भीषण गर्मी और हीट वेव का असर सिर्फ थकान या चक्कर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के कई जरूरी सिस्टम्स को प्रभावित करता है। खासकर उच्च रक्तचाप (BP) और डायबिटीज (शुगर) के मरीजों के लिए यह मौसम ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है। तापमान बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
गर्मी में अधिक पसीना आने से शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन हो जाता है। इससे खून गाढ़ा होने लगता है और उसमें ग्लूकोज की मात्रा सघन हो जाती है, जिससे शुगर लेवल बढ़ सकता है। इसके अलावा शरीर में स्ट्रेस हार्मोन जैसे कोर्टिसोल और वैसोप्रेसिन बढ़ जाते हैं, जो ब्लड शुगर को प्रभावित करते हैं।
वहीं दूसरी ओर, डिहाइड्रेशन के कारण शरीर में खून की मात्रा (ब्लड वॉल्यूम) कम हो जाती है, जिससे ब्लड प्रेशर लो हो सकता है। कई बार शरीर को ठंडा रखने के लिए रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं, जिससे BP अचानक गिर या बढ़ सकता है।
शुगर के मरीजों के लिए स्थिति और भी संवेदनशील होती है। गर्मी में इंसुलिन का अवशोषण तेज हो जाता है, जिससे हाइपोग्लाइसीमिया (लो शुगर) का खतरा बढ़ जाता है। कुछ मामलों में शरीर का नर्वस सिस्टम ठीक से प्रतिक्रिया नहीं कर पाता, जिससे पसीना और तापमान नियंत्रण प्रभावित होता है।
कैसे रखें खुद को सुरक्षित:
- दिनभर पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लेते रहें
- तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, खासकर दोपहर के समय
- नियमित रूप से BP और शुगर लेवल की जांच करें
- हल्का और संतुलित भोजन करें
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयों की डोज में बदलाव करें (जरूरत हो तो)
- शरीर में कमजोरी, चक्कर या अत्यधिक पसीना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत आराम करें
गर्मी के मौसम में थोड़ी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर आप BP और शुगर को संतुलित रख सकते हैं और गंभीर समस्याओं से बच सकते हैं।


































