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सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का बड़ा बयान: “हिंदू आस्था की कीमत पर वोट बैंक की राजनीति खत्म, जनता ने तुष्टिकरण को नकारा- देश अब विकास और राष्ट्रवाद के साथ”

लखनऊ। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब भारतीय राजनीति में तुष्टिकरण की राजनीति का प्रभाव लगातार कम होता जा रहा है। उनके अनुसार, जनता अब ऐसी राजनीति को स्वीकार करने के मूड में नहीं है जो किसी विशेष वर्ग को खुश करने के लिए की जाती है, जबकि बाकी समाज के हितों की अनदेखी होती है।

उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के कुछ नेताओं की “घबराहट” अब साफ दिखाई देने लगी है। डॉ. सिंह के अनुसार, यह घबराहट इसलिए है क्योंकि जनता का रुझान अब बदल चुका है और लोग जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टिकरण जैसे मुद्दों से आगे बढ़ चुके हैं।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने बयान में कहा कि अब देश की जनता विकास, मजबूत कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब उन राजनीतिक दलों को पसंद नहीं करती जो अपराधियों को संरक्षण देने या उनका महिमामंडन करने का आरोप झेलते रहे हैं।

पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि वहां लंबे समय से अपनाई जा रही तुष्टिकरण की राजनीति अब सवालों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ फैसले ऐसे लिए गए जिनमें धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाने या सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि घुसपैठ और अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर ढिलाई बरतकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई, जिसे जनता ने नकार दिया है।

उन्होंने “फातिहा पॉलिटिक्स” शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि देश की जनता अब उन नेताओं और राजनीति से दूरी बना रही है, जिन पर अपराधियों से जुड़ाव या उन्हें बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। उनके अनुसार, अब मतदाता ऐसी राजनीति को स्वीकार नहीं कर रहे और कानून-व्यवस्था को मजबूत देखना चाहते हैं।

राम मंदिर और सनातन आस्था से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि ये विषय आज भी करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में कुछ राजनीतिक दलों या नेताओं द्वारा धार्मिक भावनाओं का सम्मान नहीं किया गया, जिसे जनता ने गंभीरता से लिया है और अब वह अपने मत के जरिए इसका जवाब दे रही है।

लोकतंत्र की मूल भावना पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश में अंतिम निर्णय जनता का होता है। चुनाव जीतने या हारने का फैसला किसी अधिकारी या व्यवस्था के बल पर नहीं, बल्कि जनता के समर्थन से होता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता तो कोई भी सरकार कभी चुनाव नहीं हारती।

अपने बयान के अंत में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि देश की जनता का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि अब हिंदुओं की आस्था की कीमत पर किसी भी प्रकार की तुष्टिकरण की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि आने वाले समय में वही राजनीति सफल होगी जो विकास, सुरक्षा और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देगी।

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