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जलवायु परिवर्तन: भारत पर गहराते संकट के बादल, जलवायु परिवर्तन का वैश्विक संदर्भ

लखनऊ/नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन आज दुनिया भर में सबसे बड़े संकटों में से एक है। वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में मानव गतिविधियों के कारण धरती का तापमान तेजी से बढ़ा है। जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि हुई है, जैसे कि बाढ़, सूखा, ग्लेशियरों का पिघलना और समुद्र स्तर में वृद्धि। इन घटनाओं का गहरा असर भारत जैसे विकासशील देशों पर पड़ रहा है, जहां कृषि, उद्योग और जनसंख्या का बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर जलवायु के साथ जुड़ा हुआ है।

जलवायु परिवर्तन का भारत पर प्रभाव

भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है और एक तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। इसके बावजूद, भारत जलवायु परिवर्तन के सबसे बड़े शिकारों में से एक है। यहां की आबादी का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है, जो सीधे तौर पर जलवायु के अनुकूल है। हाल के वर्षों में बाढ़, सूखा, और अत्यधिक तापमान जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है।

जलवायु परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव

भारत की कुल आबादी का लगभग 60% हिस्सा कृषि पर निर्भर है, जो जलवायु परिवर्तन के चलते सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, भारत के कई हिस्सों में सूखा पड़ने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे फसल उत्पादन में कमी आई है। इसके विपरीत, मानसून के बदलते पैटर्न के कारण कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश हो रही है, जिससे बाढ़ और मिट्टी कटाव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

जलवायु परिवर्तन का जल संसाधनों पर प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के जल संसाधन भी गंभीर संकट में हैं। देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर तेजी से घट रहा है। इसके अलावा, हिमालयी ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदियों के जल प्रवाह में अनिश्चितता आ रही है। इससे भारत के कई राज्यों में जल संकट की स्थिति बन गई है।

विशेष रूप से महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक जैसे राज्य अक्सर जल संकट का सामना करते हैं, जहां सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इससे न केवल कृषि प्रभावित होती है, बल्कि पेयजल की कमी भी लोगों के जीवन को मुश्किल बना रही है।

जलवायु परिवर्तन का स्वास्थ्य पर प्रभाव

जलवायु परिवर्तन का सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर भी हो रहा है। अत्यधिक तापमान के कारण हिट स्ट्रोक, श्वसन संबंधी समस्याएं और जलजनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। बाढ़ और सूखे की घटनाओं के बाद मच्छर जनित बीमारियों जैसे डेंगू और मलेरिया में वृद्धि देखी गई है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के चलते फसल उत्पादन में कमी के कारण कुपोषण की समस्या भी बढ़ रही है।

समुद्र के स्तर में वृद्धि और तटीय क्षेत्रों पर प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र स्तर में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर भारत के तटीय क्षेत्रों पर पड़ रहा है। भारत की लंबी तटरेखा और बड़े तटीय शहर जैसे मुंबई, चेन्नई, कोलकाता आदि समुद्र स्तर में वृद्धि से प्रभावित हो रहे हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर जलवायु परिवर्तन की गति इसी तरह बनी रही, तो आने वाले दशकों में कई तटीय क्षेत्रों के जलमग्न होने का खतरा है।

1. तटीय शहरों पर खतरा

मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे वहां के लोगों को बाढ़ और तटीय क्षरण का सामना करना पड़ रहा है। इससे न केवल लोगों के घरों को खतरा है, बल्कि वहां के बुनियादी ढांचे को भी गंभीर क्षति हो रही है।

2. तटीय क्षेत्रों में आजीविका पर असर

भारत के कई तटीय क्षेत्रों में मछली पालन और कृषि प्रमुख आजीविका स्रोत हैं। समुद्र स्तर में वृद्धि के कारण ये उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। मछलियों की प्रजातियों में कमी और खारे पानी का भूमि पर फैलाव कृषि को प्रभावित कर रहा है।

सरकार और नीतिगत प्रतिक्रियाएं

1. भारत सरकार की नीतियां

जलवायु परिवर्तन के खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं। भारत ने पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर कर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में शामिल होने का संकल्प लिया है। इसके तहत भारत ने 2030 तक अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 33% तक की कमी करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही, सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं।

2. नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान

भारत में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन” (International Solar Alliance) की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से निपटना है। इसके अलावा, भारत के कई राज्यों में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरणीय संरक्षण के लिए नीतिगत सुधार किए जा रहे हैं।

समाज की भूमिका और जागरूकता

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत में जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए कई गैर-सरकारी संगठन और पर्यावरणविद सक्रिय हैं।

1. व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास

लोगों को अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करने की आवश्यकता है, जैसे कि प्लास्टिक का कम उपयोग, ऊर्जा की बचत, और जल संरक्षण। इसके अलावा, हरित ऊर्जा स्रोतों का उपयोग और वृक्षारोपण जैसे उपाय भी जलवायु परिवर्तन से निपटने में मददगार हो सकते हैं।

2. शैक्षणिक संस्थानों और युवाओं की भूमिका

युवाओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में जलवायु शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है। इससे अगली पीढ़ी जलवायु संकट को बेहतर तरीके से समझ सकेगी और इसके समाधान के लिए तैयार हो सकेगी।

भारत का भविष्य और जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन से लड़ना न केवल सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि समाज और व्यक्तिगत स्तर पर भी प्रयासों की आवश्यकता है। यदि हम अभी ठोस कदम नहीं उठाते हैं, तो भारत जैसे देश को आने वाले दशकों में गंभीर पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ेगा। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए हमें तत्काल ठोस नीतिगत सुधारों, तकनीकी विकास, और सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता है।

पंचायतीराज विभाग: मंत्री ओ.पी.राजभर की अध्यक्षता में क्षेत्र पंचायत प्रमुखों की एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

  • कार्यशाला में क्षेत्र पंचायत प्रमुखों ने रखी 09 सूत्रीय मांग
  • पीएम मोदी के स्वप्न ‘स्वच्छता ही सेवा पखावाड़ा’ को सफल बनाने में क्षेत्र पंचायत प्रमुख दें अपना योगदान
  • क्षेत्र पंचायत प्रमुख शासन द्वारा निर्धारित विभिन्न कार्ययोजनाओं को धरातल पर उतारने में करें सहयोग
  • वित्तीय कार्य स्वीकृति की सीमा 10 लाख रु0 से बढ़ाकर 15 लाख रु0 स्वीकृत
  • तकनीकी सहायता के लिए ब्लॉक स्तर पर नियुक्त होंगे ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पंचायतीराज, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज मंत्री ओम प्रकाश राजभर की अध्यक्षता में आज लखनऊ के इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर हॉल में क्षेत्र पंचायत प्रमुखों की एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी मेहनत पूर्वक कार्य कर रहे हैं। विभाग की तरफ से भी पूरा सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के संबंध में जो निर्देश प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी द्वारा मिला है उसको धरातल पर उतारने में हम सभी को मिलकर सहयोग करना होगा। ‘स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा’ को सफल बनाने के लिए उन्होंने सभी क्षेत्र प्रमुखों को अपना अमूल्य सहयोग देने का आह्वान किया।

पंचायतीराज मंत्री ने कहा कि पंचायतीराज विभाग द्वारा ओडीएफ प्लस योजना पर कार्य किया जा रहा है। गांवों में कूड़े के प्रबंधन के दृष्टिगत सॉलिड एवं लिक्विड मैनेजमेंट की दिशा में पंचायतीराज विभाग काम कर रहा है। कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था गांवों में ही की जा रही है। कूड़े के प्रबंधन से ग्राम पंचायत की स्वयं की आर्थिक स्रोत बन रहे है। इसके अलावा पंचायतीराज संस्थाओं की कार्य प्रणाली में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। आज प्रदेश की समस्त पंचायतें अपना कार्य ऑनलाइन कर रही हैं।

इस अवसर पर क्षेत्र पंचायत प्रमुखों की तरफ से 09 सूत्रीय मांग पत्र पंचायती राज मंत्री जी को दिया गया। जिस पर मंत्री ने गम्भीरतापूर्वक विचार कर निस्तारण करने का आश्वासन दिया। प्रमुख मांगों में से वित्तीय कार्ययोजना को कराने के लिए स्वीकृत 10 लाख रुपये की राशि को बढ़ाकर 15 लाख रुपये तक करने की घोषण की। उन्होंने कहा कि वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति को प्रत्येक वर्ष 10 प्रतिशत तक बढ़ाने पर भी विचार किया जायेगा। जिससे कि क्षेत्र पंचायत की कार्यों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराया जा सके। आकस्मिक व्यय नियमावली के तहत धनराशि की व्यवस्था की स्थिति अन्य प्रदेशों में क्या है का अध्ययन करने के पश्चात जल्द ही उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू किया जायेगा, जिससे कि आपदा के समय में पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद की जा सके।

पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने ब्लॉक प्रमुखों की समस्याओं को गम्भीरतापूर्वक सुना उन्होंने कहा कि आपकी समस्याओं के निराकरण के लिए एवं तकनीकी सहायता के लिए ब्लॉक स्तर पर प्रत्येक ब्लॉक में ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर की नियुक्ति किया जायेगा। ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर की नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजा जा चुका है। ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर क्षेत्र स्तर पर योजनाओं एवं उसमें आ रही समस्याओं से शासन को अवगत करायेंगे। जिसका निराकरण शासन स्तर से कराया जा सकेगा।

इसके अलावा लखनऊ में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत का राज्य स्तरीय कार्यालय खोले जाने पर भी विभाग द्वारा जल्द ही निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम के दौरान अपर मुख्य सचिव नरेन्द्र भूषण, निदेशक पंचायतीराज अटल कुमार राय, अध्यक्ष क्षेत्र पंचायत प्रमुख धीरेन्द्र प्रताप सिंह सेनानी, उपाध्यक्ष यशकान्त सिंह, महामंत्री परेश एवं संरक्षक जगमोहन यादव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

सहकार भारती: रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी बने प्रदेश सह प्रमुख विधि प्रकोष्ठ, सहकारिता में पारदर्शिता और युवाओं को स्वरोजगार की ओर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

लखनऊ: रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी, जो प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, उन्हें सहकार भारती द्वारा प्रदेश सह प्रमुख विधि प्रकोष्ठ नियुक्त किया गया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रशिक्षित कार्यकर्ता और कुशल विधिवेत्ता के रूप में पहचान बनाने वाले रवितेश प्रताप सिंह ने अपने कार्यक्षेत्र और समाज के प्रति योगदान के कारण व्यापक सराहना अर्जित की है। इस नई नियुक्ति के साथ, उनका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र को प्रगति की नई ऊंचाइयों तक ले जाना है, जिससे राज्य आर्थिक रूप से और भी अधिक समृद्ध हो सके।

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी का परिचय

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी प्रतापगढ़ के मूल निवासी हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक प्रशिक्षित कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने समाज सेवा की दिशा में अपने कदम बढ़ाए हैं। वह एक कुशल अधिवक्ता होने के साथ-साथ राज्य विधि अधिकारी के रूप में लखनऊ उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विधि और समाजशास्त्र में परास्नातक (LLM और MA) की शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव का इस्तेमाल समाज के विभिन्न वर्गों को न्याय दिलाने और सहकारिता के क्षेत्र में सुधार लाने में किया है।

सहकार भारती द्वारा प्रदेश सह प्रमुख विधि प्रकोष्ठ के रूप में नियुक्ति

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी को सहकार भारती द्वारा प्रदेश सह प्रमुख विधि प्रकोष्ठ नियुक्त किया गया है। सहकार भारती, सहकारिता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली एक प्रमुख संस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य सहकारिता को सशक्त बनाना और इसे समाज में एक मजबूत आर्थिक ढांचे के रूप में स्थापित करना है। रवितेश की इस नियुक्ति का उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र में विधिक विशेषज्ञता को और अधिक सशक्त बनाना है, जिससे सहकारी संस्थाएं कानूनी दृष्टिकोण से अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बन सकें।

सहकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता और सुचित्रा के लिए लड़ाई

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी का मुख्य उद्देश्य सहकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता और सुचित्रा (नैतिकता) को बढ़ावा देना है। उन्होंने सहकारिता के कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई प्रयास किए हैं। उनकी यह लड़ाई केवल कानूनी मसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने युवाओं को सहकारिता के क्षेत्र में जोड़कर उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

युवाओं को सहकारिता में जोड़कर स्वरोजगार की ओर ले जाना

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी का मानना है कि सहकारिता के क्षेत्र में युवाओं को जोड़ना समय की आवश्यकता है। उनका मानना है कि सहकारिता केवल एक आर्थिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सहयोग और विश्वास को मजबूत करने का एक माध्यम है। उन्होंने युवाओं को सहकारिता के माध्यम से स्वरोजगार की ओर ले जाने की दिशा में कई पहल की हैं। उनके अनुसार, यदि युवा सहकारिता के क्षेत्र में सक्रिय होते हैं, तो यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य और देश की अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करेगा।

उत्तर प्रदेश को सहकारी उद्यमशील राज्य बनाने का उद्देश्य

रवितेश का एक प्रमुख उद्देश्य उत्तर प्रदेश को एक सहकारी उद्यमशील राज्य बनाना है। उनका मानना है कि सहकारिता के माध्यम से राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने के अनेक अवसर हैं। यदि सहकारी संस्थाएं पारदर्शी और नैतिक रूप से कार्य करें, तो वे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और विकास के अवसर पैदा कर सकती हैं। इसके साथ ही, सहकारिता के माध्यम से राज्य के संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है, जिससे आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में प्रयास

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी का एक और बड़ा लक्ष्य उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से भारत के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है। उनका मानना है कि यदि सहकारी संस्थाएं मजबूत हों और राज्य की आर्थिक नीतियां सही दिशा में हों, तो उत्तर प्रदेश न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मजबूत आर्थिक शक्ति बन सकता है। उनका यह उद्देश्य भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में सहायक होगा।

गरीबों के लिए निशुल्क विधि परामर्श

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी की विधि सेवा केवल अदालत तक सीमित नहीं है। वह समाज के गरीब और वंचित वर्गों के लिए निशुल्क विधि परामर्श भी प्रदान करते हैं। उनके अनुसार, न्याय केवल उन लोगों के लिए नहीं होना चाहिए जो इसे खरीद सकते हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को न्याय पाने का अधिकार है। उनके इस कदम से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों को विधिक सहायता मिलती है, जिससे उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने का अवसर मिलता है।

राज्य विधि अधिकारी रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी की उपलब्धियां

रवितेश प्रताप सिंह ने अपनी विधि और सहकारिता सेवाओं के माध्यम से कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उच्च न्यायालय में राज्य विधि अधिकारी के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में सरकार और समाज के हित में फैसले दिलाने में मदद की है। इसके अलावा, उन्होंने सहकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं, जिससे सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली में सुधार हुआ है। उनके प्रयासों से सहकारिता के माध्यम से स्वरोजगार के कई अवसर उत्पन्न हुए हैं, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को आर्थिक सहायता मिली है।

रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी की सहकारिता और विधिक क्षेत्र में की गई सेवाएं और उनकी समाज सेवा की प्रतिबद्धता उन्हें एक प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित करती है। सहकार भारती द्वारा प्रदेश सह प्रमुख विधि प्रकोष्ठ के रूप में उनकी नियुक्ति उनके नेतृत्व और अनुभव का प्रमाण है। उनके द्वारा सहकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता लाने, युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करने और उत्तर प्रदेश को एक सहकारी उद्यमशील राज्य बनाने के प्रयास निश्चित रूप से राज्य और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।

लखनऊ: योगी सरकार की कार्यशैली में सवाल उठाता भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव और उसके गुर्गे “श्री हनुमान टेकरी धाम” मंदिर पर अनाधिकृत कब्जे के लिए पुनः हुए सक्रिय, गुण्डा एक्ट की कार्रवाई अब भी लंबित

लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। इन धार्मिक स्थलों में से एक है श्री हनुमान टेकरी धाम, जो पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के उत्तरी ज़ोन के सैरपुर थाना क्षेत्र के फ़रूख़ाबाद ग्राम पंचायत के सैदापुर गाँव में स्थित है। हाल ही में इस प्राचीन मंदिर को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव और उसके गुर्गों ने मंदिर की भूमि पर अनाधिकृत कब्जे की मंशा से गतिविधियों को फिर से तेज कर दिया है। यह मामला वर्षों से विवादित है और अब भी इसमें कई कानूनी प्रक्रिया लंबित हैं।

भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव: लगातार विवादों में

अमरेन्द्र यादव, जो सैरपुर थाना क्षेत्र के उम्मरभारी गाँव का निवासी है, पहले भी श्री हनुमान टेकरी मंदिर की भूमि पर कब्जे के कई प्रयास कर चुका है। वर्ष 2023 में भी, इसने मंदिर में आयोजित भंडारे में अनधिकृत रूप से अपने बैनर-पोस्टर लगाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई थी। यादव ने मंदिर की भूमि पर कब्जा करने के लिए अपने पियक्कड़ साथियों के साथ भंडारा आयोजित करने की योजना बनाई थी। हालांकि, स्थानीय प्रशासन की तत्परता के कारण इस घटना को समय पर रोक दिया गया था। तब यादव और उसके गुर्गों ने लगभग 10 दिनों तक मंदिर परिसर में डेरा डाले रखा था।

श्री हनुमान टेकरी धाम मंदिर: ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

श्री हनुमान टेकरी धाम न केवल एक प्राचीन मंदिर है, बल्कि यह स्थानीय जनता की आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है। मंदिर की भूमि, जो सरकारी स्वामित्व में है, सदियों से धार्मिक गतिविधियों और जनकल्याण के लिए उपयोग होती आई है। इस स्थान पर नियमित रूप से धार्मिक आयोजन होते हैं और यहां बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।

हालांकि, मंदिर की भूमि को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। इनमें से सबसे प्रमुख मामला भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव का है, जिसने इस भूमि पर कब्जा करने के लिए कई बार अवैध प्रयास किए हैं और लगातार प्रयासरत भी है।

मंदिर के महंत रामेश्वर दास जी की अपील

मंदिर के महंत, श्री रामेश्वर दास जी महाराज, ने भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव और उसके गुर्गों से मंदिर परिसर के साथ-साथ स्वयं को भी बचाने के लिए शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है। महंत जी का कहना है कि भूमाफ़िया और उसके सहयोगी बार-बार मंदिर की भूमि पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं, जिससे मंदिर की सुरक्षा और धार्मिक आस्थाएं खतरे में पड़ गई हैं। उनका यह भी आरोप है कि अमरेन्द्र यादव के इरादे केवल भूमि हथियाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह मंदिर की धार्मिक पहचान को भी धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव के कब्जे की कोशिशें

ये तस्वीर बीते साल मंदिर परिसर में हुए भंडारे की है, जहां पर अमरेन्द्र यादव के पियक्कड़ गुर्गों द्वारा भंडारे के समय मंदिर परिसर में शराब पीकर विवाद किया, जिसके बाद शिकायत पर पहुँची सैरपुर थाने की पुलिस ने समझाने की कोशिश की तो उनसे भी उलझने की कोशिस लेता हुआ अमरेन्द्र यादव का गुर्गा यह अमित यादव है। आपको बता दें कि बीते पाँच-सात वर्षों में, भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव ने कई बार मंदिर की जमीन पर कब्जा करने के प्रयास किए हैं। इनमें से एक सबसे विवादित घटना तब हुई जब बीकेटी तहसील की जमीन को सदर एसडीएम ने एक मुस्लिम परिवार के नाम कर दिया था। यह कदम बिना किसी उचित प्रक्रिया के कूटनीतिक दस्तावेजों के माध्यम से उठाया गया था, जिसे बाद में उत्तर प्रदेश सरकार के हस्तक्षेप से निरस्त कर दिया गया।

मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान लेने के बाद तत्कालीन ज़िलाधिकारी लखनऊ अभिषेक प्रकाश ने इस आदेश को रद्द कर दिया और जमीन को ग्राम सभा के स्वामित्व में वापस सौंपा। इस मामले के बाद स्थानीय लेखपाल, बीकेटी एसडीएम और सदर एसडीएम को हटा दिया गया था और विभागीय जांच शुरू हुई थी। हालांकि, आज तक यह जांच रिपोर्ट सबमिट नहीं हो पाई है, जिसके कारण मामला अब भी लंबित है।

गुण्डा एक्ट के तहत कार्रवाई और जेसीपी कार्यालय में लंबित मामला

जब मंदिर में कब्जे के प्रयास बढ़ने लगे, तो स्थानीय पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की। सैरपुर थाने की पुलिस ने भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव और उसके गुर्गों को मंदिर परिसर से बाहर का रास्ता दिखाया और उनके खिलाफ गुण्डा एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। हालांकि, यह मामला अभी तक जेसीपी (जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस) कार्यालय में लंबित है, जिसके कारण अमरेन्द्र यादव और उसके सहयोगी अब भी सक्रिय हैं। ग़ौरतलब है भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव ने बीकेटी तहसील के मुबारकपुर, पल्हरी व अपने गाँव उम्मरभारी के आसपास कई सरकारी ज़मीनें भी बेंच डाली हैं।

शासन-प्रशासन की ढिलाई या प्रभाव?

मंदिर की भूमि को लेकर भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव के प्रयास और प्रशासनिक ढिलाई के चलते यह मामला वर्षों से विवादों में बना हुआ है। उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद भी, आज तक जांच रिपोर्ट सबमिट नहीं हो पाई है, जिससे यह साफ होता है कि मामले में कुछ बड़े लोगों का प्रभाव है। विभागीय जांच की धीमी गति और सरकारी कार्रवाई की कमी के कारण भूमाफ़िया और उसके गुर्गों की मंशा आज भी मंदिर की जमीन हड़पने की बनी हुई है। इससे साफ होता है कि प्रशासनिक तंत्र में कहीं न कहीं खामी है, जिसके कारण इस विवाद का निपटारा नहीं हो पा रहा है।

स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया

मंदिर की भूमि को लेकर हो रही इस तरह की गतिविधियों से स्थानीय जनता भी परेशान है। क्षेत्र के लोग मानते हैं कि यह मंदिर उनकी धार्मिक आस्था का केंद्र है और भूमाफ़िया द्वारा किए जा रहे प्रयास उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं।

लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन समय पर कठोर कदम उठाए, तो इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकती हैं। वे यह भी उम्मीद करते हैं कि सरकार इस मामले में सख्त कदम उठाएगी और मंदिर की भूमि को सुरक्षित रखने के लिए उचित कार्रवाई करेगी।

उत्तर प्रदेश सरकार का रुख

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भूमाफ़ियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का दावा किया गया है, लेकिन इस मामले में प्रशासन की ओर से अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने भूमाफ़िया मुक्त उत्तर प्रदेश का नारा दिया था, लेकिन श्री हनुमान टेकरी धाम के मामले में यह दावा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।

यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका है और जनता को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस पर कोई ठोस कदम उठाएगी। यदि सरकार समय रहते कार्रवाई नहीं करती, तो यह मामला और भी गंभीर हो सकता है।

मंदिर की सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी

श्री हनुमान टेकरी धाम, लखनऊ का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जिसकी भूमि को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव और उसके गुर्गों के अनाधिकृत कब्जे की कोशिशें और प्रशासनिक कार्रवाई की कमी ने इस मामले को और जटिल बना दिया है। मंदिर की भूमि की सुरक्षा और धार्मिक आस्था की रक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है। जनता को उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन इस मामले में जल्द ही उचित कदम उठाएंगे, जिससे मंदिर की भूमि सुरक्षित रहे और धार्मिक आस्था को कोई ठेस न पहुंचे। आशा है कि प्रशासनिक तंत्र और सरकार इस मामले को गंभीरता से लेंगे और मंदिर की भूमि को अवैध कब्जे से बचाने के लिए उचित कदम उठाएंगे।

LUCKNOW: राजभवन में ‘स्वच्छता सेवा पखवाड़ा-2024’ के तहत सफाई कर्मचारियों और परिजनों के लिए स्वास्थ्य जांच और सामाजिक सुरक्षा शिविर का आयोजन

56 सफाई कर्मियों और उनके परिजनों को स्वास्थ्य जांच और 12 विभागों की योजनाओं से लाभान्वित किया गया

लखनऊ, 24 सितंबर 2024: ‘स्वच्छता सेवा पखवाड़ा-2024’ के तहत राजभवन में सफाई कर्मचारियों और उनके परिजनों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर और सामाजिक सुरक्षा सहायता शिविर का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन अपर मुख्य सचिव, राज्यपाल, डॉ.सुधीर महादेव बोबडे द्वारा किया गया। इस अवसर पर 56 सफाई कर्मचारियों और उनके परिजनों की विभिन्न स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें 12 सरकारी विभागों की योजनाओं से लाभान्वित किया गया।

स्वच्छता कर्मियों के योगदान को अपर मुख्य सचिव ने सराहा

अपर मुख्य सचिव डॉ.सुधीर महादेव बोबडे ने अपने सम्बोधन में सफाई कर्मचारियों के महत्त्व पर जोर देते हुए कहा कि स्वच्छता सेवा पखवाड़ा का सबसे महत्वपूर्ण अंग यही कर्मचारी हैं। इनका स्वास्थ्य और सुरक्षा शासन की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने और विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शिविर में उपस्थित सफाई कर्मियों और उनके परिजनों का स्वागत किया और विभिन्न विभागों के स्टालों का निरीक्षण किया।

स्वास्थ्य जांच और सामाजिक सुरक्षा सहायता शिविर का आयोजन

इस शिविर में सफाई कर्मचारियों और उनके परिवारजनों की नेत्र, ईएनटी, रक्तचाप, मधुमेह, अस्थि रोग समेत अन्य चिकित्सकीय जांच की गई। इसके साथ ही, सामाजिक सुरक्षा सहायता शिविर में सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने हेतु विभिन्न काउंटर लगाए गए। इनमें जॉब कार्ड, राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, उज्ज्वला योजना, वृद्धा पेंशन योजना, बैंकिंग सेवाएं, शहरी आवास योजना, पेयजल कनेक्शन, जनधन योजना, और इन्द्रधनुष जैसी योजनाओं के काउंटर शामिल थे।

12 विभागों की योजनाओं से मिला लाभ

शिविर में ग्राम विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, जल निगम, जिला शहरी विकास एजेंसी, जिला पूर्ति विभाग, प्रोबेशन विभाग, मंध्याचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड जैसे 12 सरकारी विभागों ने भाग लिया। इन विभागों ने सफाई कर्मचारियों और उनके परिजनों को सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक किया और उन्हें संबंधित योजनाओं से लाभान्वित किया।

विशेष अतिथियों की उपस्थिति

इस अवसर पर विशेष सचिव, राज्यपाल, प्रकाश गुप्ता ने उपस्थित लोगों को स्वास्थ्य जांच और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में अपर नगर मजिस्ट्रेट, सुश्री फाल्गुनी सिंह, राजभवन चिकित्सालय के चिकित्सक, राजभवन के अधिकारी और सफाई कर्मचारी एवं उनके परिजन भी उपस्थित रहे।