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RCB Stampede Today:चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भगदड़ पर विराट कोहली और RCB टीम ने क्या कहा? 11 लोगों की मौत, कई घायल

मंगलवार को RCB ने पंजाब किंग्स को 6 रनों से हराकर IPL 2025 का खिताब जीता था. फाइनल मुकाबला अहमदाबाद में खेला गया था, वहीं जब बुधवार को टीम बेंगलुरु पहुंची तो वहां खिलाड़ियों के लिए विक्ट्री परेड की तैयारियां की गई थीं. एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हजारों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी, लेकिन शाम के समय भगदड़ मच गई. इसके बावजूद RCB टीम के खिलाड़ी चिन्नास्वामी स्टेडियम पहुंचे और फैंस का अभिवादन स्वीकार किया.

विराट कोहली और RCB टीम ने क्या कहा?

चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहड़ भगदड़ मची, जिसमें कई लोगों की जान जाने की खबर है. ऐसे में जब आरसीबी टीम चिन्नास्वामी स्टेडियम पहुंची तो विराट कोहली समेत RCB खिलाड़ियों ने कुछ नहीं कहा था. ऐसे में सवाल उठने लाजिमी हैं कि जब मैदान के बाहर इतनी बड़ी घटना हो गई थी, फिर भी RCB टीम के कार्यक्रम को क्यों नहीं रोका गया और टीम के खिलाड़ियों ने कोई बयान क्यों नहीं दिया. इस पर IPL चेयरमैन अरुण सिंह धूमल ने प्रकाश डालते हुए बताया कि स्टेडियम के अंदर मौजूद कर्मचारियों को भगदड़ की जानकारी नहीं थी.

IPL चेयरमैन अरुण सिंह धूमल ने बताया, “यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. मैदान के भीतर मौजूद कर्मचारियों को भगदड़ की जानकारी नहीं थी. उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि समारोह को भीतर ही पूरा किया जाएगा. यह बहुत दुखद है.”

आपको बताते चलें कि एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में आने से पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाड़ी विधान सौधा पहुंचे थे. जहां कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बेंगलुरु टीम के खिलाड़ियों को सम्मानित किया था. वहीं BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने भी इस घटना को दुखद बताया और कहा कि कार्यक्रम के आयोजकों को बेहतर तैयारियां करनी चाहिए थी.

Caste Census: घर का मुखिया कौन है, कितनी है प्रॉपर्टी, शादी हुई या नहीं; जनगणना में कैसे होते हैं सवाल?

 जाति जनगणना को लेकर बुधवार को आयोजित CCPA की बैठक में मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि मूल जनगणना में ही जातिगत जनगणना कराई जाएगी. इस बार जनगणना के दौरान जाति से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे. इससे पहले 2021 में जनगणना होनी थी, लेकिन कोरोना के कारण टालना पड़ा.

जनगणना के लिए नियुक्त होते हैं सरकारी कर्मचारी 

देश में जनगणना के लिए सरकारी कर्मचारियों का नियुक्त किया जाता है, जिन्हें एन्यूमेरेटर कहा जाता है. जनगणना के लिए नियुक्त कर्मचारी तय किए गए इलाकों में जाते हैं और कई तरह की जानकारियां जुटाते हैं. सरकार इन्हें एक स्पेशल आईडी कार्ड देती है और किसी भी तरह का शक होने पर आप इनसे पहचान पत्र दिखाने को कह सकते हैं.

जनगणना की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, ये दो हिस्सों में कराई जाती है. पहली हाउसिंग और दूसरी हाउसिंग सेंसस. हाउसिंग में घर से जुड़े कई तरह के सवाल पूछे जाते हैं, जिसमें बिजली, पेयजल, शौचालय, संपत्ति और संपत्ति के कब्जे से जुड़े सवाल होते हैं.

प्रक्रिया के दौरान पूछे जाते हैं कुल 29 सवाल 

जनगणना का दूसरा फॉर्म नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर का होता है. इसमें घर के सदस्यों को लेकर सवाल पूछे जाते हैं. जैसे- नाम, लिंग, माता का नाम, पिता का नाम, जन्म की तारीख, वैवाहिक स्थिति, अस्थायी पता और परिवार के मुखिया को लेकर सवाल पूछे जाते हैं. जनसंख्या की प्रक्रिया के दौरान ऐसे ही कुल 29 सवाल पूछे जाते हैं.

कैसे तैयार होता है जनगणना का डेटा बेस?

दावों के मुताबिक भारत सरकार जनगणना से जुड़ी जो भी जानकारी जुटाती है, उसे निजी एजेंसी के साथ शेयर नहीं किया जाता है. जनगणना करने वाले कर्मचारी जो डेटा इकट्ठा करते हैं, उसे फिल्टर किया जाता है. कैटेगरी में बांटने के बाद इसे नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर में अंतिम रूप दिया जाता है. इस तरह जनगणना का डेटा बेस तैयार होता है जिसे सरकार इस्तेमाल करती है.

भारत में जनगणना कराने के लिए प्रावधान है, जिसे जनगणना अधिनियम 1948 के नाम से जाना जाता है. ये प्रावधान केंद्र सरकार को जनगणना कराने और इसके लिए नियम बनाने का अधिकार देता है. इसके साथ ही जनगणना का विस्तृत आंकड़ा गोपनीय रखा जाता है.

कबसे शुरू हुई जनगणना? 

देश में पहली जनगणना 1872 में तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड मेयो के शासनकाल में हुई, जबकि संपूर्ण जनगणना 1881 में हुई. इसके बाद हर 10 साल में जनगणना कराने का चलन शुरू हुआ. आजादी से पहले साल 1881, 1891, 1901, 1911, 1921, 1931 और 1941 में जनगणना कराई गई. आजादी मिलने के बाद 1951 में पहली बार जनगणना हुई थी. फिर 1961, 1971, 1991, 2001 और 2011 जनगणना कराई गई.

एलन मस्क ने ट्रंप का साथ छोड़ने के बाद DOGE ऑफिस में मिले गांजा, चूहे, कॉकरोच समेत कई हैरान कर देने वाली चीजें

Elon Musk News: टेस्ला के सीईओ एलन मस्क (Elon Musk) ने व्हाइट हाउस और अपने बनाए विभाग “Department of Government Efficiency” (DOGE) को छोड़ दिया है. उनके जाने के बाद जिस ऑफिस में उनकी टीम ठहरी थी, वहां काफी गंदगी और अव्यवस्था पाई गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की एक संस्था USIP (United States Institute of Peace) के सफाई कर्मचारियों ने बताया कि मस्क की टीम के जाने के बाद उनकी बिल्डिंग में गांजा (मारिजुआना) पड़ा मिला और वहां चूहे, कॉकरोच और पानी की लीकेज जैसी समस्याएं देखी गईं.

The Economist की रिपोर्ट के अनुसार, DOGE ने जबरन USIP की बिल्डिंग पर कब्जा कर लिया था, लेकिन कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी. मार्च से मई तक यह बिल्डिंग DOGE के कब्जे में रही और संस्थान के अधिकारी 19 मई को ही वापस अपनी बिल्डिंग में लौट पाए.

जज ने सुनाया ये फैसला

एक जज ने पिछले महीने फैसला सुनाया कि DOGE को न तो USIP के मुख्यालय (जिसकी कीमत 500 मिलियन डॉलर है) पर कब्जा करने का अधिकार था और न ही वहां के कर्मचारियों को हटाने का. USIP की स्थापना 1984 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा की गई थी और यह संस्था विदेशों में हिंसक संघर्षों को रोकने, कम करने और सुलझाने के लिए काम करती है.

USIP के कार्यवाहक अध्यक्ष जॉर्ज मूस ने कही ये बात

संस्था के कार्यवाहक अध्यक्ष जॉर्ज मूस ने एक हलफनामे में कहा कि बिल्डिंग में लौटने के बाद उन्हें पानी की लीकेज, चूहों और कॉकरोच की मौजूदगी जैसे कई खामियां नजर आईं, जो पहले नहीं थी. इसी दौरान एलन मस्क पर ड्रग्स के सेवन के आरोप भी लगे हैं. New York Times की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि मस्क ने केटामीन नामक दवा का अत्यधिक सेवन किया, जिससे उन्हें पेशाब से जुड़ी समस्याएं होने लगीं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मस्क के पास एक पिल बॉक्स (दवा रखने का डिब्बा) था, जिसमें लगभग 20 गोलियां थीं, जिनमें कुछ पर Adderall (एक उत्तेजक दवा) के चिन्ह भी थे.

आरोपों को मस्क ने बताया ‘झूठा’

इन आरोपों पर मस्क ने पहले New York Times को झूठा करार दिया और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए. फिर उन्होंने स्पष्ट कहा, “मैं ड्रग्स नहीं ले रहा हूँ!” उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने कुछ साल पहले डॉक्टर की सलाह पर केटामीन का उपयोग किया था, और उस समय उन्होंने यह बात X (पहले ट्विटर) पर साझा भी की थी, लेकिन अब वह इसे नहीं ले रहे हैं.

NEET PG परीक्षा 15 जून को कराना संभव नहीं, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन ने अगस्त में आयोजन की नई तारीख मांगी है।

NEET PG Exam: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज ने कहा है कि नीट पीजी परीक्षा का आयोजन 15 जून को कर पाना संभव नहीं है. बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर मेडिकल के पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में दाखिले की यह परीक्षा 3 अगस्त को आयोजित करने की अनुमति मांगी है.

नीट पीजी परीक्षा पहले 15 जून को दो शिफ्ट में होनी थी, लेकिन 30 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि परीक्षा को एक ही शिफ्ट में आयोजित कराया जाए. कोर्ट ने यह आदेश उन याचिकाओं को सुनते हुए दिया जिनमें कहा गया था कि अलग-अलग पाली में होने वाली परीक्षा छात्रों को असमान स्थिति में डाल सकती है. इस तरह परीक्षा होने से यह आशंका बनी रहेगी कि एक पाली में छात्रों को आसान प्रश्न पत्र मिल जाए.

‘दो शिफ्ट में परीक्षा का आयोजन मनमाना कदम’
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को स्वीकार करते हुए दो शिफ्ट में परीक्षा के आयोजन को मनमाना कदम बताया था. कोर्ट ने यह भी कहा था कि एक शिफ्ट में परीक्षा के आयोजन के लिए केंद्रों की संख्या को बढ़ाया जाए. अगर ऐसा करने में कुछ समय लगता है तो नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इसके लिए आवेदन दाखिल कर सकता है.

अब बोर्ड ने आवेदन दाखिल कर बताया है कि कोर्ट का फैसला आते ही उसने परीक्षा में तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रही कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) से बातचीत की. TCS ने उसे बताया कि एक ही शिफ्ट पर परीक्षा के आयोजन के लिए जितने केंद्रों की जरूरत पड़ेगी, उन्हें इतनी जल्दी उपलब्ध करा पाना संभव नहीं है.

बोर्ड ने कहा है कि लगभग 2.5 लाख परीक्षार्थियों के लिए पहले 195 शहरों के 448 केंद्रों में परीक्षा आयोजित की जा रही थी. अब लगभग 1000 केंद्रों की जरूरत पड़ेगी. हर केंद्र को चुनने से पहले वहां उपलब्ध सुरक्षा, इंटरनेट सुविधा, पावर बैकअप जैसी कई बातों को परखना होगा. परीक्षा को सफलतापूर्वक करवाने के लिए लगभग 60 हज़ार लोगों की तैनाती भी करनी होगी.

साउथ कोरिया में बड़ा राजनीतिक बदलाव, जे-म्युंग ने चुनाव में जीत हासिल की, मजदूर से राष्ट्रपति बनने का सफर पूरा किया

South Korea Election: साउथ कोरिया में 3 जून 2025 को हुए विशेष राष्ट्रपति चुनाव में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार ली जे-म्युंग, ने कंज़र्वेटिव प्रत्याशी किम मून-सू को बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की. अब तक 85% से अधिक मतगणना पूरी हो चुकी है और किम मून-सू ने अपनी हार स्वीकार कर ली है. यह जीत सिर्फ एक राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुकी है.

साउथ कोरिया में विशेष चुनाव की जरूरत तब पड़ी जब पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल ने 3 दिसंबर 2024 को मार्शल लॉ लागू कर दिया था, जिसने पूरे देश में लोकतंत्र की नींव हिला दी. यह दक्षिण कोरिया में 1987 में लोकतंत्र की बहाली के बाद पहली बार था, जब किसी राष्ट्रपति ने सेना का सहारा लेकर शासन करने की कोशिश की.

चुनाव के पहले क्या-क्या हुआ?
साउथ कोरिया में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का नेतृत्व ली जे-म्युंग ने किया, जिन्होंने संसद में यून के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया था. अप्रैल 2025 में संवैधानिक न्यायालय ने यून को पद से हटा दिया. उनके खिलाफ देशद्रोह और सत्ता के दुरुपयोग के आपराधिक मुकदमे शुरू हुए. इस राजनीतिक भूचाल के चलते जून 2025 में विशेष चुनाव कराना अनिवार्य हो गया.

ली जे-म्युंग का चुनावी संदेश
ली जे-म्युंग ने अपने चुनाव प्रचार को “जनता का न्याय दिवस” कहा और यून की सरकार को अलोकतांत्रिक मानसिकता, न्यायिक संस्थाओं की अवहेलना और जनता के अधिकारों के दमन के रूप में पेश किया. उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि जनता के आत्मसम्मान की वापसी है.

लोकतंत्र के पक्ष में जनता का निर्णायक जनादेश
इस विशेष चुनाव में 80% से अधिक मतदान हुआ, जो 1997 के बाद सबसे अधिक है. यह दर्शाता है कि जनता राजनीतिक अस्थिरता से थक चुकी थी. लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान केंद्रों पर उतरी और ली जे-म्युंग को नया नेता चुनने के लिए एकजुट थी. यह केवल मतदान नहीं बल्कि एक सामूहिक विद्रोह और लोकतांत्रिक आंदोलन था.

साउथ कोरिया में ली जे-म्युंग की प्राथमिकताएं
साउथ कोरिया में चुनावी जीत से पहले ली जे-म्युंग ने कहा था कि वह देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण को समाप्त करना चाहते हैं. वह आर्थिक पुनरुद्धार पर खासा ध्यान देंगे. खासकर युवाओं और मध्यम वर्ग के लिए काम करना पहली प्राथमिकता होगी. नॉर्थ कोरिया के साथ शांति और सहयोग के रास्ते तलाशे जाएंगे. हालांकि, ये देखना दिलचस्प होगा कि उनकी नीतियां दक्षिण कोरिया को स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि की नई दिशा में ले जा सकती है या नहीं.

किम मून-सू ने दी बधाई, स्वीकार की हार
यून सुक योल के करीबी और पूर्व श्रम मंत्री किम मून-सू ने अपनी हार स्वीकार की और ली को जीत की बधाई दी. किम मून-सू कंज़र्वेटिव पीपल पावर पार्टी के उम्मीदवार थे.

दीवार फांदते हुए लोकतंत्र बचाने की कोशिश
दिसंबर 2024 के वक्त दक्षिण कोरिया में जब तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक योल ने देश में मार्शल लॉ लगाने की घोषणा की, उस वक्त विपक्षी नेता ली जे-म्युंग ने प्रतिरोध का साहसिक रास्ता चुना. नेशनल असेंबली में प्रवेश पर जब सेना ने रोक लगाई तब ली ने दीवार फांदकर संसद में प्रवेश की कोशिश की. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को यूट्यूब लाइव किया, जो कुछ ही घंटों में वायरल हो गया. उसी दिन संसद में मार्शल लॉ को रद्द करने के लिए वोटिंग हुई.

संघर्षों से बने नेता
61 वर्षीय ली जे-म्युंग का जीवन संघर्षों से शुरू हुआ और सिद्धांतों से आगे बढ़ा. गरीबी में बचपन, बाल मजदूर के रूप में काम किया. खुद पढ़ाई कर कानून में डिग्री हासिल की. मानवाधिकार वकील के रूप में शुरुआत की. इसके बाद सियोंगनाम के मेयर और फिर ग्योंगगी प्रांत के गवर्नर बने

2022 में मिली हार
2022 के राष्ट्रपति चुनाव में ली जे-म्युंग हार गए, लेकिन राजनीति से वापस नहीं हटे. उन्होंने विपक्ष का नेतृत्व करते हुए जनता के मुद्दों को संसद और सड़कों पर उठाना जारी रखा. इस बीच उनकी जनप्रियता विशेषकर युवाओं और निम्न-मध्यम वर्ग में लगातार बढ़ती गई.

जानलेवा हमला फिर भी डिगा नहीं हौसला
जनवरी 2024 में बुसान यात्रा के दौरान एक व्यक्ति ने ऑटोग्राफ के बहाने उनके गले पर 7 इंच लंबी चाकू से हमला किया. उन्हें एयरलिफ्ट कर सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया. उनके समर्थकों और आलोचकों दोनों ने हमले की निंदा की. यह हमला उन्हें डरा नहीं सका, बल्कि उनकी छवि को और मजबूत कर गया.