अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण के दावे पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अराघची ने अमेरिका की खुफिया जानकारी और उसके आधार पर लिए जा रहे फैसलों पर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी कि होर्मुज को लेकर गलत आकलन अमेरिका के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर सकता है।
ईरानी विदेश मंत्री ने क्या कहा?
अराघची ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अमेरिकी खुफिया तंत्र पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका पहले भी खुफिया जानकारी की विफलता के कारण गलत फैसले लेता रहा है और ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष को भी उन्होंने इसका उदाहरण बताया।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि होर्मुज को लेकर भी अमेरिका किसी बड़ी गलतफहमी का शिकार हो सकता है। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि गलत खुफिया जानकारी फेक न्यूज से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है।
उन्होंने अपने संदेश के अंत में ईरान के भरोसे और धार्मिक आस्था का जिक्र करते हुए कहा कि ईश्वर को दुनिया की किसी भी ताकत से बड़ा माना जाता है।
ट्रंप ने होर्मुज को लेकर क्या दावा किया?
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया है और वह इसे बनाए रखने की स्थिति में है।
ट्रंप ने क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक तैनाती को बेहद मजबूत बताते हुए इसे ‘स्टील की दीवार’ जैसा बताया। उनका दावा था कि ईरान के पास अमेरिकी सैन्य शक्ति का मुकाबला करने की पर्याप्त क्षमता नहीं बची है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की सैन्य स्थिति को लेकर भी कड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि ईरान का सैन्य ढांचा बुरी तरह कमजोर हो चुका है और देश गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
ट्रंप ने ईरान की महंगाई और आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां महंगाई की दर करीब 300 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान केवल बयान देता है और कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट पर क्यों है इतनी नजर?
होर्मुज स्ट्रेट पश्चिम एशिया का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला यह रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऐसे में अगर इस समुद्री मार्ग पर सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी के कारण होर्मुज को लेकर तनाव अब केवल दोनों देशों का सैन्य मुद्दा नहीं रह गया है। पूरी दुनिया की नजर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर बनी हुई है।


































