Home Blog Page 1278

जीपीएस आधारित टोल प्रणाली: भारत में टोल प्लाजा पर रुकने की समस्या खत्म, जानिए कैसे काम करेगी नई टोल व्यवस्था

नई दिल्ली: भारत सरकार ने टोल कलेक्शन को और अधिक सुगम और सुलभ बनाने के लिए जीपीएस आधारित टोल प्रणाली को मंजूरी दे दी है। इस नई तकनीक के लागू होने के बाद, नेशनल हाईवे पर यात्रा करने वाले यात्रियों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नेशनल हाईवे फीस (दरों का निर्धारण और संग्रह) नियम, 2008 को संशोधित करते हुए इस नई प्रणाली को शामिल किया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि जीपीएस आधारित टोल सिस्टम कैसे काम करेगा और इसके क्या लाभ होंगे।

क्या है जीपीएस आधारित टोल प्रणाली?

जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) आधारित टोल प्रणाली एक सैटेलाइट-आधारित तकनीक है जो टोल कलेक्शन के लिए वाहनों की रियल-टाइम लोकेशन का उपयोग करती है। इस प्रणाली के तहत, वाहन में लगा जीपीएस डिवाइस वाहन की लोकेशन और यात्रा की दूरी को ट्रैक करता है। वाहन के चलने की दूरी के अनुसार टोल की गणना की जाती है और सीधे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से टोल राशि का भुगतान होता है। यह प्रणाली फास्टैग की तरह ही होगी, लेकिन इसमें गाड़ी की वास्तविक यात्रा दूरी के हिसाब से टोल लगेगा।

जीपीएस आधारित टोल प्रणाली के लाभ

समय की बचत: जीपीएस आधारित टोल प्रणाली के आने से वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे समय की बचत होगी। यात्री बिना किसी रुकावट के अपनी यात्रा जारी रख सकेंगे।

ईंधन की बचत: टोल प्लाजा पर रुकने और चलने से ईंधन की खपत बढ़ जाती है। इस नई प्रणाली से ईंधन की बचत होगी, जिससे यात्रियों का खर्च कम होगा।

कम ट्रैफिक जाम: टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने से अक्सर ट्रैफिक जाम की समस्या होती है। जीपीएस आधारित टोल प्रणाली के लागू होने से ट्रैफिक जाम में कमी आएगी।

पारदर्शिता: इस प्रणाली के तहत टोल की गणना पूरी तरह से स्वचालित और पारदर्शी होगी। इससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम होगी।

कार्बन उत्सर्जन में कमी: टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने से उत्पन्न कार्बन उत्सर्जन को भी इस प्रणाली से कम किया जा सकेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिलेगा।

जीपीएस आधारित टोल प्रणाली कैसे काम करेगी?

जीपीएस आधारित टोल प्रणाली को लागू करने के लिए वाहनों में एक जीपीएस डिवाइस लगाया जाएगा। यह डिवाइस सैटेलाइट के माध्यम से वाहन की लोकेशन और यात्रा की दूरी को ट्रैक करेगा। वाहन के द्वारा तय की गई दूरी के अनुसार टोल की राशि की गणना की जाएगी और टोल की राशि ऑटोमैटिक तरीके से वाहन मालिक के लिंक्ड बैंक खाते या वॉलेट से काट ली जाएगी।

क्या है मौजूदा प्रणाली की खामियाँ?

मौजूदा फास्टैग प्रणाली भी इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसमें भी कुछ खामियाँ हैं:

टोल प्लाजा पर रुकावट: फास्टैग प्रणाली के बावजूद, वाहनों को टोल प्लाजा पर धीमा होना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन की बर्बादी होती है।

अधूरी कवरिंग: फास्टैग प्रणाली केवल टोल प्लाजा पर ही लागू होती है, जबकि जीपीएस आधारित प्रणाली पूरी यात्रा के दौरान दूरी के हिसाब से टोल लगाती है।

गड़बड़ी की संभावना: फास्टैग स्कैनर में खराबी या नेटवर्क समस्या के कारण टोल कलेक्शन में गड़बड़ी हो सकती है।

जीपीएस आधारित प्रणाली को लागू करने में चुनौतियाँ

प्रणाली की लागत: जीपीएस आधारित टोल प्रणाली को स्थापित करने में उच्च प्रारंभिक लागत लग सकती है, जिसमें जीपीएस डिवाइस की लागत और सैटेलाइट सर्विस चार्ज शामिल है।

तकनीकी चुनौतियाँ: सिस्टम की सटीकता और निर्बाध कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक की आवश्यकता होगी।

डेटा सुरक्षा: जीपीएस डिवाइस के माध्यम से ट्रैकिंग होने के कारण, डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी से संबंधित मुद्दे उत्पन्न हो सकते हैं।

बुनियादी ढांचे की आवश्यकता: इस नई प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए संपूर्ण बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी, जिसमें सैटेलाइट कनेक्टिविटी, सर्वर सेटअप आदि शामिल हैं।

सरकार की पहल और भविष्य की योजनाएं

केंद्र सरकार ने इस नई प्रणाली को लागू करने के लिए पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, यह प्रणाली चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ वर्षों में सभी नेशनल हाईवे पर यह नई प्रणाली पूरी तरह से लागू हो जाए। इसके साथ ही, राज्य हाईवे और अन्य प्रमुख सड़कों पर भी इसे लागू करने की योजना है।

कैसे करें जीपीएस आधारित टोल प्रणाली का उपयोग?

जीपीएस आधारित टोल प्रणाली का उपयोग करने के लिए वाहन मालिकों को अपने वाहनों में जीपीएस डिवाइस लगवाना होगा। इसके बाद, उन्हें अपनी बैंक डिटेल्स या वॉलेट को इस सिस्टम के साथ लिंक करना होगा ताकि टोल का भुगतान स्वचालित रूप से हो सके। इसके अलावा, वाहन मालिकों को मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी यात्रा का विवरण और टोल राशि की जानकारी प्राप्त हो सकेगी।

जीपीएस आधारित टोल प्रणाली भारत के टोल कलेक्शन सिस्टम में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी। इससे न केवल टोल प्लाजा पर रुकने की समस्या से निजात मिलेगी, बल्कि समय, ईंधन और पैसे की भी बचत होगी। सरकार की यह पहल ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को कम करने में भी सहायक होगी। हालांकि, इसे लागू करने में कुछ चुनौतियाँ भी हैं, लेकिन उचित योजना और कार्यान्वयन से इनका समाधान निकाला जा सकता है। अंततः, जीपीएस आधारित टोल प्रणाली न केवल यात्रियों के लिए बल्कि देश के आर्थिक और पर्यावरणीय हितों के लिए भी लाभकारी साबित होगी।

इस प्रकार, जीपीएस आधारित टोल प्रणाली एक स्मार्ट और कुशल परिवहन प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उम्मीद है कि यह नई तकनीक जल्द ही देशभर में लागू होगी और हमारे सफर को और भी सरल और सुगम बनाएगी।

सीएम योगी का इंडिया एक्सपो मार्ट का दौरा: सेमीकॉन इंडिया- 2024 की तैयारियों का लिया जायजा

ग्रेटर नोएडा/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार शाम इंडिया एक्सपो मार्ट का दौरा कर सेमीकॉन इंडिया 2024 की तैयारियों का जायजा लिया। यह आयोजन ग्रेटर नोएडा में बुधवार से शुरू होने जा रहा है और इसमें दुनिया भर के सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमी, बायर्स और विजिटर्स हिस्सा लेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी स्थल, विभिन्न स्टॉल और आगंतुकों के लिए की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि देशी-विदेशी आगंतुकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।

सेमीकॉन इंडिया 2024: उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ा अवसर

सेमीकॉन इंडिया 2024 एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी है, जो सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के विकास और विस्तार को केंद्रित करेगी। यह प्रदर्शनी ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित की जा रही है, जिसका उद्घाटन स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस आयोजन में दुनिया भर से सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के विशेषज्ञ, निवेशक और कंपनियां हिस्सा लेंगी, जो भारत को सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उत्तर प्रदेश में इस प्रदर्शनी का आयोजन राज्य की औद्योगिक क्षमता को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिहाज से बेहद अहम है।

सीएम योगी ने दिया सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम का निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए और सभी आगंतुकों को सुरक्षित और सुखद अनुभव मिलना चाहिए। सुरक्षा के मद्देनजर, पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह और उनके दल ने सुरक्षा की विस्तृत योजना तैयार की है, जिसमें सुरक्षा उपकरणों की स्थापना, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और विभिन्न सुरक्षा लेयर्स को शामिल किया गया है।

व्यवस्थाओं का निरीक्षण और दिशा-निर्देश

सीएम योगी ने इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित विभिन्न सत्रों और स्टॉल्स का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को आयोजन स्थल का नक्शा दिखाते हुए विभिन्न व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए सुनिश्चित किया कि सभी सुविधाएं आगंतुकों के लिए आसानी से उपलब्ध हों और किसी भी प्रकार की असुविधा ना हो। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की छवि को दुनिया के सामने बेहतर तरीके से प्रस्तुत करना इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन राज्य के विकास और औद्योगिक उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।

समीक्षा बैठक और महत्वपूर्ण निर्देश

इंडिया एक्सपो मार्ट के निरीक्षण के बाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गौतम विश्वविद्यालय में जनप्रतिनिधियों, प्राधिकरणों, पुलिस एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक भी की। इस बैठक में जनपद के प्रभारी मंत्री बृजेश सिंह, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास अनिल सागर, पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह, जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा समेत कई अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी विभागों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी स्तर पर कोई कमी नहीं होनी चाहिए और सभी व्यवस्थाएं समय से पहले पूरी होनी चाहिए। उन्होंने आगंतुकों के लिए सुविधाजनक परिवहन, सुरक्षा, सूचना प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था को सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।

उत्तर प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास

सेमीकॉन इंडिया 2024 के आयोजन से उत्तर प्रदेश सरकार का उद्देश्य राज्य में निवेश को बढ़ावा देना और औद्योगिक विकास को गति देना है। यह आयोजन राज्य की औद्योगिक संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा और दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में निवेश और उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, और उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इंटरनेशनल ट्रेड शो का दूसरा संस्करण भी आयोजित होगा

इसी वेन्यू पर उत्तर प्रदेश 25 से 29 सितंबर के बीच इंटरनेशनल ट्रेड शो के दूसरे संस्करण का भी आयोजन करने जा रहा है। यह ट्रेड शो राज्य के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश की पहचान को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इंटरनेशनल ट्रेड शो में विभिन्न सेक्टर्स की कंपनियां और उद्यमी अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन करेंगे, जिससे राज्य में व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आयोजन के दौरान आगंतुकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेमीकॉन इंडिया 2024 प्रदेश के लिए एक गौरवमयी अवसर है, और इसे सफल बनाने के लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह आयोजन उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा और इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

स्थानीय पुलिस-प्रशासन की तैयारी

जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने आयोजन की तैयारियों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सभी व्यवस्थाएं समय से पहले पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि सभी आगंतुकों को एक सुरक्षित और आरामदायक अनुभव मिल सके। जिला प्रशासन ने आयोजन स्थल के आसपास यातायात व्यवस्था को भी सुचारू रखने के लिए विशेष प्लान तैयार किया है। सेमीकॉन इंडिया 2024 का आयोजन उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास और राज्य की वैश्विक पहचान को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्थलीय निरीक्षण और अधिकारियों को दिए गए निर्देश इस बात की पुष्टि करते हैं कि राज्य सरकार इस आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इस प्रकार के आयोजन से न केवल उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमताएं उभरकर सामने आएंगी, बल्कि राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सेमीकॉन इंडिया 2024 उत्तर प्रदेश के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करता है, जहां राज्य की क्षमताओं और संभावनाओं को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा। इससे राज्य की औद्योगिक क्षेत्र में उन्नति होगी और उत्तर प्रदेश एक महत्वपूर्ण औद्योगिक हब के रूप में स्थापित हो सकेगा।

आरओ/एआरओ परीक्षा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पेपर लीक के आरोपी को जमानत दी

प्रयागराज: प्रदेश में समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी भर्ती परीक्षा के पेपर लीक कांड के आरोपी सुनील रघुवंशी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी। सुनील रघुवंशी की जमानत पर बहस करने वाले अधिवक्ता अक्षय रघुवंशी ने बताया कि सुनील के ऊपर आरोप था कि वह पेपर लीक कांड में शामिल था।

एडवोकेट अक्षय रघुवंशी

यूपीएसटीएफ ने अपने आरोप में कहा था कि उसने प्रारंभिक जांच में पाया कि सुनील रघुवंशी ने परीक्षा से एक सप्ताह पूर्व प्रिंटिंग प्रेस में मोटर पार्ट के रिपेयर के बहाने एक पार्ट बॉक्स में रखकर साथ ही उसमें पेपर भी रखा और समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी के पेपर को लेकर बाहर आ गया और पेपर को लीक किया इसके बदले उसे भारी रकम मिली । इसी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश संजय पचौरी की अदालत ने सुनील रघुवंशी को जमानत दे दी। सुनील रघुवंशी की ओर से अधिवक्ता अक्षय रघुवंशी ने बहस की।

सरोजनीनगर में स्थापित कराए जाएंगे 100 रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केंद्र- डॉ.राजेश्वर सिंह

  • रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केंद्र बन रहे डिजिटल लिट्रेसी, डिजिटल लाइब्रेरी और डिजिटल नौकरियों का उन्नत आधार
  • सरोजनीनगर विधायक डॉ०राजेश्वर सिंह ने कहा 50 हजार युवाओं के बायोडाटा में प्रोफेशनल स्किल्स को जोड़ना मेरा लक्ष्य
  • 7 रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केंद्र स्थापित कर 500 बच्चों को डिजिटल कोर्सेज की ट्रेनिंग दिला रहे डॉ. राजेश्वर सिंह, 100 केंद्र स्थापित कर 50,000 युवाओं को प्रशिक्षण दिलाना लक्ष्य
  • युवाओं का डिजिटल कौशल विकास कर रहे डॉ. राजेश्वर सिंह, 100 युवा सशक्तिकरण केंद्र की स्थापना का लक्ष्य, 7वे केंद्र का किया लोकार्पण

लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा अपने पिता रण बहादुर सिंह की स्मृति में शुरू की गयी डिजिटल सशक्तिकरण केन्द्रों की स्थापना की अभिननव पहल युवाओं को महत्वपूर्ण डिजिटल कोर्सेज की फ्री ट्रेनिंग प्रदान करने के साथ क्षेत्रवासियों को ई – गवर्नेंस सुविधा का सहज लाभ भी उपलब्ध करवा रही है। सरोजनीनगर में विधायक द्वारा 100 रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केंद्रों की स्थापना के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए सीएसआर फण्ड के माध्यम से सभी केन्द्रों को 5 -5 कंप्यूटर, इन्टरनेट, फर्नीचर व अन्य आवश्यक संसाधन प्रदान कर 6 केंद्रों की स्थापना कराई गयी जिनका सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है।

मंगलवार को विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कल्ली पश्चिम में सातवें रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केंद्र का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं, जब भारत को आज़ादी दिलानी थी, तो चंद्रशेखर आज़ाद, मंगल पाण्डेय जैसे महान युवाओं ने देश के लिए बलिदान दिया। जब आज़ाद भारत को नव निर्माण की आवश्यकता थी, तो डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, डॉ. विक्रम साराभाई जैसे युवकों ने देश की नींव मजबूत की। जब उभरते भारत को विश्व की ताक़त बनाना था तो सुंदर पिचाई (गूगल के सीईओ), नीरज चोपड़ा (भाला फेंक, ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता) जैसे युवाओं ने देश की कमान संभाली। अब भारत को वैश्विक शक्ति बनाना है, तो यह दायित्व आज के युवाओं का है। इसलिए, सरोजनीनगर के हर युवा को वह प्लेटफार्म, संसाधन, सहयोग, समर्थन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे राष्ट्र निर्माण में आप अपना योगदान दे सकें।

सरोजनीनगर विधायक ने आगे जोड़ा कि आने वाला युग डिजिटल पॉवर का है, हम फैक्स मशीन से ईमेल पर आये, मोबाइल फोन से स्मार्टफ़ोन पर आये, कंप्यूटर से लैपटॉप और आईपेड पर आये, आने वाले समय में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बदलाव के वाहक है। इस लिए डिजिटल शिक्षा की दिशा में युवाओं को तैयार करना हमारा प्रमुख उत्तरदायित्व है और रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण इस दिशा में बढ़ता मजबूत कदम है, इनकेंद्रों के माध्यम से 50 हजार बच्चों को डिजिटल शिक्षा का लाभ दिलाना है, उनके बायोडाटा में प्रोफेशनल स्किल्स को जोड़ना है, ताकि उन्हें रोजगार के अधिक से अधिक अवसर मिल सकें।

विधायक डॉ.सिंह ने आगे बताया कि अब इन केन्द्रों पर डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा का प्रसार भी किया जाएगा, इनमें एनसीईआरटी की किताबें, प्रतियोगी परीक्षाओं का स्टडी मटेरियल उपलब्ध होगा ताकि युवाओं को अपने सपनें पूरा करने में भी सहायता मिल सके। उन्होंने बताया अब तक 1500 से अधिक सिलाई, कढ़ाई मशीनें प्रदान कर सरोजनीनगर में 130 तारा शक्ति केन्द्रों की स्थापना की जा चुकी है और 60 केन्द्रों की स्थापना प्रक्रियाधीन है। ताराशक्ति केन्द्रों से जुडी सरोजनीनगर परिवार की महिलाओं को आगामी प्रयागराज महाकुम्भ में 1 लाख इको फ्रेंडली बैग्स पहुंचा कर पर्यावरण संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाना चाहिए, इसके लिए उन्हें हर संभव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा।

बता दें कि डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा स्थापित इन केन्द्रों पर युवाओं को डिजिटल टूल (एमएस वर्ड, एमएस एक्सेल, ओएस, टैली आदि) का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता हैं। साथ ही इन केन्द्रों के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकारों की जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे पेंशन, सम्मान निधि, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, पीएम सूर्यघर फ्री बिजली योजना व आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र आदि का आवेदन की सुविधा भी मिलती है।इस दौरान पूर्व विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह, सेंटर इंचार्ज रंजना सिंह, पार्षद द्रौपदी रावत, मनोज रावत, हिमांशु अम्बेडकर, डॉ. रीना उपाध्याय, ललित रावत, गुड्डू तिवारी, राम खेलावन, तेज नारायण सिंह, शेर अली खान, शिव कुमार सिंह ‘चच्चू’ एवं अन्य भाजपा नेता मौजूद रहे।

आगरा: दो दिवसीय चिंतन शिविर में ओबीसी और दिव्यांगजनों के लिए रणनीतियों पर हुई चर्चा

आगरा/लखनऊ: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, भारत सरकार द्वारा आगरा के होटल जेपी पैलेस में आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर का दूसरा दिन मंगलवार को संपन्न हुआ। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप भी उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने बताया कि शिविर के दौरान उन्होंने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा से मुलाकात की। इस बैठक में दिव्यांगजनों और ओबीसी समाज के विद्यार्थियों के अधिकारों पर चर्चा की गई और उनकी समस्याओं को प्रमुख मंच पर उठाया गया। इस शिविर में विभिन्न प्रदेशों ने अपनी कार्य योजनाओं को प्रस्तुत किया।

नरेंद्र कश्यप ने बताया कि इस चिंतन शिविर का मुख्य उद्देश्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में सामाजिक न्याय संबंधी योजनाओं की प्रगति और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा करना था। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना और सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान पर चर्चा करना था। कार्यक्रम में ओबीसी समाज और दिव्यांग जनों के सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाओं की राज्यवार समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय नशा मुक्त भारत अभियान का एक्शन प्लान भी तैयार किया गया।