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Health Update:बच्चों के खाने पर FSSAI का नया ड्राफ्ट, हाई शुगर-फैट और सॉल्ट की तय होगी सीमा

स्कूल की कैंटीन में मिलने वाले समोसे, चिप्स, बिस्किट और मीठे पेय बच्चों की रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनते जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किसी खाद्य पदार्थ में चीनी, नमक या फैट की कितनी मात्रा बच्चों के लिए ज्यादा मानी जाएगी। इसी सवाल का जवाब तय करने की दिशा में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक नया ड्राफ्ट तैयार किया है।

प्रस्तावित व्यवस्था में पहली बार खाद्य पदार्थों को हाई शुगर, हाई फैट और हाई सॉल्ट श्रेणी में रखने के लिए स्पष्ट पोषण संबंधी सीमाएं तय करने की कोशिश की गई है। इससे स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले खाद्य पदार्थों की निगरानी और नियमों के पालन को आसान बनाया जा सकता है।

100 ग्राम खाने में इतनी चीनी तो हाई शुगर

प्रस्तावित मानकों के अनुसार, किसी ठोस खाद्य पदार्थ में 100 ग्राम पर 3 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त चीनी होने पर उसे हाई शुगर श्रेणी में रखा जा सकता है।

इसी तरह 100 ग्राम खाद्य पदार्थ में 4.2 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त फैट होने पर वह हाई फैट और 0.625 ग्राम से ज्यादा नमक होने पर हाई सॉल्ट कैटेगरी में आ सकता है।

बच्चों के लिए उपलब्ध पेय पदार्थों के लिए अलग मानक प्रस्तावित किए गए हैं। 100 मिलीलीटर पेय में 2 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त चीनी, 1.5 ग्राम से अधिक फैट या 0.175 ग्राम से ज्यादा नमक होने पर संबंधित श्रेणी लागू हो सकती है।

इन मानकों का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि किस खाद्य पदार्थ को वास्तव में हाई शुगर, हाई फैट या हाई सॉल्ट माना जाए।

स्कूलों में ऐसे खाने पर पहले से है रोक

स्कूलों के अंदर और स्कूल के प्रवेश द्वार से 50 मीटर के दायरे में ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री और उनके प्रचार पर रोक लगाने की व्यवस्था पहले से मौजूद है। हालांकि, एक बड़ी चुनौती यह थी कि हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट वाले खाने की पहचान किस आधार पर की जाए।

FSSAI का नया प्रस्ताव इसी कमी को दूर करने की कोशिश करता है। अगर नियम अंतिम रूप लेते हैं तो स्कूलों में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए एक निर्धारित पोषण मानक उपलब्ध होगा।

FSSAI ने प्रस्तावित सीमाएं तय करते समय भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की 2024 की भारतीयों के लिए डाइटरी गाइडलाइंस को ध्यान में रखा है।

बच्चों में बढ़ते मोटापे की भी चिंता

स्कूलों में खाने को लेकर नियमों को मजबूत करने के पीछे बच्चों में बढ़ते अधिक वजन और मोटापे की चिंता भी एक अहम वजह है। World Obesity Atlas 2026 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 4.1 करोड़ बच्चे ज्यादा वजन या मोटापे से प्रभावित हैं।

ऐसे में विशेषज्ञों की चिंता सिर्फ स्कूल कैंटीन तक सीमित नहीं है। बच्चों की खान-पान की आदतों, खाद्य पदार्थों के प्रचार और पैकेजिंग से जुड़ी नीतियों पर भी लगातार चर्चा हो रही है।

महाराष्ट्र में भी लागू किए गए सख्त नियम

महाराष्ट्र में भी स्कूलों में हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट वाले खाद्य पदार्थों को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। राज्य में स्कूल परिसर और उसके 50 मीटर के दायरे में ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री, मुफ्त वितरण और विज्ञापन पर रोक लगाई गई है।

इसके अलावा स्कूल कैंटीन के लिए FSSAI का लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन भी जरूरी किया गया है। यह व्यवस्था राज्य के करीब 1.08 लाख स्कूलों पर लागू होने की जानकारी दी गई है।

नमक और सोडियम को लेकर तकनीकी सवाल

प्रस्तावित ड्राफ्ट में नमक और सोडियम के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा हो सकती है। ड्राफ्ट के एक हिस्से में ज्यादा सोडियम की बात की गई है, जबकि दूसरी जगह सीमा नमक के आधार पर बताई गई है।

दोनों को एक ही नहीं माना जा सकता। नमक में करीब 40 प्रतिशत सोडियम होता है। इसलिए अंतिम नियम तैयार होने से पहले इस तकनीकी अंतर को स्पष्ट किया जाना जरूरी हो सकता है।

अभी लागू नहीं हुआ है नया नियम

माता-पिता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FSSAI का यह प्रस्ताव फिलहाल ड्राफ्ट स्तर पर है। इसे अभी अंतिम नियम नहीं माना जा सकता।

ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद आम लोगों और संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। इसके लिए 60 दिन का समय निर्धारित किया गया है। सुझावों पर विचार करने के बाद ही अंतिम नियमों को लेकर फैसला होगा।

अगर प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है तो स्कूलों में बच्चों के खाने की निगरानी के लिए हाई शुगर, हाई फैट और हाई सॉल्ट की पहचान का स्पष्ट आधार उपलब्ध हो सकता है।

पैकेट वाले खाद्य पदार्थों की लेबलिंग अलग मुद्दा

पैकेज्ड फूड की न्यूट्रिशन लेबलिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अलग मामला चल रहा है। इस मामले में FSSAI ने 3 अगस्त को अपना हलफनामा दाखिल किया था और पैकेट पर चेतावनी वाले संकेतों के बजाय न्यूट्रिशन टेबल से जुड़ी व्यवस्था पर अपना पक्ष रखा था।

हालांकि, स्कूलों में बच्चों के लिए हाई शुगर, हाई फैट और हाई सॉल्ट वाले खाद्य पदार्थों की सीमा तय करने वाला FSSAI का मौजूदा ड्राफ्ट उस मामले से अलग है।

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