किसी व्यक्ति की मौत के बाद जब उसकी मृत्यु की असली वजह जानना जरूरी होता है, तब पोस्टमॉर्टम किया जाता है। यह एक मेडिकल और कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसे तय नियमों और पूरी सावधानी के साथ अंजाम दिया जाता है। कई लोगों के मन में सवाल होता है कि पोस्टमॉर्टम के दौरान शरीर के साथ क्या किया जाता है और डॉक्टर किन अंगों की जांच करते हैं।
पोस्टमॉर्टम आमतौर पर अस्पताल की मोर्चरी में बने विशेष जांच कक्ष में किया जाता है, जो काफी हद तक ऑपरेशन थिएटर जैसा होता है। इस प्रक्रिया को पैथोलॉजी और फॉरेंसिक मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉक्टर करते हैं।
पोस्टमॉर्टम की शुरुआत कैसे होती है?
सबसे पहले शव को सम्मानपूर्वक जांच कक्ष में लाया जाता है। डॉक्टर शरीर की बाहरी जांच करते हैं, जिसमें चोट, सूजन, कट या अन्य निशानों को देखा जाता है। इसके बाद शरीर के सामने वाले हिस्से में चीरा लगाया जाता है, ताकि अंदर मौजूद अंगों की जांच की जा सके।
दिमाग की जांच के लिए सिर के पीछे की तरफ भी कट लगाया जाता है और खोपड़ी का ऊपरी हिस्सा सावधानी से हटाया जाता है। पूरी प्रक्रिया बेहद नियंत्रित और मेडिकल नियमों के अनुसार की जाती है।
किन अंगों की होती है जांच?
पोस्टमॉर्टम के दौरान डॉक्टर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों की जांच करते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- दिल
- फेफड़े
- लीवर
- किडनी
- पेट और आंतें
- दिमाग
डॉक्टर यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि शरीर में किसी बीमारी, चोट, खून के थक्के, संक्रमण, ज़हर या अन्य असामान्य स्थिति के संकेत तो नहीं हैं।
कई मामलों में छोटे टिश्यू सैंपल लेकर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। इसके अलावा खून और शरीर के अन्य फ्लूइड के नमूने भी लैब टेस्ट के लिए भेजे जा सकते हैं।
जांच पूरी होने के बाद क्या होता है?
पोस्टमॉर्टम खत्म होने के बाद सभी अंगों को दोबारा शरीर के अंदर रखा जाता है और शव को सिल दिया जाता है। शव को इस तरह तैयार किया जाता है कि परिजन अंतिम दर्शन कर सकें और शरीर पर किए गए कट सामान्य कपड़ों में नजर न आएं।
बिना अनुमति किसी अंग या टिश्यू को सुरक्षित नहीं रखा जाता। हालांकि अगर मामला संदिग्ध हो या अपराध से जुड़ा हो, तो कुछ सैंपल सबूत के तौर पर सुरक्षित रखे जा सकते हैं।
क्यों जरूरी होता है पोस्टमॉर्टम?
पोस्टमॉर्टम सिर्फ मौत का कारण जानने तक सीमित नहीं है। यह कानूनी जांच, अपराध की जांच और मेडिकल रिसर्च के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खासतौर पर हत्या, आत्महत्या, हिरासत में मौत या संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामलों में Forensic Pathology विशेषज्ञों की भूमिका अहम होती है।
नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी कानूनी या मेडिकल मामले में संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


































