अक्सर माना जाता है कि जो लोग तंबाकू या शराब का सेवन नहीं करते, उन्हें मुंह के कैंसर का खतरा नहीं होता। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी तरह सही नहीं है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां बिना इन आदतों के भी लोगों में मुंह का कैंसर विकसित हुआ है।
कैसे होता है यह कैंसर?
मुंह का कैंसर दरअसल कोशिकाओं में होने वाले असामान्य बदलाव से शुरू होता है, जो धीरे-धीरे अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगते हैं। तंबाकू और शराब इसके बड़े कारण जरूर हैं, लेकिन इसके अलावा भी कई जोखिम कारक मौजूद हैं।
अन्य प्रमुख कारण:
- एचपीवी संक्रमण (खासतौर पर गले से जुड़े कैंसर में)
- लंबे समय तक मुंह में सूजन या घाव
- धूप का अधिक संपर्क (विशेषकर होंठों पर)
- बढ़ती उम्र
- शरीर की व्यक्तिगत संवेदनशीलता या जेनेटिक फैक्टर
सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती चरण में यह अक्सर दर्द नहीं देती। इसी कारण लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और बीमारी आगे बढ़ जाती है।
किन लक्षणों पर ध्यान दें?
- मुंह में घाव जो 2 हफ्ते से ज्यादा ठीक न हो
- लाल या सफेद धब्बे
- निगलने या बोलने में दिक्कत
- मुंह या गले में लगातार असहजता
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे कोई भी लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
क्या कहती है रिसर्च?
हाल के शोध बताते हैं कि नियमित ओरल चेकअप और समय पर पहचान से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए सिर्फ तंबाकू और शराब से दूरी ही नहीं, बल्कि नियमित जांच भी बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष:
मुंह का कैंसर केवल तंबाकू या शराब पीने वालों तक सीमित नहीं है। इसलिए हर व्यक्ति को इसके लक्षणों के प्रति जागरूक रहना और समय-समय पर जांच कराना जरूरी है।
Disclaimer: यह जानकारी शोध और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सा सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी लक्षण की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।


































