवा डिजिटल दुनिया की भाषा सीखे। AI को सिर्फ बड़े शहरों की तकनीक न मानें। यह गांवों तक पहुँचे, और हर युवा इसमें नेतृत्व करे।”

उनकी यह सोच सरोजनीनगर को UP ही नहीं, पूरे भारत में डिजिटल क्रांति का मॉडल बनाने की दिशा में प्रेरित कर रही है।

सरोजनीनगर बना डिजिटल युग का अगुआ

डॉ. राजेश्वर सिंह की यह पहल न केवल युवाओं को रोजगार-उन्मुख शिक्षा दे रही है, बल्कि क्षेत्र को डिजिटल समावेशन का उदाहरण भी बना रही है। AI जैसे जटिल विषय को सरल, सुलभ और सर्वसुलभ बनाकर उन्होंने एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसे पूरे देश में दोहराया जा सकता है।

Health Tips:लो बीपी कितना खतरनाक हो सकता है? ऐसे मरीजों के लिए कैसी होनी चाहिए डाइट?

लो बीपी कितना खतरनाक है और कैसी होनी चाहिए इसकी डाइट?

अक्सर लोग लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) को गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि यह सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि यह कितना खतरा पैदा कर सकता है और इससे जूझ रहे मरीजों को कैसी डाइट लेनी चाहिए।

कितना खतरनाक हो सकता है लो बीपी?

लो बीपी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। जर्नल ऑफ हाइपरटेंशन (2025) में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, लंबे समय तक लो बीपी रहने से दिमाग को ऑक्सीजन कम मिलती है, जिससे चक्कर आना, बेहोशी और यहां तक कि ब्रेन डैमेज का खतरा हो सकता है। यह स्थिति खासकर बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में ज्यादा खतरनाक होती है।

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बिना कुछ खाए भी बढ़ रहा है वजन? हो सकता है ये किसी बीमारी का संकेत, जानें इसके लक्षण

यदि शरीर में ज्यादा खून की कमी या पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाए, तो बीपी इतना गिर सकता है कि जान जाने तक की नौबत आ सकती है।
डॉ. रजत शर्मा, कार्डियोलॉजिस्ट (मैक्सर सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली) के अनुसार, अगर लो बीपी के साथ बार-बार चक्कर आएं या बेहोशी हो, तो यह दिल या नर्वस सिस्टम के लिए खतरे का संकेत हो सकता है।

लो बीपी क्यों होता है?

इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

  • शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
  • दिल की बीमारी
  • डायबिटीज की दवाओं का ज्यादा सेवन
  • अचानक खड़े होने पर बीपी गिर जाना (पोस्टुरल हाइपोटेंशन)

इंडियन जर्नल ऑफ मेडिसिन (2024) के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में लो बीपी की शिकायत करीब 20% अधिक देखी गई है, खासकर मेनोपॉज के बाद।

इसके लक्षण हैं:

  • चक्कर आना
  • थकान
  • धुंधलापन
  • गंभीर स्थिति में बेहोशी

लो बीपी के मरीजों की डाइट कैसी होनी चाहिए?

डाइट लो बीपी को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाती है। जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन (2025) के अनुसार, सोडियम और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करता है।

क्या खाना चाहिए:

  1. नमक अधिक लें:
    सोडियम बीपी को बढ़ाने में मदद करता है। नमकीन बिस्किट, अचार, सूप जैसे फूड्स फायदेमंद हैं। दिन में 3-5 ग्राम अतिरिक्त नमक लिया जा सकता है, लेकिन दिल के मरीज डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
  2. पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर चीजें:
    केला, संतरा, पालक, बादाम आदि पोटैशियम के अच्छे स्रोत हैं। ये सोडियम का संतुलन बनाए रखते हैं। काजू और दालों में मैग्नीशियम होता है, जो फायदेमंद है।
  3. प्रोटीन और हेल्दी फैट्स:
    अंडा, चिकन, मछली से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। बादाम, अखरोट और घी जैसे हेल्दी फैट्स ऊर्जा और बीपी को स्थिर रखते हैं।
  4. पर्याप्त पानी पिएं:
    डिहाइड्रेशन लो बीपी की प्रमुख वजह है। रोज़ाना 2-3 लीटर पानी ज़रूर पिएं। नारियल पानी और छाछ जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स वाले ड्रिंक्स भी फायदेमंद हैं।

किन चीजों से बचें?

  1. बिना नमक वाला खाना:
    लो बीपी वालों को बिना नमक वाला खाना नहीं खाना चाहिए, इससे बीपी और गिर सकता है।
  2. शराब और ज्यादा कैफीन:
    इनका ज़्यादा सेवन बीपी को प्रभावित कर सकता है।
  3. प्रोसेस्ड और जंक फूड:
    पैक्ड स्नैक्स या फास्ट फूड से परहेज करें, ये बीपी को और गिरा सकते हैं।

नोट: यह जानकारी विभिन्न रिपोर्ट्स और अध्ययनों पर आधारित है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने NGT में रखा जनता का पक्ष: विधानसभा क्षेत्र के इस गाँव की जनता के लिए अधिवक्ता के तौर पर डटे हैं विधायक, अब परिणाम स्वरूप 3.1 हेक्टेयर भूमि पर बेदखली पर रोक, जानें कब है मामले की अगली सुनवाई और क्या है पूरा मामला

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सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने NGT में रखा जनता का पक्ष: विधानसभा क्षेत्र के इस गाँव की जनता के लिए अधिवक्ता के तौर पर डटे हैं विधायक, अब परिणाम स्वरूप 3.1 हेक्टेयर भूमि पर बेदखली पर रोक, जानें कब है मामले की अगली सुनवाई और क्या है पूरा मामला
  • सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की याचिका पर NGT ने 3.1 हेक्टेयर भूमि पर 8 अक्टूबर 2025 तक बेदखली पर रोक लगाई।
  • गढ़ी चुनौटी के चांदेबाबा तालाब क्षेत्र में रह रहे अनुसूचित जाति के परिवारों को अंतरिम राहत मिली।
  • शेष 31 हेक्टेयर तालाब क्षेत्र को झील के रूप में पुनर्विकसित करने की योजना को NGT ने स्वीकृति दी।
  • राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह संपूर्ण विकास योजना बनाकर NGT में प्रस्तुत करे।
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने जनप्रतिनिधि और अधिवक्ता के रूप में अदालत में सामाजिक न्याय की प्रभावी पैरवी की।

लखनऊ, 7 जुलाई 2025 | TRUENEWSUP ब्यूरो: सरोजनीनगर क्षेत्र के गढ़ी चुनौटी (चांदेबाबा तालाब) में दशकों से रह रहे गरीब अनुसूचित जाति परिवारों को राहत मिली है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 3.1 हेक्टेयर भूमि पर 8 अक्टूबर 2025 तक के लिए बेदखली पर रोक लगा दी है। यह आदेश सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा एक अधिवक्ता के रूप में अदालत में प्रस्तुत याचिका पर सुनवाई के बाद जारी हुआ।

इस मामले में NGT ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनते हुए पर्यावरणीय संरक्षण और सामाजिक सरोकारों के बीच संतुलन कायम रखने की दिशा में निर्देश जारी किए हैं। यह मामला पिछले कई महीनों से विवाद का विषय बना हुआ था, जहां तालाब की सीमा में रह रहे परिवारों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही थी।

मामले की पृष्ठभूमि

गढ़ी चुनौटी स्थित चांदेबाबा तालाब क्षेत्र में करीब 3.1 हेक्टेयर भूमि पर अनुसूचित जाति के कई परिवार लगभग तीन दशक से निवासरत हैं। हाल ही में NGT द्वारा तालाब क्षेत्र को पुनर्स्थापित करने और अतिक्रमण हटाने के आदेश के बाद इन परिवारों को नोटिस जारी किया गया था।

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए एक अधिवक्ता के रूप में NGT में इन परिवारों का पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि संबंधित 3.1 हेक्टेयर क्षेत्र में रहने वाले परिवार लंबे समय से वहां रह रहे हैं और उन्हें अचानक बेदखल करना सामाजिक न्याय के विरुद्ध होगा।

NGT के आदेश की प्रमुख बातें:

  1. 3.1 हेक्टेयर भूमि पर 8 अक्टूबर 2025 तक बेदखली पर रोक लगाई गई है, जिससे वहां निवासरत परिवारों को अंतरिम राहत मिली है।
  2. शेष 31 हेक्टेयर तालाब क्षेत्र को विकसित कर झील के रूप में पुनर्निर्मित किया जाएगा, जिसमें गहरी खुदाई, जल संचयन और प्राकृतिक सौंदर्यीकरण की योजना शामिल है।
  3. राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह संपूर्ण विकास योजना तैयार कर NGT में प्रस्तुत करे। इस योजना में पारिस्थितिक सुधार, वृक्षारोपण और संरचनात्मक विकास शामिल होगा।
  4. झील को छोटी नहरों से जोड़ा जाएगा, जिससे जल का स्तर साल भर बना रहे और यह एक स्थायी जल स्रोत के रूप में कार्य करे।

सरकार और न्यायालय की भूमिका

NGT ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों में पर्यावरणीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाएगा, लेकिन साथ ही वहां रह रहे लोगों के अधिकारों की भी रक्षा की जाएगी। आदेश में सरकार को निर्देशित किया गया है कि वह विकास योजना तैयार करते समय स्थानीय निवासियों के सामाजिक और कानूनी पक्षों का भी ध्यान रखे।

राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि प्रस्तावित झील को पर्यटन और जलसंरक्षण की दृष्टि से विकसित किया जाएगा, साथ ही स्थानीय लोगों के हितों की उपेक्षा नहीं की जाएगी।

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की भूमिका

डॉ. सिंह ने केवल विधायक के रूप में नहीं, बल्कि एक अधिवक्ता के रूप में इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए अदालत में पैरवी की। उन्होंने कहा:

“जहां जरूरत हो, वहां जनता की आवाज़ अदालत तक पहुंचाना मेरी ज़िम्मेदारी है। सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय संतुलन – दोनों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।”

इस मामले में NGT का आदेश एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें पर्यावरणीय पुनर्स्थापन और सामाजिक सुरक्षा – दोनों पर विचार किया गया है। अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2025 को प्रस्तावित है, तब तक बेदखली की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

📍 स्थान: चांदेबाबा तालाब, गढ़ी चुनौटी, सरोजनीनगर, लखनऊ
📄 आदेश तिथि: 6 जुलाई 2025
⚖️ अदालत: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)
👨‍⚖️ याचिकाकर्ता अधिवक्ता: डॉ. राजेश्वर सिंह, विधायक सरोजनीनगर


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Dalai Lama Reincarnation:चीन क्यों नहीं चाहता कि दलाई लामा का पुनर्जन्म भारत में हो? जानिए इसके पीछे की वजह

14वें दलाई लामा के उत्तराधिकारी के पुनर्जन्म को लेकर अब विवाद केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि रणनीतिक बन चुका है. भारत के लिए यह चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि दलाई लामा और निर्वासित तिब्बती सरकार के मेजबान यहीं रहते हैं. चीन इस मुद्दे पर भारत पर जबरदस्त दबाव बना सकता है ताकि किसी भी प्रकार का पुनर्जन्म भारत की भूमि पर न हो. खुफिया सूत्रों के मुताबिक, यह मामला अब धार्मिक अधिकारों से ज्यादा राजनीतिक दबदबे का हो गया है.

दलाई लामा का पुनर्जन्म और चीन की आपत्ति
14वें दलाई लामा तेनज़िन ग्यात्सो ने अपने 90वें जन्मदिन पर घोषणा की कि उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया गदेन फोडरंग ट्रस्ट के माध्यम से होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में किसी भी बाहरी संस्था या सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा. चीन ने इस बयान को खारिज करते हुए कहा कि पुनर्जन्म की प्रक्रिया 18वीं सदी की छिंग वंश की ‘गोल्डन अर्न’ परंपरा और चीनी सरकार की मंजूरी के अनुसार होनी चाहिए.

गदेन फोडरंग ट्रस्ट को पुनर्जन्म की मान्यता का अधिकार
दलाई लामा ने अपने बयान में कहा कि दलाई लामा की संस्था बनी रहेगी और गदेन फोडरंग ट्रस्ट, जो कि एक गैर-लाभकारी संस्था है और 2015 में स्थापित की गई थी, को ही उनके भविष्य के पुनर्जन्म को मान्यता देने का अधिकार होगा. उन्होंने दोहराया कि “इस विषय में कोई अन्य हस्तक्षेप नहीं कर सकता.” यह बयान चीन की उस रणनीति को सीधी चुनौती देता है जिसमें वह भारत में किसी वैध उत्तराधिकारी को उभरने से रोकने की कोशिश कर रहा है.

चीन की रणनीति और वैश्विक प्रभाव
सूत्रों के मुताबिक, चीन पिछले एक दशक से एक राज्य समर्थित 15वें दलाई लामा की नियुक्ति की तैयारी कर रहा है ताकि तिब्बती समुदाय के धार्मिक प्रतिरोध को कम किया जा सके. लेकिन दलाई लामा के इस ऐलान से किसी भी चीनी नियुक्त उत्तराधिकारी की वैधता तिब्बती और वैश्विक बौद्ध समुदाय की नजरों में खत्म हो जाती है. भारत में यदि पुनर्जन्म होता है तो दो समानांतर दलाई लामा अस्तित्व में होंगे – एक वैध निर्वासन में और दूसरा चीन का प्रतिनिधि ल्हासा में.

भारत-चीन संबंधों में नया मोड़
यह पूरा मामला भारत और चीन के बीच पहले से तनावपूर्ण सीमाई और राजनीतिक संबंधों को और गहरा कर सकता है. सूत्रों का कहना है कि तिब्बती और वैश्विक बौद्ध समाज चीन द्वारा थोपे गए किसी भी धर्मगुरु को स्वीकार नहीं करेंगे. इसका असर चीन की धार्मिक कूटनीति पर खासतौर से मंगोलिया, लद्दाख, सिक्किम और भूटान जैसे क्षेत्रों में पड़ेगा.

चीन की आंतरिक प्रतिक्रिया और संभावित रणनीति
खुफिया सूत्रों ने बताया कि इस चुनौती का सामना करने के लिए चीन तिब्बत में गिरफ्तारियां, निगरानी और वैचारिक दमन को और तेज कर सकता है.
वह बौद्ध मठों और शैक्षणिक संस्थानों को भी निशाना बना सकता है. इस बीच, चीन जल्दबाजी में एक प्रतिद्वंद्वी दलाई लामा की घोषणा कर सकता है ताकि भारत में संभावित उत्तराधिकारी की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को रोका जा सके.

Most Expensive Players in DPL Auction 2025:ईशांत शर्मा को मिले 13 लाख, विराट कोहली के भतीजे की हुई इतनी बोली; जानिए ऑक्शन के सबसे महंगे खिलाड़ी कौन रहे

दिल्ली प्रीमियर लीग 2025 का आगाज अगस्त महीने के पहले सप्ताह में होगा. उससे करीब एक महीना पहले ऑक्शन करवाया गया, जिसमें ईशांत शर्मा से लेकर ऋषभ पंत और IPL 2025 के स्टार खिलाड़ी रहे दिग्वेश राठी भी शामिल रहे. 2024 सीजन की तुलना में DPL 2025 में 6 के बजाय आठ टीम खेलेंगी. इस बार दो नई टीमों को लीग से जोड़ा गया है. नीलामी की प्रक्रिया नई दिल्ली में करवाई गई और सभी टीमों ने खूब सारा पैसा लुटाया. प्रत्येक टीम के पास ऑक्शन में 1.5 करोड़ रुपये का पर्स था.

70 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन के साथ DPL भारत की दूसरी सबसे अमीर लीग बन चुकी है. भारत में सबसे अमीर लीग का रुतबा IPL के पास है. खैर DPL 2025 के ऑक्शन पर नजर डालें तो नितीश राणा और सिमरजीत सिंह जैसे खिलाड़ियों पर सबसे ऊंची बोली लगी. DPL 2025 में शामिल 8 टीमों के नाम सेंट्रल दिल्ली किंग्स, वेस्ट दिल्ली लायंस, आउटर दिल्ली वॉरियर्स, न्यू दिल्ली टाइगर्स, साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स, पुरानी दिल्ली 6, ईस्ट दिल्ली राइडर्स और नॉर्थ दिल्ली स्ट्राइकर्स है.

ऑक्शन में बिके सबसे महंगे खिलाड़ी

दिल्ली प्रीमियर लीग 2025 के ऑक्शन में बिके सबसे महंगे खिलाड़ी सिमरजीत सिंह रहे. इस भारतीय तेज गेंदबाज को सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने 39 लाख रुपये में खरीदा. दूसरे सबसे महंगे खिलाड़ी दिग्वेश राठी दूसरे सबसे महंगे प्लेयर रहे, जिन्हें साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स ने 38 लकह रुपये की बोली लगाकर खरीदा है. तीसरे सबसे महंगे खिलाड़ी का दर्जा नितीश राणा को मिला, जिन्हें वेस्ट दिल्ली लायंस ने 34 लाख रुपये देकर खरीदा है.

DPL 2025 ऑक्शन के चौथे सबसे महंगे खिलाड़ी तेज गेंदबाज प्रिंस यादव रहे, जिनपर न्यू दिल्ली टाइगर्स ने 33 लाख रुपये की बोली लगाई. पांचवें सबसे महंगे खिलाड़ी मयंक रावत रहे, जिनपर ईस्ट दिल्ली राइडर्स ने RTM कार्ड खेलकर 26 लाख रुपये की बोली लगाई.

बता दें कि भारत के दिग्गज तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा पर 13 लाख रुपये की बोली लगी, जिन्हें वेस्ट दिल्ली लायंस ने अपने साथ जोड़ा. वहीं RCB के स्टार स्पिनर सुयश शर्मा को आउटर दिल्ली वॉरियर्स ने 15 लाख रुपये में खरीदा है. विराट कोहली के भतीजे आर्यवीर कोहली को साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स ने 1 लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया है.