Home Blog Page 540

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर बोलीं राज्य मंत्री रजनी तिवारी : “लोकतंत्र की रीढ़ है निष्पक्ष पत्रकारिता”, लखनऊ के पत्रकारों को मिला एनयूजे (आई) सम्मान

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर बोलीं राज्य मंत्री रजनी तिवारी : “लोकतंत्र की रीढ़ है निष्पक्ष पत्रकारिता”, लखनऊ के पत्रकारों को मिला एनयूजे (आई) सम्मान
हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर बोलीं राज्य मंत्री रजनी तिवारी : “लोकतंत्र की रीढ़ है निष्पक्ष पत्रकारिता”, लखनऊ के पत्रकारों को मिला एनयूजे (आई) सम्मान
हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर बोलीं राज्य मंत्री रजनी तिवारी : “लोकतंत्र की रीढ़ है निष्पक्ष पत्रकारिता”, लखनऊ के पत्रकारों को मिला एनयूजे (आई) सम्मान
  • कार्यक्रम में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि निष्पक्ष पत्रकारिता लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है और जब-जब देश-समाज को दिशा की जरूरत हुई, पत्रकारिता ने मार्गदर्शन किया।
  • एनयूजे (आई), उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित इस समारोह में लखनऊ की पत्रकारिता इकाई के सदस्यों को ‘एनयूजे (आई) सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
  • कार्यक्रम में पत्रकारों की भूमिका पर गहन चर्चा हुई, जिसमें उनके संघर्ष, समाज में योगदान और मीडिया की बदलती जिम्मेदारियों को रेखांकित किया गया।
  • मंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे पत्रकारिता के मूल्यों को समझें और सच्चाई के साथ बिना पक्षपात के रिपोर्टिंग करें।
  • कार्यक्रम में कई वरिष्ठ पत्रकार और मीडियाकर्मी मौजूद रहे, जिन्होंने मीडिया की वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर विचार साझा किए।

लखनऊ: लोकतंत्र में निष्पक्ष पत्रकारिता का चौथा स्तम्भ परम आवश्यक है। देश और समाज को जब-जब दशा-दिशा दिए जाने की जरूरत आई, तब-तब पत्रकारिता ने सकारात्मक भूमिका निभाई। परतंत्र भारत में पत्रकारिता ने न सिर्फ स्वतंत्रता के मतवालों को प्रेरित किया बल्कि पत्रकारों ने स्वयं सक्रिय सहभागिता भी निभाई। उक्त बातें बतौर मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने शुक्रवार को होटल दीप पैलेस में कहीं। वह नेशनल जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (आई), उत्तर प्रदेश की ओर से ‘हिन्दी पत्रकारिता दिवस-2025’ पर हुए ‘एनयूजे (आई) सम्मान समारोह’ एवं ‘कृत्रिम बौद्धिकता के दौर में पत्रकारिता’ संगोष्ठी में बोल रही थीं।

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने आगे कहा, स्वतंत्रता के बाद देश और समाज की आवश्यकता के अनुरूप पत्रकारों ने हमेशा सकारात्मक राह दिखाई। आपातकाल के दौरान जब जरूरत थी तो पत्रकारिता ने निरंकुश सत्ता को आईना दिखाया। जब सरकारों ने बेहतर कार्य किए तो सार्वजनिक पीठ भी थपथापाई। सेना के शौर्य के समर्थन में पत्रकारिता ने किसी योद्धा से कमतर भूमिका का निर्वहन नहीं किया। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज को दिशा देने वाले योद्धा हैं। आप सभी न्याय दिलाने से लेकर सामाजिक जागरूकता तक की प्रत्येक प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसी संगोष्ठियों से निश्चित ही विचारों का अमृत निकलेगा।

इस दौरान विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह के शुभकामना संदेश का वाचन भी किया गया। बतौर विशिष्ट अतिथि प्रमुख सचिव सचिवालय प्रशासन अमित कुमार कुमार घोष ने कहा कि पत्रकारों को हमेशा सीखते रहना चाहिए। एआई का दौर भी पत्रकारों को और सिखाएगा और उनके काम में मदद करेगा। श्री घोष ने पत्रकारों के संघर्ष को सम्मान देते हुए बेहद संवेदनशील शब्दों में कहा, आप सभी समाज के असली प्रहरी हैं। तकनीक चाहे जितनी उन्नत हो जाए, पत्रकार की कलम का असर आज भी जीवंत है।’ संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार राजीव श्रीवास्तव, ज्ञानेंद्र शुक्ल, अनिल त्रिगुणायत, मनोज वाजपेयी, एआई विशेषज्ञ प्रखर पाठक ने अपने महत्वपूर्ण विचार रखे।

एनयूजे, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष वीरेंद्र सक्सेना ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मंच पर संगठन के संरक्षक के. बख्श सिंह, सुरेंद्र कुमार दुबे एवं एनयूजे स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन के उपाध्यक्ष अजय कुमार भी रहे। प्रदेश महामंत्री संतोष भगवन, राष्ट्रीय कार्यपरिषद सदस्य हरीश सैनी, प्रदेश कोषाध्यक्ष अनुपम चौहान, प्रदेश प्रवक्ता/मीडिया प्रभारी डॉ.अतुल मोहन सिंह, कार्यकारिणी सदस्य अरुण शर्मा टीटू, लखनऊ जिलाध्यक्ष आशीष मौर्य, महामंत्री पद्माकर पांडेय, कोषाध्यक्ष अनुपम पांडेय, संगठन मंत्री अश्वनी जायसवाल, उपाध्यक्ष अभिनव श्रीवास्तव, अनिल सिंह, मीनाक्षी वर्मा, मनीषा सिंह, मंत्री पंकज सिंह चौहान, संगीता सिंह, गरिमा सिंह, नागेन्द्र सिंह, प्रवक्ता शिव सागर सिंह चौहान, विशेष आमंत्रित सदस्य आलोक श्रीवास्तव, डॉ. अशोक शुक्ल, मार्कण्डेय सिंह, धर्मेंद्र सक्सेना, ऋषि शर्मा, रोहित रामवापुरी, नंदिनी प्रियदर्शिनी, नेहा सिंह आदि को भी राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने सम्मानित किया। संचालन ऐश्वर्या शुक्ला ने किया।

वरिष्ठ पत्रकार/संपादक ज्ञानेंद्र शुक्ल ने कहा: सीखने-सिखाने का क्रम चलता रहता है, कल हमें हमारी वरिष्ठ सिखाते थे आज नई पीढ़ी के बच्चे सिखाते हैं। एआई और चैट जीपीटी भी नई पीढ़ी की तरह है। अब वह हमें सिखा रहा है। एआई से बचना मुश्किल है। मनुष्य और विवेक का स्थान ले पाना अभी एआई के वश में नहीं है। गुजरते वक्त के साथ पत्रकारिता ने कई चुनौतियां आत्मसात की हैं, एआई को भी मित्रवत आत्मसात कर लेंगे।

वरिष्ठ पत्रकार राजीव श्रीवास्तव ने कहा: विवेकवान होना ही मनुष्यता का पैमाना है। एआई टूल आंकड़ों और रिसर्च के आधार पर विद्वान हो सकता है, पर विवेकवान नहीं। मोबाइल पर हर सामग्री उपलब्ध है, पर मोबाइल में विवेक नहीं है। विवेकशीलता मनुष्य में ही है। एआई को हम छोड़ नहीं सकते, इनकार नहीं कर सकते, इसे हमको आत्मसात करना ही होगा। एआई को मित्रवत इस्तेमाल करें, पूर्ण आत्मनिर्भरता घाटक होगी। एआई डेटाबेस के आधार पर आपको कॉन्टेंट देता है। ह्यूमन इंटरवेंशन के बिना खबर के साथ न्याय नहीं होगा। एआई तकनीक चाहें जितनी विकसित हो जाए वह मनुष्य के विवेक का स्थान कभी नहीं ले सकता है। एआई के आने से नौकरी का खतरा नहीं है। हम अख़बार को एआई के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं, वरना खबरों का जिम्मेदार कौन होगा। पत्रकारों के निजी अनुभव का पर्याय भी एआई नहीं हो सकता है।

वरिष्ठ पत्रकार/संपादक अनिल त्रिगुणावत ने कहा: ‘एआई संवेदना, विचार और मानवीय दृष्टिकोण नहीं ला सकता है। पत्रकारिता की आत्मा उसकी विश्वसनीयता है और वह केवल एक अनुभवी पत्रकार ही बनाए रख सकता है। पत्रकार की भूमिका एआई से कभी पीछे नहीं होगी। एआई विशेषज्ञ प्रखर पाठक ने कहा, मीडिया में चैट जीपीटी और वर्कस्पेस टूल का इस्तेमाल पत्रकारों के लिए उपयोगी साबित होगा। वॉयस ओवर से लेकर बेसिक सामग्री तक एआई के माध्यम से जनरेट कर सकते हैं। एआई से रिसर्च डिटेल लेकर पत्रकार चैट जीपीटी के माध्यम से न्यूज़ सामग्री बना सकते हैं।

Johny Lever Reaction: परेश रावल के ‘हेरा फेरी 3’ छोड़ने पर जॉनी लीवर ने दी प्रतिक्रिया

हेरा-फेरी 3 इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई है. इस फिल्म का फैंस को बेसब्री से इंतजार था. मगर परेश रावल ने फिल्म छोड़कर सभी को चौंका दिया है. इस पर फैंस तो टेंशन में हैं ही, सेलेब्स को भी लग रहा है कि परेश रावल के बिना फिल्म में मजा नहीं आने वाला है. जॉनी लीवर को हेरा फेरी फ्रेंचाइजी का हिस्सा रह चुके हैं उन्होंने परेश रावल की एग्जिट पर रिएक्ट किया है। जॉनी लीवर का मानना है कि परेश रावल को अपने फैसले के बारे में एक बार फिर सोच लेना चाहिए क्योंकि उनके बिना फिल्म में मजा नहीं आएगा. जॉनी लीवर का रिएक्शन वायरल हो रहा है।

जॉनी लीवर ने किया रिएक्ट
टाइम्स नाओ को दिए इंटरव्यू में जॉनी लीवर ने परेश रावल के फिल्म छोड़ने के बारे में बात की. उनका कहना है कि परेश रावल को टीम के साथ बैठकर मामले को सुलझाना चाहिए क्योंकि फैन उन्हें फिल्म में मिस करेंगे. उन्होंने कहा- मुझे लगता है उन्हें कर लेना चाहिए फिल्म. बैठकर बात करें, मैटक सॉल्व करें क्योंकि फैंस बहुत मिस करेंगे परेशजी को फिल्म में, मजा नहीं आएगा ना वैसे उनके बिना. तो बात करके सॉल्व कर लेना चाहिए. मेरी नजर में तो ये ही सही है। बता दें 18 मई को पोस्ट शेयर करके परेश रावल ने हेरा फेरी 3 छोड़ने का कंफर्म किया था. उन्होंने लिखा था कि वो क्रिएटिव डिफरेंस की वजह से फिल्म नहीं छोड़ रहे हैं. जिसके बाद अक्षय कुमार के प्रोडक्शन हाउस ने उन्हें 25 करोड़ के हर्जाने का नोटिस भेजा है. फिल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी थी. तीनो एक्टर ने प्रोमो भी शूट कर लिया था।

अक्षय ने तोड़ी चुप्पी

हाउसफुल 5 के ट्रेलर लॉन्च पर अक्षय कुमार से परेश रावल के हेरा फेरी 3 छोड़ने को लेकर बात की थी. इस पर उन्होंने कहा था- जो कुछ भी है लेकिन ये सही जगह नहीं है जो मैं इस बारे में बात करूं. जो कुछ भी हुआ है वो सीरियस मामला है. कोर्ट इस मामले को देखेगी. मुझे नहीं लगता कि इस जगह मुझे इस बारे में बात करनी चाहिए।

शांति, प्राकृतिक खूबसूरती और औपनिवेशिक इतिहास का अनोखा मेल है डलहौज़ी

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित डलहौज़ी एक सुंदर और शांत पहाड़ी स्थल है, जो अपनी ठंडी जलवायु, हरे-भरे देवदार के जंगलों, और औपनिवेशिक वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। समुद्र तल से लगभग 1,970 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह शहर 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौज़ी द्वारा स्थापित किया गया था और आज भी अपने ब्रिटिश युग की विरासत को सहेजे हुए है।

डलहौज़ी की विशेषताएँ

डलहौज़ी एक ऐसा स्थल है जहाँ प्राकृतिक सुंदरता, इतिहास और शांति का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है। यहाँ की वादियाँ, झीलें, जलप्रपात और दूर-दूर तक फैले पहाड़, किसी चित्रकार की कल्पना जैसे प्रतीत होते हैं। यह स्थल उन यात्रियों के लिए आदर्श है जो भीड़-भाड़ से दूर, सुकून के पल बिताना चाहते हैं।

प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. खजियार – भारत का ‘मिनी स्विट्जरलैंड’

डलहौज़ी से लगभग 22 किमी दूर स्थित खजियार एक छोटा सा पठार है, जिसे घास के मैदान, झील और देवदार के पेड़ों से घिरा हुआ माना जाता है। यहाँ की खूबसूरती और खुला मैदान बच्चों और फोटोग्राफरों को बेहद पसंद आता है।

2. कालाटोप वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी

यह जंगल क्षेत्र वन्य जीव प्रेमियों और ट्रेकिंग करने वालों के लिए आदर्श स्थान है। यहाँ से धौलाधार पर्वतमाला के अद्भुत दृश्य दिखाई देते हैं।

3. पंचपुला

डलहौज़ी के पास स्थित यह जलप्रपात गर्मियों में बेहद लोकप्रिय होता है। यहाँ की ताजगीभरी हवा और पानी की कलकल ध्वनि मन को शांति देती है।

4. सुभाष बाओली

यह एक शांत जगह है जहाँ नेताजी सुभाष चंद्र बोस कुछ समय के लिए ठहरे थे। यह स्थान घने पेड़ों और पानी के झरनों से घिरा है।

5. सेंट जॉन और सेंट फ्रांसिस चर्च

ब्रिटिश काल में बनी ये चर्चें औपनिवेशिक वास्तुकला की सुंदर मिसाल हैं और पर्यटकों को अतीत से जुड़ने का अवसर देती हैं।

डलहौज़ी में क्या करें?

ट्रेकिंग और नेचर वॉक

फोटोग्राफी और बर्ड वॉचिंग

लोकल हस्तशिल्प और ऊनी वस्त्रों की खरीदारी

हिमाचली व्यंजनों का स्वाद लेना (मदरा, चना मसर, सीडू आदि)

ध्यान और योग के लिए एकांत वातावरण का लाभ उठाना

यात्रा का सर्वोत्तम समय

मार्च से जून: गर्मियों में ठंडी और सुहावनी जलवायु के लिए उपयुक्त।

सितंबर से नवंबर: हरियाली और पर्वतीय शांति के लिए आदर्श।

दिसंबर से फरवरी: बर्फबारी का आनंद लेने वालों के लिए स्वर्ग समान।

कैसे पहुँचे डलहौज़ी?

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा पठानकोट (लगभग 75 किमी) है।

रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन पठानकोट है, जहाँ से टैक्सी या बस के माध्यम से डलहौज़ी पहुँचा जा सकता है।

सड़क मार्ग: डलहौज़ी हिमाचल और पंजाब के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा है।

डलहौज़ी उन यात्रियों के लिए एक आदर्श गंतव्य है जो शहर की भीड़-भाड़ और तनाव से दूर, पहाड़ों की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं। यहाँ का हर कोना एक अलग कहानी कहता है — कभी औपनिवेशिक इतिहास की, कभी प्रकृति की, और कभी आत्मिक शांति की।

Virat Kohli Dance: अंखियों से गोली मारे’ गाने पर विराट कोहली ने मैदान के बीच में किया जबरदस्त डांस

विराट कोहली ग्राउंड पर हमेशा एक्टिव रहते हैं, चाहे वह अग्रेशन हो या फिर कूल अंदाज. उनकी टीम आरसीबी IPL 2025 के फाइनल में पहुंच गई है. टीम ने गुरुवार को खेले गए क्वालीफ़ायर-1 में पंजाब किंग्स को 8 विकेट से हराया. कोहली का एक डांस वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, जिसमे वह बॉलीवुड गाने ‘अंखियों से गोली मारे’ गाने पर डांस कर रहे हैं.

रजत ने टॉस जीतकर पंजाब किंग्स को पहले बल्लेबाजी करने के लिए कहा, इस फैसले को आरसीबी के गेंदबाजों ने सही साबित किया. पॉवरप्ले के अंदर 38 रनों पर 4 विकेट गंवाने के बाद पंजाब इसे उबर नहीं पाई. पूरी टीम 101 रनों पर ढेर हो गई. इस दौरान विराट कोहली फील्डिंग सेट कर रहे थे, गेंदबाज को बता रहे थे कि कहां गेंद डालनी है. कई बार देखा गया कि कोहली के बताने के बाद ही विकेट भी मिला. ऐसा लग रहा था कि कोहली इस मैच में कप्तान हो.

101 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए विराट कोहली बल्ले से कुछ ख़ास नहीं कर पाए, वह 12 रन बनाकर आउट हुए. हालांकि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को मैच जीतने में कोई कठिनाई नहीं आई. फिल साल्ट की 56 रनों की नाबाद पारी के सहारे आरसीबी ने लक्ष्य को 10 ओवरों में पूरा कर 8 विकेट से जीत दर्ज की.

विराट कोहली का डांस वीडियो वायरल

विराट कोहली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वह मैदान पर गोविंदा और रवीना टंडन के गाने ‘अंखियों से गोली मारे’ गाने पर नाच रहे हैं. डीजे ने ब्रेक के दौरान ये गाना बजाया तो कोहली खुद को रोक नहीं पाए और डांस करने लगे. ये वीडियो आरसीबी के लीग स्टेज के आखिरी मैच का है, जिसमें उसने लखनऊ को 6 विकेट से हराया था. इस मैच को जीतकर ही आरसीबी ने टॉप 2 में अपनी जगह पक्की की थी.

ऑरेंज कैप की दौड़ में शामिल हैं विराट कोहली

कोहली की बात करें उन्होंने आईपीएल 2025 में खेले 14 मैचों में 55.81 की एवरेज से 614 रन बनाए हैं. वह ऑरेंज कैप की दौड़ में शामिल हैं, इसके लिए उन्हें फाइनल में शतकीय पारी खेलनी होगी. जिस फॉर्म में कोहली हैं, उससे ऐसा मुश्किल नहीं लग रहा कि फाइनल में उनके बल्ले से बड़ी पारी आए.

Health Tips: कोलेस्ट्रॉल आपके शरीर के लिए कितना जरूरी है? ये बात अधिकतर लोग नहीं जानते

कोलेस्ट्राॅल का जिक्र होते ही दिल की चिंता सताने लगती है. क्या वाकई कोलेस्ट्राॅल का काम सिर्फ ह्यूमन बाॅडी को नुकसान पहुंचाना है. अगर आपके जेहन में भी इसको लेकर शंका है तो वह अब हमेशा के लिए दूर होने वाली है. हम कोलेस्ट्र्राॅल की कुछ ऐसी खूबियों से रूबरू कराएंगे, जिसके बाद आपका फोकस्ड डर की बजाय इसे कंट्रोल करने पर रहेगा. कोलेस्ट्राॅल हमारी बाॅडी के लिए क्यों जरूरी है. आइए जानते हैं…

कोलेस्ट्राॅल क्या है और कैसे मिलता है?

कोलेस्ट्रॉल एक प्रकार का लिपिड (फैट) है. कोलेस्ट्राॅल बाॅडी को दो तरीकों से मिलता है. पहला बाॅडी में लिवर कोलेस्ट्राॅल को बनाता है. दूसरा एनिमल से मिलने वाले फूड प्रोडक्ट खाने से ये हमारे शरीर तक पहुंचता है. जैसे मीट, पोलट्री, डेयरी प्रोडक्ट आदि.

क्या शरीर को होती है कोलेस्ट्राॅल जरूरत?

कोलेस्ट्राॅल शरीर के लिए जरूरी होता है. ये बाॅडी में सेल्स, विटामिन और अन्य हार्मोन बनाने में अहम भूमिका निभाता है.

कोलेस्ट्रॉल कब हो जाता है खतरनाक?

बाॅडी में कोलेस्ट्राॅल ब्लड के साथ सर्कुलेट होता है. ब्लड में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा बढ़ने पर ये बाॅडी के लिए रिस्क पैदा कर सकता है. हाई कोलेस्ट्राॅल के चलते हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा पैदा हो सकता है.

कोलेस्ट्राॅल की मात्रा कम होने पर प्रभाव

कोलेस्ट्राॅल की मात्रा बढ़ने पर ही इसके प्रभाव नजर नहीं आते, ब​ल्कि कम होने का भी बाॅडी पर असर देखने को मिल सकता है. ​पिछले वर्षों में की गई एक स्टडी के अनुसार जिन हेल्दी महिलाओं में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा कम थी, उनमें डिप्रेशन और एंक्जाइटी के लक्षण नजर आए. रिसर्चर्स के अनुसार कोलेस्ट्राॅल बाॅडी में हार्मोन्स और विटामिन डी बनाने में भूमिका निभाता है. ऐसे में इसकी मात्रा कम होना ब्रेन हेल्थ को प्रभावित करता है. विटामिन डी हमारे शरीर में सेल ग्रोथ के लिए जरूरी है. यदि ब्रेन के सेल हेल्दी नहीं रहेंगे तो एंक्जाइटी और डिप्रेशन फील हो सकता है. यानी लो कोलेस्ट्राॅल का मेंटल हेल्थ से कनेक्शन है. हालांकि इसको लेकर अभी रिसर्चर्स की स्टडी जारी है.

प्रेग्नेंसी के दाैरान अ​धिक ध्यान देने की जरूरत

प्रेग्नेंट महिलाओं में लो कोलेस्ट्राॅल बड़ी समस्या पैदा कर सकता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रेग्नेंसी के दाैरान कोलेस्ट्राॅल की मात्रा कम होने से प्रीमैच्योर डिलीवरी या जन्म के दाैरान बच्चे का वजन कम होने का जो​खिम बढ़ सकता है.

कैंसर का खतरा

वर्ष 2012 में हुई एक स्टडी के अनुसार बाॅडी में कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होने से कैंसर का जो​खिम बढ़ सकता है.

ये दिख सकते हैं लक्षण

    • बिना किसी बात के मन में निराशा आना.
    • बार घबराहट महसूस होना.
    • दिमाग में कंफ्यूजन रहना.
    • बात-बात पर गुस्सा होना.
    • निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होना. किसी बात पर कोई निर्णय नहीं ले पाना.
    • नींद के तरीकों में बदलाव
    • फूड हैबिट्स में चेंज

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.